छह सामान्य गुण का विशेष निरूपण

गारंटी है गारंटी

जब हम कोई भी वस्तु खरीदने जाते है तो ये बात जरूर पूछते है कि इसकी गारंटी कितने टाइम की है जैसे 1 साल 2 साल या 5 साल। इस गारंटी के साथ हम उस वस्तु को खरीद लेते है। कई वस्तुएं जैसे लैपटॉप मोबाइल आदि की तो हम गारंटी समाप्त होने पर आगे की गारंटी के लिए अलग से पैसा देकर गारंटी एक्सटेंड करवा लेते है। अब विचार करिए जब तक उस वस्तु की गारंटी होती है तो हमको उसके बिगड़ने सुधरने की कोई चिंता नहीं होती और हम बिना किसी संशय के उस वस्तु का प्रयोग करते है।

क्या ऐसी कोई गारंटी हमारे पास भी है जिसकी हमको ख़बर ही नहीं, जी हां, प्रत्येक द्रव्य में एक ऐसा गुण है जो प्रत्येक द्रव्य के अनादि अनन्त पने की सिद्धि करता है वो गुण है अस्तित्व गुण,
जिस शक्ति के कारण द्रव्य का कभी भी नाश नहीं हो सकता न ही किसी के द्वारा उत्पन्न किया जा सकता है, उसे अस्तित्व गुण कहते हैं। क्या हमको वास्तव में अस्तित्व गुण रूपी गारंटी पर भरोसा है शायद नहीं क्युकी अभी तो हमको ये भी भरोसा नहीं है कि हम अनादि अनन्त है अब आप पूछ सकते है कि ये बात आपने कैसे बोली की हमको अपने अनादि अनन्त पने का भरोसा नहीं है तो सुनिए वर्तमान में हमारे जो भी प्रयत्न चल रहे है वो केवल और केवल इस भव को सुधारने के ही होते है इससे पता चलता है कि हम अपने आप को वर्तमान भव रूप ही मानते है।
लेकिन जिनवाणी मां हमको इस अस्तित्व गुण के माध्यम से ये गारंटी दे रही है कि प्रत्येक द्रव्य अनादि अनन्त है। तो अब क्या करे अरे भाई खुश हो जाओ ये कोई दो या पांच साल या इस भव तक की ही गारंटी नहीं है ये तो हमको अमर बनाने वाली गारंटी है

ये गारंटी हमको ग्रहीत और अग्रहीत दोनों मिथ्यात्व से बचाती है कैसे सो देखते है

कुदेव कुगुरू कुधर्म का श्रद्धान ये जीव या तो भय से करता है या लालच से, पर अस्तित्व गुण की गारंटी इसको मिलती है तो इसका ये भय दूर हो जाता है कि कोई मेरा नाश कर देगा और ये लालच भी मिट जाता है कि कोई मेरी रक्षा करेगा इस प्रकार गृहीत मिथ्यात्व मिटता है

और तन उपजत अपनी उपज जान, तन नशत आपको नाश मान ऐसा जो अनादि का अग्रहीत मिथ्यात्व है वो भी दूर हो जाता है क्युकी अस्तित्व गुण बता रहा है कि में सिर्फ इस शरीर रूप नहीं हूं और ना ही शरीर छूटने पर मेरा नाश होगा मैं तो अनादि से हूं और अनन्त काल तक रहूंगा।

एक बात और यदि आपको इस बात का भरोसा हो गया है कि में अनादि अनन्त हूं तो हमारे सारे प्रयत्न केवल इस भव को ही सुधारने के लिए नहीं होना चाहिए जैसे हम 5 दिन के लिए भी तीर्थयात्रा के लिए जाते है तो 5 दिन की सारी व्यवस्थाएं पहले से ही कर के जाते है पर देखिए मोह की महिमा 5 दिन की तो सारी व्यवस्थाएं करता है पर आगे आने वाले अनन्त भव की कोई खबर है नहीं उसको सुधारने के लिए कोई प्रयत्न नहीं करता ये किसी और की बात नहीं मेरी ही बात है।

आगे आप मनुष्य है मननशील है विचारे

दीक्षा जैन आरोन

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