दिव्य ध्वनि से सम्बंधित

तीर्थंकर भगवान की दिव्य ध्वनि ख़िर ने में गण धर की क्या भूमिका है और क्या नियम है
क्योकि भगवान आदिनाथ की वाणी बिना गण धर के हुई थी और भगवान महावीर स्वामी की बिना गण धर के नहीं खिरी थी

वीरवर्धमान चारित्र में ऐसा आया है कि प्रथम दिव्य ध्वनि गणधर बनने की योग्यता रखने वाले व्यक्ति की उपस्थिति में होती है मतलब अव्रती अवस्था में उपस्थित रहते हैं इसी ग्रंथ में लिखा है कि दिव्य ध्वनि को सुनकर बाद में उन्होंने दीक्षा ली उसी प्रकार जब आदिनाथ भगवान की प्रथम वाणीखिरी तो गणधर वहाँ अव्रत अवस्था में उपस्थित थे ऐसा आदि पुराण में आया है
अतः दोनों तीर्थंकर की वाणी गणधर की उपस्थिति में ही प्रारम्भ हुई

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