शादी करने के मापदंड

एक मुमुक्षु को शादी करने के लिए कौन से मापदंड ऐसे है जो आवश्यक होने चाहिए और किन बातों में adjust कर सकते है

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Bhudjan Satsai (Adyay 2- Neeti Shastra)

Some other points as given by @Sulabh ji

  1. मेरी choice तो…
    जब तुम्हे माता-पिता, घर-बार, नगर-देश आदि अपनी choice से नहीं मिले, तो स्त्री में choice क्यों करते हो ? अतः पूर्व में किये हुए कर्म अनुसार ही सब मिलता है

  2. फिर अगर कहि बनी नहीं तो ?
    जब तुमने स्वयं ही अग्नि में कूदने का फैसला किया है तो अब रोना क्या ? जब तुम स्वयं ही अपने ऊपर कीचड लगा रहे हो तो अब उसे धोने का क्या सोच रहे हो ?

  3. लेकिन फिर कलेश होगा…
    पुण्य पाप सब जीव के विकारो में ही है । अर्थात कोई भी व्यक्ति अनिस्ट (कलह कारी) या इस्ट (प्रिय) नहीं होता, कोई भी पदार्थ इस्ट-अनिस्ट नहीं है, यह (कलेश/ प्रिय) मात्र तुम्हारे ही मन की कल्पना मात्र है । वास्तव में तो जीव के कभी पाप का उदय/ पुण्य का उदय आता ही नहीं है ।

  4. हर परिस्तिथि में हित/ अहित का विचार करके ही आगे बढ़ना चाहिए ।

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While I appreciate all the above points. However they are based on Nischaynay (absolute ideal viewpoint) but quite a lot of things that we do in world have to be done keeping Vyavahar Nay (practical worldview) in mind as well. Hence the reasoning of the points does not seem rational.

If let’s say that I have to choose between 2 women. 1 is an ideal moral and ethical lady and the other one is her opposite. Then should I leave everything to chance or coin toss?

This is understandable and I agree with it.

While this is again correct as per nischaynaya. It seems bad advice as per vyavaharnaya. A bad woman can wreck the entire home and turn it into hell while a good woman can turn the home into heaven. One cannot leave everything to fate.

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Agreed, and therefore it is incorporated in the last point, though not detailed.
We practically do that.

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