अभाव संबंधी प्रश्न।

क्योंकि इन अभावों को न मानने पर जो दोष दिए गए है, वे इसी परिभाषा पर सिद्ध होंगे - वर्तमान का पूर्व में अभाव, वर्तमान का भविष्य में अभाव ।

कार्यद्रव्यमनादि स्यात् प्रागभवस्य निह्नवे
प्रध्वंसस्य च धर्मस्य प्रच्यवेऽनंततां व्रजेत्

- आप्तमीमांसा, कारिका 9

अभाव परिभाषा न मानने पर दोष
प्रागभाव वर्तमान का पूर्व में अभाव वर्तमान पर्याय अनादि हो जाएगी
प्रध्वंसाभाव वर्तमान का भविष्य में अभाव वर्तमान पर्याय अनंत हो जाएगी

अब यदि प्रागभाव की यह परिभाषा बनाए कि ‘भूत काल की पर्याय का वर्तमान में अभाव’, सो इसे न मानने पर पर्याय अनंत हुई, अनादि नहीं । और यदि प्रध्वंसाभाव को इस तरह परिभाषित किया जाए कि ‘भविष्य की पर्याय का वर्तमान में अभाव’ सो इसके भी न मानने पर पर्याय अनादि सिद्ध होगी, अनंत नहीं ।

In English, there is no issue as such. It’s simply translated as -

Non-existence before origination/ prior non-existence and non-existence after destruction / posterior non-existence which points to the definition - वर्तमान का पूर्व में अभाव and वर्तमान का भविष्य में अभाव respectively.

For more, see अभाव - जैनकोश.

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