अंतराय कर्म के ५ भेद

अंतराय कर्म के ५ भेदों की चर्चा को जीव के अनुजीवी गुणों का घात करने वाला देखते हुए कैसे समझा जाए?
(Generally इनको पर-द्रव्य के दान लाभ आदि से जोड़कर ही समझा जाता है)