अचौर्य महाव्रत | मुनिराज

अचौर्य महाव्रत में बताया है कि महाव्रती जल और मिट्टी भी बिना दिये ग्रहण नहीं करते |
क्या महाव्रती मुनिराजों को शौच के लिये श्रावकों की राह देखनी पड़ती होगी? क्योंकि शुद्धि के लिये जल और मिट्टी तो वह स्वयं ले नहीं सकते |

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जितना मुझे ज्ञात है, मुनिराज के कमंडलु में श्रावक जन स्वयं आकर जल भर देते हैं व शौच आदि के क्रिया के लिए भी श्रावक जन साथ जाते हैं और उन्हें वहाँ मिट्टी देते हैं।

ये बात तो हुई जब भी श्रावक साथ ही होते हैं मुनिराजों के, पहले जब मुनिराज वन में रहते थे, तब की प्रक्रिया किसी को ज्ञात हो तो बताये अथवा इसी तरह होती हैं तो बताएं।

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छठवीं ढाल 1 ला छंद
शुद्धि के लिए मुनिराज बिना मालिक की मिट्टी और जरने का पानी, बहती हुई नदी , तालाब जिसके ऊपर उस समय कड़ी धूप पड़ी हो उसका इस्तेमाल मात्र शुद्धि के लिए कर सकते है।
एक उल्लेख इस भी आता है समाधि के लिए मुनिराज चावल की घास जो कि सुखी होती है और वे किसी के काम मे नही आती उसका इस्तेमाल समाधि कराने के लीये करते है।

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