तीर्थंकर भगवान को केवलज्ञान पूर्व आहार होता है पर निहार क्यो नही?

तीर्थंकर भगवान को केवल ज्ञान पूर्व आहार होता है पर निहार क्यो नही होता ?

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ग्रंथ नाम - चर्चा संग्रह by- ब्र.रायमलजी

यहां पर युगलिया पुरुष - स्त्री में भोग भूमि के तिर्यंच मनुष्य को लेना है।
इनके शरीर की रचना ही इस प्रकार की है।विशेष पुण्य के योग से इस शरीर मिलता है।

देव और नारकी में वैक्रियक शरीर होनेसे उन्हें निहार नही होता।

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कर्मा आहार होता हैं, लेकिन कवला आहार नहीं होता हैं इसलिए निहार भी नहीं होता हैं। और फिर अर्हन्त में ऐसे दोष संभावित नहीं होते हैं, क्योकि महापुरुषों में साधारण पुरुष वाले दोष नहीं होते हैं।

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