रात्रिभोजन की व्याख्या

चरणानुयोग के अनुसार रात्रिभोजन की व्याख्या क्या है, किस प्रकार से किया गया भोजन रात्रिभोजन कहा जाता है ?
विस्तार से बताएं…

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1.सुर्यास्त के पश्चात या सूर्योदय के पूर्व किया गया भोजन रात्री भोजन है।
2. किसी अंधेरे स्थान पर भोजन करने मे भी रात्री भोजन का दोष है। (अँधेरा स्थान अर्थात जहाँ सूर्य की रोशनी ना आये)
3. रात्री मे बने भोजन को दिन मे भी ग्रहण करने मे रात्री भोजन का दोष है।
4. दिन मे भी सूर्य के छिप जाने पर( बरसात के कारण, तूफान के कारण आदि) किया गया भोजन रात्री भोजन है।
5. रात्री मे खाद्य, स्वाद्य, लेय, पेय इनमे से किसी का भी ग्रहण करने मे रात्री भोजन का दोष है।
6.भोजन सुर्यास्त के अंतर्मुहूर्त पूर्व कर लेना चाहिए। क्योंकि हमारे भोजन के निमित्त से प्रयोग मे लिए गए बर्तनो को रात्री मे मांजने से भी रात्री भोजन का ही दोष लगता है।
7. इस प्रकरण को कृत कारित अनुमोदना से भी घटाकर समझना चाहिए।

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उपरोक्त प्रकार से रात में किसीभी प्रकार से किया गया आहार रात्रिभोजन है, सूक्ष्म आहार भी रात्रिभोजन कहलायेगा या नही ?
जैसे, रातमें स्नान करना ( रोमछिद्रों से पानी शरीर मे प्रवेश करता है), सिरदर्द होनेपर बाम लगाना, ऐसी में बैठना, गर्मी से बचने हेतु गीली पट्टी लगाना… इत्यादि ये सब भी भोजन कहलायेगा ?