नारी का एक से ज्यादा विवाह क्यों नहीं?

me chama chahta hu, iss prashn ke liye, per mere mann me bhot baar khatkata he isilye puch rha hu.
kyuki jab purush 96000 shadi kr skta he toh, naari kyu nhi. kya naari ko bhog bhogne hetu puyna ki den he mana gya he.

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Maine bhi iss vishay par kaafi baari socha hai. Har baar bade alag alag vichaar aur conclusion aate hai -

Agar 4th kaal ke purush vishesh brahmacharya se jeete thay toh phir unko itni saari striyo se vivah karne ki zarurat kyu padti thi? Maana ki har purush 96000 se shaadi nahi karta hoga par phir bhi normally har purush ki kam se kam 1 se zyaadi striya toh hoti hii hongi.

Tab phir yeh bhi lagta hai ki ho sakta hai uss kaal ki samajik vivastha kuch aisi hii ho. Wahan shaadi bhale hii ho jaaye par purush aur stri adhiktam brahmacharya se hii jeete honge aisa samjha jaa sakta hai.

Ek cheez humko aur lagti hai ki aisa bhi infer kiya jaa sakta hai ki tab ke kaal mai ki striyo ki kashay aadi kam thi toh unko koi takleef nahi hoti thi agar raja koi aur raani se bhi shaadi aadi kar le.

Dev paryay mai bhi har dev ke kam se kam 32 deviya toh hoti hii hai. Usse adhik bhi ho sakti hai par kam se kam 32 toh hai hii. Kintu Dev paryay toh waise bhi asaiyam ki paryay hai toh usme itni takleef nahi hai mujhe.

Mujhe aisa bhi lagta hai ki striyo mai purusho se zyaada namrata aur sahansheelta hoti hai shayad isliye unko ek nazariye se purusho se bhi zyaada sheelvaan aur uccha maana jaa sakta hai. Aisa bhi pratit hota hai ki maybe striyan uss 4th kaal mai ek hii purush mai santusht rehti hongi par purush 1 stri mai santusht nahi reh paate honge isiliye aur vivah bandhan aadi karte honge.

Haalaki bahu-striyon mai se ek stri hamesha pattraani hua karti thi. Aisi bhi parampara thi.

All in all iss question ka samadhaan mai nahi bata paunga kyunki woh samay alag tha aur tab ke niyam-riwaaz alag thay.

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Read this answer. Even nature does not give equality.

https://www.quora.com/If-men-and-women-are-equal-how-did-the-society-become-patriarchal-in-the-first-place-almost-all-around-the-world/answers/105278502?ch=3&share=588346bd&srid=zhr6x

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किसी विद्वान से सुना है।
नारी भोजन की थाली के समान है।और पुरुष उस भोजन को ग्रहण करने वाले व्यक्ति के समान।जैसे एक व्यक्ति अलग अलग थाली मे से भोजन कर सकता है पर किसी व्यक्ति की झूठी थाली मे से कोई और भोजन नही कर सकता।
This answers the question why men can have no. Of wifes but a woman can marry just once.

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apko, upar di hui, abhayji dwara 1 bar ,avashya dekhni chahiye

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प्रश्न - चक्रवर्ती को कितनी अधिक वासना है जो ९६००० विवाह करता है ? यह तो पाप का उदय हुआ पूण्य का उदय कैसे कह सकते हैं?

समाधान - बज्रदन्त चक्री के ७०० पुत्र थे अन्य के भी १००० से ज्यादा सुनने में नहीं आये कारण यह हो सकता है कि अन्य स्त्रियों को उसके प्रतिरूप विद्याबल से जाते हैं जिनसे संतोष तो होता होगा रानियों को परन्तु सन्तान नहीं | असली देह से ही सन्तान होती होगी | इसका मतलब तो यह हुआ कि वह लाखो वर्षों में कभी-२ किसी रानी से भोग करता होगा | पटरानी से सन्तान होती नहीं है। अन्य के पास दुर्लभता से ही जाना होता है। इससे यही सिद्ध हुआ कि वह अधिक कामुक नहीं है मात्र उदय एवं राजनीति की बलजोरी है | राजनीतिक मजबूरी भी होती हैं अखंड शासन बनाये रखने एवं बिद्रोह के स्वर कभी न उठे अतः वह सभी राजाओं की कन्याएं लेता जाता है । जिससे साले या ससुर बिद्रोह न कर सकें।

प्रश्न- पुरुष के अनेक विवाह करना शील के बिरुद्ध क्यों नहीं है?
समाधान - १- उस समय कन्यायें अधिक होती थी लड़के कम थे कारण कि सेना में युद्ध में भरती होने से मारे जाते थे लेकिन स्त्रियाँ घर के कामकाज की बजह से सुरक्षित रहती थी | इस कारण सन्तान वृद्धि का रास्ता यही था कि एक पुरुष के साथ अनेकों लड़कियों के विवाह कर दिए जावें ॥
२- विवाह हो जाने के बाद तो वह स्वस्त्री कहलाती हैं अतः शील का दोष नहीं लगता है।

प्रश्न- स्त्री अनेक विवाह करे इसमें क्या बाधा है?
समाधान - पाश्चात्य समाज में स्त्री मशीन की तरह है जो समानता के नाम पर किसी के द्वारा भी भोगी जा सकती है परन्तु वह किस पुत्र के लिए किसे जिम्मेदार ठहरायेगी | पति के मरने पर उसके अधिकार क्या होंगे ? पाश्चात्य वैवाहिक जीवन में बच्चे को प्रॉपर प्यार नहीं मिलता क्योंकि १०-१२ वर्ष के बाद उसे स्वयं के व्यय उठाना या होस्टल में भारती कर दिया जाता है। चीन में भी ६० % से अधिक लोग आपने बेटे का डीएनए चेक कराते हैं उन्हें अपनी सन्तान न होने का पता लगने के बाद बच्चे से सख्त नफरत हो जाती है जिससे उस बच्चे की मानसिकता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। कोई कल्पना करना कठिन नहीं है। माँ बाप की अय्यासी में बच्चे पिस जाते हैं। आज सन्तान को जन्म नहीं देने, शादी के पहले लिव इन रेलेसन में रहना, इसी का दुष्फल है । | भारत में सन्तान एवं पत्नी को सारे जीवन सारे रिश्तेदारों, समाज, कानून में सुरक्षा की व्यवस्था है। बच्चे का सुरक्षा चक्र हैं। शादी के बाद विधवा होने पर पति की सम्पत्ति की अधिकारी होती है। पाश्चात्य वैवाहिक जीवन में ९०% तनाव में गुजरते हैं, तलाक एवं आत्मघात वहीं से यहाँ आया है |


आभार: पंडित श्री सुमत प्रकाश जी, खनियांधाना के लेख से

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We should not try to think through 4th era situations in the 5th era. Both men & women are not capable of attaining Nirvana in the 5th which is not the case with the 4th.

Also unlike 4th era, पंचम काल में, स्त्रियों तथा पुरुषों में पुण्य-पाप की असमानता भी बहुत पायी जाती। स्त्रियाँ भी पुरुषों समान उच्च पद की प्राप्ति करते देखी जा रही हैं - list of women CEOs in Fortune 500 companies and unlike 4th era, having multiple wives are banned in many nations.

Also, religious beliefs should be applied equally to both the genders. I don’t think men marrying twice shows any religious attitude at all.

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सगर चक्रवर्ती के ६०,००० पुत्र थे ।
धर्म से ही भुक्ति है और धर्म से ही मुक्ति ।
यहाँ प्रश्न बनेगा कि स्त्री ही अपना घर छोड़कर पति के घर क्यों जाती है ? यदि स्त्री अनेक विवाह करेगी तो वह अपने किस पति के घर जाएगी ?
और प्रश्न बनेगा कि राजा अपने पुत्र को ही राज्य देकर दीक्षा क्यों लेते है ? अपनी राजकुमारी को राज्य क्यों नहीं देते ?
और प्रश्न बनेगा कि स्त्री तीर्थंकर चक्रवर्ती बलदेव वासुदेव कामदेव आदि पद को क्यों प्राप्त नहीं होती ?
और प्रश्न बनेगा कि इन्द्र की आयु ३३ सागर, तो इन्द्राणी की आयु ५ पल्य क्यों होती है ?
और प्रश्न बनेगा कि स्त्री दिगंबर मुद्रा क्यों नहीं धार सकती ?
और प्रश्न बनेगा कि स्त्री को मनः पर्यय ज्ञान क्यों नहीं होता ?
और प्रश्न बनेगा कि स्त्री ही बालक को जन्म क्यों देती है ? पुरुष क्यों नहीं देते ?
और प्रश्न बनेगा कि सम्यक्दर्शन के धारी स्त्री क्यों नहीं बनते ?
और प्रश्न बनेगा कि इन्द्र के आगे ३२ चवर डुराते है तो इन्द्राणी के आगे क्यों नहीं डुराते ?
इसलिए मालुम पड़ता है कि प्रकृति ऐसी ही है :sweat_smile:
जो जीव स्त्री होकर अनेक पुरुष की चाह करता है , व्ही जीव पुरुष होकर अनेक स्त्री की चाह करता है इससे यह स्पस्ट हुआ की यह चाह कर्म जनित है यह जीव का भाव नहीं है

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This is prevalent only in patriarchal society (male dominated) but in matriarchal societies which still exist, although very less, in that man leaves his home and goes to female house.

Same condition can be applied to males also in matriarchal society.

And also other questions. These are natural, cannot be changed by our purusharth also. But a woman can be seen to be married multiple times in modern scenario hence is not impossible. So, comparison is not fine impossible things and possible things.

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