भोग भूमि में दिन रात

क्या भोग भूमि में दिन रात होते है?

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भोगभूमि में कल्पवृक्ष की प्रभा के कारण सूर्य व चन्द्रमा इत्यादि प्रभा नहीं दिखती ,अतः दिन रात होने का प्रश्न नहीं उठता,क्योंकि दिन -रात सूर्य व चन्द्रमा पर आधारित हैं।

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It is good answer, but I also want to know whether sun and moon revolves over bhog bhumi also?

They do revolve over bhog bhumis of dhai dweep.

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नरक में दिन रात होते हैं ?

  • आदिपुराण

नरक में दिन नहीं होता,
पर पद्मपुराण, आदिपुराण और अन्य कथा शास्त्रों के अलग अलग version में कुछ अलग बातें मिलती है जोकी match नहीं करती |
eg - भरतेश वैभव में भरत चक्रवर्ती की मूछो की तारीफ़ लिखी है, परन्तु त्रिलोकसार के अनुसार, शलाका पुरषो के तो मूछ होती ही नहीं है , एक आदिपुराण में लिखा है की कनककमला के ऊपर पिशाचनी आगयी थी जिसे श्रीपाल ने दूर किया और आदिपुराण के दुसरे version में लिखा है की श्रीपाल चक्रवर्ती को देखकर कनककमला के ऊपर काम रुपी पिसाच आगया जो उनसे विवाह करके दूर हुआ, और आपने भी पद्मपुराण में एक difference दिखाया था पंचाभिषेक वाला

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May be that day - night mentioned here for hell is merely symbolic of “every time”.

Difference shown by me was in 2 books of same padampuran (by Acharya Ravishen), published by 2 publishers, but आज कल के publishers have changed the content according to their needs and requirements. So, that is not relevant to subject discussed here.

यह प्रकृति को सोचना चाहिए कि अगर आप चाहती हो कि हम सम्यक दर्शन के नि: शंकित अंग का पूर्णतया पालन करें तो ऐसे अंतर न आने दें।

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Din aur raat ka karan Sun and Moon hote hain. Inke abhav me, jahan par jis tarah ke prathvi hot ti hai us tarah ka prakash hota hain all the time.
I think like this.