जिनवाणी स्तुति अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ

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shastra
#1

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः
क, ख, ग, घ, ङ
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण
त, थ, द, ध, न
प, फ, ब, भ, म
य, र, ल, व, श
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः -2
ये स्वर सिखा कर , व्यंजन बता कर
आगम सिखाया है मां …
गतियों में भटका , विषयों में अटका
भव भव से छुड़ा देना मां …
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः

कर्म डराए मुझे जब माता
तब तब याद किया माता
तेरे शब्दों ने मुझे संबोधा
क्यों नहीं ये मां सारी दुनियां तेरी तरह
जबसे पढ़ी है , जब से सुनी है
तेरी ये वाणी मां …
तब से भला हूं, तब से ढला हूं
तेरी ही हूं शरणा …
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः
चेतन कहा कभी शुद्धातम कहा
मुझे ऐसे पुकारा था मां
तेरी डगर पे सदा जाना चाहूं मां
अविकारी पद ही मैं पाना चाहूं माँ
सिद्ध बनूंगा बंधन तोड़ूंगा
मुक्ति पद पाना है मां
निज तत्त्व बता दे प्रीति जगा दे
लोरी सुना दे ना मां
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः।

Artist- आत्मार्थी श्रुति जैन

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#2

I guess this Idea is from starting of Sidhchakra Vidhan?

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#3

Nhi siddhchakr vidhan se nhi liya :pray:

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#4

सुंदर रचना…

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#5

-ऐ का उच्चारण अशुद्ध हो रहा है।

  • ङ का उच्चारण भी अशुद्ध हो रहा है।
  • म, र, ल, व् ऐसा गायन हुआ है, लेखनी में क्रम अलग है एवं श शब्द का गायन छूट गया है।
    -शुद्धात्म के स्थान पर शुद्धातम लिखा जाये तो स्वर सही आएगा।
    -अविकारी पद वाली पंक्ति में माँ लिखना भूल गयीं हैं।
    -तत्त्व इस तरह लिखें।

शेष प्रयास बहुत सराहनीय है, लेखन एवं गायन दोनों ही अच्छे हैं👍

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#6

Galtiyo se avgat karane ke like dhanywaad …dubara recording Kar ke sudhaar avashy krenge :pray:

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#7

Nice shruti

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#12

bahut badiya

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#13

Audio is updated… Thanku again @shruti_jain1

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#16

awesome voice and bhajan…

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#17

Thnku😊

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