समवायी और असमवायी कारण

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समवायी और असमवायी कारण क्या होते है?

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मूल में नैयायिक (न्याय) दर्शन में कारण-कार्य मीमांसा में समवायी और असमवायी कारण की बात आती है।

वहां कारण तीन प्रकार के कहे हैं। समवायी, असमवायी तथा निमित्त। समवायी कारण द्रव्यात्मक है। कपड़ा बनाने के लिये धागे की अनिवार्यता है। वह समवायी कारण है। कार्य बिना कारण के नहीं हो सकता पर कारण अपने में स्वतन्त्र आस्तित्व रख सकता है। कपड़े का तंतुसंयोग असमवायी कारण है। वह समवायी कारण का गुण है और वही गुण कार्य में भी आता है। धागे का रंग कपड़े के रंग को परिभाषित करता है। असमवायी कारण सदैव गुण या क्रिया होती है। तीसरा कारण निमित्त है। बुनकर कपड़े का निमित्त कारण है। निमित्त कारण में सहयोगी कारण भी सम्मिलित रहते हैं जैसे बुनकर के साथ करघा या कुम्हार के साथ चाक।

Reference: http://hamara-aadhaar.blogspot.com/2013/05/blog-post_17.html?m=1

कारण की तीन विधाएँ मानी गई हैं।

(1) उपादान कारण वह कारण है जिसमें समवाय संबंध से रहकर कार्य उत्पन्न होता है। अर्थात् वह वस्तु जो कार्य के शरीर का निर्माण करती है, उपादान कहलती है। मिट्टी घड़े का या तागे कपड़े के उपादान कारण हैं। इसी को समवायि कारण भी कहते हैं।

(2) असमवायि कारण समवायि कारण में समवाय संबंध से रहकर कार्य की उत्पत्ति में सहायक होती है। तागे का रंग, तागे में, जो कपड़े का समवायि कारण है अत: तागे का रंग कपड़े का असमवायि कारण कहा जाता है। समवायि कारण द्रव्य होता है, परंतु असमवायि कारण गुण या क्रिया रूप होता है।

(3) निमित्त कारण समवायि कारण में गति उत्पन्न करता है जिससे कार्य की उत्पत्ति होती है। कुम्हार घड़े का निमित्त है क्योंकि वही उपादान से घड़े का निर्माण करता है। समवायि और असमवायि से भिन्न अन्यथासिद्धशून्य सभी कारण निमित्त कारण कहे जते हैं।

Reference: https://hi.m.wikipedia.org/wiki/कारण

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संक्षिप्त-
यौग ( नैयायिक + वैशेषिक ) किसी भी कार्य की उत्पत्ति में 3 कारणों की अनिवार्यता स्वीकार करते हैं।

  1. समवायी कारण 2. असमवायी कारण 3. निमित्त कारण

  2. समवायी कारण - उपादान ही समवायी कारण है। जैसे वस्त्र में तन्तु ( कपडे की मूल इकाई )

  3. असमवायी कारण - तंतुओं का संयोग

  4. निमित्त कारण - जुलाहा व् अन्य सामग्री

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