प्राचीन भारत की गुरुकुल शिक्षा पद्धति

जय जिनेन्द्र

आज से लगभग ३०० साल पहले भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति से पढ़ाया जा रहा था।जिसके प्रमाण आज भी उपलब्ध है तक्षशिला,नालंदा आदि कई

वर्तमान की शिक्षा पद्धति सन १८३५ में जो indian education act jo पास किया था मैकाले के द्वारा उसी अनुसार पढ़ाया जा रहा है।इस act पास हो जाने के बाद भारत के सभी गुरुकुलों को illegal घोषित कर दिया गया और सभी को नष्ट करवा दिया गया।

उसके कुछ बिंदु

:sparkles:शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होना (English as the Medium of Instruction)

मैकाले का यह स्पष्ट मत था कि भारत में उच्च शिक्षा का माध्यम केवल अंग्रेजी भाषा होना चाहिए। उन्होंने भारतीय भाषाओं (जैसे संस्कृत, अरबी और फारसी) को अविकसित और निरर्थक माना और तर्क दिया कि आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और दर्शन केवल अंग्रेजी के माध्यम से ही दिए जा सकते हैं।

इसके पीछे की साजिश = व्यक्ति जिस भाषा में सोचता है उस भाषा की संस्कृति उसके चारित्र में भी आ जाती,अंग्रेजी मलेच्छो की भाषा है उसको भाषा के रूप में समझना चाहिए परंतु अपने जीवन के हर पहलू उसमें ही पढ़ना बोलना सोचना इससे चारित्र नियम से बिगड़ेगा,

उससे उल्टा यदि कोई संस्कृत माध्यम में पढ़े उस बच्चे की विचार उत्कृष्ट होंगे

अधोगामी निस्पंदन का सिद्धांत (Downward Filtration Theory)

  • चुनिंदा वर्ग को शिक्षा: मैकाले का मानना था कि सरकार के पास सभी भारतीयों को शिक्षित करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसलिए, शिक्षा केवल समाज के उच्च और मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से को दी जानी चाहिए। [1]

इसके पीछे की साजिश = पहले सबको पढ़ाया जाता था,यहां मात्र कम लोगों पढ़ाते थे क्योंकि अनपढ़ व्यक्ति लड़ाई लड़ने में कहीं न कहीं दिक्कत आती है।

:sparkles: पाश्चात्य साहित्य और विज्ञान पर जोर (Emphasis on Western Literature and Science)

• मैकाले की शिक्षा नीति का मुख्य सिद्धांत पूर्वी (भारतीय) ज्ञान की तुलना में यूरोपीय साहित्य, आधुनिक विज्ञान और दर्शन को प्राथमिकता देना था。

• उन्होंने अपने विवरण पत्र में भारतीय ग्रंथों पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा था कि “एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी, भारत और अरब के संपूर्ण देशी साहित्य के बराबर है”।

साजिश = वैज्ञानिक सारे विदेशी ,पढ़ाई के बाद अपना देश पिछड़ा हुआ लगने लगे उस तरह पढ़ाई को प्रस्तुति करण

वास्तव में ऐसा नहीं था हमारे पुराने महल,मंदिर की,प्रतिमा कलाकृति इसके सबूत है हम उनसे कई गुने ज्यादा बुद्धिमान थे।

:sparkles:एक वफादार मध्यस्थ वर्ग का निर्माण (Creation of an Intermediary Class)

• मैकाले का एक मुख्य सिद्धांत और उद्देश्य एक ऐसा शिक्षित भारतीय वर्ग तैयार करना था जो ब्रिटिश शासकों और आम भारतीय जनता के बीच एक कड़ी या मध्यस्थ (Intermediary) के रूप में काम कर सके।

साजिश = अंग्रेजों को देश को गुलाम बनाए रखने के लिए ऐसे भारतीय चाहिए जो शरीर से भारतीय हो आत्मा अंग्रेज की हो और वो अपने ही भारतिय को हीन दृष्टि से देखे।जैसे जनरल डायर ने एक भी गोली नहीं चलाई सभी भारतीयों ने ही गोली चलाई

शिक्षा कोष (सरकारी धन) का पुनर्वितरण

  • इस नीति के तहत यह तय किया गया कि 1813 के चार्टर एक्ट के तहत शिक्षा के लिए मिलने वाली ₹1 लाख की राशि को पारंपरिक या प्राच्य (Oriental) शिक्षा संस्थानों पर खर्च करने के बजाय केवल अंग्रेजी और पश्चिमी शिक्षा के विकास पर ही खर्च किया जाएगा। प्राच्य प्रकाशनों और नए वजीफों पर रोक लगा दी गई। [1, 2, 3]
  • साजिश = हमारी 72 कलाओ वाली शिक्षा को नहीं पढ़ाया और मात्र पश्चिमी थोथी पढ़ाई को पढ़ाया गया।

इसका solution

वापस हम गुरुकुल परंपरा से शिक्षा प्रारंभ कर सकते है।

वर्तमान में श्वेतांबरो के विद्वानों ने मिलकर प्रारंभ किया है।

Ahmedabad me हमारे बच्चे इसी गुरुकुल में पढ़ते है।वर्तमान में श्वेतांबरो के लगभग चार गुरुकुल है अन्य हिन्दूओं के तो कई है।

इसमें 64 एवं 72 कलाओ को सिखाते है।

पूरा education skill based होता है।

अपने दिगम्बर जैन का पूरे विश्व में एक भी गुरुकुल नहीं है।

जिनको भी इसमें रुचि है अथवा अपने ही आसपास के गांव में खोलने की भावना है उनको कैसे खोलना,उसकी पूरी जानकारी एवं आर्थिक रूप से सहयोग एवं पढ़ाने वाले गुरुजी,आचार्य जी को पगार आदि दिया जाएगा।

यह विश्व का सबसे अलौकिक कार्य है गुरुकुल से निकला हुआ बच्चा इतना टैलेंटेड है उसको नोकरी नहीं वे entrepreneur बनेगा।क्योंकि कई कलाओं का जानकार है।

जिनकी भी मजबूत भावना हो हमसे संपर्क करे काम हो जाएगा। मार्गदर्शन से लेकर आर्थिक सारा काम हो जाएगा।

@Kishan_Shah जी, जय जिनेन्द्र।
गुरुकुल परंपरा और शिक्षा पर विस्तार से लिखने के लिए धन्यवाद। जिनशासन में विद्या की परंपरा बहुत प्राचीन मानी गई है: आचार्य जिनसेन के आदिपुराण में भगवान ऋषभदेव द्वारा अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुन्दरी को लिपि और अंक विद्या सिखाने का, तथा पुरुषों की 72 और स्त्रियों की 64 कलाओं का वर्णन आता है।
फ़ोरम के साधर्मियों से निवेदन: शास्त्रों के अनुसार विद्या का उद्देश्य केवल आजीविका है या सम्यग्ज्ञान की ओर ले जाना? आदिपुराण के इस प्रसंग का ग्रंथ और पर्व सहित संदर्भ रखते हुए अपनी बात रखिए।