ताल से ताल मिला — जैन स्वाध्याय सामग्री | Tal Se Tal Mila

ताल से ताल मिला

अनुक्रमणिका

क्र. विवरण
1 ताल से ताल मिला
2 हिन्द
3 वीर, गीत, दोहा
4 चौपाई
5 अर्द्धरीला, तोमर, शंखनारी, उल्लाना, नागरुमिनी, अर्द्धनाराय, लक्ष्मीधारा
6 द्रुतविलंबित
7 सवैया, समान सवैया
8 विधाता
9 दिग्ववधू दिगपाल
10 मानव, सखी, चाल, पायटा
11 भुजंगप्रयात, उणजाति, शंखवारी, इन्द्रवजा
12 गीतिका, हरिगीतिका, गीता
13 पूर्ववत, लोलतरंग
14 सरसी, नरेन्द्र, जोगीरासा, चौबोला
15 रेखता, गोपी, श्रृंगार
16 मोतिया दाम
17 अड़हीरोला, तोमर, दाखनानी, उल्लाला, नागराजनी
18 अड़हीरोला
19 लोलताड़, बड़ी चौपाई
20 किवधू
21 सोरठा
22 नोटम
23 झूलना
24 उद्गीतिगीशा
25 चागर
26 विधाता
27 गीत
28 कामिनी मोह
29 चौबोला छन्द
30 लक्ष्मीधरा
31 डालर, दोधक मोदक
32 दोहा, रोला, रोड़क, आमानक, इन्द्रय, राधिय
33 अवतार अक्षयपदी
34 नाराच, अर्द्धनाराच, नागरूपिनी
35 उत्तविलाखिल
36 सोरठा
37 गीत

ताल से ताल मिला

हिन्द

वीर, गीत, दोहा

१. सुनो-सुनो ये दुनिया वालों बापू की ये अमर कहानी।
२. ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सन्मति दे भगवान।
३. ममता की पतवार न तोड़ी आखिर के दम तोड़ दिया।
४. अपने घर को देख बाबे, सुख का जहाँ खजाना रे।
५. जिस चैतन्य महावीरी है, परिणति के धन करते है।
६. जब तक रत्न अनमोल है, तो रत्नाकर फिर कैसा होगा।
७. आओ रे आओ रे आत्मानंद की डगरिया।
८. वीतरागी के तुमहो जैसा जग में देव कहाँ।
९. मोह-छे बोल चारों काई बिगाड़े।
१०. रोम-२ से निकले प्रभुवर।
११. प्रभुजी अब न भरमो।
१२. तुम शामक चेतन है।
१३. रोम-२ पुलकित हो जावे।
१४. लूट रहा, लुट रहा।
१५. बह रही रे धरम की धार।
१६. ये महामहोत्सव।
१७. आ रे भैया आ रे भैया।
१८. खा मां रहा आग।
१९. ऊँचे-२ शिखरों वाले।
२०. मद नकार दो।
२१. आया कहाँ से।
२२. सोरी पुर वाले।
२३. माता तू दया करके।
२४. संत साधु बन के निश्चक।
२५. देख दे प्यार दे।
२६. आगम की वाणी में मेरी मन डोले।
२७. जिनधर्म हमारा है।
२८. एक बार आओ मुनिराज मेरे आँगन।
२९. पावन हो गई आज ये धरती।

चौपाई

१. नन्हा मुन्ना राही हूँ देश का सिपाही हूँ।
२. चलो रे डोली उठाओ कहार पिया मिलन की रुत आई।
३. मैं पाँच गुरु कल्याण प्रभू।
४. मोह का सूलीमा देखो।
५. स्वागत करने आज तुम्हारा।
६. ऊँचे-२ लख शिखरों वाले।
७. तुम जाग्रत चेतन हो।
८. अपना ही रंग मोह रंगा है।
९. प्रभु जी अर्जुन भरमो संसार में।
१०. जिनप्रतिमा जिनवरसी कहिए।
११. रोम-२ से निकले।
१२. अन्दर में आनन्द आओ।
१३. प्रेम-२ प्रवाहित हो जाय।
१४. रंग रंग में।
१५. गा रे भैया।
१६. चाल सारा आत्मा तू।
१७. जिनवाणी जग में।
१८. मोह की महिमा देखो।
१९. मंद जपो नवकार मंत्र।
२०. फूल तुमने भेजा है खत में।
२१. मेरी प्यारी लछमिया।
२२. मुनिवर आज मेरे।
२३. चलो चेतन निज में आओ।
२४. नाथ तुम्हारी पूजा में।
२५. आओ तुम्हे धुनधाम।
२६. करलो आत्मज्ञान परमोत्तम।
२७. जिनवाणी अमृत साल।
२८. शांति सुधा बरसाओ जिनवाणी।
२९. रंग लाओ महावीर।
३०. दिन रात स्वामी।
३१. प्रभु रथ में हुए स्वार।
३२. केशरिया-२ आज हमारी रंग।

अर्द्धरीला, तोमर, शंखनारी, उल्लाना, नागरुमिनी, अर्द्धनाराय, लक्ष्मीधारा

जैनी होकर पानी न
राजा राजा छत्रपती मीरा नहीं काला नहीं
आया कहाँ से कहो नीर गंध अक्षताम पुष्प
आओ रे आओ
हम लाये हैं विदे

द्रुतविलंबित

राधिका, रागिनी
कितना प्यारा मेरा द्वारा चरणों में आ पड़ा हूँ। वन्दे जिनवरम्
जिन प्रतिमा जिनवर रोम-२ से निकले प्रभुवर
उछक चन्दन तंदुल होठों पर की बातें।

सवैया, समान सवैया

ऐसे कोई चंडाली हम हिन्दुस्तानी
शांतिनामुख शशि वन्दे जिनवरम्

विधाता

शुद्धात्मा का लक्षण तिहारे ध्यान की भरत
भावे भजो-भावे जिन सजन रे झूठ मत बोलो
जगाया तुमने कितनी बार तुम अगर सामने भी आओ (राज)

दिग्ववधू दिगपाल

नर्तन की पाकर के आओ आतम में आतम की
इक प्यार का नगमा (धुन)
अशरीरी सिंह भगवान
जिनधर्म की डगर पे बच्चो
किया कथक भूमेगा
हाय रे मेरा नन्दनी में हम

मानव, सखी, चाल, पायटा

तू जाग रे चेतन प्राणी
हंसे मुनिवर देखे वन में
रे मन भजले आत्म राम
कहाँ गये चक्री जिन
नाथ तुम्हारी पूजा में

भुजंगप्रयात, उणजाति, शंखवारी, इन्द्रवजा

जैनी होकर पानी न
नसे घातिया कर्म
धन्य धन्य वीतराग
जयपुर शहर में जन्म
अच्छा शिला दिया (धुन)
बड़े भाग्य से हमका

गीतिका, हरिगीतिका, गीता

जो मोह माया मान
प्रवचनसार पद्यानुवाद
निर्मल सलिल शुभ
संत साधु बनके बिछ
है परम दिगम्बर
तुम क्षायक चेतन हो
जिनवाणी माता रत्नत्रय
जिस देश में जिस वेष में

पूर्ववत, लोलतरंग

हम तुम युग युग से इस
वीर प्रभु की अजब
जिनवाणी साधक बताय
सदा फहराओ

सरसी, नरेन्द्र, जोगीरासा, चौबोला

जिनवाणी जग में जन्म
धन्य २ जिनवाणी माता
निरखो अग २ जिनवर
निरखी २ मनहर सूरत
सुख जिनवाणी प्रभु की वाणी
नाम तिहारा तारब हारा

रेखता, गोपी, श्रृंगार

तुम्हारे दर्शी बिन स्वामी
जगाया तुमने कितनी बार
बधाई आज मिल गाओ
नसे घातिया कर्म
खाली रहम तिहारे

मोतिया दाम

मैं साचानंद स्वभावी हूं
निरखी २ मनहर मूरत
शांति नाथ मुख शशि
तुम्हारे दर्शी बिन

अड़हीरोला, तोमर, दाखनानी, उल्लाला, नागराजनी

अड़हीरोला

१. राजा रागा
२. आत्मा कही से
३. आओ २ रे आत्मा
४. एक आत्मा
५. छूटे संसार
६. रे मन भजले आत्मन
७. तशी वेला छूटे पिंजरा
८. जैनी होकर
९. जिनवाणी

लोलताड़, बड़ी चौपाई

१. भूल जामुन
२. कटैलो जिनवर
३. सो मोह माया
४. होली खेले
५. जिनवर आज मेरी

किवधू

१. माता तू क्या कहे
२. माता मैं कैसे इंसान
३. करुणा सागर भगवान
४. जिया कब तक उलझेगा

सोरठा

१. कब तक तुम्हारा हृदय तोड़ दे
२. तुम अगर साथ देने का
३. ऐसी वस्तु मेरी
४. मैं स्वतंत्र हूं कोई बंधन
५. तुम तो हमारे वीतरागी
६. मौन सावन प्रतिमा
७. कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं

नोटम

१. हे परम दिगम्बर माते
२. तू तो हरसे दिगम्बर होता
३. हे वीर बुद्धा

झूलना

कर चले हम फिदा जानो तन साथियों

उद्गीतिगीशा

कहाँ गये चक्री जिन

चागर

वन्दे जिनवरम्
जय जिनेन्द्र

विधाता

शुद्धात्मा का श्रद्धान,
उद्धार दश विना
आवे भजी
छी है आर जिनवर से कही के
गीत गाते है।

गीत

अभी रे मेरे मन में।
नवगीत - मंगल विधान घड़ुआ अनाज।
मराठा माधवी
सबसे पहला दिगम्बर मुनिवर
तुम हो अरहंदानन्द
शुद्धात्मा का श्रद्धान

समान संवधा, निवात, उपजाति

हम हिन्दुस्तानी
तेरे पांच हुए कल्याण प्रभी,
वंदे जिनवरम्
पापा कहते है।

कामिनी मोह

हे प्रभू चरनो में तेरे आ गये
मोक्ष भावन
आत्मा है।

चौबोला छन्द

सुन जिनवाणी प्रभू की वाणी,
भाई री भाई गय

लक्ष्मीधरा

पारसनाथ देवसेव।

डालर, दोधक मोदक

शान्तिनाथ मुख।

शान्तिनाथ मुख
तुम्हर दश जिन स्वामी।
केवलज्ञ निरखा।

भुजंगप्रयात, उपजाति, बांखनारी, इन्द्रवज्जा, पीयूषनिर्वसर

जैनी होकर पानी न डना
तेरी दिववाणी सदा भव्यमानी।
बहुत बार कहा है
कही मेरी माता तुम्हो मेरे पिता।
बाँसवाड़ा शहर में पंचकल्याणक
जय-जय जिनवाणी माता
हे नाथ तुम्हरे द्वार पर।
यतीभाति मैया से।
मैं महापुण्य उदय से।
कियाहवन वीरा खराई आज।

दोहा, रोला, रोड़क, आमानक, इन्द्रय, राधिय

जीव सच्चा लगता है।
मुझे न तुम तो हम
मैं तो अच्छी अंतरी।
हे प्रभू चरनो में तेरे आ गये
छड़ा पर की बात।
पूजा सारे भाव।
तुम तो प्रभू वीतरागी।

अवतार अक्षयपदी

नये चैत्ये
महा अंगडे में आए
बाने कुण्डलपूर में बधाई
आनंदश्रोत बह रहा
माता तू क्या करके।

चाल, भावन, सखी, पायता, अष्टक

हास्य-ह जिनवाणी माता।
तू जाग रे चेतन प्राणी।
ऐसे मुनिवर देखे जग में।
हे मन भजते।
मुनि सुकृतनी बड़भागी।
कहो रामे चक्र जिन जीता
नाथ तुम्हारी पूजा में।
छोम-से निखरे तुमवर।
केवल रवि किरणों से जिसका।
हे मन भजले रे भगवान।
तुझे मेरा कहे या वीरा।

नाराच, अर्द्धनाराच, नागरूपिनी

जैनी होकर पानी न डना।
वीरा नहीं काला नहीं मारी भगवान
वीर गंध अद्वान।

उत्तविलाखिल

जिनहातिमा जिनवर सी काहेता
उदये चक्रन दुदुल पुष्प।

सोरठा

तिमा प्रभू अवतार।
आओ रे आओ रे ज्ञानानंद
तीन भुवन के सार।
रेम-से निकले
आओ-रे हमारी
जलफल आदि अखिया।
हिंडो से मिलने का मार्ग ध्यान है
ज्ञानी का ध्यानी
बाने कुण्डलपूर में बधाई।

गीत

सुंदरी | त्रिभंगी, घनानंद
प्रिया कब तक घूमेगा खेबार में | निर्मल रुचि निर्मल
धन्य-धन्य जिनागनी माता

गीत | नवगीत
मंगल विधान हुआ | वीर जी की सेना चली
अभी रे मेरे मन

मुनयशानन्द
वीर मेघ भगवान
वीर जी की सेवा चली
काया से चेतन निकल गयो रे
जय जिनेंद्र जय जिनेंद्र सब बोलिये
कर चले हम फिदा जानुतन

लावनी - रोम-२ से
गजल - वीरा तेरे चरणों की
विराग - इन्द्रध्वज मंडल आ गया
श्रृंगार - घर-२ आनंद छायो
विजात - तुम्हारी नजरों में हमने देखा गजब से झलक
रही हो

स्रोत: Gyata संग्रह।

प्रूफरीडिंग बाकी है