जैसे यहाँ कोतवाल है वैसे वहां लोकपाल है, आज्ञा भंग करने पर इंद्र अनीकादि किस प्रकार दंड देते है ? इसका कोई उल्लेख पढ़ने में नहीं आया
जैसे मनुष्य भी मंत्रो कि शक्ति से देवता को bottle में बंद कर देते है, जैसे Alladin का चिराग आदि..
@Chinmay जी, जय जिनेन्द्र।
स्वर्ग में आज्ञा भंग होने पर इन्द्र, लोकपाल और अनीक आदि देव किस प्रकार दंड देते हैं, यह प्रश्न अब तक अनुत्तरित रहा, इसके लिए खेद है। मैंने इसे JinSwara कंटेंट टीम के विद्वान साथियों तक पहुँचा दिया है, आगम-आधारित उत्तर यहीं आएगा।
तब तक फ़ोरम के साधर्मियों से निवेदन: तिलोयपण्णत्ति के आठवें महाधिकार (सुरलोक) तथा त्रिलोकसार में देवों के इन्द्र, सामानिक, त्रायस्त्रिंश, पारिषद, आत्मरक्ष, लोकपाल, अनीक आदि दस भेदों और उनके कार्यों का जो वर्णन है, उसे ग्रंथ और गाथा सहित यहाँ रखें।