स्त्रियों को क्षायिक सम्यक्त्व | Striyon Ko Kshayik Samyaktva

स्त्रियों को क्षायिक सम्यक्त्व क्यों नहीं हो सकता?

जिसप्रकार पंचम काल में मनुष्यों को, नारकियों को, तिर्यंचों को (please confirm) को क्षायिक सम्यक्त्व नहीं होता उसी प्रकार स्त्रियों को नहीं होता। क्षायिक सम्यक्त्व के लिए उत्कृष्ट सहनन, निश्चलता आदि अनेक गुण चाहिए जो इन जीवों में नहीं पायी जाते।

Related Question: क्षायिक सम्यक्त्व मात्र केवली के पादमूल में ही होता हैं, इसका मतलब क्या हैं?

you are right sowmay ji , पंचम कल में किसी की भी इतनी पात्रता नहीं है कि वो क्षायिक सम्यक्त्व प्रकट कर सके qki वो केवली के पादमूल में ही होता है।
means की तीर्थंकर ,केवली तथा श्रुतकेवली के उपदेश से तथा उनके सानिध्य में ही होता है qki क्षायिक सम्यक्त्व के लिए उत्कृष्ट निमित्त चाहिए जो की उनसे श्रेष्ठ कोई नही है।
and पंचम कल में नहीं होता qki तीर्थंकर 4th काल में ही होते हैं।

स्त्रियों को क्षायिक सम्यक्त्व संभव है।
अभी वर्तमान में किसी भी भरत क्षेत्र के जीव को क्षायिक सम्यक्त्व संभव नहीं।

जिनेन्द्र सिद्धांत कोष से साभार

स्त्रीयों के क्षायिक सम्यक्त्व नहीं होता क्योकि क्षायिक सम्यक्त्व वज्रवृषभनाराच वालो को होता है ,सर्वार्थसिद्धि का जो कथन है वह भाव स्त्री वेद की अपेक्षा है ।

यह भाव वेद की अपेक्षा से ही संभव है, द्रव्य वेद की अपेक्षा से नहीं।

क्षायिक सम्यक्त्व नही होता लेकिन जोड़नी क्षायिक होता है।
इसका अर्थ है कि आगे चलके वह क्षायिक होगा ही। वह सम्यक्त्व छूटेगा नही।

यहां भाव वेद कैसे है इसके लिए इस लेख में स्पष्टीकरण किया गया है।
https://drive.google.com/file/d/1ad11M5iNd3DAT9zp29W47b0WyKyPIbkS/view?usp=drivesdk