महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं | Story of Todarmal Ji (lyrical)


#1

भूले हुए इतिहास की तुमको याद दिलाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं (२)
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी (२)
तुम्हे जगाने ये इतिहास हम फिर दोहराते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

सरल स्वभावी जग से उदासी स्वानुभवी विद्वान
निराभिमानी प्रतिभाशाली जागृत विवेक गुणखान
जिनशासन के प्रभावक की महिमा गाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

पिता जोगीदास माता रम्भा देवी नाम
खण्डेलवाल गोदिका गोत्रज रहते जयपुर धाम
पुत्र हरिश्चंद्र गुमानी राम बताते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

थे गृहस्थ फिर भी विरक्त महा विवेक अवधार
ज्यों कमल रहता कीचड़ में त्यों रहते थे अघहाल
एक क्षण भी भेद ज्ञान को वो नहीं विसरते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

लोरी —
ओ मेरे वीर कुंवर तुम, जिन ध्वज भू पर लहराना
चाहे प्राण भले ही जावें, जिनधर्म रक्षा करना
मिथ्यात्व महातम ललना, इस भूतल पर अति छाया
इस अंधकार में सबने शुद्धात्म तत्त्व भुलाया
इसको बैरी सम लख कर, नहीं अंश भी रहने देना
चाहे प्राण भले ही जावें, जिनधर्म की रक्षा करना
अहो देव शास्त्र गुरुवार जी सर्वोत्कृष्ट हैं जग में
उनकी सम्यक श्रद्धा कर लखना निज ज्ञायक निज में
निर्मल समकित प्रगटाना, संयम की भावना भाना
चाहे प्राण भले ही जावें, जिनधर्म रक्षा करना
चिदानंदघन का अनुभव कर तू सहजानंद विकसाना
परमानन्द में ही जीवन है, ऐसा तू अपना बनाना
भव्यो को भी प्रेरित कर ये ही शुभ मार्ग दिखाना
चाहे प्राण भले ही जावें, जिनधर्म रक्षा करना
अमूर्तिक प्रदेशों का पुंज, वृष ज्ञानादि गुणों का धारी
अनादि निधन वस्तु को अनुभवों सदा अविकारी
स्वानुभव ही मूल, स्वानुभव ही मूल धरम का
पुरषार्थ कर प्रगटाना, insert लाइन
तू गृहस्थ अवस्था तजना, मुनि मुद्रा धारण करना
फिर निज स्वभाव साधन सों, चहुँ घाति करम क्षय करना
अरिहंत दशा प्रगटा कर शाश्वत सिद्ध पदवी पाना
चाहे प्राण भले ही जावें, जिनधर्म रक्षा करना
ओ मेरे वीर कुंवर तुम, जिन ध्वज भू पर लहराना
चाहे प्राण भले ही जाएँ, जिनधर्म रक्षा करना

-परिचय-
मैं जीव द्रव्य मम चेतना गुण याद रहे सुखकार
सब कहें मल्ल जी वो लखें ज्ञायक भेद ज्ञान अविकार
ज्ञायक की दुनिया की मंगलमय गाथा गाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

–शास्त्र वर्णन-
सम्यग्ज्ञान चन्द्रिका टीका गोम्मटसार की जान
महा बुद्धि धारक ने लिखिकर तित्व नहीं उर आन
लिखनादि किरिया पुद्गलमय सबको समझाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

चारों अनुयोगों का किया सतत अहो अभ्यास
सबका सार है आत्मानुभव दिखलाया अविकार
सूत्र शास्त्र का तात्पर्य वीतरागता दिखाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

–सभा वर्णन–
हज़ार बारह सौ जन आ, नित वाणी सुनते
सुनकर वचन जिननाथ के कलिकाल विसरते
चतुर्थ काल सा वातावरण वहां पर दिखाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

–विरोध–
मिथ्यादृष्टियों के गढ़ हिल गए विरोध था किना
पंचम अध्याय हटा दो प्रस्ताव था दीना
मरवा देंगे अन्यथा तुमको धमकियां सुनाते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

कोई पंचम कोई छटम सप्तम हटाना चाहे
मिथ्यात्व हटाने ग्रन्थ रचा नहीं मानादिक की चाह
सप्त व्यसन से बड़ा पाप जिन स्वामी कहते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

मृत्यु की धमकी किसको देते नहीं हमको कुछ भय
जिन शासन की सेवा करते रहते परम अभय
वह भी भयभीत होकर भागे उस आत्म को ध्याते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं

उपद्रवियों ने शिवपिंड उखाड़ दिया दुखकार
पंडित टोडरमल जी का नाम लिया अघकार
तुम्हे जगाने ये इतिहास हम फिर दोहराते हैं
महामना टोडरमल जी की गाथा गाते हैं
जागो-जागो जैनी भाई कथा ये जगा रही सुखदायी

–सम्बोधन–
जिन धर्म जिन धर्म तेरा समझा मरम (२)
तेरी रक्षा में प्राण भी तज देंगे हम(२)
जिन धर्म जिन धर्म तेरा समझा मरम (२)
जिंदा रहें न रहें कुछ गम नहीं (२)
तेरा नाम तो अमर कर देंगे हम
जिन धर्म जिन धर्म तेरा समझा मरम
तेरी रक्षा में प्राण भी तज देंगे हम
राग कुदेव कुगुरु कुधर्म को तज,
वीतरागी प्रभु को भजेंगे हम
सिर कटे तो कटे पर इनके सिवा,
सिर कही पर भी नाही झुकायेंगे हम
जिन धर्म जिन धर्म तेरा समझा मरम
तेरी रक्षा में प्राण भी तज देंगे हम
आज मिथ्या दर्शन काँप उठा
घबरा कर विरोध करने उठा
हम रहे ना रहें इसका कुछ गम नहीं, उसको तो मुर्दा कर चले हम (२)
जिन धर्म जिन धर्म तेरा समझा मरम
तेरी रक्षा में प्राण भी तज देंगे हम

Artist- Br. Shri Sunil Ji, Shivpuri.