सीख | Seekh (फूलों से तुम हंसना सीखो)

फूलों से तुम हंसना सीखो, भौरों से तुम गाना ।
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना ॥
वायु के झोंकों से सीखो, बढ़ना और बढ़ाना ।
मेंहदी के पत्तों से सीखो, पिसकर रंग चढ़ाना ॥
सुई और धागे से सीखो, बिछुड़े बंधु मिलाना ।
दूध और पानी से सीखो, मिलकर प्रेम बढ़ाना ॥
वृक्षों की डाली से सीखो, फल आए झुक जाना।
संतों की वाणी से सीखो, अंतज्र्योति जगाना ॥
चौरासी के बंधन काटो, जीवन सफल बनाना ।
आतम में अपनापन करके, शीघ्र अमर पद पाना।।

- संस्कारोदय

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