सांस्कृतिक कार्यक्रम - जैन स्वाध्याय सामग्री | Sanskritik Karyakram

सांस्कृतिक कार्यक्रम

अनुक्रमणिका

सांस्कृतिक कार्यक्रम

किसने किससे कहा

मुझे यह शरीर का कुष्ठ रोग दूर नहीं करना है
मुझे जन्म मरण का रोग दूर करना है

यह बात सनत कुमार मुनि ने
वैद्य बनकर आए देवों से कहा

उनसे कहना - जिस तरह मुझे छोड़ा
है उस तरह लोग अपवाद के कारण
धर्म मत छोड़ना

सीता जी ने कृतांत वक्र
सेनापति से कहा

अगर तुम्हें अपनी भूख मिटानी हैं तो
यह जलेबी खा लो, और अगर मांस ही
खाना है तो, मुझे मारकर खा लो

दीवान अमरचंद ने शेर से कहा

हे सिंहराज!! तुम आने वाले भाव में
तीर्थंकर बनने वाले हो, कहां मांस
भक्षण कर रहे हो

दो चारण रिद्धि धारी मुनिराजो
ने महावीर के जीव सिंह से कहा

राजन ! मुझे केवल तीन पग भूमि
चाहिए

वामन बने विष्णु कुमार मुनि
ने राजा बलि से कहा

(सबको एक सा आशीर्वाद दिया चाहे वह
उपसर्ग करने वाला ही क्यों ना हो )
धर्म वृद्धि हो-

यशोधर मुनिराज ने राजा श्रेणिक
और रानी चेलना को आशीर्वाद
दिया

किसकी दिव्य ध्वनि में आया
यह मारीच का जीव 24 वा
तीर्थंकर बनेगा

भगवान आदिनाथ की देशना में
आया भरत चक्रवर्ती के पूछने पर

किसने कब कहा

आडम ताडम कछु न जानम सेठ
वचन प्रमाणम्

अंजन चोर ने
विद्या सिद्ध
करते हुए कहा

किसकी दिव्य वाणी में आया

यह द्वारिका नगरी 12 वर्ष बाद
जलकर भस्म हो जाएगी

नेमिनाथ भगवान की
दिव्य वाणी में आया था

भैया !! आप मुझे छोड़कर चले जाओ,
आपके द्वारा धर्म की प्रभावना होने
वाली है क्योंकि आप एक पाठी हैं और
मैं दो पाठी

संवाद

निकलंक ने अकलंक से कहा
अभी इस अखाड़े में धूल से सने हुए शरीर को क्या देखते हो, उस समय देखना जब मैं श्रृंगार सहित राज दरबार में आऊंगा

सनत कुमार चक्रवर्ती ने देवों से कहा

अभी विवाह कर लो विवाह के
दूसरे दिन ही दीक्षा ले लेना

जंबू स्वामी के पिता ने
जंबू स्वामी से कहा

अगर वह सच्चे मुनि होंगे तो
उन्होंने अपने गले से सर्प नहीं
निकाला होगा

संवाद

रानी चेलना ने राजा श्रेणिक से कहा

पंडित टोडरमल जी ने गजराज से कहा
हे गजराज! तुम अपना कर्तव्य करो और मेरे मस्तक पर पैर रखो, मै अपना कार्य करूंगा

हे नानाजी ! आप पंचाग्नि तप मत
करिए इसमें नाग नागिन का जोड़ा जा
रहा है

पारसनाथ के जीव ने
अपने नाना से कहा

जय जिनेंद्र


:paperclip: मूल दस्तावेज़ (PDF): 3280.pdf

स्रोत: Gyata संग्रह।

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