संज्ञा - निर्जीव — जैन स्वाध्याय सामग्री | Sangya - Nirjiv

संज्ञा - निर्जीव

Notes

ऊपरी-भूमिका

  1. डोली खेले मुनिराज
  2. जा रे भैया जा रे भैया
  3. ये जावत सुख का झाला
  4. हेरे-2 शिवजी वाला है
  5. जिनवाणी जागोगा
  6. अपने ही रंग में रंग दो प्रभु जी
  7. मेरे मन मंदिर में आन
  8. रोल-रोल मुनिराज आ जाए
  9. दिन रात मेरे स्वामी
  10. मुनिराज आप मेरी कुटिया में
  11. गोकर मदी वाली तरी
  12. उदार आगन में आये मुनिराज
  13. तुम आपक चेतन को
  14. जिनवर हमारे तुम्हारे
  15. प्रभु जी अब न भटकेंगे संसार में
  16. हम जिनकुल में जन्मे अभिमान
  17. कवि वाला 2

Notes

रागनी

  1. शिवजी मेरे अंग जिनवर के
  2. जिनवाणी (अमनिया जन्म दुख मेट दे
  3. दिन-2 हम जिनवाणी
  4. शिवजी-2 केवल सुन्दर मूर्ति
  5. करो मेरे प्रभु जिन दर्शन

कामिनी मोहना। लक्ष्मी बाबा। नयन

  1. वीर जी ने मेरा नाम
  2. भावना की कमी
  3. कैलाश नाथ से, कृपा करिये आप तो

Notes

नाटक उद्‌

विवाह रचाना तुम्हारा
नाटक उद्‌
दुगना कहा रे
सलोनी सलोनी
मुनि मुनिराज मेरे
शिवजी की वाणी
ओ सजनवा आज
चकोर छंद

  1. घर-घर आनन्द छाया

Notes

ढोला

  1. घोड़ों पर की गति
  2. जीव के आया आता है
  3. चलो, 3 चेतन
  4. मेरी बस्ती में तेरे आ गये
  5. जो मेरी भेद ज्ञान की बात

दिव्यपुर। दिलासा

  1. माता मैं क्या करूं
  2. अरहंत सिद्ध भगवान
  3. जहां नेमि के चरण पड़े

आदिल

  1. भैया आओ बहिना आओ, जिन मंदिर आओ
    प्रभु ज्ञान का निष्पादन पाओ
  2. कुंदकुंद का सभी ये प्यारा नाम है।
  3. मामा हूं मामा हूं मामा
  4. 2 तरह चरणों में तेरे आ गये
  5. जिनवाणी 2 समता सभी
  6. जिनवाणी 2 जिनवाणी

प्रियवर्णी

  1. प्रभु चरणों में तेरे आ गये

Notes

छंद उद्‌

कुमार आया आया

  1. प्रेम रंग के शिवजी अवतार
  2. प्रभु जी अब न भटकेंगे संसार में
  3. प्रेम रंग मुनिराज का (चार)
  4. जा रे भैया जा रे भैया
  5. कर-कर शिवजी वाला
  6. मेरे मन मंदिर में आन
  7. क्या करें ये बात (ज्ञान)
  8. शिवजी मेरा जिनवर के
  9. मेरे आत्मा में आये मुनिराज
  10. शिवजी-शिवजी हमारा नाम
  11. कैलाश का भगवान नाम
  12. शिवजी-शिवजी हमारे गुरुदेव
  13. वीर-वीर मुनिराज
  14. जिनवाणी अमनिया जन्म दुख मेट दे
  15. शिवजी-शिवजी मेरे भगवान
  16. जीव पूजा का ये जिनधाम
  17. शिवजी को पूजे
  18. जब हम देखेंगे भगवन है (विपुल स्वरूप
    जिनवर का नाम)

Notes

  1. डोली खेले मुनिराज
  2. शिवजी-शिवजी शिवजी वन में
  3. (हम जैन कुल में जन्मे अभिमान करो)
  4. जिनवर तुम्हारे तुम्हारा

हरिगितिका

  1. जिस देश में जिस देश में
  2. आत्मा के राही, आत्मा के राही
  3. मेरा नाम मेरा भी जिनवाणी

मुक्तक (मिलक)

  1. भक्तमर प्रभात और भक्ति प्रभात
  2. रूप जितने सुंदर हार किरीट लाक

Notes

भूमिका

१) हे प्रभु आपका दास।
२) श्री वीर प्रभु आया।
३) संत साधु संत के विरद
४) अब जिनेश्वर जयजिनेन्द्र
५) मेरा जीवन मेरा आप
६) सर्वोदया वर्तमान

सोरठा

१) देश है है पूज्य साधक है तू
२) विद्या प्रभु अवतार
३) दशवन्त अपने सदा

Notes

गीत

१) रोम रोम में बिगड़े असुर
२) पापा पापा धनपति
३) पापी पापी पापी पापी
४) पापी पाप का भुगतान
५) सहा पाप विलाप सुनार
६) हे परम दिगंबर मुझ दिगंबर
७) विरले अंग अंग दिगंबर के
८) दिगंबर हूँ मैं मैं मैं हूँ नकेट
९) वीर वीर मुनिराज
१०) पापा पापा नेतर
११) पापा मुझे भुखाया
१२) दिगंबर सुंदर तेरा सुभाव द्वारा
१३) अब दिगंबर के चरणों अभिमान किया है
१४) मेरे मन में भरी
१५) जिनशासन सदा निसार
१६) कहा कुछ प्रभू जिनवीरा
१७) वीर-अमृत को भाव और भाव
पाप को काटो पाप को न तो काटो।
१८) पुर्वजन्म का विधाता (पाप का)

Notes

खंडकाव्य

१) वीर जी सेवा चली

सोरठा

१) बुढ़ापा का प्रधान होगा
२) एक परम दया दिगंबर का
३) प्रभु जी अब न हटेगे समाज में

इंद्रगति

१) तुम्हें का मेरा सुख

विनय छंद

१) कहाँ गये नहीं जिन जीस

Notes

उद्गार

१) फल-फल अति सुविचार
२) बापि-कुंडलपुर में बसाव
३) जीनी-जीनी उड़े रे सुभाव
४) तुम तो हरे परदेसी

अखंड

१) कहे जिनवर
२) सदा परम दिगंबर मुनिवर
३)

जिनवाणी

१) धन-धन जिनवाणी दाता सदा पूजनी
२) अभी-अभी रे हमारी बड़ी भाग
३) जिनवाणी जनवाणी
४) निरखे-अंग-अंग जिनवर के
५) पापी-पापी नेतर

Notes

गीत

१) मेरा मेरा मुक्ति से लावे
२) अपना ही रंग होवे

सुंदरीछंद | सोरठा

१) परम-धन-वीतराग वाणी

विरक्त

१) मेरे मन मंदिर में ज्ञान

Notes

गीतिका

१) बिरदी-बिरदी मन में पूरनि
२) पाना तुमको मिलती बार

लावणी कविता

१) वीर वीर मुनिराज
२) जीनी-जीनी उड़े रे सुभाव
३) मेरी मेरी सुभाव
४) प्रभु जी अब न हटेंगे समाज में

छंदसंग्रह | छंद-छंद

१) जिनवाणी सुनो रे
२) सज्जन के सिद्धांत बीच की

गर्भ कल्याणक

गर्भ कल्याणक आ गया
पुष्पी जी माँ ने देखे सोलह
सपना-२ सपने

जन्म कल्याणक

पावन हो गई आज ये धरती
लिया प्रभु अवतार
प्रभु जी पधारे मेरे आँगन
अमृत की गगरी भरें

तप कल्याणक

निर्ग्रन्थों का मार्ग
जन-जन का अचरण
रोम रोम से नाम कुंवर
गिरनारी पर तप कल्याणक ले मिलकर
आनंद अवसर आया, मुनिवर दर्शन पाये
संसार लगने लगा अब असार–
छाटे मुनिवर

ज्ञान कल्याणक

धन्य है गौतमा गुरु पुरुषार्थ
जिनवर दरबार तुम्हारा
समवशरण आओ भक्तों की टोलियाँ
घर-२ आनंद छायो, मुनिवर व केवलज्ञानी
ओंकारमयी वाणी तेरी
सुनकर वाणी जिनवर की
करलो जिनवर का गुणगान
निरखत जिन चंद्र

मोक्ष कल्याणक

जीयारा जीयारा
देखो जी अठारह
अठारह सिद्ध भगवान

संकलन

संकलन - समकित “शास्त्री”
विकेश “शास्त्री”

स्रोत: Gyata संग्रह।

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