समयपवाद
अनुक्रमणिका
| क्र. | विवरण |
|---|---|
| 1 | जनवरी-2026 |
| 2 | फरवरी-2026 |
| 3 | मार्च-2026 |
| 4 | अप्रैल-२०२६ |
| 5 | मई-२०२६ |
| 6 | जून-२०२६ |
| 7 | जुलाई-२०२६ |
| 8 | अगस्त-२०२६ |
| 9 | सितंबर-२०२६ |
| 10 | अक्टूबर-2026 |
| 11 | नवंबर-2026 |
| 12 | दिसंबर-2026 |
जनवरी-2026
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
श्री रंगपंचमी-बाहुबली
प्रतिष्ठा दिवस
वार्षिक दिन
ता. ३-१-२०२६
पौष वद-५
4
पौष वद-१२
11
पौष वद-१९
18
श्री जिनशासन ज्ञान क.
पौष सुद-८
25
MON
श्री दशवल्ली व्रत
ता. २-१-२०२६
ता. ११-१-२०२६
पौष वद-६
5
पौष वद-१३
12
माघ सुद-१
19
माघ सुद-९
26
TUE
श्री ओमोटीजी दि.
जैन बालिका आश्रम
सिद्धाचल दिन
ता. २१-१-२०२६
पौष वद-७
6
पौष वद-१४
13
माघ सुद-२
20
माघ सुद-१०
27
WED
श्री आदिनाथ भगवान्
निर्वाण महोत्सव
ता. २२-१-२०२६
पौष वद-८
7
पौष वद-१५
14
माघ सुद-३
21
माघ सुद-११
28
THU
पौष सुद-१३
1
श्री पंचम ज्ञान क.
पौष वद-९
8
श्री पंचम ज्ञान क.
माघ सुद-४
15
श्री चौदशज्ञान ज्ञान क.
माघ सुद-१२
22
श्री जिनशासन ज्ञान क.
माघ सुद-१३
29
FRI
पौष सुद-१४
2
श्री जिनशासन ज्ञान क.
पौष वद-१०
9
माघ सुद-५
16
माघ सुद-१३
23
माघ सुद-१४
30
SAT
पौष सुद-१५
3
श्री धर्मज्ञान ज्ञान क.
पौष वद-११
10
पौष वद-१२
17
श्री रत्नत्रय मोक्ष क.
माघ सुद-७
24
श्री जिनशासन ज्ञान क.
माघ सुद-१५
31
मनुष्यपणुं, पंचेन्द्रियपणुं, उत्तमकुळ, सत्यधर्म अने पूज्य गुरुदेवश्रीनी पुरुषार्थ प्रेरक वाणीनुं श्रवण आवुं अनंदकाले प्राप्त थाय छे माटे विवळीना गभारे मोतो परोवी ले!
प्रमाद छोडी पुरुषार्थ कर अने शुद्धात्मनो अनुभव कर.
फरवरी-2026
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
माघ सुद-१५
1
माघ वद-८
8
श्री पुण्यज्ञान मोक्ष क.
माघ वद-१५
15
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण सुद-७
22
श्री मतिज्ञान मोक्ष क.
MON
माघ वद-१
2
माघ वद-९
9
श्री पुण्यज्ञान मोक्ष क.
फागण सुद-१
16
श्री सम्यग्दर्शन ज्ञान क.
फागण सुद-८
23
श्री दर्शनज्ञान मोक्ष क.
TUE
माघ वद-२
3
माघ वद-१०
10
श्री पुण्यज्ञान मोक्ष क.
फागण सुद-२
17
श्री सम्यग्दर्शन ज्ञान क.
फागण सुद-९
24
श्री ज्ञानदर्शन मोक्ष क.
WED
माघ वद-३
4
माघ वद-११
11
श्री अज्ञानज्ञान मोक्ष क.
फागण सुद-३
18
श्री सम्यग्दर्शन ज्ञान क.
फागण सुद-१०
25
श्री अज्ञानज्ञान मोक्ष क.
THU
माघ वद-४
5
माघ वद-१२
12
श्री पंचम ज्ञान क.
फागण सुद-४
19
श्री चौदशज्ञान ज्ञान क.
फागण सुद-११
26
श्री अज्ञानज्ञान मोक्ष क.
FRI
माघ वद-५
6
माघ वद-१३
13
श्री उपचरित ज्ञान क.
फागण सुद-५
20
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण सुद-१२
27
SAT
माघ वद-६
7
माघ वद-१४
14
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण सुद-६
21
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण सुद-१३
28
पोताना परमेस्वर आत्माने भूली गयो हतो, तेने जाणीने,
तेनुं श्रवण आवुं अनंदकाले प्राप्त थाय छे माटे विवळीना गभारे मोतो परोवी ले!
ते हूँ ऐवो अनुभव करूँ छु के हूँ चेतन्यमात्र ज्योतिषरूप आत्मा छु.
मार्च-2026
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
फागण सुद-१३
1
फागण वद-६
8
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण वद-१३
15
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-१
22
चैत्र सुद-८
29
MON
फागण सुद-१४
2
फागण वद-७
9
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण वद-१४
16
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-२
23
चैत्र सुद-९
30
TUE
फागण सुद-१५
3
फागण वद-८
10
श्री जिनशासन ज्ञान क.
फागण वद-१५
17
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-३
24
चैत्र सुद-१०
31
WED
फागण वद-१
4
फागण वद-९
11
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-१
18
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-४
25
THU
फागण वद-२
5
फागण वद-१०
12
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-२
19
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-५
26
FRI
फागण वद-३
6
फागण वद-११
13
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-३
20
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-६
27
SAT
फागण वद-४
7
फागण वद-१२
14
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-४
21
श्री जिनशासन ज्ञान क.
चैत्र सुद-७
28
जीव जे गतिमां जाय त्यां जड-शरीरने पोतानुं मानी अनंत दुःख भोगवे छे.
हे आत्मन् ! जो तने शाश्वत अविनाशी सुख अने शांति जोइती होय तो
आ जड-शरीर अने चेतन आत्माने पूर्णतया भिन्न भिन्न मान.
अप्रैल-२०२६
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
MON
TUE
WED
THU
FRI
SAT
पूर्णिमा वर्धमानजी
दीक्षापर्वना
भावप्रकाशननो दिवस
स्वामी महावीर दिन
ता. १०-४-२०२६
चैत्र वद-३
५
चैत्र वद-४
६
कदाचनपुर प्रभावना
उत्सवनी पूर्णाहुति
ता. ११-०४-२०२६
चैत्र वद-५
७
चैत्र वद-६
८
चैत्र वद-७
९
चैत्र वद-८
१०
चैत्र वद-९
११
चैत्र वद-१०
१२
चैत्र वद-११
१३
चैत्र वद-१२
१४
चैत्र वद-१३
१५
चैत्र वद-१४
१६
चैत्र वद-१५
१७
चैत्र सुद-१
१८
श्री मुनिसुव्रत तप श.
चैत्र सुद-२
१९
चैत्र सुद-३
२०
चैत्र सुद-४
२१
चैत्र सुद-५
२२
चैत्र सुद-६
२३
चैत्र सुद-७
२४
चैत्र सुद-८
२५
चैत्र सुद-९
२६
चैत्र सुद-१०
२७
चैत्र सुद-११
२८
चैत्र सुद-१२
२९
चैत्र सुद-१३
३०
समयसार ते समयसार, तेना जेवुं सर्वोत्कृष्ट बीजुं कोई नथी. गुरुदेव ते गुरुदेव ज हता. तेमना जेवुं कोण थाय? एक जगतगुरु समयसार, तेम बीजा जगतगुरु गुरुदेव. समयसारने बतावनाग ते एक, तेमना जेवुं बीजुं कोई नथी.
मई-२०२६
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
MON
TUE
WED
THU
FRI
SAT
अ. ज्येष्ठ सुद-१५
३१
अ. ज्येष्ठ वद-१
१
अ. ज्येष्ठ वद-२
२
अ. ज्येष्ठ वद-३
३
अ. ज्येष्ठ वद-४
४
अ. ज्येष्ठ वद-५
५
अ. ज्येष्ठ वद-६
६
अ. ज्येष्ठ वद-७
७
अ. ज्येष्ठ वद-८
८
अ. ज्येष्ठ वद-९
९
अ. ज्येष्ठ वद-१०
१०
अ. ज्येष्ठ वद-११
११
अ. ज्येष्ठ वद-१२
१२
अ. ज्येष्ठ वद-१३
१३
अ. ज्येष्ठ वद-१४
१४
अ. ज्येष्ठ वद-१५
१५
अ. ज्येष्ठ सुद-१
१६
अ. ज्येष्ठ सुद-२
१७
अ. ज्येष्ठ सुद-३
१८
अ. ज्येष्ठ सुद-४
१९
अ. ज्येष्ठ सुद-५
२०
अ. ज्येष्ठ सुद-६
२१
अ. ज्येष्ठ सुद-७
२२
अ. ज्येष्ठ सुद-८
२३
अ. ज्येष्ठ सुद-९
२४
अ. ज्येष्ठ सुद-१०
२५
अ. ज्येष्ठ सुद-११
२६
अ. ज्येष्ठ सुद-१२
२७
अ. ज्येष्ठ सुद-१३
२८
अ. ज्येष्ठ सुद-१४
२९
अ. ज्येष्ठ सुद-१५
३०
कमलीनी पत्र पांणीमां डुबेलां देखाए छे पण पांणी अने हिंगीत्रमात्र पण स्पर्शतुं नथी, असक्तुं नथी, तेवी रीते मुनीनी पर्यायमां राग अने पुद्गल कर्मोनी साथे निमित्त-नैमित्तिक संबंध देखाए छे, पण स्वभावदृष्टिथी जोता आत्मा तो त्रिकाल निरावरण, निर्लेप अने मुक्त ज छे.
जून-२०२६
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
SUN
MON
TUE
WED
THU
FRI
SAT
नि. ज्येष्ठ वद-१
१
नि. ज्येष्ठ वद-२
२
नि. ज्येष्ठ वद-३
३
नि. ज्येष्ठ वद-४
४
नि. ज्येष्ठ वद-५
५
नि. ज्येष्ठ वद-६
६
नि. ज्येष्ठ वद-७
७
नि. ज्येष्ठ वद-८
८
नि. ज्येष्ठ वद-९
९
नि. ज्येष्ठ वद-१०
१०
नि. ज्येष्ठ वद-११
११
नि. ज्येष्ठ वद-१२
१२
नि. ज्येष्ठ वद-१३
१३
नि. ज्येष्ठ वद-१४
१४
नि. ज्येष्ठ वद-१५
१५
नि. ज्येष्ठ सुद-१
१६
नि. ज्येष्ठ सुद-२
१७
नि. ज्येष्ठ सुद-३
१८
नि. ज्येष्ठ सुद-४
१९
नि. ज्येष्ठ सुद-५
२०
नि. ज्येष्ठ सुद-६
२१
नि. ज्येष्ठ सुद-७
२२
नि. ज्येष्ठ सुद-८
२३
नि. ज्येष्ठ सुद-९
२४
नि. ज्येष्ठ सुद-१०
२५
नि. ज्येष्ठ सुद-११
२६
नि. ज्येष्ठ सुद-१२
२७
नि. ज्येष्ठ सुद-१३
२८
नि. ज्येष्ठ सुद-१४
२९
नि. ज्येष्ठ सुद-१५
३०
मननी एकाग्रताथी इन्द्रियोना समूहने वश करी, आत्मवान पुरुषे पोतानामां स्थित आत्माने आत्मा द्वारा ज ध्याववो जोईए.
जुलाई-२०२६
प्रेम स्फटिकोंमें पीळो, लीलो, रंगना प्रतिबिंबो देखावा छातां स्फटिक निर्मळ छे,
तेम जीवमां विभावो जावा छातां जीव निर्मळ छे. आ बधा कषायो-विभावो जणाय छे,
ते ज्ञेयो छे, हूँ तो ज्ञायक छुं. एम ओळखे. परिणमन करे तो प्रगट निर्लेपता थाय छे.
अगस्त-२०२६
वैरागी अंतर्र्मुखी, मंथन पारावार,
ज्ञातानुं तल स्पर्शीने, कर्यो सकळ अवतार.
सितंबर-२०२६
भगवान् आत्मा, स्वभावी वीतरागमूर्ति छे
अने मुनिराज तो पर्यायमां वीतरागनी मूर्ति छे.
अक्टूबर-2026
विक्रम संवत
२०८२
वीर संवत
२५५२
| SUN | MON | TUE | WED | THU | FRI | SAT |
|---|---|---|---|---|---|---|
| भादरवो वद-५ | भादरवो वद-६ | भादरवो वद-७ | ||||
| 1 | 2 | 3 | ||||
| भादरवो वद-८ | भादरवो वद-९ | भादरवो वद-१० | भादरवो वद-११ | भादरवो वद-१२ | भादरवो वद-१३ | भादरवो वद-१४ |
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| आसो सुद-१ | आसो सुद-२ | आसो सुद-३ | आसो सुद-४ | आसो सुद-५ | आसो सुद-६ | आसो सुद-७ |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| आसो सुद-८ | आसो सुद-९ | आसो सुद-१० | आसो सुद-११ | आसो सुद-१२ | आसो सुद-१३ | आसो सुद-१४ |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| श्री सीमंधर स्वामी मोक्ष क. | आसो सुद-१५ | आसो वद-१ | आसो वद-२ | आसो वद-३ | आसो वद-४ | आसो वद-५ |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 |
| श्री अनंतनाथ ज्ञान क. |
पोताना अनूपी अतीन्द्रीय शुद्ध स्वभाव उपर जेनी दृष्टि नथी
अने विभाव अमे संयोगमां एकत्वबुद्धि करे छे
ते चारगतीमां भ्रमणा करी अनंत दुःखोने पामे छे.
नवंबर-2026
विक्रम संवत
२०८२-८३
वीर संवत
२५५२-५३
| SUN | MON | TUE | WED | THU | FRI | SAT |
|---|---|---|---|---|---|---|
| आसो वद-८ | आसो वद-९ | आसो वद-१० | आसो वद-११ | आसो वद-१२ | आसो वद-१३ | आसो वद-१४ |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| आसो वद-१५ | कार्तिक सुद-१ | कार्तिक सुद-२ | कार्तिक सुद-३ | कार्तिक सुद-४ | कार्तिक सुद-५ | कार्तिक सुद-६ |
| 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 |
| श्री महावीर मोक्ष क. | श्री पूनमचंद ज्ञान क. | |||||
| कार्तिक सुद-७ | कार्तिक सुद-८ | कार्तिक सुद-९ | कार्तिक सुद-१० | कार्तिक सुद-११ | कार्तिक सुद-१२ | कार्तिक सुद-१३ |
| 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 |
| कार्तिक सुद-१४ | कार्तिक सुद-१५ | कार्तिक वद-१ | कार्तिक वद-२ | कार्तिक वद-३ | कार्तिक वद-४ | कार्तिक वद-५ |
| 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 |
| श्री सीमंधर स्वामी मोक्ष क. | श्री दीक्षाचार्य ज्ञान क. | |||||
| कार्तिक वद-६ | कार्तिक वद-७ | कार्तिक वद-८ | कार्तिक वद-९ | कार्तिक वद-१० | कार्तिक वद-११ | कार्तिक वद-१२ |
| 29 | 30 | |||||
| ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ | ता. २९-११-२०२५ |
जेम पतंग आकाशमां होइ पण दोर हाथमां होय छे. तेम “चैतन्य छुं”
ए दोर हाथमां राखवो, विल्पो आपे आ चैतन्यत्व ते हूँ हूँ
एवो वारंवार अभ्यास करवाथी ददता थाय.
दिसंबर-2026
विक्रम संवत
२०८३
वीर संवत
२५५३
| SUN | MON | TUE | WED | THU | FRI | SAT |
|---|---|---|---|---|---|---|
| कार्तिक वद-१३ | कार्तिक वद-१४ | कार्तिक वद-१५ | मार्गशर सुद-१ | मार्गशर सुद-२ | ||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | ||
| श्री कुंदकुंदाचार्य | ||||||
| अषाढ सुद-१५ | ||||||
| ता. २९-११-२०२५ | ||||||
| मार्गशर सुद-३ | मार्गशर सुद-४ | मार्गशर सुद-५ | मार्गशर सुद-६ | मार्गशर सुद-७ | मार्गशर सुद-८ | मार्गशर सुद-९ |
| 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
| मार्गशर सुद-१० | मार्गशर सुद-११ | मार्गशर सुद-१२ | मार्गशर सुद-१३ | मार्गशर सुद-१४ | मार्गशर सुद-१५ | मार्गशर वद-१ |
| 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 |
| मार्गशर वद-२ | मार्गशर वद-३ | मार्गशर वद-४ | मार्गशर वद-५ | मार्गशर वद-६ | मार्गशर वद-७ | मार्गशर वद-८ |
| 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 |
| मार्गशर वद-९ | मार्गशर वद-१० | मार्गशर वद-११ | मार्गशर वद-१२ | मार्गशर वद-१३ | मार्गशर वद-१४ | मार्गशर वद-१५ |
| 27 | 28 | 29 | 30 | 31 |
पूज्य गुरुदेवश्री : भाई ! प्रभु ! तुं भगवान् छो नाथ !
तारा परम शुद्ध स्वभावोनी विश्वास लाप, प्रतीति कर, अनुभव कर के
जेथी रत्नत्रयधर्म प्रगट थाय अने तारो अविनाशी, अक्षय कल्याण थाय.
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है