कल्प्ति तत्त्व नाम का गृहीत मिथ्यात्व | Samaysaar

समयसार में राग को पौद्गलिक कहा है| क्या इसी तरह के जो उपचरित कथन है उनको वास्तविक मानने से कल्प्ति तत्त्व नाम का गृहीत मिथ्यात्व बंधता है?

जी, इसे ग्रहीत मिथ्यात्व कहा जाएगा, क्योंकि इसमें राग (जो कि आस्रव तत्त्व है), उसको पुद्गल (जो कि अजीव तत्त्व है) के साथ जोड़ दिया है। सात तत्त्वों का वास्तविक ज्ञान सम्यक् ज्ञान है। उससे विपरीत मिथ्याज्ञान है।

ध्यान रहे कि सिद्धांत (आगम) अर्थात् वस्तु स्वरूप का वास्तविक ज्ञान होने पर ही आध्यात्म की ओर झुका जा सकता है जहाँ पर अनुभूति की अपेक्षा से इन सब को भिन्न तत्त्व, भिन्न प्रदेश इत्यादि कहा जाता है।

राग आगम की अपेक्षा से अशुद्ध निश्चय नय का विषय है, आध्यात्म की अपेक्षा से व्यवहार नय का विषय है।