दशलक्षण पर्व के दस धर्मों (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य, ब्रह्मचर्य) पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी, पाठशाला, शिविर और घर पर बच्चों-बड़ों के लिए। हर धर्म पर प्रश्न, चार विकल्पों के साथ; मूल हस्तलिखित पृष्ठों का पूरा पाठ नीचे और PDF अंत में।
Satpath Daslakshan Quiz: multiple-choice questions on the ten dharmas of Daslakshan Parva (Uttam Kshama to Uttam Brahmacharya) for Jain pathshala and shivir quiz rounds. Full text of the 24 handwritten pages below; original PDF attached.
उत्तम मार्दव धर्म
-
मार्दव धर्म आत्मा का कौन सा भाव है?
A. स्वभाव B. विभाव C. अभाव D. शुभभाव -
मार्दवधर्म किस कषाय के अभाव होने पर प्रकट होता है?
A. क्रोध B. मान C. माया D. लोभ -
मान कषाय को जीतने का उपाय है?
A. छल-कपट B. विनय/मार्दवगुण C. क्रोध
D. लोभ -
उद्धत होकर अभिमान से चलना, बैठना, झाँकना, बोलना
किसका प्रतीक है?
A. मार्दव गुण B. मान कषाय C. सरलता D. सहजता -
उत्तमपुरुष उद्धतता के वस्त्र आभरण पहनते हैं?
A. हाँ B. नहीं C. उक्त दोनों D. दोनों में से कोई नहीं -
संसारी जीवों को अनादिकाल से उदय हो रहा है?
A. सम्यग्दर्शन B. मिथ्यादर्शन C. सम्यग्ज्ञान D. दर्शन -
अपराध किये बिना ही समस्त लोग बैरी हो जाते हैं, किसके?
A. सज्जन B. अभिमानी के C. बालक के D. वृद्ध के -
आत्मा और मान कषाय में भेद को अनुभव करके मान को
छोड़ना उसका नाम है?
A. मानकषाय B. मार्दवगुण C. क्रोध D. माया
९. मार्दवगुण के द्वारा नाश होता है?
A. पुण्य का B. शुभभावका C. कषायका D. धर्मका -
मार्दवगुण अर्थात् विनय के द्वारा दण्ड मिलता है किसको?
A. पाँच इन्द्रियों B. मन C. उक्त दोनों को D. उनमें से कोई नहीं
आत्मा को -
अभिमानी के मूल से ही अभाव है?
A. कठोरता का B. रागभाव का C. दयाधर्मका
D. मिथ्यात्वका -
वह कौन सा गुण है जिसके अभाव में व्रत पालना, संयम
धारण करना, ज्ञान का अभ्यास करना सब निष्फल है?
A. क्रोध B. मान C. मार्दव D. माया -
अज्ञानी जीव जिसके आश्रय से मद करता है, वे जिनवाणी
में उनको कितने प्रकार का कहा है?
A. चार अभाव B. आठ मद C. छह द्रव्य D. सात तत्त्व -
क्षयोपशम ज्ञान के आधार पर अपने को बड़ा ज्ञानी मानना है?
A. जातिमद B. ज्ञानमद C. कुलमद D. रूपमद -
कोमल चुरिणामों द्वारा सिद्धि होती है?
A. इहलोककी B. परलोक की C. दोनों लोकों की सम्पति
D. नरक की -
मान कषाय से इस जीव को लाभा होता है?
A. उच्च पद का B. स्वाभिमान का C. संसार परिभ्रमण का
D. गुरुपने का -
मेरे नाना बहुत बड़े उच्च पद पर हैं, ऐसा मानकर
अपने को बड़ा मानना है?
A. कुलमद B. जातिमद C. ज्ञानमद D. रुपमद -
मेरे बल्लब पिताजी प्रधानमंत्री व स्त्री के मित्र हैं इस
आधार पर अपने को बड़ा मानना है?
A. बल मद B. कुलमद C. जातिमद D. ज्ञानमद -
मेरा चेहरा बहुत सुंदर है इसप्रकार शरीर के आश्रय से
अपने को सुन्दर मानना है?
A. कुलमद B. रूपमद C. ज्ञानमद D. बलमद -
मैंने तीन दिन का उपवास किया, उपवास के आश्रय से
अपने को बड़ा मानना है?
A. पूजा मद B. तप मद C. रूपमद D. कुलमद -
पिता, गुरू, उपाध्याय पुत्र को और शिष्य को कैसा देखकर
आनंदित हो जाते हैं?
व्यसनी
A. अभिमानी B. विनयवंत ✓ C. संपत्तिवान D. वैभववान -
जिनकी हजारों देव सेवा करते थे। उनका पुण्यक्षय होने पर
कोई एक मनुष्य पानी देनेवाला भी नहीं रहा ?
A. सही ✓ B. गलत C. उक्त दोनों D. कोई नहीं -
जिनके मस्तक पर गुरू विराजमान हैं. वे कैसे हैं?
A. भाग्यहीन B. देव C. धन्यभाग्य ✓ D. बलवान
उत्तम आर्जव धर्म
-
उत्तम आर्जवधर्म आत्मा का कौन-सा भाव है?
A. स्वभाव ✓ B. विभाव C. उभवि D. अभाव -
आर्जव धर्म का अर्थ है?
A. कुटिलता B. सरलता ✓ C. मायाचारी D. लोभ -
आर्जवधर्म को धारण करने से होने वाली हानि का नाम बताओ
A. पाप का खण्डन B. कर्मकाक्षय C. कुटिलता का अभाव
D. उक्त सभी ✓ -
मन-वचन-काय की विरूपता को कहते हैं?
A. सरलता B. मायाचार ✓ C. सदाचार D. स्वच्छता -
मन - वचन - काय की विरूपता वाले जीवो के कौन-सी
शल्य बाकी जाती है होती है?
A. पुण्य B. पाप मिथ्यात्व ✓ 3. माया 4. वेदना -
जैसे कांजी डालने से दूध फट जाता है उसी प्रकार प्रीति
भंग होती है किसकी ?
A. सज्जन की B. मायाचारी की ✓ C. परिवार की
D. देश की समाज की
Data.
-
कपटी जीव कैसा है?
A. मित्रद्रोही B. धर्मद्रोही C. कृतघ्नी D. उक्त सभी -
जिनेन्द्र भगवान् का धर्म कैसा है?
A. मायासहित B. छल-कपटसहित C. छल-कपटरहित
D. उक्त सभी -
जिसप्रकार टेढ़े म्यान में सीधी तलवार प्रवेश नहीं
करती है, उसीप्रकार वक्र परिणामी के हृदय में प्रवेश नहीं
करता है?
A. क्रोध B. लोभ C. आर्जवरूपसरलधर्म D. -
कपटी के दोनों लोक नष्ट हो जाते हैं/पतन होता है?
A. सही B. गलत C. उक्त दोनों D. दोनोंमेंसेकोई
नहीं -
कपटरहित सरलचित्त वाले ने यदि कोई अपराध
भी किया हो तो भी वह किसके योग्य नहीं है?
A. पुरुस्कार क B. ख्याति C. दण्ड D. लाभ -
आर्जवधर्म का धारक जीव संकल्प करता है?
A. आत्मानुभव का B. कषायजीतने C. संतोष धारने का
D. उक्त सभी -
छल-कपट ठगाई करने वाला जीव किसको
अपनाता है
A. धन B. सम्पदा C. कुटुम्ब D. उक्त सभी -
काय से स्वाध्याय में बैठना और मन में विचारना कि इस
भयभयाज दुकान पर क्या हो रहा है -
मायाचाररूप कुटिल परिणामों से लाभ होता है?
A. ख्याति B. लाभ C. यश D. संसारपरिभ्रमण -
आर्जवधर्म का धारक जीव दूर से ही परिहार करता है?
A. स्वाध्यायका B. सामायिकका C. जगत् के छलों का D. उक्त सभी का -
आर्जवधर्म का धारक जीव आत्मा को कैसा जानता है?
A. असहाय B. चैतन्यमात्र C. उक्त दोनों D. दोनों में से
कोई नहीं -
मन-वचन-काय की एकरूपताको आर्जवधर्म किस अपेक्षा
से कहते हैं?
A. व्यवहारनयसे B. निश्चयनयसे C. उभयनयसे D. अनुभयनयसे -
आत्मा का हित चाहनेवालों को अवलंबन लेना चाहिए?
A. कुटिलताका B. कषायका C. आर्जवधर्मका D. संसारहेषका -
कपटी जीव की प्रीति किसके समान कही जाती है?
A. शक्कर B. नीम C. बबूल D. अँगार -
मायाचाररूप कुटिल परिणामों के द्वारा धनप्राप्तिकी चाह
रखने से आत्मा को लाभ होता है किसका?
A. धन का B. स्वर्ण का C. कर्मबन्धन का D. यश का
उत्तम शौच
सं०दु० जीव की दुर्गति नही होता दुर्गति नही होती है।
Data.
१. शौच धर्म किसको उज्जवल करने से प्रकट होता है?
A. शरीर को B घर को C. आत्मा को D. वस्त्र को
२. बहिरात्मा शौच किसे कहते है / मानते है?
A. देह की उज्जवलता को B. स्नानादि को
३. धन खर्च करने को D. उक्त सभी
३. आत्मा किस कारण से मलिन हो रहा है?
A. हिंसा से B. लोभ से C. उक्त दोनों से D. पुण्य से
४. संसार में परिणामों को मलिन करने वाली है?
A. परधन की इच्छा B. परस्त्री की वांछा
C. भोजन की अतिलंपटता D. उक्त तीनों
५. जिनको पचास वर्ष तक शास्त्र सुनते हो गये हैं किन्तु जिन्हें
धर्म के स्वरूप का ज्ञान ही नहीं हुआ है, वह सब इसका कबहुँ
फल है?
A. अन्याय B. अनीति C. अभक्ष्य-भक्षण D. उक्त तीनों
6. ऐसा कौन है असंख्यात भवों तक करोड़ों तीर्थों में
स्नान करने से, दान करने से भी पाप का संतानक्रम दूर
नहीं होता है किसका?
A. धर्मगुरु द्रोही B. उपकार को लोपनेवाले C. स्वामी द्रोही
D. उक्त सभी
7. श्रावकाचार जी में सदा ही मलिन किसे कहा है?
A. देह को B. परिवार को C. विश्वासघाती को D. समाज को
8. यदि अपनी आत्मा की पवित्रता चाहते हो, तो यह ब नहीं करो।
A. अन्याय धन का ग्रहण B. अभक्ष्य भक्षण C. परस्त्री की
वांछा D. उक्त सभी
9. पाँच पापों में प्रवर्तन वाले जीव किस काल में
मलिन होते है?
-
संध्याकाल में 2. ब्रह्ममुहूर्त में 3. सदाकाल
-
किसी-किसी काल में
-
जो परके उपकार को मात्सिक लोप करते हैं एवं सदा ही मलिन हैं; उन्हें क्या कहते हैं?
A. कृतज्ञ B. कृतघ्नी ✓ C. सज्जन D. भला आदमी -
वीतराग सर्वज्ञ के परमागम का अनुभव करके अंतरंग
मल का धोना वह शौचधर्म है?
A. मिथ्यात्व मल B. कषाय मल C. उक्त दोनों ✓ D. द्रव्यकर्म -
भोजन के लंपटी को अति अधम क्यों कहा है?
A. अखाद्य वस्तु भी खा लेता है B. हीनाचारी होता है
C. लज्जा नष्ट हो जाती है D. उक्त सभी ✓ -
परिणामों में उत्तम पुरुषों के गुणों का चिंतवन करने
से आत्मा उज्ज्वल होता है।
A. सही ✓ B. गलत C. उभय D. अनुभय -
उत्तम शौच धर्म आत्मा का कौन सा भाव है
A. स्वभाव ✓ B. विभाव C. अभाव D. दुभाव -
उत्तम शौच धर्म किस कषाय के अभाव से प्रकट होता है?
A. क्रोध B. मान C. माया D. लोभ ✓ -
वह कौन-सा जल है जिसके द्वारा तीव्र लोभरूप
मल को धोया जाता है?
A. समभावरूपी जल B. संतोषभावरूपी जल C. उक्त दोनों ✓
D. कषाय भाव -
ऐसे कोई दो कार्य, जिसके वशीभूत हुए जीव नरक तिर्यंच
गति के कारण महानिंद्य परिणामों को प्राप्त हो जाते हैं?
A. जिह्वा इंद्रिय B. उपस्थ इंद्रिय
C. उक्त दोनों ✓ D. कर्ण इंद्रिय -
कषायमल का अभाव करने से प्रकट होता है?
A. स्वर्ग B. महल C. शौचधर्म D. सुन्दरशरीर -
वे कौन-से जीव हैं जो करोड़ों वर्षों तक समस्त शास्त्रों
का पठन-पाठन करे तोभी, उनके शुचिता कभी नहीं होती है?
A. परस्त्री वांछक B. परधन का वांछक C. जीवघात करने
वाले D. उक्त सभी -
शौच धर्म है?
A. मोक्ष का मार्ग B. मोक्ष का दाता C. उक्त दोनों D. संसारमार्ग
उत्तम सत्य धर्म
-
यह जीव अनन्तानन्त काल से रहा?
A. स्वर्ग में B. मोक्षमें C. मनुष्य में D. निगोद में -
वचन बोलने की शक्ति प्रकट होती है?
A. त्रसमें B. स्थावरमें C. तिर्यञ्च में D. मनुष्यपनमें -
आभरण, वस्त्रादि कूकर, वानर, गधा, घोड़ा, ऊँट, बैल,
इत्यादि को भी मिल जाते हैं परन्तु ऐसी कौन-सी शक्ति है जो
एक मनुष्य जन्म में ही संभव है?
A. पढ़ने-पढ़ाने की शक्ति B. उत्तर देने की शक्ति
C. वचन की शक्ति D. उपर्युक्त सभी -
कर्मभूमि के मनुष्य तिर्यंच की अकाल मृत्यु नहीं होती है यह
असत्य वचन कैसा है?
(A) विद्यमान अर्थ का निषेध करनेवाला C. कर्कशा
B. पैशून्य D. कटुका -
अविद्यमान अर्थ को प्रकट करने वाला असत्य वचन है?
A. देवों की अकालमृत्यु कहना B. देवों को मांसभक्षी कहना
C. देवों को कुरूप बताना D. उक्त सभी -
हास्य नाम का गर्हित असत्य वचन है?
A. भण्डवचन B. लीलावचन C. हास्यवचन D. उक्त सभी -
पण्डित सदासुखदासजीने प्राण जाने पर भी किसे दूषित
नहीं करने की प्रेरणा दी है।
A. राग को B. द्वेष को C. वचन को D. पाप को
सुखका आधार छोटा परिवार ख नहीं,
आधार संस्कारित परिवार है।
सम्यग्दृष्टि जीव को दुर्भवि नहीं होता
∴ दुर्गतिगमन Page No.
नहीं होता है। Data.
-
जिस वचन के द्वारा कलह-विसंवाद-युद्ध होने लगे, महाहिंसा
में प्रवृत्ति होने लगे; इस प्रकार के वचनको कहते हैं?
A. गर्हित B. अप्रिय C. सावद्य D. उक्त सभी -
जिस वचन को सुनने से ही हड्डियों की ताकत नष्ट हो जाती है,
उस भाषा को कहते हैं?
A. असत्य वचन B. मध्यमृषा C. गर्हित वचन D. उक्तसमे -
उत्तम सत्यधर्म आत्मा का भाव है?
A. स्वभाव B. विभाव C. अभाव D. उक्त कोई नहीं -
श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार जी के अन्तर्गत कितने प्रकार
के असत्य की बात कही है?
A. दो B. तीन C. चार D. पाँच -
जब अपने बोलने से सत्यधर्म का
-
हमें किन स्थानों पर बिना पूछे ही बोलना चाहिए?
A. प्राणियों का उपकार होता हो B. धर्म की रक्षा होती हो
C. कवह स्व-पर का हित हो D. उक्त सभी -
तू महासिंध है, तू अभक्ष्य भक्षण करने वाला है
-
अपने गुण प्रकट करना, दूसरों के दोष कहना, अपना कुल जाति
रूप-बल-विज्ञान आदि का मद सहित वचन बोलने रूप भाषा को
कहते हैं?
A. सत्य भाषा B. प्रामाणिकभाषा C. अभिमाननी भाषा
D. धर्मभाषा -
वह कौन-सा स्थान है जहाँ मौन सहित ही रहना उचित है?
A. अपने बोलने से हिंसा बढ़ती हो B. धर्म की रक्षा हो
C. जीवों की रक्षा हो D. कषाय का पोषण हो -
असत्य वचन से घोर पाप के आस्रव रूप हजारों दोष प्रकर
होते हैं उनमें से मुख्य यह हैं?
A. भगवान् की आज्ञा का भंग B. परमागम से पराङ्मुखता
C. घोर पाप का आस्रव D. उक्त सभी -
यह जीव उत्तमकुल का है, यह नीचकुल का है इसकी
पहिचान भी क्या इनके द्वारा होती है?
A. मौन के द्वारा B. आभूषणों के द्वारा
C. वचनों के द्वारा ✓ D. धन-वैभव के द्वारा -
जिस वचन से अशुभ वेदना प्रकट हो जाय, ऐसी प्राणोंका
घात करने वाली भाषा है?
A. अहिंसक B. सत्य
C. भूतवधकरी ✓ D. अभयकरी -
सत्यवादी किसके समान होता है।
A. माता के समान विश्वास योग्य B. गुरु के समान पूज्य
C. मित्र के समान प्रिय D. उक्त सभी ✓ -
श्री रत्नकरण्ड-श्रावकाचार जी ग्रंथ के अन्तर्गत
अप्रिय भाषा के भेद कहे गये हैं?
A. चार B. पांच C. आठ D. दस ✓
उत्तम संयमधर्म
-
पाँच व्रतों के एकदेश त्याग करने को कहते हैं?
A. महाव्रत B. अणुव्रत C. उभय D. अनुभय
२. मलमूत्र-कफादि मलों को ऐसे स्थान में फेंकना त्यागना
जहाँ अन्य जीवों को ग्लानि, दुःख, बाधादि उत्पन्न नहीं हो उसे
कहते हैं?
A. अणुव्रत B. महाव्रत C. प्रतिष्ठापन समिति D. पापकार्य -
शरीर तथा उपकरणों को नेत्रों से देख-शोधकर उठाना-
धन धरना उसे कहते हैं?
A. भाषा समिति B. वचनगुप्ति C. आदाननिक्षेपनसमिति
D. ईर्या समिति -
वह क्या है? जिसके अभाव में दीक्षा धारणा, व्रत धारणा
मूंड मुडावना, नग्न रहना, भेष धारणा - ये सभी वृथा है?
A. पीछी B. कमण्डलु C. संयम D. संघ -
संयम बिना हमारे मनुष्य भव की एक घड़ी भी व्यतीत न
हो, ऐसी भावना किसके होती है?
A. मनुष्य के B. ज्ञानी जीवों की C. अज्ञानी जीवों के
D. धनवानों के -
संयमी जीव अंतरंग और बहिरंग दोनों ओरसे आत्मा की
सुरक्षा किस प्रकार करता है?
A. अंतरंग में कषायों से रहित होकर B. बाह्य में यत्नाचाररूप प्रवृत्ति से
C. उक्त दोनों D. शुभ-अशुभ वृत्ति द्वारा -
एक ऐसी अमूल्य संपत्ति जिसे प्राप्त करके उसे बिगाड़ने
के समान बड़ा अनर्थ दूसरा नहीं है?
A. ख्याति B. प्रभुता C. संयम D. स्वास्थ्य -
विषयों का सुख कैसा है?
A. क्षणभंगुर B. नरकों के घोरदुःखों की प्राप्ति का कारण
C. किंपाक फल समान D. उक्त सभी -
देख-देखकर इसप्रकार गमन करना कि जिससे
जीवों की हिंसा न होवे, इस प्रकार की प्रवृत्ति को कहते हैं?
A. अयत्नाचार B. यत्नाचार C. प्रमादचर्या D. स्वच्छंद चर्या -
विषयों का लोभी होकर जो संयम को बिगाड़ता है वह
किसके समान है?
A. ईंधन के लिए कल्पवृृक्ष काटना B. कौड़ी के लि लिए चिंतामणि
रत्न बेचना C. उक्त दोनों
D. कांच व्बेचकर रत्न लेना -
मर्यादा/यत्नाचारपूर्वक बनाये गये भोजन को भी देख-शोध
कर ग्रहण करने को कहते हैं?
A. भ्रमबुद्धि B. शंकालुबुद्धि C. एषणासमिति
D. दोषबुद्धि -
हित-मित-प्रिय वचन बोलने को कहते हैं?
A. चाटुकारिता B. दीनवचन C. भाषासमिति -
वाक्पटु D. मिठबोला
-
पाँच पापों के सम्पूर्ण त्याग को कहते हैं?
A. दिग्व्रत B. देशव्रत C. महाव्रत D. अणुव्रत -
देशव्रत को धारण करने के लिए कौन-सी कषाय का
क्षयोपशम आवश्यक है?
A. अनन्तानुबंधी का B. अप्रत्याख्यानावरण का
C. उक्त दोनों का D. प्र संज्वलन का -
नरकगति, व तिर्यंचगति व देवगति में तो संयम होता ही
नहीं हैं -
देवगति में संयम होता है?
A. हाँ B. नहीं C. उक्त दोनों D. दोनों में से
कोई नहीं -
मनुष्यपर्याय में भी ऐसे कौन-से जीव हैं जिन्हें संयम
कभी नहीं होता है?
A. अधम देशों में B. इन्द्रियों अन्यायमार्गी
C. मिथ्यादृष्टि D. उक्त सभी -
अप्रत्याख्यान व प्रत्याख्यान दोनों कषायों के क्षयोपशम
से होता है?
A. देश संयम B. असंयम C. सकलसंयम D. अविरति -
जो जीव संयम प्राप्त करने के बाद उसे छोड़ / बिगाड़
देता है. ऐसे जीव को लाभ होता है?
A. संसार परिभ्रमणका B. त्रस स्थावरों में भ्रमण का
C. सुगति प्राप्त नहीं होती D. उक्त सभी का -
क संयम के दो प्रकार का है वह यह है?
A. भक्ष्य-अभक्ष्यकात्याग B. इन्द्रियसंयम तथा प्राणीसंयम
C. कुशील सेवन D. उक्त कोई नहीं
20: संयम को धास्व
२० इसभव और परभव में एकमात्र शरणभूत है?
A पुण्यभाव B. संयमभाव C. माता-पिता
A. ज्योतिष D. स्त्री-पुत्र
उत्तम तप धर्म
१. उत्तम तप कह धर्म कहते हैं किसे?
A. अनशन को
B. प्रायश्चित को
C. इच्छानिरोध को
D. एक पैर से खड़े होने को
२. जैसे सोल्हक सोल्ह बार स्वर्ण
मैल छुड़ाकर शुद्ध होता है, उसीप्रकार आत्मा भी कर्ममलरहित
शुद्ध होता है किसके प्रभाव से?
A. ख्याति
B. ऐश्वर्य
C. बारह प्रकार के तप
D. प्रभुता
३. उत्तम तप धर्म किस वस्तु का स्वभाव भाव है?
A. शरीर का
B. आत्मा/जीव का
C. धर्म का
D. आस्रव का
४. अज्ञानी मिथ्यादृष्टि जीव तप किसे कहते हैं?
A. पंचाग्नि द्वारा शरीर को तपाने
B. शरीर को जला देने से
C. शरीर कृष करने से
D. उक्त सभी
५. संसारी जीव के सबसे बड़ी फाँसी कौन-सी लगी है?
A. स्त्री-पुत्रादि रूप
B. कुटुम्ब परिवार रूप
C. ममता रूप
D. सोसायटी रूप
६. जिस प्रकार स्वर्ण पाषाण की संगति से मलिन है उसी
प्रकार यह आत्मा किससे मलिन हो रहा है?
A. धूल मिट्टी से
B. कर्मोदय से
C. राग-द्वेष-मोहादि
रूप भावकर्म से
D. नोकर्म रूप बाह्य
७. सच्ची तप करने की योग्यता किस गति के जीव में है? सामन्यी से
A. देव
B. नरक
C. मनुष्य
D. तिर्यञ्च
८. तप करने के योग्य परिणामों का होना कैसा है?
A. सुगम है
B. कभी भी कर सकते हैं
C. अति दुर्लभ है
D. बुढ़ापन में कर सकते हैं
९. परमधर्म के धारक वि वीतरागी गुरुओं को प्राप्त करके भी
तप-संयम ग्रहण की पात्रता के लिए आवश्यक है?
A. सम्यक्त्व रूप सूर्य का उदय हो
B. अशुभ कर्मोदय अति मंद हो
C. संसार-विषयभोगों से विरक्तता हो
D. उक्त सभी
-
Q. तप धारण करके भी यदि कोई पापी विषयों की इच्छा से बिगाड़ता है
उसको पुनः तप कब प्राप्त होगा?
A. एक वर्ष बाद B. एक माह बाद C. अनन्तानन्त काल तक
D. छह माह बाद -
तप करने की अयोग्यता किन-किन गतियों में है?
A. नरक B. तिर्यञ्च C. देव D. उक्त सभी -
जिनागम में तप कितने प्रकार का कहा है?
A. दस B. आठ C. बारह D. चौदह -
तप करने से नवर होता है?
A. काम B. निद्रा C. प्रमाद D. उक्त सभी -
तप करते समय इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
A. परिणामों में उज्जवलता बढ़ती बढ़ती जाये
B. खेद की वात-पित्त-कफादि का प्रकोपन न हो
C. तप में उत्साह बढे D. उक्त सभी -
श्रुत के अर्थ का प्रकाश करना, व्याख्यान करना, स्वयं निरंतर अभ्यास
करना, दूसरों को अभ्यास कराने को कहते हैं?
A. क्षयोपशम ज्ञान B. बुद्धि कौशल्य C. तप D. प्रवीणता -
तप धारण करने की शक्ति किसको प्राप्त है?
A. बालक को B. तरुण को C. वृद्ध को D. सभी को -
संसारी जीव ममता रूप जाल में फंसा हुआ रोगादि की तीव्र
वेदना से तथा स्त्री-पुत्रादि के वियोग से तीव्र आर्तध्यानपूर्वक
मरण करके प्राप्त करता है?
A. स्वर्ग सुख B. दुर्गतियों के घोर दुःखों को C. स्त्री-पुत्रादि के
संयोग D. तीव्र अनुकूलता को -
जिससे कर्म के समूह का नाश करके आत्मा स्वाधीन हो
जाये उसे कहते हैं?
A. मित्र B. शत्रु C. तप D. राग -
जिसप्रकार से राग-द्वेष-मोहरूप मैल भिन्न हो जाय तथा
शुद्ध ज्ञान-दर्शनमय आत्मा भिन्न हो जाये, उसे कहते हैं?
A. भेद विज्ञान B. प्रज्ञा छैनी C. तप D. उक्त सभी
२०. कर्मों के बन्धन से जकड़े व बंधे हुए आत्मा को बंधन से
मुक्त करने का उपाय है? (व्रतादिक धारण करना)
A. व्रतादि धारण करना B. भेद विज्ञानपूर्वक आत्मा और कर्मों को भिन्न जानना
C. पूजा - पाठ करना D. प्रभावना करना
उत्तम त्याग धर्म
- उत्तम त्याग धर्म (किसका) आत्म स्वभाव है?
A. शरीर का B. आत्मा का C. आहार का D. औषधिका
२. यह भी बड़ा दान है?
A. ब्राह्मण व क्षत्रिय को भोजन कराना B. मिष्ट वचन बोलना
C. चिंटियों को दाना देना D. कबूतरों को चुगाना
- लोभरूप अंधकूप में पड़े हुए को वहाँ से निकालने का
उपकार कौन करता है?
A. कुपात्र B. अपात्र C. उत्तमपात्र D. लुटेरे
४. जिनागम में दान कितने प्रकार का कहा है?
A. दो B. तीन C. चार D. छह
5. ऐसा निर्धन, जिसकी सेवा टहल करनेवाला कोई नहीं है
यदि उसे तैयार औषधि मिल जावे तो वह किसके समान
मानता है?
6. यह जीव परिग्रह त्याग करने के लिए समर्थ
कब होता है?
A. वीतराग की तीव्रता में B. राग की मंदता में
C. राग के अनुदय में D. राग के उदय में
A. निधियों के लाभ समान B. बंगला के लाभ समान
C. पुत्र के लाभ समान D. सुन्दर रूपकेलाभ समान
-
दान की सफलता है?
A. भोगने से B. फिजूल खर्च से C. दान से ✓
D. रेस्टोरेण्ट में भोजन
करने से -
ऐसे जीव जो समस्त परिग्रह त्यागने को समर्थ नहीं हैं,
वे अपने उपयोग को कहाँ रमाते हैं?
A. सराग धर्म में रुचि रखते हैं B. पाप से भयभीत हैं ✓
C. उत्तम पात्रों को दान देते हैं D. उक्त सभी -
छहकाय के जीवों को अभयदान देने का अर्थ होता है?
A. अभक्ष्य का त्याग B. यत्नाचार पूर्वक प्रवृत्ति
C. देख-शोधकर उठाना-धरना D. उक्त सभी ✓ -
औषधिदान के प्रभाव से यह जीव देह प्राप्त करता है?
A. नपुंसक शरीर B. हुण्डक शरीर C. वैक्रियिक शरीर ✓
D. वामन शरीर -
औषधिदान के द्वारा अनेक गुण पुष्ट होकर प्रकट होते हैं?
A. वात्सल्य B. स्थितिकरण C. निर्विचिकित्सा
D. उक्त सभी ✓ -
ज्ञानदान के प्रभाव से प्राप्त होता है?
A. क्षयोपशमज्ञान B. मनःपर्ययज्ञान C. अवधिज्ञान
D. केवलज्ञान ✓ -
अभयदान के प्रभाव से यह जीव पात्र नहीं बनेगा
किसका?
A. जन्म-मरण का B. रोग-शोक का C. दारिद्र वियोगादि संतापका
D. उक्त सभी ✓ -
कोई मिथ्यादृष्टि जीव भी यदि पात्र को आहारदान देता है:
वह अगल, आगामी भाव में कहां उत्पन्न होता है?
A. कुभोग भूमि B. भोगभूमि, स्वर्ग ✓ C. लवणसमुद्र D. स्वयंभू-
रमण समुद्र -
भोगभूमि में क्षुधा-तृषा की बाधा कितने दिन के
अंतर से होती है?
A. आठ B. पाँच C. छह D. तीन ✓ -
आत्मा के उद्धार के लिए अपने को व अन्य को शास्त्र पढ़ाना
है?
A. क्षयोपशम ज्ञान B. ज्ञानदान ✓ C. जानकारी बढ़ाना
D. प्रवीनता प्रकट करना -
धर्म का स्तम्भ है?
A. पंचकल्याणक B. अर्जित ज्ञान ✓ C. बड़े-बड़े मंदिर
D. बड़े-बड़े तीर्थक्षेत्र -
(ज्ञान के इच्छुक है।)
-
जहाँ ज्ञानदान होगा वहाँ धर्म रहेगा अतः ज्ञान के इच्छुक
जीवों का कर्तव्य है?
A. अपनी संतान को ज्ञान दान करो B. पाठशाला की स्थापना
C. शास्त्र दान करो D. उपर्युक्त सभी ✓ -
प्राणी का जीवन, शक्ति, बल, बुद्धि ये सभी गुण आहार बिना
नष्ट हो जाते हैं। जिसने आहारदान दिया प्राणियों को क्या दिया है।
A. जीवन-शक्ति B. बल-बुद्धि C. निरोगता D. सभी कुछ
दिया। ✓
२०. श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार जी में के अन्तर्गत किस प्रकार
के मन-वचन-काय की प्रवृत्ति का त्याग करने को कहा है।
A. दूसरों के दुःख के कारण
B. जिनसे यश और धर्म नष्ट हो C. क्रोधादि कषायों की निग्रहवृत्ति
D. ✓ उक्त सभी
२१. हमें पात्र दान किस प्रकार देना चाहिये ?
A. अभिमान सहित B. ✓ विनय व स्नेह के वचन सहित
C. एहसान दिखाकर D. लोक प्रसिद्धि के लिए
उत्तम आकिंचन्य धर्म
१. A. अपने ज्ञान दर्शनमय स्वभाव के बिना अन्य किंचित् मात्र भी मेरा
नहीं है, मैं किसी अन्य द्रव्य का नहीं हूँ - ऐसे अनुभव को कहते हैं?
A. आस्रव B. जीव C. ✓आकिंचन्य धर्म D. बंध
२. आठ प्रकार का स्पर्श किसका स्वरूप है?
A. जीव B. ✓पुद्गल C. धर्म D. अधर्म
३. सुख से परिपूर्ण स्वभाव किसका है, वह हमें कहाँ मिलेगा?
A. शरीर में B. धन धौलत में C. ✓मेरे स्वभाव में
D. रेस्टोरेण्ट में
४. यह जीव अद्यापिकाल से कर्मों की संगति में कब से है?
A. कुछ वर्षों से B. इसी भव से C. ✓अनादिकाल से
D. अनन्त काल से
५. अनन्त काल से मैंने परिभ्रमण किया है?
A. मिथ्यात्व के उदय से B. स्वरूप ज्ञान रहित होकर
C. परद्रव्यों को अपना स्वरूप जानकर D. ✓उपर्युक्त सभी
६. अब इस अवसर में मुझे अपना तथा पर के स्वरूप का ज्ञान
हुआ है?
A. आवरणादि के किंचित् दूर होने से B. ✓श्रीगुरूओं के प्रसाद से
C. परमागम के प्रसाद से D. उपर्युक्त सभी
७. इस जीव ने अनादिकाल से आजतक एक ही भावना भाई
है किसकी?
A. आकिंचन्य B. ✓मिथ्यात्व C. सम्यक्त्व D. आराधना
८. मेरे ज्ञान स्वभाव में मिले हुए राग, द्वेष, मोह कामादि मैल को
तथा अपने क्षायक स्वभाव को भिन्न जाना है किस प्रकार?
A. चार घण्टे टी.वी. देखने से B. पांच किलोमीटर घूमने से
C. देशान्तर में भ्रमण करने से D. ✓परमागम के निरन्तर
अभ्यास से
Data,
९. परमार्थ जो शुद्ध आत्मा उसका विचार करने की शक्ति
प्रकट होती है किसके ?
A. धनवान के B. बलवान के C. जिनके आकिंचनपना
होता है D. निर्धन के
१०. यह आत्मा अनादिकाल से कर्मों से मिला हुआ है ?
A. मटके में मोतियों के समान B. भण्डारगृह में अनाज के समान
C. क्षीर-नीर के समान D. मोतीचूर के लड्डू समान
११. गर्म, ठंडा, नरम, कठोर, लूखा, चिकना, हलका, भारी
यह सब किसका स्वभाव है ?
A. जीव B. पुद्गल C. आस्त्रव D. संवर
१२. मेरा स्वभावतो सुख से परिपूर्ण है फिर भी मैं दुःखी
हो रहा हूँ, क्यों ?
A. संयुक्त परिवार से B. कर्माधीन होने से C. रात में भोजन
नहीं मिलने से D. घर के खाने से
१३. जिसे आकिंचनपना होता है उसके ये अतिशय प्रकट होते हैं।
A. परिग्रह में वांछा का अभाव B. रत्नत्रय में प्रवृत्ति
C. चक्रवर्ती का सुख भी दुःख दिखता है D. उक्त सभी
१४. जिनका संसार का किनारा आ गया है उनको ही यह धर्म
होता है ?
A. गृहस्थ धर्म B. श्रावक धर्म C. आकिंचन्य धर्म
D. पुत्र धर्म
१५. आकिंचन्य वास्तव में कैसा है ?
A. सराग रूप B. परमवीतरागभावरूप C. शुभभावरूप
D. शुभाशुभभावरूप
१६. अनादिकाल से जितने भी सिद्ध हुए हैं तथा आगे जो भी
तीर्थंकरादि सिद्ध होगे वे एकमात्र इससे ही होंगे ?
A. वस्त्र त्याग से B. भोजन त्याग से C. आकिंचन्य धर्म से
D. मौन ग्रहण से
8602998600
17. आकिंचन्य धर्म का गृहस्थ अवस्था में पालन होता है?
A. सर्वदेश B. एकदेश C. रंचमात्र भी नहीं
D. उक्त सभी
18. आकिंचन्य धर्म का प्रधानरूपसे पालन होता है?
A. श्रावकावस्था में B. गृहस्थावस्था में C. साधु अवस्था में
D. वृद्धापन में
19. गृहस्थ के आकिंचन्य धर्म बाहर में कैसे दिखाई देता है?
A. आगामी वांछा रहित है B. प्रामाणिक परिग्रह रखता है
C. अल्पपरिग्रह में संतोष करता है D. उक्त सभी
२०. आकिंचन्यधर्म आत्मा का भाव है?
A. अभाव B. विभाव C. स्वभाव D. दुर्भाव
उत्तमब्रह्मचर्यधर्म
- समस्त विषयों में अनुराग छोड़कर ब्रह्म जो नामक भाव आत्मा
उसमें रमण प्रवृत्ति को कहते हैं?
A. अब्रह्मचर्य B. ब्रह्मचर्य C. असंयम D. अविरति
२. इस संसार में ब्रह्मचर्य धारण करने में समर्थ कौन हैं?
A. विषयों का लोलुपी B. जिह्वा का लोलुपी C. जो मनुष्यों में
देव के समान है D. तीव्र कषायी - जिसके ब्रह्मचर्य होता है वह जीव सुलभता से जीत लेता है?
A. समस्त इन्द्रियों को B. कषायों को C. उभय/उक्त दोनों
D. उक्त कोई नहीं - स्त्रियों के सुख में रागी जो मनरूप मदोन्मत्त हाथी है
उसे इसके द्वारा रोको?
A. भोग B. वैराग्यभावना C. परोपकाररूपी कर्तव्य - दुर्द्धर ब्रह्मचर्य धारण करने के लिए किसका अभाव
करना है?
A. स्त्री का B. परिवार का C. विषयों की इच्छा का
D. शरीर का
६. यह काम मन का मथन करता है, मन के ज्ञान को नष्ट
कर देता है, इसी कारण इसे कहते हैं?
A. पापी B. धर्मात्मा C. मन्मथ D. पुण्यात्मा
७. यह कामभाव कहाँ उत्पन्न होता है?
A. स्त्री में B. पुरुष में C. जीव की चित्तभूमि में
D. वृद्ध, तरुण में
८. इसके कारण अनेक जीव तिर्यञ्च तथा मनुष्यों में
भवों में लड़-लड़कर मर जाते हैं, अतः इसे कहते हैं?
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