पुरा कथा दर्शन
प्रतियोगिता
पुरा कथा दर्शन
समूहों में विभक्त प्रतिभागियों को पुराणों से संदर्भित
एक पहेली के आधार पर मंच पर दृश्य निर्माण करना होगा।
पार्श्व दृश्य, वेशभूषा, संवाद, रोचकता, शिक्षा
के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रतियोगिता का उद्देश्य तात्कालिक कार्य कुशलता,
ज्ञान वर्धन और जैन कहानियों से परिचय कराना है
प्रत्येक समूह को तैयारी के लिए 5 मिनट का समय दिया
जाएगा जिसमें वह स्वयं व मंच को तैयार कर सकें।
पहेली में आईं सभी बातों का दृश्य में सम्मिलित होना अनिवार्य है
वन गमन बार बार प्रेम द्वेष धर्म के कारण।
धन्य हुई जानकी जग जननी दृश्य बनाओ मनभावन।।
गृहस्थ धर्म उपदेश दाता प्रति, शची पति चिंता जाग उठी।
नृत्य देख भरतेश तिलक कर मुक्ति पुरी की राह चुनी।।
परिजन आग्रह ब्याह रचाया चार रानियां संग मिलीं।
चोर सहित सब पथ वैरागी, सबके मन में मुक्ति पुरी।।
हरि से भ्रात पग गिरनार नाथ परिणति में बस जाते।
आसन नाग राजमति त्याग शुद्ध चित रूप को ध्याते।।
एक सत्य का एक प्रवर्तन हिंसा का कर डाला।
अज का अर्थ अनर्थ किया वसु क्षण में नरक सिधाया।।
श्री वीर महा अति वीर सन्मति नायक हो।
जय वर्धमान गुणधीर सन्मति दायक हो।।
कर्म कलंक विनश्वर दर्शन पढ़न बड़े दो भाई।
प्राण तजे एक तर्क किए और जैन ध्वजा फहराई।।
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3462.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है