परिस्थिति का नायक कौन
दस लक्षण महापर्व जामनगर
सांस्कृतिक कार्यक्रम
परिस्थिति का नायक कौन
प्रस्तुति :- ब्र. जिनल बेन देवलाली
परिस्थिति 1
एक बालक ने शिविर में रात्रि भोजन त्याग का नियम लिया है
दादी जी उसके नियम की प्रशंसा करते हैं एक दिन रात्रि
बालक को भूख लगती है मम्मी आधुनिक विचारों की हैं
कहती हैं बेटा ! एक दिन खा लो कुछ नहीं होता है, पापा
मम्मी को रात्रि भोजन त्याग की कहानी सुनाई |
नायक
बालक
परिस्थिति 2
पर दादा - दादा जी वृद्ध होने से घर का कार्य करने
असमर्थ हैं परन्तु निरंतर स्वाध्याय में संलग्न हैं
म्मी हमेशा दादी को डांटती रहती हैं यह देख उनका
ना भी उन्हें जैसा चाहे बोलने लगा यह देख एक दिन
म्मी को स्वयं पर गुस्सा आया और उन्होंने अपने पुत्र
समझाया बेटा ! दादा दादी जी से ऐसा नहीं बोलते हैं |
म्मी और बेटे की वार्ता सुन पापा मन ही मन हंसने
ो |
नायक
दादा- दादी
परिस्थिति 3
द्वारिका 12 वर्ष बाद जलेगी यह खबर सुनने पर कुछ लो
सब क्रमबद्ध है यह समझकर वहीं रहने लगे | कुछ लो
ने दीक्षा ले ली
कुछ लोग द्वारिका छोड़कर भाग गए, कुछ लोग क्रमबद्
बदलने की कोशिश करने लगे और
नायक
दीक्षा लेने वाले लोग
परिस्थिति 4
ठंड का समय है मुनिराज जंगल में तप कर रहे हैं वहीं एक ग्वाला गायें चरा रहा है ठण्ड होने के कारण से वह उनके पास आग जला देता है और भक्ति भाव से वह भी वहीं बैठ जाता है ग्वाला का यह कृत्य यद्यपि मुनिराज को उपसर्ग था तथापि अज्ञानी ग्वाले के अन्दर तो मुनिराज के प्रति अनन्त भक्ति भाव था |
नायक
मुनिराज
परिस्थिति 5
शीतल का आज उपवास है, उसकी बहिन सलोनी ने उपवास नहीं किया माँ घर का सारा काम सलोनी से करवाती है क्योंकि उसने उपवास नहीं किया है | शीतल घर का काम करने के के लिए कहने पर गुस्सा करती है | पापा शीतल को समझा रहे हैं कि मात्र भूखा रहना उपवास नहीं है | इसके साथ कषाय, विषय का भी त्याग होना चाहिए | तभी माँ ने दोनों को जोर से फटकारा |
नायक
पापा
परिस्थिति 6
- सीता गरीबों की मदद करती है
- रमा स्वाध्याय करती है |
- कृष लड़ता है |
- मुनि दीक्षा का छेद करते हैं
नायक
रमा
परिस्थिति 7
मुनिराज ध्यानमुद्रा में बैठे हैं, शेर सामने खाने के भाव से बैठा है, सुअर बचाने के भाव से दौड़कर आया यह देख श्रावक शेर के मुख से सुअर को बचाने दौड़ा।
नायक
मुनिराज
परिस्थिति 8
दादा जी का अंतिम समय निकट है, पिताजी इलाज़ करा हेतु अस्पताल ले जाने को उद्यत / तैयार हैं दादी जी दादा जी को पूर्व इच्छा के अनुरूप समाधि के लिए प्रेरित कर रही हैं पोता -पोती इसे आत्महत्या बता कर दादी से लड़ रहे हैं तथा चाचा जी ने दादी जी का समर्थन किया
नायक
दादा
पारस्थित 9
चंद्र जी बलभद्र थे, सीता जी सती थीं, लक्ष्मण जी नारायण थे। ने वनवास के समय देशभूषण-कुलभूषण मुनिराज का उपस दूर किया था।
नायक
देशभूषण-कुलभूषण मुनिराज
परिस्थिति 10
स्वार्थ और भव्या दोनों भाई बहन हैं जिनकी उम्र
वर्ष है। दोनों घर में खेल रहे थे। और अचानक
ड़ने लगे। पापा उसी समय स्वाध्याय कर रहे थे
पा स्वाध्याय छोड़कर उन्हें समझाने लगे तभी
म्मी ने कहा आप स्वाध्याय करो मैं बच्चों को
वती हूँ।
नायक
मम्मी
जय जिनेन्द्र
मूल दस्तावेज़ (PDF): 1905.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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