पंच परम परमेष्ठी भगवन् जिसके है रखवाले | panch param parmesthi bhagwan jiske hain rakhwale

पंच परम परमेष्ठी भगवन्, हो… जिसके है रखवाले।
ऐसा धर्म है मेरा हो…
कुन्दकुन्द योगीन्दु देव हैं, जिसके पालन हारे।।ऐसा… ।।टेक।।

अणु-अणु की स्वतंत्रता, धर्म मेरा बतलाए।
पराधीन किञ्चित् भी, नहिं सर्वद्रव्य पर्यायें।।
जड़ और चेतन सारे, अपने में ही परिणमते।
अब तन की भी पराधीनता, न मेरे में आए।।
तो सुन लो! निर्विकल्प निर्भेद निराकुल, निज स्वरूप दर्शाए।।
ऐसा धर्म है मेरा।।१।।

अष्टापद चम्पापुर पावापुर और गिरनारी।
ऊँचे-ऊँचे शिखरों पर सम्मेद शिखर मनहारी।।
तीर्थंकरों की मुक्ति ने कण-कण पावन कर डाला।
सोनगढ़ से फैला जग में भेदज्ञान का उजाला।।
तो सुन लो! इन तीर्थों पर आकर मानो, सिद्धों से मिल जाए।।
ऐसा धर्म है मेरा।।२।।


Sung by: Atmarthi Deshna Jain. (@Deshna)

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