पहेली — आध्यात्मिक पहेली — ‘आतम ध्याना’ (उत्तर सहित)
आतम ध्याना, आतम ध्याना, आतम में रम जाना… बोलो-बोलो क्या???
पहेली 1:
एक अक्षर का मेरा नाम, मैं हूँ पंच प्रभु का धाम ।
सब जन करते मेरा ध्यान, पूरे जिनागम का है सार ।।
पहेली 2:
दो अक्षर का मेरा नाम, पाँच भाइयों का हूं धाम ।
मुझको जो अपनाता है, वह नरकों में जाता है ।।
पहेली 3:
तीन अक्षर का मेरा नाम, अन्त कटे तो मैं ही सब हूँ।
मुझमें लोकालोक झलकते, मैं हूँ अनन्त सुखों का धाम।।
पहेली 4:
दो अक्षर का मेरा नाम, बिना कमाये ही आराम।
नाम अमर है दूजा मेरा, अमृत पीने का है काम।
फिर भी मर जाता मैं इक दिन, इससे होता हूँ हैरान।।
पहेली 5:
मैं सबको कस कर दुःख देती, सबकी सुख-शान्ति हर लेती।
मैं हूँ अकुलता की माता, मेरा नाम किसे है आता॥
पहेली 6:
अणु-अणु जिसने देखा जाना, सत्य-सत्य बतलाती है।
द्वादश अंगों से सजी हुई, केवली कन्या कहलाती है॥
पहेली 7:
एक डंडा है इतना बड़ा, मध्य लोक नाभि में गड़ा।
दो-दो आजू-बाजू गड़े, देव-देवियाँ पूजा करें॥
पहेली 8:
पहला गया तो दूजा आया, यह अनादि का है चक्कर।
सज-धज कर जब राजा आया, दोनों हुए रफूचक्कर॥
पहेली 9:
सुख-दुःख, बैरी-बन्धु बीच हो, समता रस ही पीता हो।
हिरन खाज खुजलावें फिर भी अचल उपल सम रहता हो।।
पहेली 10:
वह पृथ्वी है कहाँ बताओ, चौदह नदियाँ बहती हों?
पूरब-पश्चिम सदा बराबर, छह पर्वत की धरती हो।।
पहेली 11:
चार अक्षर का नाम है मेरा, वार रोकने काम मैं आता।
प्रथम शब्द संख्या में आता, प्रसिद्ध जैन साहित्य कहाता।।
पहेली 12:
एक फिल्म ऐसी चले, क्रमशः चौबीस बार ॥
दृश्य वही बदले नहीं माँ से पूछ बताय ॥
पहेली 13:
नव नाली जिस नगर में, बहे सदा निःसार ।
गली-गली में गन्दगी, सड़े गले दिन रात ॥
पहेली 14:
एक पुरुष जिनवर ने देखा पाँव पसारे खड़ा हुआ।
कमर पे दोनों हाथ हैं उसके, काल अनन्तों अड़ा हुआ ॥
पहेली 15:
दस भागों में बँटा हुआ है, जैनी जन का रटा हुआ है।
संस्कृत का यह पहला दौर, करण शास्त्र का जो सिरमोर ॥
पहेली 16:
दो गोरे, दो सांवले, दो हरियल, दो लाल।
सोलह स्वर्णमयी कंचन के, वन्दू बारम्बार।।
पहेली 17:
चार भुजाओं का चक्कर है, चार चतुष्टय बतलावा।
सम्मेदाचल अवनि तल में छिपकर भी वह इठलाता ॥
पहेली 18:
कौन रत्न ऐसा वह भाई, सब गति में मिल जाता है।
पुण्य-पाप घनघोर उदय हो, जगमग ज्योति जगाता है।।
पहेली 19:
विंशति कर गये गगन विहार और अनन्तों हो गये पार।
पार्श्व चन्द्र की दो मीनार, कौन? बताओ अर्थ विचार ?
पहेली 20:
पाँच महा मुनिवर खड़े, शत्रुंजय के शीश।
कौन पधारे मुक्ति में, कौन रहे जग बीच ?
पहेली 21:
अष्ट महाभाषा सहित, लघु भाषा शत सात।
चार चतुष्टयमय रमें, भव्य जीव के तात।।
उत्तरमालिका (उत्तर)
- ॐ 2. पाप 3. सर्वज्ञ 4. देव 5. कषाय 6. जिनवाणी
- सुमेरू पर्वत 8. पुण्य-पाप 9. मुनिराज 10. जम्बूद्वीप
- छहढाला 12. सोलह स्वप्न 13. शरीर 14. लोक
- तत्त्वार्थ सूत्र 16. चौबीस तीर्थंकर 17. स्वस्तिक
- सम्यग्दर्शन 19. सम्मेद शिखरजी 20. पाँच पाण्डव (मोक्ष- युधिष्ठिर, भीम,अर्जुन व सर्वार्थसिद्धि- नकुल, सहदेव)
- अरिहंत भगवान
मूल दस्तावेज़ (PDF): 1848.pdf
स्रोत: तत्त्व, जिनवाणी व जैन साहित्य पर आधारित इक्कीस बूझ-पहेलियाँ — उत्तरमालिका सहित (जैन समुदाय पांडुलिपि)।
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