पहेली — आओ जिनमन्दिर में आओ — जिनमंदिर प्रश्नोत्तरी (उत्तर सहित)
नियमावली
- आपसे जिनमन्दिर से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाएंगे।
- आपको उन प्रश्नों का उत्तर जिनमंदिर से सम्बन्धित तथ्यों एवं वस्तुओं के आधार पर ही देना है।
उत्तर नीचे उत्तरमालिका में दिए गए हैं।
प्रथम चरण — प्रश्न
प्रश्न 1: जिन मंदिर किसका प्रतीक है ?
प्रश्न 2: मंदिर शब्द का क्या अर्थ होता है ?
प्रश्न 3: मंदिर में मूलनायक कौन-से परमेष्ठि होते हैं ?
प्रश्न 4: मंदिर में मूलनायक अरिहंत परमेष्ठि हैं — ऐसा ज्ञान किन वस्तुओं को देखकर होता है ?
प्रश्न 5: तीनों लोक में जिनेन्द्र देव के शासन की सूचक कौन-सी वस्तु है ?
प्रश्न 6: मूलनायक भगवान का मुख कौन-सी दिशा में होता है ?
प्रश्न 7: समवशरण में भव्य जीवों को अपने अधिकतम सात भव कहाँ दिखाई देते हैं ?
प्रश्न 8: तीन लोक में कितने जिनमंदिर हैं ?
प्रश्न 9: मन्दिर में अन्य सर्व सांसारिक बातें नहीं करने की प्रतिज्ञा हम क्या बोलकर लेते हैं ?
प्रश्न 10: रत्नत्रय की प्राप्ति की भावना से हम मन्दिर जी में कौन-सा कार्य करते हैं ?
प्रश्न 11: जिनमंदिर में दिव्यध्वनि के प्रतीक रूप क्या होता है ?
प्रश्न 12: भगवान के साथ में लगी 1008 संख्या किसका प्रतीक है ?
द्वितीय चरण — नियमावली
हम एक वाक्य बोलेंगे, आपको बताना है कि उससे मिलती हुई क्या वस्तु मंदिर में होती है।
उदाहरण :-
कथन — एक आत्मा होती है।
उत्तर — मन्दिर में एक मूलनायक भगवान होते हैं।
कथन 1: आठ कर्म होते हैं। (ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र, अन्तराय)
कथन 2: 64 ऋद्धियां होती हैं।
कथन 3: तीन योग होते हैं।
कथन 4: मुनिराज पाँच महाव्रतों का पालन करते हैं।
कथन 5: चौबीस परिग्रह होते हैं।
कथन 6: नव केवल लब्धियाँ होती हैं।
उत्तरमालिका
प्रथम चरण
- समवशरण
- भवन
- अरिहंत
- अष्ट प्रातिहार्य
- तीन छत्र
- पूर्व / उत्तर
- भामण्डल
- असंख्यात
- निःसहि
- तीन प्रदक्षिणा
- जिनवाणी
- तीर्थंकर के शारीरिक शुभ लक्षण
द्वितीय चरण
- पूजन के अष्ट द्रव्य।
- अरिहंत भगवान पर देव 64 चंवर ढोरते हैं।
- तीन छत्र होते हैं।
- पूजन के पाँच अंग होते हैं।
- चौबीस तीर्थंकर होते हैं।
- नौ बार णमोकार महामंत्र जाप करते हैं।
स्रोत: जिनमंदिर से सम्बन्धित तथ्यों पर आधारित दो-चरणीय प्रश्नोत्तरी पहेली — उत्तरमालिका सहित (जैन समुदाय पांडुलिपि)।
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