माठडना — जैन स्वाध्याय सामग्री | Mathdana

माठडना

माण्डना

संकलन
बा.ब्र. रोहित भैया
(संघस्थ मुनिश्री 108 प्रमाणसागरजी महाराज)

अंतिमनोत्र मूलनायक श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान

अतिप्राचीन श्री 1008 आदिनाथ भगवान
सिद्धिदायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान

गुणायातन, शिखरजी, मधुवन (झारखण्ड)

पुण्यार्जक
श्री राजकुमार संजयकुमार पाण्ड्या
कम्प्यूटर नेटवर्क, राँची (झारखण्ड)

अनुक्रमणिका

श्री पंचपरमेष्ठी विधान मण्डल 1
श्री 1008 शांतिनाथ विधान मण्डल 2
श्री चौंसठ ऋद्धि विधान मण्डल 3
श्री भक्तामर विधान मण्डल 4
श्री कल्याण मंदिर विधान मण्डल 5
श्री तीर्थंकर विधान मण्डल 6
श्री आचार्य छत्तीस विधान मण्डल 7
श्री तत्वाथ सूत्र विधान मण्डल 8
श्री कर्मदहन विधान मण्डल 9
श्री कर्मनिर्झरा विधान मण्डल 10
श्री श्रुतस्कन्ध विधान मण्डल 11
श्री गणधर वलय विधान मण्डल 12
श्री णमोकार पैंतीसी विधान मण्डल 13
श्री पंचमेरु विधान मण्डल 14
श्री पंचकल्याणक विधान मण्डल 15
श्री दशलक्षण विधान मण्डल 16
श्री 1008 पार्श्वनाथ विधान मण्डल 17
श्री सिद्धचक्र विधान मण्डल 18
श्री त्रिकाल चौबीसी विधान मण्डल 19
श्री सोलहकारण विधान मण्डल 20
श्री नंदीश्वर विधान मण्डल 21
श्री रविव्रत विधान मण्डल 22
श्री त्रिलोक जिनालय विधान मण्डल 23
श्री चंदन षष्ठी विधान मण्डल 24
श्री जिनगुण संपति विधान मण्डल 25
श्री जिनसहस्रनाम विधान मण्डल 26
श्री लब्धि विधान मण्डल 27
श्री रत्नत्रय विधान मण्डल 28
श्री सप्तऋषि विधान मण्डल 29
श्री सम्मेद शिखर विधान मण्डल 30

श्री पंचपरमेष्ठी विधान मण्डल

व्रत नाम - पंचपरमेष्ठी व्रत
व्रतारम्भ तिथि - अष्टाह्निका की अष्टमी या सप्तमी से 8 दिन
व्रतावधि - 4 माह
व्रत विधि - पूर्णिमा तक शक्त्यनुसार उपवास करें।
व्रत पूजा - पंचपरमेष्ठी पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं ह्रीं हूँ हूँ ऐं ऐं अ सि आ उ सा अर्हं पंचपरमेष्ठिभ्यो नमः।
व्रत फल - उत्कृष्ट पद प्रदायक
अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- अनतराय कर्म निवारण व्रत, अनन्त चतुर्दशी व्रत, अक्षय तृतीया व्रत, अष्टे पंचमी व्रत, कांजी बारहस व्रत, दुःख हरण व्रत

श्री 1008 शांतिनाथ विधान मण्डल

व्रत नाम - शांतिनाथ तीर्थंकर चक्रवर्ती कामदेव व्रत
व्रतारम्भ तिथि - ज्येष्ठकृष्ण चतुर्दशी
व्रतावधि - उत्कृष्ट 5 वर्ष, मध्यम 5 माह
व्रत विधि - प्रत्येक चतुर्दशी को उपवास करें
व्रत पूजा - श्री शांतिनाथ पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं जगत्कान्ति कल्याण श्री शांतिनाथाय नमः सर्वोपद्रव शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
या
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्रीशांतिनाथजिनेंद्राय नमः।
व्रत फल - सर्वोत्कृष्ट पद प्रदायक
अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- अज्ञान निवारण व्रत, शील कल्याणक व्रत, षोडश क्रिया व्रत, श्रेणिकला क्रिया व्रत

श्री चौंसठ ऋद्धि विधान मण्डल

व्रत नाम - चौंसठ ऋद्धि व्रत
व्रतारम्भ तिथि - किसी भी माह की 8 या 14
व्रतावधि - 64 व्रत
व्रत विधि - 2, 5, 8, 11 एवं 14 को शक्त्यनुसार उपवास या एकशन पूर्वक।
व्रत पूजा - चौंसठ ऋद्धि पूजा
व्रत जाप मन्त्र - 64 ऋद्धि मन्त्रों में से क्रमशः व्रत के दिन एक मन्त्र की जाप करें।
व्रत फल - ऋद्धि कारक

श्री भक्तामर विधान मण्डल

व्रत नाम - भक्तामर व्रत
व्रतारम्भ तिथि - किसी भी माह की अष्टमी
व्रतावधि - 1 वर्ष
व्रत विधि - व्रत के दिन उपवास करें। अष्टमी एवं चतुर्दशी को व्रत करते हुए 48 दिन करें।
व्रत पूजा - भक्तामर पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ह्रीं ह्रीं क्लीं ऐं श्री अर्हं श्रीवृषभनाथ-तीर्थंकराय नमः।
व्रत फल - संकट, प्राकृतिक प्रकोप, महामारी, असाध्यरोगादि निवारक
अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- अधिक सप्तमीव्रत, एकेनिय जाति निवारण व्रत, पर्व मंगल व्रत, मंगलभूषण व्रत

श्री कल्याण मंदिर विधान मण्डल

व्रत नाम - कल्याण मंदिर व्रत
व्रतारम्भ तिथि - किसी भी मास की चतुर्दशी
व्रतावधि - 44 चतुर्दशी पूर्वक
व्रत विधि - प्रोषध पूर्वक उपवास
व्रत पूजा - कल्याणमंदिर स्तोत्र पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ह्रीं ह्रीं क्लीं ऐं श्री अर्हं श्रीपद्मप्रभजित-पार्श्वनाथ-जिनेद्राय नमः।
व्रत फल - उपसर्ग निवारक

श्री तीर्थंकर विधान मण्डल

व्रत नाम - तीर्थंकर व्रत
व्रतारम्भ तिथि - भगवान आदिनाथ के किसी एक कल्याणक की तिथि
व्रतावधि - 24 दिन
व्रत विधि - शेष तीर्थंकरों के भी उसी कल्याणक की तिथि का उपवास
व्रत पूजा - चौबीस तीर्थंकर पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ह्रीं ह्रीं श्री क्लीं अर्हं श्री वृषभदिचतुर्विंशति तीर्थंकरेभ्यो नमः।
व्रत फल - सोलह कारण भावनार्धक

श्री आचार्य छत्तीस विधान मण्डल

व्रत नाम

  • आचार्य छत्तीस व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • शुभ माह के शुक्ल पक्ष की कोई भी तिथि

व्रतावधि

  • 36 दिन

व्रत विधि

  • इस व्रत में तीज के 3 व्रत, पंचमी के 5 व्रत, षष्ठी के 6 व्रत, दशमी के 10 व्रत एवं बारह के 12 व्रत उपवास से उत्तम, नीरस भोजन से मध्यम एवं एकभान से जयध्वज से करते हैं।

व्रत पूजा

  • आचार्य छत्तीस पूजा

व्रत जाप मन्त्र

  • ॐ ह्रीं श्रीं षट् विंशत् गुणाधिपत आचार्याय परमेष्ठिभ्यो नमो नमः।
    (प्रत्येक गुण के अनुसार जाप अलग से करें।)

व्रत फल

  • परम्परा से मोक्ष

श्री तत्त्वार्थ सूत्र विधान मण्डल

व्रत नाम

  • तत्त्वार्थ सूत्र व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • किसी भी माह की कोई भी अष्टमी

व्रतावधि

  • 10 दिन, उत्कृष्ट 357 दिन

व्रत विधि

  • उपवास पूर्वक

व्रत पूजा

  • तत्त्वार्थ सूत्र पूजा

व्रत जाप मन्त्र

  • ॐ ह्रीं श्रीजिनमुखोद्भूत-द्वादशांग-सारभूत-श्रीतत्त्वार्थसूत्राय नमः।

व्रत फल

  • तत्त्व सिद्धांतवर्धक एवं मोक्षमार्ग प्रदायक

श्री कर्मदहन विधान मण्डल

व्रत नाम

  • कर्मदहन व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी

व्रतावधि

  • 156 उपवास पूर्वक

व्रत विधि

  • व्रत के दिन घोष पूर्वक उपवास एवं व्रत सम्बन्धी जाप करें।
    7 चतुर्दशी के 7 उपवास 3 अष्टमी के 3 उपवास
    36 नवमी के 36 उपवास 1 दशमी का 1 उपवास
    16 द्वादशी के 16 उपवास 85 चतुर्दशी के 85 उपवास 8 अष्टमी के 8 उपवास
    लघु कर्मदहन विधान

व्रत पूजा

  • ॐ ह्रीं अर्हं सि आ उ सा अ नमहंतसिद्धेभ्यो नमः।

व्रत जाप मन्त्र

  • अष्टकर्म निवारक एवं पारलौकिक सुख दायक

व्रत फल

  • अष्टख व्रत जिसमें यह विधान कहते हैं- उपवास निवारण व्रत, कर्मकावली व्रत, कर्मपुर व्रत, कर्मक्षय व्रत, केवल चंद्रायण व्रत, सारिंद्र शुद्धि व्रत (1234 व्रत), मुक्तावली व्रत, सिंह निष्क्रीड़ित व्रत, गुणरत्न एवं कर्म प्रकृति निवारण व्रत

श्री कर्मनिर्जरा विधान मण्डल

व्रत नाम

  • कर्मनिर्जरा व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • भाद्रपद शुक्ल द्वादशी

व्रतावधि

  • 8 वर्ष

व्रत विधि

  • 12, 13, 14 तीन दिन तक शक्त्यनुसार उपवास या एकाशन करें।

व्रत पूजा

  • कर्मनिर्जरा पूजन

व्रत जाप मन्त्र

  • प्रथम दिन - ह्रीं ह्रीं द्वादशमिथ्यात्वनिवारकाय भगवजिनाय नमः।
  • द्वितीय दिन - ह्रीं ह्रीं द्वादशव्रत-चारित्राय-भगवजिनाय नमः।
  • तृतीय दिन - ह्रीं ह्रीं द्वादशभावना-चिन्तक-भगवजिनाय नमः।

व्रत फल

  • अशुभ कर्म निवारक एवं पारमार्थिक सुख दायक

श्री श्रुतस्कन्ध विधान मण्डल

व्रत नाम

  • श्रुतस्कन्ध व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी

व्रतावधि

  • 14 वर्ष

व्रत विधि

  • कार्तिकशुक्ल 4 के दिन प्रोषध पूर्वक उपवास करें

व्रत पूजा

  • चौबीस तीर्थंकर एवं श्रुतस्कन्ध पूजा

व्रत जाप मन्त्र

  • ह्रीं ह्रीं जिनमुखोद्भव-द्वादशांग-नयगर्भित-द्वादशांग श्रुतज्ञानाय नमः।

व्रत फल

  • स्वर दोष निवारक, तीक्ष्ण बुद्धि प्रदायक एवं ज्ञानवर्धक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं

  • श्रुत कल्याणक व्रत, श्रुत पंचमी व्रत, श्रुतज्ञान व्रत, श्रुतावतार व्रत, श्रुति कल्याणक व्रत, निश्छय नय व्रत, भावना द्वात्रिंशतिका व्रत, सरस्वती व्रत

श्री गणधर वलय विधान मण्डल

व्रत नाम

  • गणधर वलय व्रत

व्रतारम्भ तिथि

  • किसी भी अष्टाह्निका की अष्टमी

व्रतावधि

  • 24 वर्ष, 12 वर्ष, 9 वर्ष, 8 वर्ष या 3 वर्ष

व्रत विधि

  • अष्टमी से पूर्णिमा तक उपवास/एकाशन शक्त्यनुसार

व्रत पूजा

  • श्री गणधरवलय पूजा

व्रत जाप मन्त्र

  • ह्रीं हां ह्रीं हूं हौं हः अ सि आ उ सा अप्रतिचक्र फट् विचक्राय झौं झौं नमः।

व्रत फल

  • कार्यसिद्धि दायक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं

  • चतुर्दशीति गणधर व्रत

श्री णमोकार पैंतीसी विधान मण्डल

व्रत नाम

  • णमोकार पैंतीसी व्रत

व्रतआरंभ तिथि

  • आषाढ़ शुक्ल सप्तमी

व्रतअवधि

  • 45 दिन (1 1/2 वर्ष की अवधि में)

व्रत विधि

  • आषाढ़ शुक्ल सप्तमी, श्रावण आषाढ़ की दो सप्तमी, भाद्रपद मास की दो सप्तमी, आश्विन मास की दो सप्तमी को णमोकार मंत्र जाप्य के साथ उपवास, कार्तिक कृष्ण पंचमी से पौष कृष्ण पंचमी तक पाँच पंचमी के विधि उपवास, पौष कृष्ण चतुर्दशी से फाल्गुन चतुर्दशी तक सात चतुर्दशी के सात उपवास, चैत्र शुक्ल चतुर्दशी से आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी तक सात चतुर्दशी के सात उपवास, श्रावण कृष्ण नवमी से अलहदन कृष्ण नवमी तक नौ नवमी के नौ उपवास।

व्रत पूजा

  • नवकार मन्त्र पूजा

व्रत जाप्य मन्त्र

  • णमोकार महामंत्र

व्रत फल

  • संकट निवारक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- नवकार व्रत

श्री पंचमेरु विधान मण्डल

व्रत नाम

  • पुष्पांजलि व्रत

व्रतआरंभ तिथि

  • भाद्रपद, माघ एवं चैत्र माह की शुक्ल पंचमी से नवमी तक

व्रतअवधि

  • 5 वर्ष

व्रत विधि

    1. उत्तम विधि- पंचमी से नवमी तक 5 उपवास
  1. मध्यम विधि- पंचमी, सप्तमी, नवमी का उपवास एवं षष्ठी, अष्टमी का एकाशन
  2. जघन्य विधि- पंचमी एवं नवमी का उपवास एवं षष्ठी, सप्तमी एवं अष्टमी का एकाशन

व्रत पूजा

  • श्री पंचमेरु पूजा

व्रत जाप्य मन्त्र

  • ह्रीं ह्रीं पंचमेरुस्थाधीति-जिनालयस्थ-जिनेभ्यो नमः।

व्रत फल

  • सातिशय पुण्यदायक

श्री पंचकल्याणक विधान मण्डल

व्रत नाम

  • पंचकल्याणक व्रत

व्रतआरंभ तिथि

  • आषाढ़ कृष्ण द्वितीया

व्रतअवधि

  • 5 वर्ष

व्रत विधि

  • उपवास पूर्वक करें।
    प्रथम वर्ष - 24 तीर्थंकरों की गर्भ कल्याणक की तिथियों के चौबीस उपवास
    द्वितीय वर्ष - जन्म कल्याणक की तिथियों के चौबीस उपवास
    तृतीय वर्ष - तप कल्याणक की तिथियों के चौबीस उपवास
    चतुर्थ वर्ष - ज्ञान कल्याणक की तिथियों के चौबीस उपवास
    पंचम वर्ष - निर्वाण कल्याणक की तिथियों के चौबीस उपवास करें।

व्रत पूजा

  • चौबीस तीर्थंकर पूजा एवं जिन तीर्थंकर का कल्याणक हो उसकी पूजा

व्रत जाप्य मन्त्र

  • ह्रीं ह्रीं अर्हं ह्रीं अर्हं श्रीवृषभदीरन्तग-चतुर्विंशति-तीर्थंकरेभ्यो नमः।

व्रत फल

  • मोक्ष पद प्रदायक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- अनन्त सुख व्रत, कल्याणक व्रत, कल्याणमित्र व्रत, निर्वाण कल्याणक व्रत, सर्वोत्कृष्ट व्रत

श्री दशरक्षण विधान मण्डल

व्रत नाम
दशरक्षण व्रत

व्रतारम्भ तिथि
भाद्र, माघ, चैत्र तीनों माह की शुक्ल पंचमी

व्रतावधि
10 वर्ष

व्रत विधि
उपवास, मध्यम, अपवास की अपेक्षा तीन विधियाँ हैं-

  1. उत्तम विधि - दश दिन के दश उपवास
  2. मध्यम विधि - पंचमी अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी इन चार तिथियों में आहार और शेष दिन में स्वल्प
  3. जघन्य विधि - दश दिन के दश एकाशन

व्रत पूजा
दशरक्षण पूजा

व्रत जाप मन्त्र
ॐ ह्रीं अर्हत् नमो-दशरक्षणाय-उत्तम-क्षमादि-दशरक्षण-धर्मेभ्यो नमः
प्रत्येक दिन जाप

ॐ ह्रीं उत्तम क्षमा-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम मार्दव-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम आर्जव-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम सत्य-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम शौच-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम संयम-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम तप-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम त्याग-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम अकिंचन-धर्मेभ्यो नमः।
ॐ ह्रीं उत्तम ब्रह्मचर्य-धर्मेभ्यो नमः।

व्रत फल
आत्म स्वभाव प्राकट्यकारक

श्री 1008 पार्श्वनाथ विधान मण्डल

व्रत नाम
मोक्षसप्तमी व्रत

व्रतारम्भ तिथि
श्रावण शुक्ल सप्तमी

व्रतावधि
7 वर्ष

व्रत विधि
व्रत के दिन उपवास करें।

व्रत पूजा
श्री पार्श्वनाथ पूजा

व्रत जाप मन्त्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्रीपार्श्वनाथजिनेन्द्राय नमः।

व्रत फल
विघ्न विनाशक/सौख्य प्रदायक

श्री सिद्धचक्र विधान मण्डल

व्रत नाम
सिद्धचक्र व्रत

व्रतारम्भ तिथि
आषाढ़, कार्तिक व फाल्गुन में

व्रतावधि
उत्कृष्ट 12 वर्ष, मध्यम 6 वर्ष, जघन्य 3 वर्ष

व्रत विधि
अष्टमी से पूर्णिमा तक लगातार उपवास या एकाशन

व्रत पूजा
सिद्ध पूजा

व्रत जाप मन्त्र
ॐ ह्रीं अर्हं अ सि आ उ सा नमः।

व्रत फल
सिद्ध गुणदायक

श्री त्रिकाल चौबीसी विधान मण्डल

व्रत नाम - त्रिकालनुतीय व्रत,
व्रतारम्भ तिथि - भाद्रपद शुक्ल तृतीया
व्रतविधि - 3 वर्ष
व्रत विधि - प्रत्येक तृतीया के दिन उपवास करें।
व्रत पूजा - त्रिकाल चौबीसी पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं जिणचउव्वीस-ठिअप्पति - त्रिकाल तीर्थवरेभ्यो नमः।
व्रत फल - त्रिलोक पूज्यता प्रदायक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं - चतुर्विंशति धातुभावना व्रत, चतुर्विंशति श्रीतुभावना व्रत, सम्यक्त्व चतुर्विंशति व्रत, समकित चौबीसी व्रत

सोलहकारण विधान मण्डल

व्रत नाम - सोलहकारण व्रत
व्रतारम्भ तिथि - आश्वद, माघ एवं चैत्र तीनों मास में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा
व्रतविधि - उत्तम सोलहकारण मण्डल पीठ पर, संकल्प एक वर्ष
व्रत विधि - इस व्रत को उत्तम, मध्यम एवं जघन्य की तीन-तीन विधियाँ हैं -

  1. उत्तम विधि - कृष्ण पक्ष की एकम से दूजरे माह की कृष्णा एकम तक (31 दिन के 31 उपवास)
  2. मध्यम विधि - 16 उपवास एवं 16 पारणा पूर्वक (क्रमशः एक उपवास एक पारणा क्रम से)
  3. जघन्य विधि - 31 एकाशन। (लगातार)
    व्रत पूजा - सोलहकारण पूजा
    व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं दर्शनविशुद्धयादि-षोडशकारणभ्यो नमः। (प्रत्येक भावना का जाप करें)
    व्रत फल - तीर्थंकर प्रकृति दायक

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं - सोलहकारण - भावना के एक-एक अंग के व्रत में यही विधान होता है।

श्री नंदीश्वर विधान मण्डल

व्रत नाम - नंदीश्वर द्वीप व्रत
व्रतारम्भ तिथि - अष्टाव्हिक पर्व की अष्टमी
व्रतविधि - एक ही आठ दिन
व्रत विधि - 56 उपवास एवं 52 पारणा पूर्वक लगातार करें। पृथ्वीदिठि-अंजनगिरि का बेला एक, पारणा एक दक्षिण-पूर्व के उपवास चार, पारणा चार, रतिकर के उपवास आठ, पारणा आठ इस प्रकार पृथ्वीदिठि के चौदह उपवास, पारणा तेरह
इसी तरह दक्षिण दिशा, पश्चिम दिशा एवं उत्तर दिशा के उपवास करें।
व्रत पूजा - नंदीश्वर द्वीप पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं नंदीश्वरद्वीपे-द्विंपंचाशजिनालयस्थ-जिनेभ्यो नमः।
व्रत फल - सातिशय पुण्य सहित सम्यक्त्व प्रदाता

अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं - अष्टाव्हिक व्रत, नंदीश्वर पवित व्रत, बीससागर व्रत

श्री रविव्रत विधान मण्डल

व्रत नाम - रविव्रत व्रत
प्रारम्भ तिथि - आषाढ़ शुक्ल का अंतिम रविवार
व्रतावधि - 9 वर्ष
व्रत विधि - 9 वर्ष में 81 रविवार
व्रत की चार विधियाँ है

  1. प्रथम विधि - प्रति रविवार को पोषधोपवास करना।
  2. दूसरी विधि - आमिल (इमली-चावल) से एकाशन।
  3. तीसरी विधि - एक बार का पटोला भोजन करना।
  4. चतुर्थ विधि - एकाशन करना।
    व्रत पूजा - श्रीपार्श्वनाथ पूजा।
    व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्री पार्श्वनाथाय नमः।
    व्रत फल - मनोवांछित फल प्रदाता

श्री त्रिलोक जिनालय विधान मण्डल

व्रत नाम - त्रिलोकसार व्रत,
प्रारम्भ तिथि - किसी भी माह की कोई भी तिथि
व्रतावधि - 41 दिन
व्रत विधि - 30 उपवास 11 पारणाएँ लगातार यथा-उपवास 5 पारणा 1,
उपवास 4 पारणा 1, उपवास 3 पारणा 1, उपवास 2 पारणा 1,
उपवास 1 पारणा, उपवास 2 पारणा 1, उपवास 3 पारणा 1,
उपवास 4 पारणा 1, उपवास 3 पारणा 1, उपवास 2 पारणा 1
उपवास 1 पारणा 1
व्रत पूजा - अकृत्रिम चैत्यालय पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं त्रिलोकस्थस्वस्ति-कृत्रिमाकृत्रिम-चैत्यचैत्यालयेभ्यो नमः।
व्रत फल - उत्कृष्टपद प्रदाता
अक्षय व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- इन्द्रध्वज व्रत, त्रिलोकबीज व्रत

श्री चन्दन षष्ठी विधान मण्डल

व्रत नाम - चन्दन षष्ठी व्रत
प्रारम्भ तिथि - आषाढ़ कृष्ण षष्ठी
व्रतावधि - 6 वर्ष
व्रत विधि - आषाढ़ कृष्ण षष्ठी को उपवास करें
व्रत पूजा - श्री चन्द्रप्रभ पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्रीचन्द्रप्रभजिनेन्द्राय नमः।
व्रत फल - अशुद्धि से हुए अभिनय की विशुद्धि हेतु।

श्री जिनगुण संपत्ति विधान मण्डल

व्रत नाम

  • जिनगुण संपत्ति व्रत

व्रतारंभ तिथि

  • आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा

व्रतविधि

  • 63 दिन

व्रत तिथि

  • व्रत के दिन उपवास
  • उत्तम-सोलह भावना के 16, प्रतिपदा, पंचकल्याणकों के 5 पंचमी के 5 उपवास, अल्पप्रतिहार्य के 8 अष्टमी के 8 उपवास, दश जन्म के अतिहार्य के 10 दशमी के 10 उपवास, दश केवलज्ञान के अतिहार्य के 10 दशमी के 10 उपवास, चौदह देवकृत अतिहार्यों के 14 चतुर्दशी के 14 उपवास

व्रत पूजा

  • जिनगुण संपत्ति व्रत पूजा

व्रत जाप मंत्र

  • जिनगुण संपत्ति मन्त्रों में से जिस मन्त्र का दिन हो।

व्रत फल

  • सर्वसुख प्रदायक

श्री जिनसहस्रनाम विधान मण्डल

व्रत नाम

  • जिनसहस्रनाम व्रत

व्रतारंभ तिथि

  • 1008 वां 11 दिन

व्रतविधि

  • 11 दिन उपवास करें, व्रत अष्टमी एवं चतुर्दशी के दिन करें। लघुकाल का पाठ अवश्य पढ़ें।

व्रत पूजा

  • लघुसहस्रनाम पूजा।
  1. ॐ ह्रीं श्रीं जिनसहस्रनाम-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  2. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीऋषभजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  3. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीअजितजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  4. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीसंभवजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  5. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीअभिनन्दनजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  6. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीसुमतिजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  7. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीपद्मप्रभजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  8. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीसुपार्श्वजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  9. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीचन्द्रप्रभजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)
  10. ॐ ह्रीं श्रीं श्रीपुष्पदन्तजिनेन्द्राय-नामाराध्य श्रीजिनेन्द्राय नमः। (100 दिन तक)

व्रत फल

  • शत्रुघ्न प्रदायक
  • अन्य व्रत जिनके यह विधान कहते हैं - वक्रकुण्डगत, शत्रुद कल्याण व्रत

श्री लब्धि विधान मण्डल

व्रत नाम

  • लब्धि विधान व्रत

व्रतारंभ तिथि

  • आषाढ़, माघ, चैत्र शुक्ल तिथि में

व्रतविधि

  • 3 वर्ष

व्रत तिथि

  • इस व्रत की तीन विधियाँ मिलती हैं:-
  • प्रथम विधि - अमावस्या का एकान्तर कर पड़वा, दूज एवं तृतीया का तेल कंद चतुर्दशी को पारणा करें।
  • द्वितीय विधि - आषाढ़, माघ एवं वैशाख में शुक्ल पड़वा एवं तीज का उपवास, दोज एवं चतुर्दशी को पारणा करें इस प्रकार छह वर्ष करें।
  • तृतीय विधि - आषाढ़, माघ एवं चैत्र माह में शुक्ल पड़वा एवं तीज का एकान्तर, दोज का उपवास, चतुर्दशी का एकान्तर इस प्रकार दो वर्ष में व्रत पूर्ण करें।

व्रत पूजा

  • श्री महावीर स्वामी पूजा

व्रत जाप मन्त्र

  • ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्रीमहावीरस्वामिने नमः।

व्रत फल

  • शील वृद्धि प्रदाता

श्री रत्नत्रय विधान मण्डल

व्रत नाम - रत्नत्रय व्रत
व्रतारम्भ तिथि - भाद्रपद, माघ एवं चैत्र तीनों माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी
व्रतविधि - उत्कृष्ट 13 वर्ष, मध्यम 8 वर्ष, जघन्य 5 वर्ष एवं 3 वर्ष
व्रत विधि - शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अय्याच्य भोजन के पश्चात् त्रयोदशी, चतुर्दशी एवं पूर्णिमा इन तीन दिन के उपवास की प्रतिज्ञा करे एवं प्रतिपदा के दिन पारणा करे।
व्रत पूजा - रत्नत्रय पूजा
व्रत जाप मन्त्र - ॐ ह्रीं अर्हत् सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रेभ्यो नमः।
व्रत फल - मोक्षमार्ग प्रदायक
अन्य व्रत जिसमें यह विधान करते हैं- चक्रोदय व्रत, दर्शन विशुद्धि व्रत, सम्यग्दर्शन के प्रत्येक अंग के व्रत, रत्नत्रोक व्रत, शुद्धदर्शन तप व्रत, त्रिगुणसार व्रत

श्री सप्तऋषि विधान मण्डल

श्री सम्मेद शिखर विधान मण्डल

In Memory of Samajratna
Late Rai Bahadur Harakh Chand Jain (Pandya)

गुरु चरणों में
शत्-शत् नमन…

संत शिरोमणि
आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज

परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाणसागरजी महाराज

पूज्य मुनिश्री 108 विराटसागर जी महाराज

माण्डना

संकलन
डॉ. के. के. जैन ‘प्रेमा’
(संपादक मुनिश्री 108 प्रमाणसागरजी महाराज)

प्रकाशक :
निर्ग्रन्थ फाउण्डेशन, भोपाल

स्रोत: Gyata संग्रह।

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