मानुषोत्तर पर्वत सम्बन्धी | Manushottar Parvat Sambandhi

मानुषोत्तर पर्वत के चार जिनालयों को नरलोक में क्यों लिया है
जब की मनुष्य मानुषोत्तर पर्वत के बाहर जा नहीं सकते हैं

@Vikas13 जी, जय जिनेन्द्र।

बहुत सुंदर प्रश्न है: मनुष्य मानुषोत्तर पर्वत के बाहर नहीं जा सकते, फिर भी उस पर्वत के चार जिनालयों को नरलोक में क्यों गिना जाता है। यह अब तक अनुत्तरित रहा, इसके लिए खेद है। मैंने इसे JinSwara कंटेंट टीम के विद्वान साथियों तक पहुँचा दिया है, आगम-आधारित उत्तर यहीं आएगा।

तब तक फ़ोरम के साधर्मियों से निवेदन: तिलोयपण्णत्ति और त्रिलोकसार में मानुषोत्तर पर्वत, उसके कूट और जिनालयों, तथा ढाई द्वीप रूप नरलोक की सीमा का जो वर्णन है, उसे ग्रंथ और गाथा के संदर्भ सहित यहाँ रखें। पर्वत की स्थिति पुष्करवर द्वीप के मध्य में है, तो उसका कौन सा भाग नरलोक की सीमा में आता है, इस पर अपने स्वाध्याय से बात रखिए।