मणिभद्र नाटक | Manibhadra Natak — वैराग्य व धर्म प्रेरक मंचन योग्य नाटक

मणिभद्र नाटक — मणिभद्र व चन्द्रप्रभा आदि पात्रों के संवादों से सजा एक मंचन योग्य नाटक, जिसमें संसार की असारता, वैराग्य व धर्म की प्रेरणा दी गई है। पूरे पात्र परिचय व संवाद सहित। स्वाध्याय, पाठशाला व सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु उपयोगी।

Manibhadra Natak — a stage-worthy Jain drama with full characters and dialogues conveying detachment (vairagya) and dharma. Jain natak script for pathshala and cultural programs.

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नाटक का आरंभिक अंश

[शीर्षक पृष्ठ]

श्रीवीतरागाय नमः।

पंडित कुंजबिहारीलाल जैन शास्त्री “वत्सल” कृत
गद्य-पद्यमयी, स्टेज पर खेलने योग्य
मणिभद्र-नाटक।

प्रकाशक — पंडित कुंजबिहारीलाल जैन शास्त्री।
प्रथमावृत्ति १,०००, मिती मगसिर सुप्रथा २, वीर सम्वत् २४६६, विक्रम सम्वत् १९८६।


नाटक के पात्र

मणिभद्र — सुभद्र सेठका पुत्र
कर्मकार — मणिभद्रका गुमास्ता
दिनेश — मणिभद्रका मित्र
यज्ञदत्त — अनंगतिलका का नोकर
ज्ञानचंद — ब्रह्मचारी
कालिया — मिहतर (भंगी)
कुरा — मिहतर
जज, वकील, पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट, सिपाई, द्वारपाल और सभासद आदि।

नाटक की पात्रायें

चन्द्रप्रभा — मणिभद्रकी स्त्री
अनंगतिलका — वेश्या
रूपतिलका — अनंगतिलका की बहन
शुभभद्रा — मणिभद्रकी माँ
त्रिगुणा — बुढ़ी और चेरियां


यह नाटक का आरंभिक अंश (शीर्षक पृष्ठ व पात्र परिचय) है। पूरा नाटक ऊपर दी गई PDF में उपलब्ध है।