मैं अतिथि हूँ
नियमावली
- आपको एक घर दिखाया जाएगा, जिसमें चार सदस्य होंगे। उन चार म से तीन उसी घर के मूल निवासी है तथा एक अतिथि है।
- आपको उस अतिथि को पहचानना है और साथ में यह भी बताना है कि वो किस घर से है।
- और यह घर किसका है।
मैं अतिथि हूँ
आदिनाथ, भरत, शांतिनाथ, महावीर नाम के चार घर दिखाए गए हैं।
मैं अतिथि हूँ
चित्र में चार घर बने हैं, जिन पर क्रमशः ‘क्रोध’, ‘मान’, ‘राग’, ‘लोभ’ लिखा है।
मैं अतिथि हूँ
चित्र में चार घर बने हैं, जिन पर क्रमशः ‘हिंसा’, ‘पाप’, ‘झूठ’, ‘परिग्रह’ लिखा है।
मैं अतिथि हूँ
चित्र में चार घर बने हैं, जिन पर क्रमशः ‘जीव’, ‘बंध’, ‘पुद्गल’, ‘निर्जरा’ लिखा है।
मैं अतिथि हूँ
मनुष्य
नरक
तिर्यंच
सिद्ध
मैं अतिथि हूँ
बाल
रसना
चक्षु
कर्ण
मैं अतिथि हूँ
क्षमा
मार्दव
आर्जव
धर्म
मैं अतिथि हूँ
अरिहंत
सिद्ध
परम
आचार्य
बैल
चूहा
हाथी
घोड़ा
हाथ
जीव
कान
आँख
मैं अतिथि हूँ
ऊर्ध्व
नरक
मध्य
अधो
मैं अतिथि हूँ
लाल
हरा
सफेद
नारंगी
मैं अतिथि हूँ
तितली
चूहा
कपड़ा
मम्मी
मैं अतिथि हूँ
परिक्रमा
स्वाध्याय
कायोत्सर्ग
लड़ना
मैं अतिथि हूँ
दर्शन
रत्न
ज्ञान
चारित्र
मैं अतिथि हूँ
चंद्रमा
स्वस्तिक
दर्पण
ध्वज
मैं अतिथि हूँ
चार घरों के चित्र, जिन पर क्रमशः ‘शंख’, ‘कलश’, ‘गैंडा’, ‘बिल्ली’ लिखा है।
मैं अतिथि हूँ
चार घरों के चित्र, जिन पर क्रमशः ‘मोह’, ‘शोर’, ‘राग’, ‘द्वेष’ लिखा है।
मैं अतिथि हूँ
चार घरों के चित्र, जिन पर क्रमशः ‘पानी छानना’, ‘मन्दिर जाना’, ‘सोना’, ‘रात्रि भोजन त्याग’ लिखा है।
जय जिनेंद्र
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3230.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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