कृष्ण अभी कहाँ हैं और .. | Krishna Abhi kahan hain?

कृष्ण तीसरे नरक में हैं, वहाँ से निकलकर अगली चौबीसी के निर्मल भगवान् होंगे।


जैन रामायण एवं महाभारत के प्रमुख पात्रों की गति: कौन तद्भव मोक्षगामी हुए, कौन स्वर्ग अथवा सर्वार्थसिद्धि गये, और कौन कुगतिगामी हुए। स्वाध्याय हेतु सारणी रूप में।

क्रम नाम गति / विशेष
25 कुम्भकरण तद्भव मोक्षगामी
26 विभीषण तद्भव मोक्षगामी
27 मेघनाथ तद्भव मोक्षगामी
28 इन्द्रजीत तद्भव मोक्षगामी
29 मन्दोदरी स्वर्ग में
30 हनुमान् तद्भव मोक्षगामी
31 बालि कैलाश पर्वत से मोक्ष
32 सुभद्रा सोलहवें स्वर्ग में
33 युधिष्ठिर तद्भव मोक्षगामी
34 भीम तद्भव मोक्षगामी
35 अर्जुन तद्भव मोक्षगामी
36 नकुल सर्वार्थसिद्धि, वहाँ से चय करके अगले भव में मोक्ष जायेंगे
37 सहदेव सर्वार्थसिद्धि, वहाँ से चय करके अगले भव में मोक्ष जायेंगे
38 कृष्ण तीसरे नरक में; अगली चौबीसी में 16वें तीर्थंकर श्री निर्मल जी होंगे।
39 बलदेव स्वर्ग, वहाँ से 7 सागर की आयु पूर्ण करके भरत क्षेत्र में तीर्थंकर होंगे
40 जरत्कुमार नरक
41 नृपदन्त तद्भव मोक्षगामी
42 देवपाल तद्भव मोक्षगामी
43 अनीकदन्त तद्भव मोक्षगामी
44 अनीकपाल तद्भव मोक्षगामी
45 शत्रुघ्न तद्भव मोक्षगामी
46 जितशत्रु तद्भव मोक्षगामी
47 गजकुमार तद्भव मोक्षगामी, सोमशर्मा ब्राह्मण ने सिर पर अंगीठी जलायी, अन्तःकृत केवली हुये।
48 द्वीपायनमुनि कुगतिगामी, इनके क्रोध के निमित्त से द्वारिका नगरी भस्म हुयी।
49 कंस कुगतिगामी, रौद्र परिणामी होने से बहुत… (पेज यहाँ कट गया है)

क्रम 49 (कंस) मूल पृष्ठ पर ही अधूरा छपा है, आगे का पाठ मिलने पर पूर्ण किया जायेगा। क्रम 1 से 24 शीघ्र जोड़े जायेंगे।

Gati (destiny) of the principal characters of the Jain Ramayan and Mahabharat: tadbhav mokshgami, swarg, sarvarthasiddhi and kugati, compiled as a reference table for swadhyay.