कोष्ठक जाग्रति पाठ
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जितेन्द्र जैन
तीर्थधाम वन्दनात्यन्तन
धार्मिक पहेलियाँ
१. अजब बहार-अजब नजारा।
अब तक इसे कोई समझ न पाया।
प्रथम कटे तो हो जाये रस, मध्य कटे तो हो जाये र। — रसना
२. वीर जहां से गुजरे थे, वह धन्य हुई थी हर राह।
उस राह में ऐसा क्या जादू था, जो धन्य हुई थी हर राह।
२. उस नगरी का भेद बता दे, मेरा मन तुझसे पाना चाहता है। — पारस
३. तुम जैसे बलशाली, हितकारी थे हे जगबन्धु कहा है।
उस नगरी का भेद बता दे, मेरा मन तुझसे पाना चाहता है। — पारस
४. सौ-सौ कोस से देख रहा हूँ, देख रहा हूँ तुझको शान।
एक झलक तेरी देख लेता हूँ, मुझ पर होता है अहसान। — चन्द
५. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां मोक्ष गये महावीर स्वामी, देखत पाप पलायन हो जाये।
५. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — पावा
६. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां मोक्ष गये वासुपूज्य स्वामी, देखत दुनिया के गम खो जाये।
६. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — देव
७. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां मोक्ष गये वासुपूज्य स्वामी, देखत दुनिया के गम खो जाये।
७. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — चम्पा
८. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां जन्म हुआ था महावीर का, देखत मन हरषित हो जाये।
८. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — कुण्डलपुर
९. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां जन्म हुआ था शांति-कुंथु-अरह का, देखत मन हरषित हो जाये।
९. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — हस्तिनापुर
१०. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां जन्म हुआ था ऋषभ-अजित-अभिनन्दन-सुमति-अनन्त का, देखत मन हरषित हो जाये।
१०. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — अयोध्या
११. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये।
यहां जन्म हुआ था ऋषभ-अजित-अभिनन्दन-सुमति-अनन्त का, देखत मन हरषित हो जाये।
११. इक बार जो आये, दर्शन पा ले, वह तो नगरी पावन हो जाये। — अयोध्या
१२. तेरह अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है।
आठ अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है, ऐसा क्यों होता है।
१३. तेरह अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है।
आठ अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है, ऐसा क्यों होता है।
१४. तेरह अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है।
आठ अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है, ऐसा क्यों होता है।
१५. तेरह अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है।
आठ अब तक मर चुके, फिर भी नाम अमर है, ऐसा क्यों होता है।
१६. सर कट जाये तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
१७. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
१८. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
१९. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२०. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२१. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२२. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२३. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२४. सर कटे तो मतलब बदलता, धड़ कटे तो मतलब बदलता।
तुम होते कौन हो, मेरा मतलब बदलने वाले।
२५. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
२६. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
२७. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
२८. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
२९. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
३०. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
३१. इक दिन ऐसा भी आयेगा, जब सब कुछ छूट जायेगा।
जो कुछ कमाया है, वह सब यहीं रह जायेगा।
१२. वीर बना तू, धर्म पाल तू, धर्म के रास्ते पे चल। — भगवान्
१३. यह प्रभु का भेद जब सबको बतायेगें इतिहास बनायेंगें। — शिखरजी
संकलन : आर्थिक-शुचिता, जितेन्द्र-अभिषेक, विनीत-हर्षित, सहज-समकित।
१. विघ्नोंका हरण, मंगल करण, प्रथम पूज्य पद में तुम्हें मानूं गा।
२. पहले दो अक्षरों से बनता है श्रेय, अंतिम दो से बनता है अंश।
३. पहले दो अक्षरों से बनता है महा, अंतिम दो से बनता है वीर।
४. प्रथम अक्षर को पुष्प कहते हैं, द्वितीय अक्षर को दंत कहते हैं।
५. जीवित अवस्था में हाथी समान, दिल्ली में है जिनका जन्मस्थान।
६. कुछ अक्षर पार्श्व में हैं, कुछ अक्षर नाथ में हैं, कुछ अक्षर भगवान में हैं।
७. कुछ अक्षर चन्द्र में हैं, कुछ अक्षर प्रभु में हैं, कुछ अक्षर भगवान में हैं।
८. कुछ अक्षर श्रेय में हैं, कुछ अक्षर अंश में हैं, जिन पर पुष्प चढ़ाये जाते हैं।
९. कुछ अक्षर महा में हैं, कुछ अक्षर वीर में हैं, जिन पर पुष्प चढ़ाये जाते हैं।
१०. कुछ अक्षर पुष्प में हैं, कुछ अक्षर दंत में हैं, जिन पर पुष्प चढ़ाये जाते हैं।
११. आज से अक्षर का नाम गज, दिल्ली में है जिनका जन्मस्थान।
१२. दो अक्षर में पार्श्व छुपा, दो अक्षर में नाथ छुपा, बीच में भगवान छुपे।
१३. दो अक्षर में चन्द्र छुपा, दो अक्षर में प्रभु छुपा, बीच में भगवान छुपे।
१४. दो अक्षर में श्रेय छुपा, दो अक्षर में अंश छुपा, बीच में भगवान छुपे।
१५. पांच अक्षर का मेरा नाम, मुझमें छुपे हैं तीर्थंकर भगवान।
उत्तर :- 1. चन्द्रप्रभ 2. श्रेयांस 3. महावीर 4. पुष्पदन्त 5. गज 6. पार्श्वनाथ 7. चन्द्रप्रभ 8. श्रेयांस 9. महावीर 10. पुष्पदन्त 11. गज 12. पार्श्वनाथ 13. चन्द्रप्रभ 14. श्रेयांस 15. महावीर
१६. 500 धनुष की काया थी, चन्द्रमा के समान मुख था।
१७. प्रथम दो अक्षर रोचक, अंतिम दो अक्षर क।
१८. तीन पहिये वाली गाड़ी में बैठे थे, नाम था जिनका अजित।
१९. ऋषभ के समान देव थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२०. पुष्पदंत के समान देव थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२१. आदि अक्षर ‘ग’ है, पहले हुए आठवें तीर्थंकर।
२२. पार्श्व के समान नाथ थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२३. चन्द्रमा के समान प्रभु थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२४. श्रेयांस के समान नाथ थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२५. तीर्थंकरों में श्रेष्ठ थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२६. पुष्पदंत के समान देव थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२७. गज के समान देव थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२८. पार्श्व के समान नाथ थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
२९. चन्द्रमा के समान प्रभु थे वे, हम सब उनकी वंदना करते हैं।
पाठ - 16. चन्द्रप्रभ 17. रोचक 18. अजितनाथ 19. ऋषभ 20. पुष्पदन्त 21. गज 22. पार्श्वनाथ 23. चन्द्रप्रभ 24. श्रेयांस 25. महावीर 26. पुष्पदन्त 27. गज 28. पार्श्वनाथ 29. चन्द्रप्रभ
३२. दो अक्षर से मोक्ष गये, नाम था उनका श्रेयांस।
३३. सेन्चुरी की सेंचुरी मारी, फिर भी नाम था चन्द्रप्रभु।
३४. दो अक्षर से मोक्ष गये, नाम था उनका अजित।
३५. गुन्दऊ में जन्म हुआ, गुन्दऊ में मोक्ष गये, नाम था उनका सुपाश्व।
३६. गुन्दऊ में जन्म हुआ, गुन्दऊ में मोक्ष गये, नाम था उनका अरह।
३७. धर्म के नाथ थे, फिर भी नाम था धर्मनाथ।
३८. अभिनन्दन के नाथ थे, फिर भी नाम था अभिनन्दन।
३९. चन्द्रमा के समान प्रभु थे, फिर भी नाम था चन्द्रप्रभु।
४०. वासुपूज्य के पुत्र थे, फिर भी नाम था वासुपूज्य।
४१. चन्द्रमा के समान प्रभु थे, फिर भी नाम था चन्द्रप्रभु।
४२. गरवारे की थाली में खाना खाते थे, फिर भी नाम था महावीर।
उत्तर :- 31. पारसनाथ 32. श्रेयांसनाथ 33. चन्द्रप्रभु 34. अजितनाथ 35. सुपाश्वनाथ (गुन्दऊ) 36. अरनाथ (गुन्दऊ) 37. धर्मनाथ 38. अभिनन्दन 39. चन्द्रप्रभु 40. वासुपूज्य 41. चन्द्रप्रभु 42. महावीर 43. शांतिनाथ 44. पार्श्वनाथ 45. नेमु पुलिस
४६. दिल्ली की यह शान है, कुतुबमीनार से भी ऊंची इसकी मीनार है।
४७. सब मिल-जुलकर दर्शन करने जाते हैं, फिर भी नाम है नेमी के दर्शन।
४८. नेमी के चन्द थे, फिर भी नाम था नेमीचन्द।
४९. दिल्ली वालों ने टैक्स लगाया, फिर भी नाम था जी.एस.टी.।
५०. जिन के देव थे, फिर भी नाम था जिनदेव।
५१. तीर्थों को करने वाले थे, फिर भी नाम था तीर्थंकर।
५२. जीव के धर थे, फिर भी नाम था जीवंधर।
५३. सिद्धों के चक्र थे, फिर भी नाम था सिद्धचक्र।
५४. जांच में सबसे ऊपर थे, फिर भी नाम था जाचपऊ।
५५. ईसवी सन् में जन्म हुआ, फिर भी नाम था ईसवी।
५६. ज्ञान के सागर थे, फिर भी नाम था ज्ञानसागर।
५७. ज्ञान के सागर थे, फिर भी नाम था ज्ञानमती।
५८. ज्ञान के सागर थे, फिर भी नाम था ज्ञानभूषण।
५९. ईसवी सन् में जन्म हुआ, फिर भी नाम था ईसवी।
- नेमी के दर्शन 52. नेमीचंद 53. जी.एस.टी. 54. जिनदेव 55. तीर्थंकर 56. जीवंधर 57. सिद्ध 58. जाचपऊ 59. ईसवी 60. ज्ञान
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मूल दस्तावेज़ (PDF): 164.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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