Kese jaane, kya he samyag darshan

#1

Q. Agar me 24 ghante me se, 23 ghante yahi sochu ki…aatma bhinn he…aur pudgal bhinn…toh sochne se samyag darshan kese hoga
Yaa…esi kon si koshish kru ki…samyag darshsan ke marg per bhi chal sake
Jese nihalchand ji, wo toh 5 7 ghante dhyan me rehte the, toh unhone esa kya kia…kese jaana hoga aatma ko
Kya iske liye…aankh band krke…sochne ki jarurat he…ya…kya kia jata he…me toh bhot jyada confuse rehta hu yaar…mtlb…kese batau

#2

भाई…सम्यकदर्शन को लेकर tension लेने की जरूरत नही है।यह तो जीव का यथार्थ श्रद्धान ही है।

जैसे मिश्रि का गुण मिठास है उसी तरह आत्मा में सुख गुण जो कि बाहर से नही अंदर ही है।

सर्व प्रथम 6 द्रव्य का स्वरूप जान कर उसमें चिन्तन करना।

विषय भोग में से सुखबुद्धि चिंतवन द्वारा छोड़नी है।

इंद्रिय जनित सुख हे ही नही ऐसा यथार्थ श्रद्धान करना है।

जैसे में ये शरीर नही हु उसके अंदर विराजमान जीव जो ज्ञानमय अरस अरुपी है वही में हु इस चिंतन करने से भेदविज्ञान होगा और प्रत्येक जीव जीव दिखेंगे पुद्गल पुद्गल दिखेंगे उसमे पर्याय दृष्टि मात्र व्यवहार से होगी एसा करने से रागादि भाव कम होकर वैराग्य बढेगा और प्रत्यक्ष आत्मा का श्रद्धान हो सकता है।इसमें ईच्छा का अभाव होनेसे निराकुलता मय सुख होता है।

हमे तो यह मार्ग में सिर्फ तत्व चिंतन से सिर्फ आंनद लेना है।
सम्यक्त्व हो तो जीव को पता नही चलता( दर्शन पहुड गाथा - 2की जयचंदजी की टीका)

विशेष अध्ययन के लिए आप रूपस्थ ध्यान और पिण्डस्थ ध्यान कर सकते है।

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#3

Toh sirf chintavan krne se kese hota he, kya apne aap mjhe atma ka shradhan hoga.agr me kashay ko mand kr lu, toh fir toh automatic he me iss outer world se door ho jaunga.kya esa he

#4

में कूछ भी नही कर सकता। एसा जानना। अपने मे से कर्तुत्व बुद्धि को दूर करना । मात्र ज्ञायक स्वरूप जानना।

चारो अनुयोगों को यथार्थ रूपसे जानिए।
उसका स्वादध्याय निरंतर बनाए रखिए।
और पढ़के prectical लाइफ में apply करना।

सब अपनी योग्यता अनुसार हो जाएगा।

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#5

I am just hearing pravachan on तत्समय की योग्यता
पंडित सुमतप्रकाश जी told a case that वो आत्मानंद जी से बार बार पूछा करते थे कि सम्यक्त्व कब मिलेगा…
तो वे अपनी भाषा मे कहते थे कि भाई! सम्यक्त्व की चिंता मत करे,मोक्ष जायंगे तो गैल में पढ़ो मिले।।
मतलब है कि टेंशन लेने से सम्यक्त्व नही होगा ।।
अपनी योग्यता पर विश्वास रखें और निर्णय करते रहें।।

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