Karm Chetna and karm fal chetna

कर्म चेतना और कर्म फल चेतना में क्या अंतर है?

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कर्मचेतना व कर्मफलचेतना के लक्षण
स.सा./आ./३८७तत्राज्ञानादन्‍यत्रेदमहं करोमीति चेतनं कर्मचेतना। ज्ञानादन्‍येत्रेदं वेदयेऽहमिति चेतनं कर्मफलचेतना। =ज्ञान से अन्‍य (भावों में) ऐसा अनुभव करना कि ‘इसे मैं करता हूँ’ सो कर्म चेतना है, और ज्ञान से अन्‍य (भावों में) ऐसा अनुभव करना कि ‘इसे मैं भोगता हूँ’ सो कर्मफल चेतना है।
प्र.सा./त.प्र./१२३-१२४कर्मपरिणति: कर्म चेतना, कर्मफलपरिणति: कर्मफलचेतना।१२३।… क्रियमाणमात्‍मना कर्म।…तस्‍य कर्मणो यन्निष्‍पाद्यं सुखदु:खं तत्‍कर्मफलम् ।१२४।=कर्म परिणति कर्मचेतना और कर्मफलपरिणति कर्मफल चेतना है।१२३। आत्‍मा के द्वारा किया जाता है वह कर्म है और उस कर्म से उत्‍पन्न किया जाने वाला सुख दु:ख कर्मफल है।१२४।
द्र.सं./टी./१५/५०/६अव्‍यक्तसुखदु:खानुभवनरूपा कर्मफलचेतना।… स्‍वेहापूर्वेंष्‍टानिष्‍टविकल्‍परूपेण विशेषरागद्वेष-परिणमनं कर्मचेतना। =अव्‍यक्तसुखदु:खानुभव स्‍वरूप कर्मफलचेतना है, तथा निजचेष्‍टा पूर्वक अर्थात् बुद्धिपूर्वक इष्‍ट-अनिष्‍ट विकल्‍परूप से विशेष रागद्वेषरूप जो परिणाम हैं वह कर्मचेतना है।

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आ.बड़े पंडित जी का बहोत मार्मिक प्रवचन है इस विशय के ऊपर.

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