जैन काव्य परंपरा | Episode 01
कविवर पंडित दौलतराम जी–
आपके माध्यम से जैन जगत् में प्रसिद्ध छ:हढाला अनुपम कृति है। आपने अपने जीवन में अनेकों संघर्ष देखे और फिर भी जैन धर्म के संस्कारों को बनाए रखा।
क्या आप भी अपनी लेखनी से जैन साहित्य को समृद्ध करना चाहते हैं?
तात्त्विक काव्य सृजन प्रतियोगिता 2026 में भाग लें और अपनी कविता के माध्यम से जैन-दर्शन की सुंदर अभिव्यक्ति करें।
प्रतियोगिता की विशेषताएँ:–
• दो श्रेणियाँ – 18 वर्ष से कम एवं 18 वर्ष से अधिक
• प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार
• श्रेष्ठ 10 रचनाओं का विशेष चयन
• सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र
अंतिम तिथि: 09 अगस्त 2026
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