भगवान से सांसारिक मांगें मांगने वाले पात्रों (विद्यार्थी, व्यापारी, युवा, बेरोजगार, रिश्वतखोर) के माध्यम से देवदर्शन की सच्ची विधि, स्वाध्याय व सम्यग्दर्शन का मर्म समझाता मंचन-योग्य जैन नाटक। वीतराग भगवान न लेते हैं न देते हैं — जिन मंदिर मांगने का नहीं, सीखने का स्थान है। पूरे पात्र-संवाद सहित; पाठशाला व सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु।
A staged Jain natak on the true purpose of temple-worship (dev-darshan), swadhyay and samyagdarshan — the Jin temple is a school, not a place of begging. Jain natak script for pathshala & cultural programs.
नाटक
जिन मंदिर मिक्षालय नहीं शिक्षालय है।
पात्र :- (i) विद्यार्थी, (iv) बेरोजगार,
(ii) व्यापारी, (v) रिश्वतखोर,
(iii) युवा, (vi) नायक।
- विद्यार्थी:-
O’MY God! good morning
हे प्रभो! आनन्ददाता, ज्ञान हमको दीजिए।
मुझको कुछ आता नहीं, फिर भी पास कीजिए।
हे भगवान! देखो, आपको पता ही है कि मैं क्रिकेट का फैन हूँ और अभी भारत-पाकिस्तान की श्रृंखला चल रही है, तो समझलो कि भारत की इज्जत दांव पर लगी है। अतः मैच देखना बहुत ही जरूरी है और आपको तो पता ही है कि बौर्ड की परीक्षा सिर पर है। पढ़ाई तो हो नहीं पा रही है। पढ़ाई करूं कि मैच देखूं। तो हे भगवान! सम्हाल लेना। मेरी इज्जत आपके ही हाथों में है। मैं अपनी पॉकेट मनी में से 21 रु. दानपात्र में जरूर डालूंगा। याद रहे भगवान्। भूल मत जाना।
Good by
२. व्यापारी :- अति पुण्य उदय मम् आया।
सौ-सौ की गड्डी पाया।
चतारि मंगलं, सोना मंगलं, चांदी मंगलं।
रूपया मंगलं, ड्राप्त मंगलं।
हे भगवान! आप नाराज क्यों हो गये हो। इस बार बिल्कुल भी सीजन नहीं चल रहा है। अरे! आपको चावल चढ़ा सकूँ इतनी भी कमाई नहीं हो पा रही है। अरे! जब आप हमें खाना-खाने को नहीं मिलेगा तो हम आपको क्या चढ़ावे? भगवान जरा दया करो। आप दया निधान हो। हमारी दुकान अच्छी-चलने लग जावे और अपने मजे हो जावे। भगवान अपनी यह बात पक्की रही कि अपने मजे तो आपके मजे। एक जोरदार विधान कराऊंगा। अब तो अन्तरीक्ष पार्श्वनाथ हम तुम्हारे ही भरोसे है।
३. रिश्वतखोर :-
हे भगवान! आप तो सर्वज्ञ हैं। मैंने जो अर्जी लगाई है। आप तो समझ ही गये होंगे। समझे न हो तो भगवान में फिर से बता रहा हूँ कि मैं तो रिश्वतखोरी के चक्कर में पकड़ा गया हूँ। लोगों ने कह दिया है कि मैंने एक लाख रूपये की रिश्वत ली है मगर
राज की बात बताऊं भगवान ली तो दो लाख की है। पर आप ही इस झंझट/मुसीबत से छुड़वा सकते हो। अगर मैं कोर्ट में बाइज्जत बरी हो गया तो 10% आपको दूंगा व 25% साथ ही चढ़ाऊंगी भी।
४. बेरोजगार :-
[इधर-उधर देखते हुये…]
वाह- भगवान वाह! आपके मंदिर में फर्श मार्बल का, दीवारों पर ऑयलपेंट, वेदी पर सोने का पेंट छत्र चंवरादि चांदी के क्या कहना भगवान…? अपरिग्रही भगवान के पास इतना परिग्रह और एक मैं आपका भक्त बेरोजगार घूम रहा हूँ। किसी से मत कहना भगवान ये ड्रेस भी मैंने दूसरों की पहन रखी है। अरे भगवान! कुछ तो सोचो हमारे बारे में, हम जैसे बेरोजगारों पर कृपा करो। बस एक छोटी-सी नौकरी दिला दो भगवान! पहली वेतन आपको ही चढ़ाऊँगा। ज्यादा क्या कहूँ भगवान और तो आप समझ ही गये होगे।
5. युवा :-
तुमसे लागी लगन, ले लो अपनी शरणा।
पारस प्यारा, तुम तो करवा दो ब्याह हमारा।।
हे पारसनाथ भगवान! मैं कब से
रविवार का व्रत कर रहा हूँ। पर आप हो कि सुनते ही नहीं हो। अरे! मैं एक शादी ही तो कह रहा हूँ। भगवान आपकी ही कृपा से चक्रवर्तियों की तो ९६ हजार शादियाँ हो गई मेरी एक भी एक नहीं करवा सकते? अरे! हमें पता है आपकी शादी नहीं हुई तो क्या हुआ? भक्तों पर दया तो करनी चाहिये। हे चिन्तामणी पार्श्वनाथ! दया करो। किसी कन्या को मेरे ऊपर प्रसन्न करवा दो।
- ज्ञायक:— अभी आपने देखा कि कितने भक्त आये और वीतरागी भगवान से अपने-अपने राज की बातें कहकर चले गये। ये तो गाँव-गाँव, घर-घर की कहानी है। दर्शन करने आते हैं कहलाते हैं। भगवान के नाम पर से और जैन से किराना भण्डार, बर्तन भण्डार, बस्त्र भण्डार चलाते हैं। पर देवदर्शन की विधि क्या है यह भी ठीक ढंग से नहीं जानते हैं।
कोई एक:— तो आप ही बता दो देवदर्शन की विधि क्या है?
ज्ञायक:— देवदर्शन की विधि बतायेगा।
कोई एक:— स्वाध्याय करने से क्या लाभ है?
ज्ञायक:— स्वाध्याय करने से हिताहित, भक्ष्याभक्ष्य, पूज्यापूज्य का ज्ञान होता है। षट् द्रव्य व सात तत्त्व का ज्ञान पूर्वक भेदज्ञान से सम्यग्दर्शन प्राप्त होता है।
सभी एक साथ:— भैया आपने तो हमारी आंखें खोल दी।
ज्ञायक:— भैया आप सब लोग भी मांग लेकर भगवान के पास आते हैं लेकिन भगवान न लेते हैं और न देते हैं। हम जैन हैं हमे जैन का सच्चा स्वरूप नहीं मालूम, जिनवाणी मिली, उत्तम कुल मिला फिर भी धर्म से वंचित हो रहे हैं। हमसे अभागा कौन है? अर्थात कोई नहीं।
यह मानुष पर्याय :-
जय जिनेन्द्र
स्रोत: दस लक्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम संग्रह — मंचन-योग्य नाटक (जैन समुदाय पांडुलिपि, यूनिकोड देवनागरी में लिप्यंतरित)।
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