जल को प्रासुक करने की विधि व उसकी मर्यादा![]()
व्रत विधान संग्रह/31 पर उद्धृत रत्नमाला का श्लोक–
मुहूर्तं गालितं तोयं प्रासुकं प्रहरद्वयम् । उष्णोदमहोरात्रमगालितमिवोच्यते।
=छना हुआ जल दो घड़ी तक, हरड़े आदि से प्रासुक किया गया(जिससे पानी का रंग और स्वाद बदल जाये) दो पहर या छह घंटे तक तथा उबला हुआ जल 24 घंटे तक प्रासुक या पीने योग्य रहता है, और उसके पश्चात् बिना छने के समान हो जाते हैं।
नोट:-
छने जल की मर्यादा 48 मिनिट,6 घंटे,24 घंटे है।विशेष ऊपर से समझें।
गर्म/प्रासुक किये गए पानी की मर्यादा 6 घंटे
और उबले पानी की मर्यादा 24 घंटे है।
जल की 12 घंटे की मर्यादा का कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं है।
मोटे दोहरे कपड़े के छन्ने से छानकर योग्य रीति से जीवाणी करके जीवों की रक्षा करने पर ही जल छना हुआ होता है।
प्रस्तुति:-
ज्ञाता सिंघई
(सिवनी)