यह सामग्री जैन धर्म के आठ मूलभूत तत्त्वों का सचित्र परिचय प्रस्तुत करती है। इसमें जिनधर्म (अशोक चक्र प्रतीक), अरहंत (तीर्थंकर की प्रतिमा), सिद्ध ( अशरीरी/विदेही आत्मा), आचार्य (शिष्यों को उपदेश देते हुए), उपाध्याय (अध्ययन-अध्यापन में संलग्न), साधु (संयम और तपस्या में रत), जिनवाणी ( जिनेन्द्र देव की वाणी से उद्धृत पवित्र ग्रंथ), और जिनालय (जैन मंदिर) का सुंदर चित्रण किया गया है। प्रत्येक तत्त्व को देवनागरी में नामांकित करते हुए उसका दृश्य प्रतिनिधित्व दिया गया है। यह शैक्षिक सामग्री जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और उसके आध्यात्मिक स्तंभों को समझने के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका है जो धार्मिक अध्ययन और संस्कार शिक्षा में सहायक है।
मूल दस्तावेज़ (PDF): 2263.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह (मूल दस्तावेज़ स्कैन PDF रूप में संलग्न)।
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