इन भावों का फल क्या होगा ?
प्रश्नोत्तरी
इन भावों का फल क्या होगा ?
सुख दुःख जीवन मरण लाभ अलाभ संयोग वियोग यश अपयश का कारण क्या ?
कर्म
कर्म किसे बंधते है ?
- बालक को युवा को वृद्ध को
- समझदार या नासमझ को
- यथा योग्य योग और कषायों के अनुसार सबको
प्रश्नोत्तरी
कर्म किस निमित्त से बँधते है ?
भावों से
शीर्षक
जैन धर्म भाव प्रधान धर्म है
ध्यान देने योग्य बाते
- स्वयं किए जो कर्म शुभाशुभ फल निश्चय ही वे देते
करे आप फल दे अन्ये तो स्वयं किए निष्फल होते - अपने परिणामों के बिगड़ने का भय रखना
- पाप से घृणा करो पापी से नहीं
- जो भाव हम बार बार करते है वो हमारे संस्कार बन जाते है
भाव कितने प्रकार के होते है ?
- शुभ भाव
- पूजा आदि का भाव
- पुण्य बंध का कारण
- अशुभ भाव
- हिंसा आदि का भाव
- पाप बंध का कारण
- शुद्ध भाव
- वीतराग भाव
- मुक्ति का कारण
जैसी करनी वैसी भरनी
बहरा कौन ?
जो जिनवाणी नहीं सुनते एवं विकथा केंशास्त्र मन में विकार उत्पन्न करने वाली बात सुनते है ।
अंधा कौन ?
जो भगवान् के दर्शन नहीं करते एवं पराई माँ बहन को बुरी निगाह से देखते है
गूंगा कौन ?
जैन धर्म के सिद्धांत को सुनकर धर्म की निन्दा करते है
भाव सबसे ज्यादा कब बिगड़ते है ?
- पर पदार्थ मे इष्ट अनिष्ट की कल्पना से
- अपनी इच्छा अनुसार कार्य की कल्पना से
- पर मे दोष देखने से
वीतराग भाव के सन्मुख होने का उपाय
तत्वज्ञान के अभ्यास से यह विचार करना
- मैं कौन हूँ
- मेरा स्वरूप क्या हैं
- इन भावों का फल क्या होगा
मूल दस्तावेज़ (PDF): 465.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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