हाँ का ना, ना का हाँ
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ज्ञायक जैन
हाँ का ना, ना का हाँ
१. इस प्रतियोगिता में सभी भाग ले सकते हैं।
२. प्रतियोगियों के नाम पर्ची के माध्यम से निकाले जायेंगे।
३. प्रतियोगियों को पाँच प्रश्न पूछे जायेंगे -
प्रथम तीन प्रश्नों के उत्तर सही देने है और सिर गलत हिलाना है।
अन्तिम दो प्रश्नों के उत्तर गलत देने हैं और सिह सही हिलाना है।
निर्णायक का निर्णय ही सर्वमान्य या अन्तिम निर्णय होगा।
१. परमेष्ठी पाँच होते हैं।
२. कषाय चार होती हैं।
३. रात में नहीं खाना चाहिए।
४. नरक गति अच्छी है।
५. तीर्थकर २५ होते हैं।
६. तत्व चार होते हैं।
७. देवताओं की मूंछे होती है।
८. अनुयोग चार होते हैं।
९. हन गधे भी हुए हैं।
१०. तुम जैन हो।
११. अनछना जल पीना चाहिए।
१२. इन्द्रियाँ पाँच होती हैं।
१३. तुम अज्ञानी हो।
१४. आज उत्तन क्षमा का दिन है।
१५. तुमने आज नहाया है।
१६. हम मनुष्य हो।
१७. विदेह क्षेत्र में २० तीर्थकर होते हैं।
१८. कोई किसी का कतां-धर्ता नहीं है।
१९. हम अनादि काल से मिथ्यादृष्टि हैं।
२०. पाण्डव पाँच होते हैं।
२१. पंचकल्याणक पाँच होते हैं।
२२. तुम बहुत पापी नहीं हो।
हो का न
२३. हमे देव-शास्त्र-गुरु की पूजा करनी चाहिए। ✓
२४. नरक सात होते हैं।
२५. तुम ब्रह्मचारी हो।
२६. तुम भगवान आत्मा हो।
२७. तत्त्वार्थसूत्र के रचयिता उमास्वामी हैं।
२८. छहढाला के रचयिता बनारसीदास हैं।
२९. सुकुमार गुनि ने उपसर्ग किया था।
३०. तुम भूत हो।
३१. दुर्ग छत्तीसगढ़ में है।
३२. बाहुबली पाँचवें तीर्थंकर हैं।
३३. व्यसन सात होते हैं।
३४. जिनवाणी सुनना चाहिए।
३५. परिग्रह पाँच होते हैं।
३६. प्रमाद के १५ भेद होते हैं।
३७. माता १६ स्वप्न देखती है।
३८. गधे के सींग दो होते हैं।
३९. बारह भावनायें होती हैं।
४०. जैनधर्म महान नहीं है।
४१. जियो और जीने दो आदिनाथ का संदेश है।
४२. सम्यग्दर्शन के बिना मोक्ष नहीं होता।
४३. लोभ पाप का बाप नहीं है!
४४. १४ गुणस्थान होते हैं।
४५. धर्म दस नहीं होते, लक्षण १० होते हैं।
४६. हमें प्रवचन में सोना चाहिए।
४७. हमें प्रश्न का उत्तर गलत देना चाहिए।
४८. हमें रात्रि में भोजन करना चाहिए।
४९. तुम्हारे घर में आलू-प्याज नहीं बनते।
५०. तुम्हारा नाम ब्रह्म है।
५१. तुम्हें मोक्ष जाना है।
५२. अरहंत पिता है, जिनवाणी माता है।
५३. हमें पूरे जीवन भर पाप करना चाहिए।
५४. काना होना पुण्य कर्म का उदय है।
५५. भगवान हमारा भला करते हैं।
५६. सिद्ध भगवान लौटकर संसार में आते हैं।
५७. कंठ ने पार्श्वनाथ भगवान का उपसर्ग दूर किया।
५८. तुम काले पापकर्म के उदय से हो।
५९. तुम बहुत झूठ बोलते हो।
६०. चोरी करना पाप है।
६१. हमें माता-पिता को आश्रम में छुड़वा देना चाहिए।
६२. तुम्हें प्रवचन में आना चाहिए।
६३. तुम अभव्य हो।
६४. सीता लव-कुश की सास थी।
६५. रावण ने राम को मारा।
६६. तुम जानते-देखते हो।
६७. पापा को मम्मी से लड़ना चाहिए।
६८. तुम्हारी मम्मी मंदिर आती है।
६९. औरतें मंदिर में जाकर घर-गृहस्थी की चर्चा करती हैं।
७०. भगवान महावीर का चिन्ह सर्प है।
७१. केवली भगवान चारों लोकों को स्पष्ट जानते हैं।
७२. तुम बहुत धर्मात्मा हो।
७३. साधु परमेष्ठी २८ मूलगुणों का अनाचार पूर्वक पालन करते हैं।
७४. हमें टी. व्ही. देखने से बहुत ज्ञात मिलता है।
७५. प्रत्येक द्रव्य स्वतंत्र व स्वाधीन है।
७६. द्वारिका नगरी कृष्ण ने जलाई।
७७. नेमीनाथ की शादी शानदार हुई।
७८. पार्श्वनाथ के माता-पिता सिद्धार्थ और त्रिशला हैं।
७९. हाथी नारकी जीत हैं।
८०. अमृतचन्द्राचार्य ने समयसार लिखा।
८१. २+२=४ होते हैं।
८२. भरत ने १ वर्ष तक तप किया।
८३. मेघनाथ रावण का पिता है।
८४. राम लक्ष्मण बंदूक चलाते थे।
८५. हमें १० दिन संयम पूर्वक रहना चाहिए।
८६. हवाला में ६ ढाले होती हैं।
८७. हम भी एरमात्मा बन सकते हैं।
८८. कालिदास ने अच्छे भजने लिखें।
८९. तम्बाखू गधे खाते हैं।
पवन जैन ‘सिद्धार्थ’
मुम्बई
आत्मानुभूति !!
।। श्री वीतरागाय नमः ।।
तत्व प्रचार।।
आचार्य कुन्दकुन्द नैतिक शिक्षा समिति
उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित
आचार्य कुन्दकुन्द ज्ञान पत्र द्वितीय
निर्देश :
1- आचार्य कुन्दकुन्द ज्ञान पत्र द्वितीय में जिनागम से सम्बन्धित 200 प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न पर 1 अंक सुरक्षित है।
2- निर्णायक मण्डल का निर्णय अन्तिम व सर्वमान्य होगा।
3- प्रश्नपत्र जमा करने की अन्तिम तिथि 30/5/07 है।
4- प्रश्नपत्र स्थानीय प्रभारी एवं स्थानीय विद्वान के पास 30/5/07 तक जमा किये जा सकते हैं।
5- प्रश्नपत्र आचार्य कुन्दकुन्द नैतिक शिक्षा समिति 80 हनुमान गंज फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश पर भी भेजे जा सकते हैं
6- देरी से प्राप्त प्रश्नपत्र प्रतियोगिता में शामिल नहीं किये जा सकतें।
8- प्रश्नपत्र की सहयोग राशि 3 /- रूपये रखी गई है।
प्रथम पुरुस्कार
द्वित्तीय पुरस्कार
तृतीय पुरस्कार
अन्य सांत्वना पुररूकार (4)
बीडियोकॉन का डी०वी०डी० प्लेयर
महाराजा की मिक्सी
बी०आई०पी० सूटकेस (फुलसाइज)
कूल केन (CELLO)
नाम … दीवेश कुमार जैन … पिता/पति का नाम …
पूरा पता … फोन न० …
प्र०1- सीता को कितनी बार वन जाना पड़ा था ? … तीन बार
प्र०२- भरत चक्रवर्ती के स्त्रीरत्न का क्या नाम था ? … सुभद्रा
प्र०३- राजा अमरप्रग के पुत्र का नाम क्या था ? … कपिदेव
प्र०४- राजा अनरण्य का पुत्र कौन था ? … दशरथ
प्र०५- किष्किन्ध नगर का राजा कौन था ? … सुग्रीव
प्र०६- पुनर्वसु सामन्त किस नगर का स्वामी था ? … प्रतिष्ठ पुर
प्र०७- भगवती का पुत्र किस नाम से प्रसिद्ध था ? … सत्य कीर्ति
प्र०८- कुशंध्वज ब्राह्मण की स्त्री का नाम क्या था ? … सावित्री
प्र०९- मन्दोदरी आदि के साथ कितनी स्त्रियों ने संयम धारण किया ? … 48 हजार
प्र०१०- रावण की कितनी स्त्रियाँ थी ? … 18 हजार
प्र०११- जनक का छोटा भाई कौन था ? … कनक
प्र०१२- राजा भूति का जीव मरकर कौन से वन में मृग हुआ ? … सन्दकारन्यनामा वन में
प्र०१३- रत्नमाली का पुत्र कौन था ? … सूर्यञ्जय
प्र०१४- श्रेणिक राजा कहाँ राज्य करता था ? … राजग्रही में
प्र०१५- सम्पूर्ण कल्पवृक्ष किस कुलकर के काल में नष्ट हुए ? … नाभिराय
प्र०१६- महेन्द्र विद्याधर कहाँ रहता था ? … महेन्द्र गिरी पर्वत पर
प्र०१७- पवनंजय का दूसरा नाम क्या था ? … वासु कुमार
प्र०१८- राजा महेन्द्र की पुत्री का नाम क्या था ? … अंजनागिरी
प्र०१९- लक्ष्मण की माता का नाम क्या था ? … सुमित्रा
प्र०२०- रावण कौन सी विद्या साध रहा था ? … बहुरूपिणी विधा
प्र०२१- बज्रजंघा कहाँ का स्वामी था ? … पुण्डरीकपुर
प्र०२२- राक्षसों का इन्द्र कौन था ? … भीम
प्र०२३- राक्षसद्वीप के मध्य कौन सा पर्वत है ? … त्रिकुटाचल
प्र०२४- रतिमयूख राजा की कन्या का नाम क्या था ? … सुप्रभा
प्र025- ऋषभदेव का प्रथमपुत्र कौन था ? भरत
प्र026- सम्यक्दर्शन के कितने अंग होते है ? आठ
प्र027- नौवीं प्रतिमा का नाम क्या है ? परिग्रह त्याग प्रतिमा
प्र028- बुरी आदत जो इस लोक तथा परलोक में संकटों में डाल दे उसे क्या कहते हैं ? व्यसन
प्र029- श्रावक के कितने मूलगुण होते हैं चार
प्र030- उदम्बर फलों के नाम लिखो बड, पीपर, कमर, उमर, पाकर
प्र031- अणुव्रत कितने होते है पाँच
प्र032- जिससे अणुव्रतों में विकास हो उसे क्या कहते हैं गुणव्रत
प्र033- शिक्षाव्रत के कितने भेद है चार
प्र034- अहिंसाव्रत के कितने अतिचार लग सकते हैं 5
प्र035- ब्रहमचारी कितने प्रकार के होते हैं 5
प्र036- बोधिदुर्लभ अनुप्रेक्षा कौन से क्रम की अनुप्रेक्षा है ग्यासठी
प्र037- आठवें धर्म का नाम क्या है इलात्याग
प्र038- परिषह के कितने भेद हैं 22
प्र039- तप कितने प्रकार के होते हैं 12
प्र040- किसी एक आलम्बन पर मन को केन्द्रित करना क्या है ध्यान
प्र041- धर्मध्यान के कितने भेद है 10
प्र042- ऋद्धियों कितने प्रकार की होती है 8
प्र043- मुनिराजों के आहार में आने वाले अंतराय के कितने भेद है 32
प्र044- मुनिराजों के कितने आवश्यक होते हैं 6
प्र045- पूजा के कितने अंग होते हैं 5
प्र046- प्रतिक्रमण के कितने भेद हैं 8
प्र047- गुणों के समूह को क्या कहते हैं दत्य
प्र048- रत्नकरण्ड श्रावकाचार के रचियता कौन हैं समन्तभद्राचार्य
प्र049- रत्नकरण्ड श्रावकाचार में कुल कितने छन्द है 51
प्र050- आदिपुराण शास्त्र के रचियता कौन है रविमताचार्य
प्र051- हरिवंश पुराण के रचियता कौन है आचार्य जिनसेन
प्र052- राजा समुद्र विजय के सबसे छोटे भाई का नाम क्या है राजा वसु
प्र053- कृष्ण का जन्म कितने माह गर्भ में रहने के बाद हुआ सात
प्र054- राजा धृतराज की कितनी पत्नियाँ थी 3
प्र055- राजा पाण्डु की पत्नी कौन थी माद्री
प्र056- द्रौपदी किसकी पुत्री थी द्रुपद
प्र057- राजुल किसकी पुत्री थी। उग्रसेन
प्र058- राजा मुनिसुव्रत के पुत्र कौन थे सुव्रत
प्र059- झूठ बोलने के कारण सिंहासन जमीन में धस गया वे कौन थे राजा वम
प्र060- मुनिसुव्रतनाथ का कुमारकाल तथा राज्यकाल कितने वर्ष का था। राज्यकोले 5 हजार वर्ष 7.5 लाख
प्र061- 63 शला का पुरूष में बलदेव कौन थे तलभद्र
प्र062- वे कौन मंत्री थे, जिनको जैन मुनि से द्वेष था वाले, प्रहलाद, नमुचि, बृहस्पति
प्र063- वसुदेव किस नगरी में राज्य करते थे चम्पापुरी
प्र064- सुमौ चक्रवर्ती के पिता का नाम क्या था कार्तीण्डरा
प्र065- सातवें नम्बर की सोलह कारण भावना का नाम क्या है शक्तिः त्याग भावन
प्र066- माता के सोलह स्वपनों में बारहवां स्वप्न क्या है सिंहामन
प्र067- ऐरावत हाथी के दाँव कितने होते है 32
प्र068- रानी रूक्मणी का पुत्र कौन था प्रद्युम्न कुमार
प्र069- राजा दुर्योधन कौन से वंश का था। कुरुवंशी
प्र070- 63 शलाका पुरुष में कृष्ण कौन थे। नारायन
प्र071- नारायण नियम से किसका वय करता है पतितारायन का
प्र072- श्रीकृष्ण के बाद देवकी को कौन सा पुत्र हुआ था। स्युकुमार गजकुमार
प्र073- मुनिसुव्रतनाथ भगवान का वंश कौन सा था। यादवका
प्र074- सत्यमामा के मोक्ष जाने में कितने भव शेष थे। 2
प्र075- जरासंघ और कंस मे प्रतिनारायण कौन था। जरासंध
प्र076- प्रथमानुयोग के कोई पाँच ग्रन्थों के नाम बताओं आदिपुराण, पद्मपुराण, हरिवंशपुराण, शलाका
प्र077- बहुरूपिये से मुनि कौन बने बह्ममुलाल
प्र078- तीर्थकर के माता-पिता मर कर कौन सी गति प्राप्त करते है। ऊर्द्धगमन
प्र079- सर्वार्थ सिद्धि के देवो की आयु कितनी होती है। 33 सागर
प्र080- स्त्रियाँ कौन से नरक तक जा सकती है 6
प्र081- सूक्ष्म लोभ किस गुण स्थान तक रहता है। 10
प्र082- द्विदल किसे कहते हैं। दो दल के पदार्थ के साथ दही लेने पर बिदलहीताल)
प्र083- पूजन के कौन-कौन से अग है। 5
प्र084- तीर्थकर प्रकृति के बंघ का कारण क्या है। 16 कारन भावनाए
प्र085- जैन के मुख्य लक्ष्ण क्या है। दिन में भोजत, छात व गती, नित्य जिनालयजाना।
प्र086- एक जीवन को एक साथ अधिक से अधिक कितने ज्ञान हो सकते है 4
प्र087- पंचपरमागम के नाम तथा लेखक बताइये। समयसार, प्रवचतसार, पंचास्तिकाय, आटपाड
प्र088- सम्यग्ज्ञान के बिना किये गये तप को क्या कहते है बालतय
प्र089- विभाव किसे कहते है। आत्मा के विपरीत भाव को विभाव करते है।
प्र090- 24 तीर्थकरों में पाँच तीर्थकरों के नाम लिखिये, जिनके जीवन मे समानता हो तथा उनके नम्बरों का योग
100 हो। वासुपूज्य, मल्लिनाहध, नेमिनाथ, पारख नाथ, महावीर
प्र091- दशलक्षण पर्व वर्ष में कितने बार तथा कब-कब आते है। 3 बार
प्र092- भारत में बूचड़खाने किस जैन त्यौहार के दिन बन्द हो जाते है। महावीर जयंती
प्र093- जिस घर में जिनवाणी नहीं होती, उसे क्या कहते है। श्मशान
प्र094- गोमटेश की मूर्ति का निर्माण किसने कराया। राजा चामुण्डरल
प्र095- छः महीने आउ समय मे कितने जीव मोक्ष जाते है। 608
प्र096- 363 मत किसने चलाये। मारीची
प्र097- भगवान महावीर की प्रथम देशना कब और कहां खिरी। विवलाचल पर्वल, सावन की
प्र098- भगवान महावीर का जीव कहाँ से च्युत होकर आया। सोलहवें स्वर्ग से।
प्र099- राजकुमार महावीर का वंश कौन सा था। नारा वगाय
प्र0100- श्रवणबेल गोला की बाहुबली भगवान की प्रतिमा की ऊँचाई कितनी है। 57
प्र0101- मध्यलोक में एक साथ कितने तीर्थकर हो सकते है। 170
प्र0102- मध्यलोक में सर्वाधिक तीर्थंकर एक साथ किस तीर्थकर के तीर्थकर काल में हुए अजितनाथ
प्र0103- विदेह क्षेत्र में कितने तीर्थकर होते है। 20
प्र0104- 10 धनुष ऊँचाई किस तीर्थकर की है। नेमीनाथ
प्र0105- तीर्थकर महावीर के प्रथम आहारदाता कौन थे। नन्दन
प्र0106- किन तीर्थकरों की जन्म तिथि समान है। वन्दप्रभ, पार्श्वनाथ
प्र0107- कितने तीर्थकरों की जन्म तिथि व दीक्षा तिथि समान नहीं है। 3 सुमति, अरनाथ, महावी
प्र0108- कितने तीर्थकरों के वैराग्य का कारण उल्कापात थे। 4
प्र0109- कितने तीर्थकरो ने राज्य नहीं किया 5
प्र0110- वर्तमान में किस तीर्थकर का शासन पल रहा है। महावीर स्वामी
प्र0111- दत्त किस तीर्थकर के मुख्य गुरुवर, थे। चन्द्रप्रभ तीर्थकर
प्र0112- तीर्थकर के कितने अतिशय होते है। 34
प्र0113- भविष्य बराल के चौदीसवे तीर्थकर कौन से है।
प्र0114- विदेह क्षेत्र में विराजमान बीसवे तीर्थकर कौन से है। अजित वीर्य
प्र०115- 12 योजना विस्तार वाला समवशरण किस तीर्थकर का था। आदिनाथ
प्र०116- वे कौन थे जिन्होंने षट्खण्डागम ग्रन्थ की रचना की थी। भूतबली, पुष्पदन
प्र०117- वे कौन से मुनिराज थे जो प्रभावन/अंग में प्रसिद्ध हुए। वज्र कुमार
प्र०118- वे कौन से मुनिराज थे जिनको अन्तर्मुर्हत में केवलज्ञान हो गया था। भरत मुनि
प्र०119- वे कौन से मुनिराज थे जिनका वाघ में भक्षण किया था। सुकौशल मुनि
प्र०120- वे कौन से मुनिराज थे, जिन्हें 3 दिन तक लोमड़ी खाती रही। सुमाल मुनि
प्र०121- वे कौन थे जिनको देखने देवेन्द्र आया था। सनत कुमार चक्रवती
प्र०122- वे कौन थे जो इस युग में प्रथम आहार दाता थे। राजा श्रेयांस
प्र०123- वे कौन से मुनिराज थे जो विवाह के एक दिन पहले दीक्षित हुए थे। जम्बूस्वामी
प्र०124- वे कौन थे जिन्हें सूली पर चढ़ाते ही सूली सिंहासन बन गयी। सुदर्शन सेठ
प्र०125- वे कौन से मुनिराज थे, जिन्हें वन में देवताओं ने आहार दिया था। चन्द्रगुप्त मुनि
प्र०126- वे कौन से मुनिराज थे, जो भगवान आदिनाथ से पहले मोक्ष गये थे। अनंत वीर्य, बाहुबली
प्र०127- वे कौन से मुनिराज थे, जिनको एक बार में याद हो जाता था। अवलंब मुनि
प्र०128- वे कौन से मुनिराज थे, जो कानी स्त्री से मोह करते थे तथा उस मोह को दूर किया था। पुण्यदत्त
प्र०129- वे कौन से मुनिराज थे जिनके गले में मय सर्प डाला गया। यशोधर मुनि
प्र०130- वे कौन से मुनिराज थे, जिनका उपसर्ग राम-लक्ष्मण ने दूर किया था। देशभूषण, कुलभूषण
प्र०131- वे कौन से मुनिराज थे जिन्हें मस्मक, व्याधि रोग हो गया था। समन्तभद्राचार्य
प्र०132- वे कौन से मुनिराज थे, जो एक वर्ष तक कायोत्सर्ग खड़े रहे। बाहुबली
प्र०133- वे कौन से मुनिराज थे जिन्होंने हाथी पर बैठे-बैठे केशलोंच कर लिया था। राजा मधु
प्र०134- वे कौन से मुनिराज थे जिनके तीव्र क्रोध के कारण द्वारिका जल उठी थी। बोधारात मुनि
प्र०135- वे कौन से मुनिराज थे जिन्होंने 700 मुनियों का उपसर्ग दूर किया था। विष्णु कुमार
प्र०136- वे कौन से मुनिराज थे जिन पर सीतेन्द्र ने उपसर्ग किया था। राम मुनि
प्र०137- वे कौन से मुनिराज थे जिन्होनें बल ऋद्धि से कैलाश पर्वत दबाया। वलि मुनि
प्र०138- वे कौन से मुनिराज थे जिनके सर पर जलती सिगड़ी रखी गई थी। राज कुमार
प्र०139- वे कौन थे जिनकी बहन को कुदृष्टि देखने मात्र से वैराग्य हो गया था। कुलभूषण, देशभूषण
प्र०140- वे कौन थे जिन्होंने नाग-नागिनी को णगोकार मंत्र सुनाया। पार्श्वनाथ
प्र०141- द्रवयानुयोग में क्या निरूपण करके धर्म में लगाते है। द्रव्य, तत्व का
प्र०142- तीव्रकषायी किसका पुरूषार्थ करता है। पाप का
प्र०143- ओपशमिक सम्यकत्व के कौन-कौन से भेद है। प्रथमोपशम, द्वितीयोपशम
प्र०144- सरल कषाय रहित जो उदासीन भाव है, उसे क्या कहते है। सच्चा चारित्र
प्र०145- निर्जरा का सच्चा कारण क्या है। शुद्धोपयोग
प्र०146- सुखी होने के लिए पहले क्या-क्या करना चाहिये। तत्वज्ञान का उपाय व निर्णय
प्र०147- सम्यक्त्व होने से पूर्व कितनी उपलब्धियाँ होती है- लब्धिया व निर्णय
प्र०148- चरित्र मोह के उदय से जो कषाय होती, है, उसका नाम क्या है। मिथ्या चारित्र
प्र०149- पंचम काल में कितने केवली हुऐ। 3
प्र०150- सर्व धर्म का मूल क्या है। सद्धात
प्र०151- चौदह विद्याओं में प्रधान विद्या कौन सी है। अध्यापन विधा
प्र०152- दुख का मूल कारण क्या है ? कर्म वधन
प्र०153- श्रुत ज्ञान कितने प्रकार का होता है। 2
प्र०154- अवधिज्ञान के कितने भेद है। 3
प्र०155- दर्शन माँह के उदय से क्या होता है। मिथ्या दर्शन
प्र०156- मिथ्यात्व कषायादि भाव किसे उदय से होते है। मोह
प्र०157- मोह का मंद उदय आने मंदकषायरूप भाव हो कि तत्व विचार हो सकें उसे क्या कहते है। [[?]]
प्र०158- आत्मा के परिणाम विशेषो की प्राप्ति के जो तीन रूप है, तथा इन तीनों के कारणों के क्रम से कर लेने
पर भव्य सम्यकत्व का प्राप्त कर लेता है, तो उसे क्या कहते है। करन लब्धि
प्र०159- जो सम्यकत्व से भ्रष्ट हो उसे कौन सः मिथ्यादृष्टि कहते है। सादि मिथ्या दृष्टि
प्र०160- अधात्ति कर्मों में विशेष रूप से पाप प्रकृतियों का क्या होता है। उदय
प्र०161- प्रसिद्ध छडकालाकार का जन्म कहाँ हुआ था, उनका नाम भी बतायें। सामती, पे. गलत राम
प्र०162- तीन लोक में सारभूत क्या है। वीतराग विज्ञान
प्र०163- तीन लोक में जीव क्या चाहते है। सुख
प्र०164- पंचेन्द्रिय कितने प्रकार के होते है। दो, एसी भजी
प्र0165- सहन करने की अनिच्छा होने पर भी जीव रोग भुघादि सहन करता है उसे क्या कहते हैं। भवान निजी
प्र0166- तीन काल में किसी भी समय रत्त्रय कि प्राप्ति की योग्यता रखने वाले जीव को क्या कहते है। सत्य
प्र0167- प्रयोजनभूत तत्व कितने है। सात
प्र0168- छः द्रव्यों को अवगाहना कौन सा द्रव्य देता है। आकाश द्रव्य
प्र01688- कितने सेवन से गृहीत मिथ्यात्व होता है। सुदेव, कुगुरू, कुधर्म
प्र०३८९- आत्मा का सुख किससे पहित है। आकुलता से
प्र0171- सम्यक्ज्ञान, चारित्र किसके बिना नहीं होते। सम्यक दर्शन
प्र0172- कुदेव, कुगुरू, कुधर्म तथा इनके सेवक ये किसके भेद है। 5 अतायतन
प्र0173- धार्मिक कार्यों में अनुत्साष्ठ क्या है 4419
प्र0174- निक्षेप के भेद कितने व कौन से है। 14
प्र0175- सम्यकचारित्र के कितने भेद है 13
प्र0176- सोहलवे स्वर्ग से ऊपर तथा प्रथम अनुदिश से नीधे देवों के रहने का स्थान क्या है। शैब्राड
प्र0177- द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव और भव किसके मेद है। परावर्तत के
प्र0178- गुणस्थान कितने होते है। 14
प्र0179- तीन लोक की ऊँचाई कितनी है। 14 राजू
प्र0180 - पाँचवे नरक का नाम क्या है। धूम प्रभा
प्र0181- छः लेश्याएँ कौन-कौन सी है। करण, गीत कापीत पगत, पद्म, शुक्ल
प्र0182- नरक गति के जीवों की उत्कृष्ट आयु कितनी है। 13
प्र0183- कौन से पर्वत के आगे मनुष्य नहीं जा सकता। वानुर्णत्तर पर्वत
प्र0184- संस्थान तथा संहन कितने प्रकार के होते है। 6
प्र0185- 16 स्वर्ग में कितने इन्द्र होते है। 12
प्र0188- नन्दीश्वर द्वीप किस लोक का कौन या द्वीप है। 2, मध्यलोक
प्र0187- लानत्व स्वर्ग कौन सा स्वर्ग है।
प्र0188- जम्मूदीप में कितने क्षेत्र होते है। 7
प्र०189- जीवों की उत्पत्ति स्थान को क्या कहते है। योती
प्र०190- शरीर कितने प्रकार के होते है। 5
प्र0191- नारायण कितने होते है। 2
प्र0192- नन्दीश्वर द्वीप में कुल कितनी प्रतिमायें है। 5616
प्र०193- अष्टान्हिका पर्व वर्ष में कितनी बार आता है। 3
प्र0194- स्वर्ग के देवों की जघन्य आयु कितनी होती हैं। 10 हजार वर्ष
प्र0195- जिनेन्द्र भगवान कितने इन्द्रों से पूजित है। 100 55
प्र0196- मध्य लोक में कितने अकृत्रिम चैत्यालय होते है। 458
प्र0197- नरक के बिल कुल कितने होते है। 24 लापत
प्र0198- मनुष्य की उत्कृष्ट आयु कितनी होती है। तीन पल्य
प्र0199- मध्य लोक की ऊँचाई कितनी होती है। 7.40 योजन
प्र0200- तीन लौकों में कितने अकृत्रिम जिन चैत्यालय है। 8 करोड़ 56 लाख मुहजार
4 सौ 81
85697481
सामूहिक बाल संस्कार शिक्षण शिविर देवनगर, मिण्ड के सहयोग से आचार्य कुन्द-कुन्द
नैतिक शिक्षा समिति एवं पाण्डे राजा राम मिठानी देवी जैन परिवार की तरफ से आयोजित
मेहमान बताओ
चार कषाय
(i) क्रोध
(ii) मान
(iii) हरील (iv)
303 माया
चार चि
- कतृत्व
- भोगतत्व
- नाशत्व x
या एकत्व
- ममत्व
चार गति
- तिर्मच
- वरक
- मनुष्य
- पोथ X
- देव
चार अनुयोग
- द्रव्यानुयोग चरणानुयोग
- मन्धानुयोग या प्रथमानुयोग
- करणानुयोग
चार शिक्षाव्रत - सामामिक
- भोग उपोग परिवाज
- अतिथि संधिभरण पर उपयोग प्रतत्र
- पौषधोपवास
- चार दर्शगपयोग
- अचसु
- उवचिदर्शन
- ज्ञानदहति x
- ज्ञानदान र
- केवल दर्शन
(i) सिद्ध क्षेत्र
(ii) पावापुर
(iii) चम्पापुर
(iv) गिरनार जी
x (iv) सम्मेद शिखर जी
= महावीरजी
चार गति
(i) मनुष्य
(ii) तिर्मय
(iii) मोक्ष
(iv) देव
x
(v)
(i) हिंसा
(ii) झूठ
(iii) चोरी
(iv) कुशील
(v) रति x
= परिग्रह
पाँच स्थावर
(i) पृथ्वी
(ii) जल
(iii) अग्नि
(iv) वायु
(v) वनस्पति
x
⑥ पंच परमागम
(i) नियमसार
(iii) समयसार जी (ii) अष्टपाहुड़
(v) त्रिलोक सार X (iv) पंचास्तिकाय
⑦ पाँच पाण्डव
(i) युधिष्ठिर (ii) अर्जुन
(iii) सहदेव (iv) भीम
(v) कर्ण X
⑧ स्वाध्याय
(i) वाचना (ii) अनुकरण
(iii) प्रञ्छना (iv) आम्नाय
(v) धर्मोपदेश =) अनुप्रेक्षा
⑨ संवाय पाँच
- स्वभाव 2) चवितत्यता
- पुरुषार्थ 4) काललब्धि
- कर्मोदय x =) निमिन्त
(10) वर्ग की पर्याप - काला 2) सफेद हरा
- नीला 4) हरा x5) लाल - पीला
मेह मानवता औ
चार कषाय चौकड़ी
- अनंतानुबंधी 2) अप्रत्याख्यानावरण
- प्रत्याख्यानावरण 4) संज्वलन
पर आवश्यक
- देवपूजा 2) गुरुभक्ति
- स्वाध्याय 4) तप
- सामायिक x 6) दान
पाँच आचार
- दर्शन 2) ज्ञान
- चारित्र 4) तप
- वीर्य
पाँच परावर्तन
- द्रव्य 2) क्षेत्र
- काल 4) पुद्गल
- भव भाव
पंच वातयति [ब्रह्मचारी]
- पुष्पदंत x 2) नेमीनाथ
- मल्लिनाथ 4) पार्श्वनाथ
- महावीर वासुपूज्य
Date:
अमिता मे
Date:
उपादेय तत्व
- जीव
- अजीव
- निरखरा
- मोक्ष
संवर
X - ब्रह्मचारिणी
- वाहनी
- अनंतमति
या चेला
X - सुन्दरी
- चंदनमाला
देव
शाश्वत वर्ष
- भवनवासी
- ज्योतिषी
- दशलक्षण
- व्यंतर
- असुर कुमार X
- अण्णाहिका
- चतुर्दशी
- दीपावली X
- वैमानिक
- अलमी
स्थावर
कल्याणक
- पृथ्वी
- जल
- गर्भ
- तप
- बादल X
- अग्नि
- जन्म
- केवल ज्ञान X
- वायु
- वनस्पति
- मोक्ष
- ज्ञान
पाँच भाव
आगम
- औपशमिक
- क्षायिक
- पुष्पदंत भूतवली आचार्य
- णमोकार मंत्र
- क्षायोपशमिक या युभाशुत्र X
- सखण्डागम
- देव-शास्त्र-गुरु
- पारिणामिक
- ओदमिक
- पंचपरमेष्ठी
सती
चार सतो
- अंजना
- मनास्था
- आहार
- मैथुन
- वेली
- भय
- भाव X
- परिग्रह
Date:
Date:
6) 53558
ओम्कार मंत्र
5 पद
35 अक्षर
58 मात्राए
10) 16995
ऊर्ध्वलोक
16 स्वर्ग
9 ग्रैवेयक
7) 468 35 2528
अहंते-46
सिद्ध-8
पाँचों परमेष्ठी के प्रमुख
आचार्य-36
उपाध्याय-25
माधु-29
8- स्पर्श
5- रस
मद
3 मूढ़ता
20 पुद्गल की पर्याय
2 गंध
5 वर्ण
25 सम्यग्दर्शन के दोष
6 अनायतन
8 शंकादिक दोष
10 ध्यान के भेद
4. आर्त, 4 रौद्र, 4 धर्म, 4 शुक्लध्यान
चार अनुयोग, चार कषाय
चार गति
पाँच परमेष्ठी, पाँच पाप.
बारह व्रत श्रावकों के
5 शिक्षाव्रत
3 गुणव्रत
5 अणुव्रत
2412999
63 शलाका पुरुष
24 तीर्थका
(12) 9568
12 चक्रवती
9 नारयिण
9 प्रति नारायण
9 बलभद्र
403224211
सौ इन्द्र
13) 4444
50- भवनवासियो के बीच इन्द्र वशेष धर्ती
32- व्यंतरी के
24-
25- सोलह स्वर्गो के इन्द्र
141 1111
2-
ज्योतिषी - सूर्य, इन्द्र
मनुष्य मे चक्रवती
निर्मच सिंह
15 11111
354-
Date:
दान
आहार
अभय
द्रव्य
पैसा दान X
हिंसा
- उद्योगी
- आरम्भी
निक्षेप - नाम
- क्षेत्र X
विग्रह गति - प्रऋजुगति
- गोमूत्रिका
आराधना - ज्ञान
- तप
औषधि
संकल्पी
मा पशु X
2) द्रव्य
4) भाव
स्थापना
3) पाणि सुक्टा दा स्थानांतरी
4) लांगलिका
10,10,4.8.4
अरहंत के ५० मूलगुण
10- जन्म
10 - केवलज्ञान
14 - देवकृत
8 - प्रातिहार्य
4- अनंत चतुष्टय
सिद्ध के मूल गुण
समकित, दर्शन, ज्ञान, अगुरुलघु, अवगाहन
सूक्ष्मत्व, वीरजवान, विरावाध पुन जिल
10,12.56.3 - आचार्य के ३८ पूलगुण
10 धर्म 5 पंचाचार उगुप्ति
12 तप 6 आवश्यक
3.4444 - 25. कषाय
1- नो कषाय 4 अंनंतानुवंधी आदि
4- प्रत्यारख्यान 4 अपत्याख्यान
संयुनन
चारित्र
वीर्य X
55567
सन्मई
साधु के 28 मूल्गुण
5 मेहर्ज पर विजय
5 समिति
6 आवश्यक
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द्वेष
- क्रोध
- मान
- अरति - 6) रति X
- जुगुप्सा
- शोक
- त्रय
ज्योतिष देव - सूर्य
- ग्रह
- चन्द्रमा
- नक्षत्र
- उपग्रह X
- प्रकीर्णक तारे
- उपसर्ग जयी मुनिराज
- गजकुमार मुनि
- सुकुमाल मुनि
क) भरत X
- सुकौशल
राजा राम का परिवार
- राम
- लक्ष्मण X
- सीता
- लव
- उश
-
प्रकृति
-
मूलगुण
19 25 उपाध्याय
31 साधु 38 -
46 भरहते
-
36
-
सिहर 185
-
चार दुबधि
-
कतृत्व 2) भोगतत्व
-
नाशत्व X 4) एकत्व
- ममत्व
-
चारगति
-
तिर्मच 2) वरक
-
मनुष्य 4) मोक्ष X - देव
-
चार अनुयोग
-
द्रव्यानुयोग व चरणानुयोग
-
ग्रन्धानुयोग X 4) प्रथमानुयोग
करणानुयोग -
चार शिक्षाव्रत
-
सामामिक 2) भोग उपभोग परिमाण
-
अतिथि संविभाग या उपभोग व्रतत्र
- पोषधोपवास
- -चार दर्शनोपयोग
- अचक्षु 3) अचक्षुदर्शि
- अवधिदर्शि 4) ज्ञानदर्शि X
- केवल दर्शि
“वे कौन थे”
DAILY NOTES
वे कौन थे 1. प्रतियोगिता के आवश्यक नियम
(क) यह प्रतियोगिता सभी व्यक्ति के लिए है इसलिए सभी व्यक्ति इस प्रतियोगिता में
भाग ले सकते है।
एवं आपको हमारे प्रश्न का जवाब पूर्ण वाक्य मे देना होगा।
(ग) जब आप प्रश्न का उत्तर देगें उसका निर्णय मैं स्वयं करूंगा।
प्रश्न उत्तर 1. वे कौन थे जिनके ऊपर जलती सिगदी रखी गई थी- गन कुमार मुनिराज
2. वे कौन थे जिन्हें जलते हुए कपडे पहनाये गए थे - पंच पाण्डव
3. वे कौन थे जिन्हें मरणासन्न अवस्था में कुत्ते को नमोकार मंत्र सुनाया था-जीकधर कुमार
4. वे कौन थे जिन्होंने 'आप्त परीक्षा नामक ग्रंथ लिखा - विद्यानन्द जी आचार्य
5. वे कौन थे जिन्हें हाथी पर बैठे बैठे वैराग्य हुआया - गरजा मधु
6. वे कौन थे जिन्होंने सममसार नाटक की रचना की भी - बनारसीदास
7. वे कौन थे जो णमोकार मेत्र की अवहेलना करने से सातवें नरक में गये - सुभीम चक्रवर्ती
8. वे कौन थे जिन्होंने यशोधर मुनिराज के गले में मृत सर्प डाला था - राजा श्रेणिक
9. वे कौन थे जिन्हें “भस्मक, व्याधि रोग” हुआ था - समन्तभद्राचार्य
10. वे कौन थे जिन पर सेवर नामक देव ने उपसर्ग किया था- पार्वकुमार मुनिराज
11. वे कौन थे जिन पर सीता के जीतने : पसर्ग किया था- मुनि राम
12. वे कौन थे जिनका उपसर्ग राम-लक्ष्मण ने दूर किया- कुलभूषण-देशभूषण
13. वे कौन थे जो तीन पद धारी तीर्थकर थे- शांतिनाम, कुन्युनाम, अरनाम
14. वे कौनसे जो विवाह के एक, दिन बाद,घर छोड़कर चले गये थे - जम्बूस्वामी
15. वे कौन थे जो नन्दा और सुनन्दा के ससुर में- नाभिराम
16. वे कौन थे जिन्हें पशुओं को बंधन में देखकर वैराग्य हुआ-नमिकुमार
17. वे कौन थे जिन्होंने त्रिलोकसार की रचना की - सिमिचक्रावर्त
18. वे कौन थे जिनकी अवगाहना 500 धनुष भी - राजा आदिकम
19. वे कौन थे जो एक वर्ष तक ही आसन पर खो रहे- मुनि बाहुबत्ति
20. वे कौन थे जो गुमानीराम के पिताश्री ये - पण्डित टोडरमलजी
21. वे कौन थे जिन्होंने तत्वार्थ, राजनार्तिक ग्रंथ की स्चना की - भहट अकलंद
22. वें कौन थे जिन्होंने कोति शिला उठाई थी - लक्ष्मण
23. वे कौन थे जो विदेह क्षेत्र में सीमन्दर स्वामी के दर्शन को गए - आ कुन्दकुन्द्र देव
24. वे कौन थे जो णमोकार मंत्र के प्रभाव से निरंजन हो गये - अंजन चोर
25. वे कौन थे जिनका जन्म सासनी में हुआ था - दौलतराम जी
26. वे, कौन थे जिनको कोट या उसे उन्होंने स्वयं दर किया - वादिराज मुनिराज
27. वे कौन थे जिनको मुनिदीक्षा लेने के अन्तर्भुवर्त में केवलतान प्राप्त हुआ-भरत चक्रवर्ती
DAILY NOTES
28. वे कौन थे जिनको पह तालों में बन्द किया गया - मांगतुंगाचार्य
23. वे कौन थे जिनको तीन दिन तक श्यालनी खाती रही - सुकुमार मुनि
30. वे कौन थे जिनके निमित्त से द्वारिका जली भी - डीपायन मुनिराज
31. वे कौन थे जोज्ञामी होते हुये भी भाई की लाश को 6 महीने तक बंधे पर स्वे घूमते रहे - रामचन्द्र जी
32. वें कौन थे जिनका सिहचक्र के विद्याम से कुण्ड रोग मिटा या - श्रीपाल
33. ते कौन थे जिन्होंने जैन धर्म का पहला ग्रन्म लिदा - आचार्य पुष्पदेत एवं भूतवली
34. वे कौन थे. जोराम की मृत्यु का समाचार सुन स्वयं भी मरणको प्राप्त हो गये - लक्ष्मण
35. वे कौन थे जिनका जन्म कारावास में दुआमा - श्रीकृष्ण
36. वे कौन थे जिनका जन्म रापशान घाट में हुआ था - जीवंधर स्वामी
37. वे कौन थे जिन पर सबसे अधिक उपसर्ग दुआभा- पारवंत मुनिराज
38) वे कौन थे जिनकी सबसे अधिक आयु भी - ऋषभदेव (प्रथम तीर्थकर)
39. वे कौन थे जिन्होंने वालक वर्षमान की सर्पबनकर परीक्षा ली भी - लेगम देव
40. वे कौन थे जिन्हें हाथी के पैर के नीचे कुचलवा दिया था- प. टोडरमलजी
41. वे कौन थे जिन्त्र सूली परचराया गया पर सिंहासन वन गया था- सुदर्शन सेठ
42. वे कोंग्थे जिन्हें एक बार में माद होता था - अकलंक देव
43. वे कौन थे जिन्होंने चोर को धन ले जाने में सहायता की श्री - प. बनारसी दास
44. वें कोन में जो इस चुग के प्रथम वाता बने- राजा श्रेयांस
45.) वे कौन थे जिन्होंने बैल को णमोकार मंत्र सुनायामा - पदमर्साच सेठ
46. वे कौन थे जिनका बाघ ने भक्षण विश्रा मा - सुकौशल मुनिराज
47. वे कौन थे जिन्होंने अपनी बहिन को कुहष्टि से देखा और बाद में वैराग्यागमा देश-कुलभूषण
48. वे कौन थे जिनके पांचों कल्याणक एक ही स्थान पर हुए - वासुपूज्य जी
49. वे कौन थे जिनके नाना व पिता एक ही थे- कार्तिकेय मुनिराज
50. वे कौन थे जिन्होंने 303 मिथ्या मत चलाये थे- मारीचि
51. वे कौन थे जो तरक गये और भविष्य में प्रथम तीर्थकर होगें - राजा श्रेणिक
52. वे कौन थे जो जुआ में प्रशित हुए - पाण्डव
53. वे कौन थे जिन्हें प्रतितारामण होते हुए भी तीसरे नरक का दस्त भोगना पड़ा - रावण
54. वे कौन थे जो आचार्य पुष्पदंत एवं भूतवली के गुरुथे- धरसेनाचार्य
55. वे कौन थे जिन्हें सीता का जीव प्रतीन्ड नरक में संबोधन करने गया - लक्ष्मण
56. वे कौन थे जो इस अक्सरेणी काल में अंतिम अनुबह केवली कहलाए - जम्बूस्वागी
57. वे कौन थे जो इस अवसर्पणी काल के अंतिम भुत केवली हुए - आचार्य भड़बाहु
58. वे कौन थे जो मविष्य काल में सोलहवें तीर्थकर होंगे। श्री कृष्ण
59. ते मैन में जो मविष्य काल में 19 वे तीर्थकर होंगे - डरायण
60. वेकौन थे जिन्होंने संस्कृत में गयशैली का पहला ग्रेम लिखा- आचार्य उत्तएवागी :
पवन जैन ‘सिद्धार्थ’
धार्मिक पहेलियाँ
Sachin Siddhan
Garhi"
- एक शब्द का मेरा नाम, में हूँ पंच प्रभु का धाम !
जन-जन करते मेरा ध्यान, पुरे जिन आतम का सार !! [ ओम /ॐ ] - घः अक्षर का मेरा नाम, सबको बताता मुक्ति मार्ग !
कितना सुन्दर है मेरा धाम, बोलो बच्चो क्या यह काम !! [ दिव्य ध्वनि ] - पाँच अक्षर का मेरा नाम, शुद्धात्तम का मुझमें धाम !
कुन्द-कुन्द का मुझमें नाम, बोलो क्या है मेरा नाम !! [ समयसार ] - दो अक्षर का मेरा नाम : आता हूँ मुक्ति के काम !
प्रपम करे तो रम बन जाऊँ, अन्त करे तो धर बन जाऊँ !! [ धर्म ] - पाँच अक्षर का मेरा नाम, चारो गति में मेरा धाम !
उल्टी श्रद्धा मेरा काम, संसारी मुझसे परेशान !! [ मिथ्यात्व ] - मुझे चाहिए रुपया पैसा, बोलो मेरा है कैसा !
तृष्णा देवी मेरी माता, तीन लोक की संमति व्याता !! [ परिग्रह ] - मनन्न शील कस्लाता हूँ, चारो गति में जाता हूँ !
संयम धारण करके में, मुक्ति पुरी भी जाता हूँ !! [ मनुष्य गति ] - तीन अक्षर का मेरा नाम, मुझसे चलता है संसार !
जिसने मुझसे मुख को मोड़ा, उसका करता है संसार !! [ आश्राव ] - तीन अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ रहने के काम !
मुझसे बड़ा न जग में कोई नाम, बताओ मेरा भाई !! [ आकाश ] - चार अक्षर का मेरा नाम, मुझको क्या दुनियाँ से काम !
ज्ञान ध्यान का बस व्यापार, मुक्ति पाने को तैयार !!
दिखने में “लगता” कंगाल, फिर भी हूँ में माला माल !! [ मुनिराज ]
चार अक्षर का गेरो नाम, तीर्थकर में मेरा नाम !
अन्त करे तो महा बन जाये, अन्त करे तो वीर महान !! [ मुनिसून ]
महावीर
12. पूर्व विदेह मे विद्यमान हुँ, भरत क्षेत्र में है गुणगान !
केवल ज्ञान का धारी हुँ में, बोलो भाई मेरा नाम !! [ सीमंधर स्वामी ]
13. इन्द्र भुति है मेरा पुरा नाम, तीन अक्षर का मेरा नाम !
जिन आगम में मेरा काम, द्वादशांग है मेरा धाम !! [ गौतम ]
14. तीन अक्षर का मेरा नाम, अंत करे तो सर्व बने !
मुझामे लोका लोव, झलकते, मै हुँ अनंत गुणों की खान !! [ सर्वज्ञ ]
15. चार अक्षर का मेरा नाम, छः खण्ड़ो में मेरा धाम !
जीव अवस्था में बतलाता, मुझको रचते फैलत राग !! [ छहढाला ]
16. दो अक्षर का मेरा नाम, सारे जग के आता कान !
मुख्य गोष करते में जानू, श्रुत ज्ञान में मेरा धाग !! [ नय ]
17. चार अक्षर का गेरा नाम, गेंग जाम है लड़ा गहाज !
प्रथम ग्रंथ के कला को, गंगे हो लस दिया है ज्ञान !! [ धरसेन. आचार ]
18. छः अक्षर का मेरा नाग, बाहरा निश्रुति मेरा काम !
बारह समारों मुत्तमें लगती. और बताओ मेरा नाम !! [ समवशरण ]
19. पाँच अक्षर का मेरा नाम, सबको जानना मेश काम !
मैं रहता हूँ अपने अन्दर, फिर गी पुगिया मेरे अन्दर !! [ केवल ज्ञान ]
20. एक पुरुष जिजवर ने देखा, पाँव पसारे खड़ा हुया !
पतली कमर पर हाँप रखे हैं, अनादि काल से खड़ा हुआ !! [ त्रिलोक चित्र ]
21. कर्म प्रधान कथन है मेरा गुणस्थानो का मुझमें नाम !
त्रिलोकादि का वर्णन कनलता, नोलो भाई मेरा नाग !! [ करुणानुयोग ]
२२. आतम ध्याना आतम ध्याना : आतम में रम जाना आतम ध्याना !
अष्ट कर्म की हानी घटत हो रस्ता हे गस्ताना आतम ध्याना !! [सम्यग्दृष्टि]
२२. मुनिराजो की बात बताता वीतरागता को दर्शाता !
महापुरुषो की बात बताकर वीतरागता को दर्शाता !!
पुष्य बंध भी मैं करवाता, अरे बताओ क्या कहलाता !!
[ प्ररामानुयोग ]
२३. नगी का राजा कहलाये तीर्थकर को नवन कराये !
चिन्ह देखतां सबसे पहले, कौन हैं उसका नाम बताओ !! [सौहार्म इन्दा ]
२४. अनु-अनु जो देरता जाना सत्य-सत्य बतलाती है !
अरहंतो को दिव्य ध्वनि हैं, केवलो कन्या कहलाती !!
[ गाँ लिगवाणी ]
२५. आठ अक्षर का मेरा नाग, गो खण्डो है मुझमे धाग !
मैं स्वयं में अपूर्ण हुँ, पर कहलाता पुर्व हुँ !!
[ मोक्ष मार्गप्रकारात ]
२६. निगोद से लेकर मुक्ति पुरो का, गै के मार्ग व्यतःता !
छोटा समयसार नाग से गे हैं अपना परिचय पाता !! [हस्दाला]
२७. द्वादश अंनो से सजी हुदे है, केतली कन्या मेरा जाम !
जो भी गैंग आजारा लेता तह एन जाता है गगवान !
[णिगवाणी]
२८. एक गुणी हमने देखी नागिन जगा उसका काम ।
लत्तीस भुत करते सहयोग, रहती एक गुफा के धाग !!
[ जीन ]
२९. घः प्रथो वा शाम कराती, नव तत्वों को भी बतलाती !
अनेकान्तगय धर्म बताती, स्याद्वाद गैली अपनाती !!
[ जिनवाणी ]
३०. एक नागिन की ऐसी करनी, सबकुछ चरकर जाती है !
तृष्णा के यह बस में रहती. धर्म भ्रष्ट करवाती है!! [ रसना ]
Sachen-Siddhant
31. चार अक्षर का मेरा नाम, चेतन का क्या मुझमें काम !
मुझमें भ्रमित हुआ हे राम, सारे जग में मेरा धाम !! [ मिथ्यात्व ]
32. दो अक्षर का मेरा नाम, परिवमन का एक ही काम !
पुरे जग में रहता हूँ, बोलो भाई मेरा नाम !! [ काल द्रव्य ]
33. मैं सबको कसकर दुःख देती, सबकी सुख शांति हर लेती।
मैं हूँ आकुलता की माता, मेरा नाम सबको है आता !! [ कषाय ]
34. जिसके सिरपर मैं हुँ आता, उसके होठ भुजा फड़काता !
जो मुझमें अंधा हो जाता, छोटा बड़ा न उसे सुहाता !! [ क्रोध ]
35. हित कारो अति मिष्ठ हैं, तीन जगत का इष्ट है !
जिनवाणी कहलाती है, मोक्षमार्ग बतलाती है !! [ दिव्य ध्वनि ]
36. सबको गुक्ति मार्ग बताती, तोर्थंकर के मुख से खिरती !
छः अक्षर का मेरा नाम, बोलो बच्चो मेरा नाम !! [ दिव्य ध्वनि ]
37. मैं हूँ सब पापो का बाप, नाम बताये मेरा आप !
सारा जग मेरे आंधीन, सब कुछ है फिर भी में दीन !! [ लोग ]
38. छेदन भेदन के दुःख भोगूँ, पराधीनता मेरा काम !
माया चारी से जन्मी हुँ, चौपाया भी मेरा नाम !! [ तिर्यंच गति ]
39. सब पापी मेरे घर आते, सात धरो मैं है दुःख पाते !
तिल- तिल करे देह के खण्ड, भुख प्यास भी लगे पचण्ड !! [ नरक ]
40. सुख का पुरा धाम है, पंञ्चम गति भी नाम है !
सिशे का तो धाम है, पीड़ित का क्या काम है।। [ मोक्ष ]
sachin siddhant
41. ऐसे शाश्वत पर्व बताओ, महीने में दो-दो आते !
संयम समता भाव जगाते, श्रावक के मन को भाते !! [ अष्टमी, चतुर्दशी ]
-
गुरु की आज्ञा में रहते हैं, अध्ययन मनन नित्य करते हैं !
द्रव्य सुत के ज्ञाता पूरे, सब को शिक्षण वह देते हैं !! [ उपाध्याय ] -
बीस आठ पालन करते है, बाईस को वह जीत रहे हैं !
पंच परम पद की श्रेणी में, उनको सब पहिचान रहे हैं !! [ साधु परमेष्ठी ] -
काम किसी के कमी न आता पर अपना अस्तित्व जताता ।
"उसको हम स्वीकार रहे हैं!; पर कर्ता नहीं मान रहे !! [ निमित्त ] -
ऐसा शाश्वत पर्व बताओ, तीन बार वर्ष में आता !
संयम समता भाव जगाता, हम श्रावक के वह मन को भाता" [ पर्युषण पर्व ] -
जाद ध्यान तप लीन मुनिश्वर राग-द्वेष का नाम नहीं था।
मरा सर्प गजाने डाला, पिरतिचार उपसर्ग सहा था !!
रानी ने उपसर्ग हटाया, उनको कुछ भी भान नहीं था !
पर मुनिवर ने धर्म दृष्टि का, दोनों को उपदेश दिया था !! [ यशोधार मुनिराज ] -
चार अक्षर का मेरा नाम, चेतन का नहीं नाम विधान ।
मुझरो भ्रमित हुआ है राम, सारा जग है मेरा धाम [ पुद्गल द्रव्य ] -
दो अक्षर का मेरा नाम, बिना कमाए ही आराम !
लोग अगर मुझको कहते हैं, अमृत पीने का है काम !!
फिर भी, मर जाता हूँ मैं, उससे रहता हूं हैरान
[ देन ] -
दो अक्षर का मेरा नाम, रहता हूँ मैं सुख के धाम !
करने को कुछ काम नहीं, दुःख का नाम निशान नहीं !! [ सिद्ध ] -
प्राणों की आहुति देकर, जिसने अपना भाई बचाया ! - Sachin-Suc
जैन धर्म की रक्षा करके, जग में अपना नाम कमाया !! [ निकलंक -
आँखों से आसु टप-टप हो, पैरो में थी पड़ी बेड़िया !
फिर भी मुनि को दिया आहार, महिमा उसकी अपरम्पार !! [ चंदन -
ऐसे तुम स्थान बताओ, जहाँ जीव आते जाते है।
आते हैं अपने भायो से, जाते हैं अपने गावो से !! [ चार गतिय -
मोदा पुरी एक ने पाई, एक हुआ परिपुर्ण ज्ञानी !
उस दिन का तुम नाम बताओ, नहीं रहोंगे तुम अज्ञानी !! [ दीपावली -
नाग बना फूलो का हार, श्रद्धा उसकी अपरम्पार !
नाम बताओ कौन सती वह, जग जाहिर है उसका नाम !! [ सुलोपण -
मुस्कुराती सुरत है मेरी, मनमोहक मूरत है गेरी !
मैं सारे जग को ठगती हूँ, दो अक्षर से वरा करती हूँ !! [ माया -
मेरा मस्तक सबसे ऊँचा, बोलो बच्यो मेरा नाम !
मैं रावण को नरक ले गया, सब लोगो मे मेरा धाम !! [ गान -
सब लोगो का माल हड़पता, सबको मैं पहुंचाता जेल !
सबकी बदनामी करवाता, बतलाओ यह कैसा खेल !! [ तोड़ी ] -
ज्ञान नहीं अज्ञान नहीं, सुख व दुख का नाम नही !
पाँच भाई है मेरे जग में, जीव शब्द रहता है मुझमें !! [ अजीव
तीर्थधाम मङ्गलायतन
धार्मिक पहेलियाँ
१. आतम ध्याना-आतम ध्याना,
आतम में रम जाना आतम श्याना।
अष्ट कर्म को धनी पटा हो, रहता है मस्ताना
- स्वभाव सम्यक्दृष्टि
२. तीन अक्षर का मेरा नाम अन्त कटे तो में ही सब हूँ।
मुझमें लोकालोक झलकते मैं हूँ अनन्त सुखों का थान।। - सर्वज्ञ
३. एक अक्षर का मेरा नाम मै हूँ पञ्च प्रभु का धाम।
सब जर्न करते मेरा ध्यान पूरे जिनागम का है सार।। - ॐ
४. दो अक्षर का मेरा नाम रहता हूँ मैं हूँ के धाम।
काम-धाम से हूँ बेकाम सिद्ध शिला है मेरा धाम।। - सिद्ध
५. एक मनुष्य ऐसा देखा खाता है ५ पीता है।
लाखों वर्षों तक जीता है अमृत भी नहीं पीता है।। - अरहन्त
६. चार अक्षर का मेरा नाम पुड़ाके कण दुनिया से कान।
तप्त-ध्यान दे बस व्यागार मुक्ति पाने को तैयार।
दिखने में लगता कंगाल फिर भी मैं हूँ मालामाल।। - मुनिराज
७. चार अक्षर का मेरा नाम पानी नहीं पर गंगा नाम।
हर कण में चेतन का नाम जीव नहीं पर जड़ का काम।
जो पी मेरा आश्रय लेता वह बन जाता है गदान।। - जेनवाणी
८. दो अक्षर का मेरा नाम बिना कमाये ही आश्रम।
नाम अमा है दूजा मेन अमृत पीने का है गांम।
फिर भी थे मर जाता इक दिन, इससे नै होता हैर न।। - देव
९. चार अक्षर का मेरा नाम चेतन से मुझको क्या काम।
मुझसे प्रपित हुआ है राम, सारे जग में मेरा धाम।। - पुद्गल
१०. दो अक्षर का मेरा नाम दो द्रव्यों के आता काम।
चलती दुनिया अपनी गति से फिर भी आता है गेप नाम।। - धर्मद्रव्य
११. तीन अक्षर का मेरा नाम पूरे लोक में मेरा धाम।
सारी दुनिया चलकर रुकती दुनिया कहती मेरा काम।। - अधर्मद्रव्य
१२. तीन अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ रहने के काम।
मुझसे रहा न जग में कोई, नाम बताओ मेरा कोई।’ - आकाशद्रव्य
१३. दो अक्षर का मेरा नाम, स्थिर रहकर भी चलता हूँ।
आता सब द्रव्यों के काम, बोलो जल्दी मेरा नाम।। - कालद्रव्य
१४. दो अक्षर का मेरा नाम, पाँच भाइयों का है धाम।
मुझको जो अपनाता है, वह नरकों में जाता है।। - पाप
१५. तीन अक्षर का मेरा नाम चारों गति में मेरा धाम।
उलटी श्रद्धा मेरा काम मुझसे सारा जग हैरान।। - मिथ्यात्व
१६. जो जीवों को दुःख देता है यह मुझको धारण करता है।
राग-द्वेष है मेरे भाई मुझसे यह दुनिया परमाई।। - हिंसा
१७. सत्य रूप से मैं विपरीत अज्ञानी ने मेरी जीत।
मैं ले जाता नरकों बीच मुझमें है पापों की कीच।। - झूठ
१८. सब लोगों का माल हड़पता सबको पहुँचाता नै जेल।
सबकी बदनामी करवाता बतलाओ यह कैसा खेल।। - चोरी
१९. मुझे छादि। रुपया-पैसा बोलो मेरा रूप है कैसा।
तृष्णा देवी मेरी माला तीन लोक की सम्पत्ति खाता।। - परिग्रह
२०. पाँच अक्षर का मेरा नाम शुद्धात्म का मुझमें धाम।
कुन्दकुन्द का मुझमें नाम बोलो बच्चो मेरा नाम।। - समयसार
२१. चार अक्षर का मेरा नाम छह खण्डों में मेरा धाम।
पूर्वार्ध में छह रह जाता मुझको गातें दौलतराम।’ - अहदाला
२२. मै सब को कस कर दुःख देती सबकी सुख शान्ति हर लेती।
मैं हूँ अकुलता की माता, मेरा नाम किसे है आता।। - कषाय
२३. जिसके सिर पर मैं हूँ आता उसके होंठ, भुजा फड़काता।
जो मुझ अन्धा हो जाता छोटा-बड़ा न उसे सुहाता।। - क्रोध
२४. मेरा मस्तक सबसे ऊँचा बोलो बच्चो मेरा नाम।
मैं पवन ब्वे नरक ले गया सब लोगों में मेरा धाम।। - मान
२५. गुप्त करती सूरत है मेरी मनमोहक हैं मूरत मेरी।
मै सारे जग की उगती हूँ दो अक्षर से वश करती हूँ।। - माया
२६. छह अक्षर का मेरा नाम सबको मुक्तिमार्ग बताना।
कितना सुन्दर मेरा काम - दिव्यध्वनि
—प्रस्तुति: पण्डित अशोक लुहाडिया, तीर्थधाम मङ्गलायतन
कौन बनेगा ज्ञानपति
१. णमोकार मंत्र में कितने अक्षर है।
(१) ३५ (२) ५८ (३) ५५ (४) ३९
२. महावीर के कितने नाम है।
(१) १ (२) २ (३) ५ (४) २
३. महावीर के पिता का क्या नाम था।
(१) सिद्धार्थ (२) नाभिराय (३) गोमदत्त (४) सूर्यदत्त
४. महावीर निर्वाणोत्सव के रूप में कौन सा त्यौहार मनाते है।
(१) दीपावली (२) रक्षाबंधन (३) वीर शासन जयंती (४) महावी
५. महावीर भगवान का चिन्ह है।
(१) सिंह (२) सर्प (३) बैल (४) हाथी
६. महावीर का जन्म किस नगर में हुआ।
(१) कुण्डलपुर (२) पावापुर (३) अयोध्या (४) चंपापुर
७. भगवान महावीर का विवाह किसके साथ में हुआ।
(१) इनमे से कोई नहीं (२) किसी के साथ नहीं हुआ (३) राजुल (४)
८. महावीर कहाँ से मोक्ष गये।
(१) पावापुरी (२) अयोध्या (३) चंपापुर (४) सम्मेध शिखर
९. भगवान महावीर को किस पर्याय में सम्यदर्शन
प्रकट हुआ।
(१) सिंह (२) सर्प (३) हाथी (४) मनुष्य
१०. पार्श्वनाथ के साथ जिसने दस भव तक वैर
किया।
(१) कनही (२) मारीचि (३) राजा श्रेणिक (४) इनमें से कोई न
११. वे कौन थे जिन्होने भाई के ऊपर-चक्ररत्न चलाया
(१) भरत चक्रवर्ती (२) बाहुबली (३) कृष्ण (४) बालि
१२. णमोकार मंत्र में कितने परमेष्ठी है।
(१) पाँच (२) चार (३) छः (४) दो.
१३. लोक में कितने मंगल है।
14- कपाये कितनी होती है।
① चार ② पांच ③ छः ④ इनमे से कोई नहीं।
15- बीसवें तीर्थंकर है।
① मुनिसुव्रत ② मल्लिनाथ ③ कुंथुनाथ ④ अजितनाथ
16- अरहंत के कितने मूलगुण होते हैं।
① 46 ② 36 ③ 28 ④ 25
17- निः सहि का क्या अर्थ है।
① मंदिर में घर के जाते [[?]] करना ② नमस्कार करना ③ इनमे से
18- सुविधि नाथ का दूसरा नाम क्या है। ④ सर्व सांसारिक कार्यो का
① पुलादंत ② सन्मति ③ चंद्रप्रभ ④ अजितनाथ निषेध
19- तत्व कितने होते हैं।
① सात ② नव ③ छः ④ चार
20- बाराणसी में किन दो तीर्थकरो का जन्म हुया।
① पार्श्वनाथ, सुपार्श्वनाथ ② महावीर पार्श्वनाथ ③ वासुपूज्य पार्श्व
21- भरत चक्रवर्ती के पिता का क्या नाम था। ④ पार्श्वनाथ पुष्पदंत
① राजा [[?]] ② आदिनाथ ③ महावीर ④ नाभिराय
22- अरहनाथ (अरनाथ) कौन से तीर्थकर है और
चिन्ह क्या है-
① 18वें, कंस मछली ② 15 कछरा ③ 23 सर्प ④ 12 भैंसा
23 णमोकार मंत्र सर्वप्रथम किस ग्रंथ में लिपिबद्ध
हुआ
① षट्खण्डागम ② समयसार ③ मोक्षमार्गप्रकाशक ④ इनमे से
24 हाथी का शरीर क्या है। कोई नहीं।
① अजीव ② जीव ③ पुद्गल ④ इनमें से कोई नहीं।
25- इनमें से कौन तीर्थंकर नहीं है।
① अरहंतनाथ ② अनन्तवीर्य आदिनाथ ③ अजितनाथ ④ सम्भ
26- चाँदपुर में किस भगवान की प्रतिमा प्रकट हुई।
① गलगीर ② आदिनाथ ③ चंद्रप्रभ ④ पार्श्वनाथ
27- वर्तमान में किस तीर्थकर का शासन चल रहा है।
① गलगीर ② आदिनाथ ③ नेमिनाथ ④ पार्श्वनाथ
28 नमोकार मंत्र में कितने अक्षर हैं।
①35②58③55 ④ 38
29 णमोकार मंत्र में कितनी मात्राएँ हैं।
①58 ② 38 ③35 ④55
30 राजन के कितने अंग हैं।
① पाँच ② आठ ③ छः ④ सात
31 तीर्थंकर के कितने कल्याणक होते हैं।
① पाँच ② चार ③ तीन ④ तीर्थंकर के कल्याणक नहीं है
32 पुद्गल के कितने भेद हैं?
① दो ② आठ ③ चार ④ पाँच
33 उन्नीसवें तीर्थंकर का क्या चिन्ह है?
① कलश ② मगर ③ कमल ④ हिरण।
34 जीव के मूलतः कितने भेद हैं?
① दो ② तीन ③ चार ④ पाँच
35 उपाध्याय परमेष्ठी के कितने मूलगुण हैं?
①25 ② 38 ③46
36 रत्नकरण्ड श्रावकाचार किस अनुयोग का ग्रंथ है?
① चरणानुयोग ② करणानुयोग ③ प्रथमानुयोग ④ द्रव्यानुयोग
37 भगवान ऋषभदेव कहाँ से मोक्ष गए?
① अष्टापद ② अयोध्या ③ गिरनार ④ सम्मेद शिखर
38 इस युग के प्रथम आहार दाता कौन हैं?
① राजा श्रेयांश ② राजा श्रेणिक ③ राजा वीरसेन ④ राजा बसुदत्त
39 दशलक्षण पर्व कौन से महीने में मनाया
जाता है?
① इन तीनों में ② शुभ भाद्र ③ वैशाख ④ पौष
40 मरते हुए नाग-नागिन को णमोकार मंत्र
सुनने के प्रभाव से कौन से पर्याय प्राप्त हुई?
① धरणेन्द्र, पद्मावती ② वैमानिक ③ व्यन्तर ④ ज्योतिष ⑤ भवन
41 भावना होती है।
बारह ।। 9/7
42 आदिनाथ की कितनी पत्नियाँ थीं?
दो / तीन / चार / एक
43 णमोकार मंत्र का आदर करने से कौन
नरक गया?
सुभोग चक्रवती / सनत / भरत / ब्रहमदत्त
44 हिंसा पाप में कौन प्रसिद्ध हुआ
① धनश्री ② राजा सुख ③ अंजनोर ④ राजा बलि
45 झूठ बोलने के अपराध में गोबर किसे
खाना पड़ा
सत्यघोष
46 णमोकार मंत्र सर्वप्रथम किस भाषा में
लिपिवद्ध किए गए ?
प्राकृत / संस्कृत / अर्ध मागधी /
47 आदिनाथ को सर्वप्रथम आहार किसने दिया?
① राजा मेयारा ② राजा श्रेणिक ③ राजा जनक ④ राजा राम
48 जिस दिन षट्खंडागम ग्रंथ की रचना पूर्ण
हुई उस दिन से कौन सा पर्व मनाया
जाता है?
① श्रुत पंचमी ② तीरशासन जयंती ③ महावीर जयंती ④ दीपावली
49 छल - कपट करना कौन सी कपाय है?
① माया ② क्रोध ③ हिंसा ④ लोभ
50 झूठ पाप में कौन प्रसिद्ध हुआ ?
51 ① सत्यघोष ② राजा रावण ③ नारद ④ इनमें से कोई नहीं।
- वे कौन थे जो लगातार एक वर्ष
तब तप करते रहे?
① बाहुबली ② आदिनाथ ③ भरत ④ महावीर
52 वैराग्य बढ़ाने वाली भावना कितनी होती है?
① बारह भावना ② एकत्व भावना ③ संसार भावना ④ सोलह कारण
53 जिन के कितने मूलगुण होते हैं?
भावना
① 8 ② 28 ③ 25 ④ 26
54- भगवान महावीर को किस निशी में मोक्ष हुआ।
① कार्तिक कृष्ण ११/११/११ ② चैत्र शुक्ला त्रयोदसी
55- आदिनाथ को सर्वप्रथम आहार के रूप में किस रस की प्राप्ति हुई।
① गन्ने के रस ② अनार कारस ③ आमरस ④ नीबू रस
56 महावीर की कितनी आयु थी।
① ७२ वर्ष ② ६२ वर्ष ③ ८२ वर्ष ④ ५२ वर्ष
57- जो सुख दुःख का अनुभव करता है उसे कहते हैं।
① जीव ② अजीव ③ पुद्गल ④ इनमें से कोई नहीं।
58- पाँचवे तीर्थकर का क्या चिन्ह है।
सुमितनाथ
59- गतियाँ कितनी होती है।
चार
60- द्रव्य कितने होते हैं।
छः
61- अप कितने होते हैं।
पाँच
62- कुल कषाये कितनी होती है।
25 11 9 13
63- भगवान कितने होते हैं।
अनंत 124 संख्यात असंख्यात
64- लोक में कितने उत्तम है।
चार
65- महावीर ने किस पर्याय में सम्यग्दर्शन प्राप्त किया
सिंह इनमें से कोई नहीं।
66- बाल्यति (बाल ब्रम्हचारी) तीर्थंकर नहीं है।
① कुंथुनाथ ② महावीर ③ वासुपूज्य ④ मल्लिनाथ
67. महावीर के पाँच नाम में शामिल नहीं है।
① अनंतवीर ② अतिवीर ③ सन्मति ④ वीर
68- चन्द्रप्रभ मोक्ष गये हैं।
① सम्मेदशिखर ② चंपापुर ③ कैलाश पर्वत ④ पावापुर
कषाय कितनी होती है?
① चार
पूजन कितने द्रव्यों से की जाती है?
आठ
साधु कहने पर सामान्य रूप से कितने
परमेष्ठियों का ग्रहण हो जाएगा?
तीन
णमोकार मंत्र में कितने पद हैं?
पाँच
मुनि ऋषभदेव के प्रथम आहार से कौन
सा पर्व मनाया जाता है।
अक्षयतृतीया।
इन्द्रियाँ कितनी होती है?
पाँच
तत्वार्थसूत्र के दूसरे अध्याय में कितने सूत्र है?
ताले टूटने की कथा किस मुनि के लिए
प्रसिद्ध है?
मानतुंग
महावीराष्टक किसके द्वारा लिखा गया?
भागचन्द्र । धानतराय । भूधरदास (टोडरमलजी
पुष्पदन्त का चिन्ह क्या है?
मगर
भक्तामर के रचयिता कौन है?
मानतुंग
सभी जीव चाहते है:-
सुख
रक्षाबंधन की कथा किससे संबंधित है?
विष्णुकुमार।
82 श्रुत पंचमी पर्व क्यों मनाते हैं।
इस दिन परखण्डागम ग्रंथ की रचना पूर्ण हुई
83 जैन धर्म का मूल सिद्धांत क्या है।
अनेकान्त स्याद्वाद
84 अमिनाथ का चिन्ह है।
नील कमल
85 धर्म के कितने प्रकार कहे हैं।
दस
86 इनमें से इव्य में जिसका नाम नहीं आता।
अजीत
87 मसित मल्लिनाथ का चिन्ह क्या है।
कलश
88 अनुयोग के कितने भेद है।
चार
89 जो पच्चीस मलगुण का पालन करते हैं उन्हें कहते -
उपाध्याय
90 चार घाति कर्मों के अगाव में प्रकट होते हैं।
-चार अनंत चतुष्टय
91 वर्तमान के पिता का नाम क्या था।
सिद्धार्थ
92 महावीर ने कितने वर्षों तक तप किया।
12 वर्ष
93 शरण कितनी होती है।
94 श्रावक के कितने आवश्यक होते हैं।
95 भगवान महावीर के पुत्र का क्या नाम था।
इनमें से कोई नहीं। पुत्र नहीं थे। शादी नहीं की
96 महावीर के प्रथम गणधर कौन से।
गौतम गणधर, सुधर्माचार्य। भद्रबाहु। मुनि
97 मय कितने होते हैं।
98 किस तीर्थकर के पाँचो कल्याणक एक जगह हुए
वासुपूज्य
99 वे कौन थे जिन्होने अपनी जान देकर जैन धर्म की
रक्षा के लिए भाई की जान बचाई।
निकलंक
100 पार्श्वनाथ के पहले जो तीर्थकर हुये उनके बाद में
जो तीर्थकर हुये उनका नाम क्या था।
महावीर, बीसवें, बहल पार्श्वनाथ
101 णमोकार मंत्र किसने बनाया।
इनमें से कोई नहीं
102 ज्ञान के कितने भेद है।
103 गिरनार जी से कौन मोक्ष गये।
शम्यूकुमार
104 स्याद्वाद किसे कहते हैं।
किसी अपेक्षा कथन है
105 पाँच पाण्डवों में से कितने मोक्ष गये।
तीन
106 किस मुनि ने अपने बैगुठे से कैलाश पर्वत को दबाया।
बालि
107 समयसार के रचियता कौन है।
कुन्दकुन्दाचार्य
108 कैलाश पर्वत से कौन मोक्ष गये है।
आदिनाथ
109 भगवान आदिनाथ के कितनी आयु थी ।
84 लाख नये पूर्व
110 वे कौन थी जिनकी इण भास्था के प्रभाव से सर्प
श्री फूलो का हार बन गया ।
सोमाराती
111 वे कौन थे जिन्धेने श्री पाल को समुह में धम्का दिया ।
घवल रोए
112 श्रावक कितने मूलगुण है ।
113 वे कौन थे जिन्होने 700 मुनियो का उपसर्ग इर किया ।
विष्णु कुमार
114 तीर्थकर में कितने तीर्थकर कामदेव है ।
तीन
115 आदिनाथ की कितनी संताने थी ।
116 मिथ्याज्ञान के कितने भेद है ।
117 सर्वप्रथम आत्मकथा किराणे लिखी ।
बनारसी दास जी ने
118 अरनाथ का चिन्ह क्या है ।
इनमें से कोई नहीं
119 रत्नकरण्ड श्रावकाचार के कौन से श्लोक में साठमडो का वर्णन है ।
25 वे
120 महावीर की आयु कितनी थी ।
72 वर्ष
121 वे कौनथे जिन्होने शेर को जलेवी खिलाई थी ।
दीवान अमरचन्द्र
122 → वे कौनसी जिनके ब्रम्हचर्य के प्रमातु से स्पर्श करने
गले जल से रोगइर हो जाता है ।
विराच्या सती
123 व्यसन कितने प्रकार का होता है।
सात
124 श्रावक शब्द में कितने अर्थ छिपे हैं। (सगला गन, विवेक वान, क्रियावान)
तीन
125 आदिनाथ कितने वर्षों तक ग्रहस्थावस्था में रहे।
४३ लाख वर्ष पूर्व
126 छः द्रव्यों के समूह को कहते हैं।
विश्व
127 पूजन कितने द्रव्यों से कि जाती है।
आठ
128 महावीर के नाना का क्या नाम था।
चेटक
129 सम्यग्दर्शन कितने दोषो से रहित होता है।
पच्चीस
130 वे कौनये जिन्हें बाहानी खाती रही फिरभी वे
आत्मस्वरूप से नहीं डिगे।
सुकौशल
131 जीव के कितने स्वतत्व है।
पौच
132 मैना सुन्दरी के पिता का क्या नाम था।
महापाल
133 झूठ का पक्ष लेने से जिसका सिंहासन धस गया।
राजा वसु
134 मुख्य गौण करना किसका काम है।
नय
135 रत्न कितने प्रकार के होते हैं। (रत्नत्रय)
तीन
136 वे कौनथी जिन्होने पिता के स्वाभिमान के कारण
विवाह नहीं किया।
नाम्ही सरी
137 चक्रवर्ती की कितनी पत्नियाँ होती है-।
95000
138 धर्मनाथ का चिन्ह है।
वज्रदण्ड
139 धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ (बड़ा) पुत्र कौन था।
दुर्योधन
140 अमस्य पदार्थों को कितने भागो में बाँटा गया है
141 चार प्रकार की इच्छाओ का वर्णन किस अधिकार
में है।
मोक्षमार्ग प्रकाशक के चौथे अधिकार है
142 वे कौन थे जिन्हे दीक्षा के अन्तर्मुहूर्त बाद केवलज्ञान
व्याप्त हो गया।
भरत चक्रवर्ती
143 ऐसे कामदेव का नाम जिन्हे कुष्ठ रोग हुआ था -
श्रीएल
144 जिसके पुत्र का नाम मेघनाथ था।
रावण
145 शीतलनाथ की माता का क्या नाम था।
सुनन्दा
146 द्रव्य को कौन से दो भागो में शामिल किया जा
सकता है।
जीव अजीव
147 संती कहते है।
जो मनसहित है
148 स्थावर के कितने भेद है।
149 महावीर स्वामी के भाई का क्या नाम था।
इनमें से कोई नहीं
150 णमोकार मंत्र का अनादर करने से जो सातवे नरक गया।
सुमोम चक्रवर्ती
151 अपने में अपनेपन की मान्यता का नाम है।
सम्यग्दर्शन
152 आत्मा में मोहराग देष भावो की उत्पत्ति का नाम है
भाव हिंसा
153 सच्चे देव की पूरीक्षा के द्वारा किसने स्वीकार किया।
समन्तभदाचार्य
154 हनुमान कहाँ से मोक्ष गये।
मांगीतुंगी
155 पार्श्वनाथ का दस भवतक किसके साथ वैर चला
कमठ
156 मुनिसुव्रत की माता का क्या नाम था।
सोमा
157 मड के कितने भेद है।
158 सराकाल तीर्थकर किस क्षेत्र से होते हैं।
विदेह
159 जैनधर्म के अनुसार कितने देवता पूज्य है।
160 आदिनाथ कितने दिनो तल आहार को नहीं मिळले।
6 महीने
161 प्रथमानुयोग में वर्णन होता है।
महापुरुषों के जीवनचरित का
162 परमात्मा के कितने भेद है।
दो
163 प्रमाद कितने होते हैं।
K.B.W
164 शान्तिनाथ का जन्म किस नगर में हुआ था?
अयोध्या
165 जो 36 मूलगुणों का पालन करते हैं।
आचार्य
166 शान्तिनाथ का जन्म कहाँ हुआ था?
हस्तिनापुर
167 वे कौन थे जिन्होंने अपने ही घर में चोर को
स्वयं को हाथ दो गठरी उसके सिर पर रख दी?
पं बनारसी दास
168 महावीर के शरीर की कितनी ऊँचाई थी?
7 हाथ
169 एकल - सेय लायक स्तोत्र किसने लिखी?
पण्डित दौलतराम जी
170 समवशरण में कितनी सभाएँ होती हैं?
171 पचवर्तन कितने होते हैं?
172 त्रेसठ शलाका पुरुषों में नहीं आते हैं।
रुन्ड
173 गिरनार से कौन मोक्ष गए?
राम्यूकुमार
174 रत्न के कितने भेद हैं?
175 सर्वप्रथम आत्मकथा किसने लिखी?
बनारसी दास ने
176 भगवान आदिनाथ के प्रमुख गणधर कौन थे?
वृषभसेन
177 भ० आदिनाथ को मोक्ष किस तिथि में हुआ?
माघ कृष्ण उत्ताने चतुर्दशी
178 | वैद्यविद्वान नामक आयुर्वेद ग्रंथ के लेखक कौन है।
| आचार्य पूज्यपाद
179 | किसके क्रोध के निमित्त से द्वारिका नगरी जली।
| डीपायन
180 | मिथ्याज्ञान के कितने भेद है।
| तीन
181 | समयसार की अमृतचन्द्राचार्य ने कौनसी टीका लिखी।
| आत्मख्याति
182 | अष्टापद से कौन मोक्ष गये है।
| आदिनाथ
183 | अविरति के कितने भेद है।
| 12
184 | अरहनाथ का चिन्ह क्या है।
| स्नो कोर्कनली मछली
185 | महावीर का जन्म कब हुआ।
| चैत्र शुक्ला त्रयोदशी
186 | कुंदकुंदाचार्य के पट्ट (परम्परा) शिष्य थे।
| उमास्वामी
187 | स्वाध्याय के अंग है।
| 5
188 | किस राजा के 60 हजार पुत्र एक साथ चल गये।
| राजा सगर
189 | वे कौन थे जिन्होने श्रवण बेलगोला में बाहुबली की मूर्ति
| बनवाई।
| चामुण्डराय
190 | जीव के कितने अधिकार है।
| 8-9
191 | चेतना के कितने भेद है।
| दो
192 सबसे ज्यादा पाप कौन से काल में होता है।
चौथे काल में
193 यद्यपि शब्द नहीं कियो-पूजन-किसने लिखी?
194 नन्दीखर द्वीप में कितनी प्रतिमाएँ होती है।
195 एमौम चक्रवर्ती किस नरक में गया?
सातवें-नरक
196 मल्लिनाथ के बाद में नौ तीर्थकर हुए
उनमें प्रथम तीर्थकर कौन थे?
मल्लिनाथ
197 आत्मा के कितने भेद होते हैं?
तीन
198 लोभ की अधिकता किस गति में होती है।
देवगति
199 वे कौन थे जिन्होंने विवाह के दूसरे दिन दीक्षा
ले ली?
जम्बूस्वामी
200 छहढाला कितने कवियों द्वारा लिखी गई।
तीन
201 मल्लिनाथ को कितने दिनों में केवलज्ञान हुआ
छः दिन
202 देशभषण कुलभूषण कहाँ से मोक्ष गए?
कुन्थेलगिरी
203 “प्रेम भाव हो” मेरी भावना के रचयिता कौन है?
जुगलकिशोर जी ‘मुख्तार’
204 मरते हुए कुत्ते को णमोकार मंत्र किसने सुनाया?
जीवंधर स्वामी
205 परोंधर मुनि के गले में मरा हुआ साँप किसने डाला?
राजा श्रेणिक
इस युग के प्रथम काम देव थे।
बाहुबली
सत् लक्षण है।
डण्यका
वे कौन थी जिसने अपने अपने पति को सहकार्ग
पर लगाया
चेलना रानी
209-
नियमसार पेटीका कार कौन है।
अनंत नाथ कौन से नम्बर के तीर्थकर है।
चौदहवे
211.
आप्तमीमांसा के रचियता कौन है।
समंतभडाचार्य
वे कौन थी जिनके पुत्र का जन्म होते ही
बरी ग्ठा ले गया।
रुम्मणि
अमस्य परार्च कितने प्रकार के होते हैं।
वे कौन से जिन्हे तीन दिन तक च्यालानी खाती रही
सुकमाल
छः महीने भाठ समय में कितने जीव मोत जाते हैं।
वे कौनये जिनके सिर पर जलती सियड़ी रखी गई।
राजकुमार मुनि
लोक के कितने भेद है।
तत्वार्थ सूप्त किसके द्वारा लिखा गया है।
उमास्वामी
स्वर्ग कितने होते हैं।
चित्र पहेली
सिद्ध
मंदिर
त्रिलोक
ध्वज
पीछी
कमण्डल
आत्मा
6: द्रव्य
अनेकान्त
निश्चय
ज्ञात
7 तत्व
स्याद्वाद
व्यवहार
i) अशरिरी सिद्ध भगवान
ii) अरहंत, सिद्ध, आचार्य पाठक साधु है…
iii) सिद्धो से मिलने का मार्ग
i) शिखर पर कलश चढाओ
ii) ऊँचे - 2 शिखरों वाला है
iii) मेरे मन मंदिर मे
i) तीन भुवन में सार
ii) जे त्रिभुवन में नोव
iii) गगन मण्डल में
i) लहर - 2 लहराये
ii) मंगलमय अरु मंगलकारी
i) हाथ में पीछी कमण्डल
ii) हाथ कमण्डल बगल में पीछी है-
i) जिनवाणी जग मैया
ii) जिनवाणी - 2 ध्याना सभी
iii) महिमा है अगम जिनागम की
कलश
i) जल भरि-२ लाओ
ii) अमृत से गगरी भरो
नाव
i) भगवान मेरी नैय्या
ii) पार लगा-२ पार लगाना
iii) मेरे तेरे ही भरोसे
सम्यक् चारित्र
" ज्ञान
" दर्शन
रत्नत्रय - मोक्षमार्ग
i) मोक्ष महल की प्रथम
ii) सम्यग्दर्शन प्राप्त करेंगे
iii) सम्यग्दर्शन ज्ञान चरण कि मग यो
चरण
i) चरणों में आ
ii) चरण कमल जिनवर कहे
तीर्थ
i) जीवराज उड़ के नामो
ii) भावना रथ पर चह गहुँ
iii) कैलाश श्री सम्मेद शिखर में
i) अष्ट द्रव्य
ii) पूजा
i) नाथ तुम्हारी पूना में
ii) अष्टम वसुधा पाने
iii) मम्मो -2 मुझको -2
i) आई -2 अंतर में
ii) लगा से प्रभु से भजन
कलश
नाव
सम्यक् चारित्र
ज्ञान
रत्नत्रय - मोक्षमार्ग
चरण
तीर्थ
i) जल भरि-२ लाओ
ii) अमृत से गगरी भरो
i) भगवान मेरी नैय्या
ii) पार लगा-२ पार लगाना
iii) मेरे तेरे ही भरोसे
i) मोक्ष महल की प्रथम
ii) सम्यग्दर्शन प्राप्त करेंगे
iii) सम्यग्दर्शन ज्ञान चरण शिव मग सो
i) चरणों में आ
ii) चरण कमल जिनवर कहे
i) जीवराज उड़ के जाओ
ii) भावना रथ पर चढ़ आऊँ
iii) कैलाश श्री सम्मेद शिरतार में
i) नाथ तुम्हारी पूना में
ii) अष्टम वसुधा पाने
iii) मम्मी-२ मुझको-२
अष्ट द्रव्य
पूजा
i) आई-२ अंतर में
ii) लगा ले प्रभु से लगन
वक्ता का स्वरूप
१. दैवखातं च वदनं, आत्मायत्तं च वाङ्मयम्।
श्रोतारः सन्ति चोक्तस्य, निर्लज्जः को न पण्डितः।। -सिद्धसेन-बत्तीसो
२. जनाः घनाश्च वाचालाः सुलभा स्युर्वथोत्थिताः।
दुर्लभा ह्यन्तरार्दास्ते जगदभ्युदयजिहीर्षवः।। - आत्मानुशासन, 4
३. अप्रतिबुद्धे श्रोतरि वक्तृत्वमनर्थकं भवति पुंसाम्।
नेत्रविहीने भर्तरि विलासलावण्यमिव स्त्रीणाम्। - पंचसंग्रह
४. विद्वानेव विजानाति विद्वज्जनपरिश्रमम्।
न हि वन्ध्या विजानाति गुर्वी प्रसववेदनाम्।।
५. कोषस्येव महीपानां कोशस्य विदुषामपि।
उपयोगी महान् यस्मात् क्लेशस्तेन बिना भवेत्।।
६. शतेषु जायते शूराः सहस्रेषु च पण्डितः।
वक्ता दशसहस्रेषु ज्ञाता भवति वा न वा।।
७. यत्परैः प्रतिपाद्योऽहं यत्परान् प्रतिपादये।
उन्मत्तचष्टितं तन्मे यदहं निर्विकल्पकः।। - समाधितंत्र, 19
८. श्राद्धः श्रोता सुधीर्वक्ता युज्येयातां यदीश तत्।
त्वच्छासनस्य साम्राज्यमेकच्छत्रं कलावपि।। - वीतरागस्तोत्र, 3
९. कालः कलिर्वा कलुषाशयो वा श्रोतुः प्रवक्तुर्वचनाशयो वा।
त्वच्छासनैकाधिपतित्वलक्ष्मीप्रभुत्वशक्तेरपवादहेतुः।। - युक्त्यनुशासनम्, 5
१०. धम्मसभा णिव पंच य जादि लोगा य बंधुवग्गं णाणी।
इणविरुद्धं वच करदि स च सठ लोगणिंद दुक्खलहो।। - सुदृष्टितरंगिणी, 100
११. आदहिदं कादव्वं जदि सक्कदि परहिदं पि कादव्वं।
आदहिद-परहिदादो आदहिदं सुठु कादव्वं।।
१२. कलिप्रावृषि मिथ्यादृङ्मेघच्छन्नासु दिक्ष्विह।
खद्योतवत् सुदेष्टारो हा ! द्योतन्ते क्वचित् क्वचित्।। - सागार धर्मामृत 1/7
१३. आलस्यो मंदबुद्धिश्च सुखिनो व्याधिपीड़ितः।
निद्रालुः कामुकश्चेति षडैते शास्त्रवर्जिनाः।। - सम्यकचकौमुदी
ग्रन्थ
अन्वेषण
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ग
ग्रन्थ का नाम
समयसार नाटक
तत्वार्थ वृत्ति रापक
भगवती आराधना
चिन्तामणि अलंकार
सत्यशासन परीक्षा
मेकमन्दर पुराण
गणित सार संग्रह
शास्त्रसमुच्चयसारसार
धर्मामृत गान
दीपक सिद्धान्त सार
प्रकृति कर्म रहस्य
तत्व ज्ञान तरंगिणी
मन्धष्य भाग हस्ति
इस पहेली में पन्द्रह ग्रन्थों के नाम
समाहित किये गये हैं। प्रत्येक ग्रन्थ का
नाम आठ अक्षरों वाला है। ग्रन्थ के नाम में
आगत अक्षर बिखरे हुए हैं। आप सर्वप्रथम
नामाक्षरों को क्रम से जमाइये। तदुपरान्त
ग्रन्थकर्त्ता का नाम लिखिये।
ग्रन्थकार का नाम
1 बनारसी दास जी
2 श्रुत सागर
4 शिवकोटि आचार्य
10 पं. अजित कुमार शास्त्री
15 माघनन्दि आचार्य
श्रमण संस्कृति
प्रतियोगिता
किसको किस कारण वैराग्य हुआ ?
- सुनील प्रसन्न शास्त्री, हटा
- हनुमान जी को - तारा टूटने से वैराग्य उत्पन्न हुआ।
- रामचंद्र जी को - लक्ष्मण की मृत्यु देखकर, देवों द्वारा संबोधन
- दशरथजी को - खोजा की वृद्धा अवस्था देखकर
- भरतजी को - त्रिलोक मंडल हाथी को देखकर धर्मोपदेश सुनकर
- शत्रुघ्न को - रामचंद्र जी के साथ वैराग्य उत्पन्न हुआ
- इंद्रजीत कुम्भकर्ण को - रावण की मृत्यु देखकर
- राकल भूषण को - पत्नी से कहते कि संसार विचित्र है
- सीता जी को - अग्नि-परीक्षा के बाद
- वाली को - देवशास्त्र गुरु के अलावा किसी को नमस्कार नहीं करेंगे।
वाहेन की शादी का प्रसंग बना। युद्ध की हिंसा से - सुग्रीव को - रामचंद्र जी के साथ
- सहस्त्ररश्मि को - रावण के द्वारा पराजित होने से
- नल-नील को - रामचंद्र जी के साथ
- मधु कैटभ - युद्ध के प्रसंग से
- कैकयी को - भरतजी के साथ धर्मोपदेश सुनकर
- राजा मय को - रावण की मृत्यु देखकर
- अनरण्यराजा को - सहस्त्ररश्मि ने कहा कि आपको वैराग्य हो तब आप बता देना
और हमें वैराग्य हो तब हम बता देंगे। - कपिल ब्राह्मण - राम नगरी देखकर
- लवण व अंकुश का - नारायण की मृत्यु के कारण
- पार्श्वनाथ जी को - जाति स्मरण
- चंद्रप्रभ भगवान को - उल्कापात से
- मल्लिनाथ जी को - वटवृक्ष के विनाश से पूर्व भव के जाति स्मरण से
- वज्रबाहु जी को - जंगल में मुनिराज के दर्शन करने से और उदय सुंदर ने कह दिया
क्या आप ऐसा बनना चाहते हैं? - श्रीपाल जी को - अपने पूर्व भव सुनने से
- कीर्तिधर महाराज को - राहु के द्वारा सूर्य के ग्रस्त होने से
- सुकुमालजी को - मुनिराज जी के द्वारा त्रिलोक प्रज्ञप्ति का पाठ सुनने से
- गौतम गणधर - मानस्तम्भ अवलोकन से
- पवनञ्जय को - धर्मोपदेश से
- अंजना को - धर्मोपदेश से
गोलापूर्व जैन 2011 वर्ष 8 अंक 24 14
अंताक्षरी व्यूह प्रतियोगिता
- मध्यलोक में अकृत्रिम जिनालय
- सूर्य की गलियाँ
- मनुष्य क्षेत्र का विस्तार
- हस्तिनापुर के राजा पद्म का मंत्री
- पुद्गल का एक गुण
- भवनवासी देवों का एक भेद
- सातवी शताब्दी के एक आचार्य
- सर्व विघ्ननाशक एक मंत्र
- अधोलोक की एक पृथ्वी
- मुनियों का एक मूलगुण
- एक गति का नाम
- एक सिद्ध क्षेत्र का नाम
- आचार्य कुन्दकुन्द का एक ग्रन्थ
- ऐरावत क्षेत्र की एक नदी
- जंगल की अग्नि
- एक समुद्र का नाम
- 58 गाथा वाला एक ग्रन्थ
- श्रीकृष्ण का वंश
- चक्ररत्न का उद्गम स्थल
- ज्योतिषी देवों का प्रतीक
- आचार्य श्री विद्यासागर
क्र
माया
अ
सभी प्रश्नों के उत्तर ‘अ’ से दें
- बंध का एक भेद
- धर्म्यध्यान का एक भेद
- केवली का एक भेद
- मतिज्ञान से पूर्व होने वाला एक दर्शन
- मुनियों का एक विशेष गुण
- ६ जनवासी देवों का एक भेद
- श्रावकों की एक प्रतिमा
- द्रव्य का एक सामान्य गुण
- भवनत्रिक की आयुबन्ध कराने वाली निर्जरा
- कबिपर श्री विजयसिंह के द्वारा लिखित एक पराण
- चौदहवें गुणस्थान का नाम
- जिस स्त्री का स्वामी न हो’
- दुर्गति का कारणभूत उपयोग
- एक कर्म का नाम
- मिध्यात्व को बान्धने वाली कपाय
- अवधिज्ञान से पूर्व होने वाला दर्शन
- ज्ञानाचार का एक भेद
- करण का एक भेद
- जिसका आदि और अन्त न हो
20 राजा द्रोण:-
ग्रन्थ
अन्वेषण
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क्र. ग्रन्थ का नाम
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इस पहेली में पन्द्रह ग्रन्थों के नाम
समाहित किये गये हैं। प्रत्येक ग्रन्थ का
नाम आठ अक्षरों वाला है। ग्रन्थ के नाम में
आगत अक्षर बिखरे हुए हैं। आप सर्वप्रथम
नामाक्षरों को क्रम से जमाइये। तदुपरान्त
ग्रन्थकर्त्ता का नाम लिखिये।
ग्रन्थकार का नाम
खोजो तो जाने
| अ | व | ता | र | अ | यो | भ | ला | क | च |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | द | व्य | ग्र | इ | ग | अ | भ | क | र |
| नि | ग | वि | हा | न्द्रो | स | र्या | ला | त | कु |
| यो | वृ | त्या | प्र | प | म्य | भ | र्ण | दृ | ति |
| त्ति | प | शा | ग | पा | ह | य | व | ढ़ | र्या |
| न | न्ति | त्या | ल | द | भा | व | यौ | च | क |
| ज | ह | ज्य | प्रा | सा | य | व | ल | र्या | पे |
| गृ | ग्र | वा | मा | ज | रा | कु | प्र | च | भि |
| रु | ण | पे | वि | ज्य | न्त्य | र्ह | आ | त | क्रा |
| गु | ग | दिग | ण | र | त | व | ता | वृ | च |
ऊपर जो सौ अक्षर बिखरे हुए हैं, उनमें बीस दीक्षान्वय
संस्कारों के नाम छिपे हुए हैं। आपको उन संस्कारों के नाम
खोजने हैं। इनका वर्णन आचार्य भगवन्त श्री जिनसेन जी
महाराज के द्वारा रचित आदिपुराण में है।
वर्ग पहेली!
बांये से दायें
1 कवि हरिचन्द्र का एक ग्रन्थ
5 दश धर्मों में से उत्तम धर्म
7. पुद्गल द्रव्य का एक गुण
8 तालाब, हृद
10. द्रव्यकर्मों के आठ भेदों में से एक
12. दश धर्मों में से द्वितीय धर्म
14. छह द्रव्यों में से एक द्रव्य, आकाश
15. बाइस परीषह में से एक
16. देशव्रत का एक अतिचार
18. दो से लेकर पंच इन्द्रिय पर्यन्त के जीव
20. इच्छा, अभिनव
23. सल्लेखना करने वाला साधु
24. पौद्गल ज्ञान में चौथा ज्ञान
ऊपर से नीचे
- जिनागम में इनकी संख्या चौदह है,
जीवस्थान - चक्षु इन्द्रिय का विषय
- पाँच इन्द्रियों में से एक
4 अन्तिम, श्रेष्ठ - मान को स्तंभित करने वाला स्तम्भ
- वस्तु का स्वभाव
- पद्मप्रभ और नमिनाथ भगवान का
चिन्ह - तीनों योगों में से एक
- ज्योतिषियों का एक भेद
- अन्त:करण, अनिन्द्रिय
- साधु, मुनि
- मूलाचार ग्रन्थ का चौथा
अधिकार - दश धर्मों में से छठ धर्म
- कुकथा, खोटी कथ
- दश धर्मों में से सातवाँ धर्म
- कर्मों का समूल [[?]], विनाश
वर्ग पहला
बायें से दायें
- कवि हरिचन्द्र का एक ग्रन्थ
- दश धर्मों में से प्रथम धर्म
- पुद्गल द्रव्य का एक गुण
- लगाव, हर
- द्रव्यकर्मों के आठ भेदों में से एक
- दश धर्मों में से द्वितीय धर्म
- छह द्रव्यों में से एक द्रव्य, आकाश
- देवत्व का एक अधिकार
- दो से लेकर पाँच इन्द्रिय पर्यंत के जीव
- [[?]], [[?]]
- [[?]]
- [[?]]
ऊपर से नीचे
- जिनागम में इनकी संख्या चौदह है,
जीवस्थान - चक्षु इन्द्रिय का विषय
- पाँच इन्द्रियों में से एक
- अन्तिम, श्रेष्ठ
- मान को स्तंभित करने वाला स्तम्भ
- वस्तु का स्वभाव
- पद्मप्रभ और नमिनाथ भगवान का
चिन्ह - तीनों योगों में से एक
- ज्योतिषियों का एक भेद
- अन्तःकरण, अनिन्द्रिय
- साधु, मुनि
- मूलाचार ग्रन्थ का [[?]]
अधिकार - दश धर्मों में से [[?]] धर्म
- कुकथा, खोटी [[?]]
- दश धर्मों में से [[?]] धर्म
- कर्मों का समूल [[?]], विनाश
20 21
पहेली
41 42
स्वस्तिक
26 27
28 29
33 34
ऊपर से नीचे
- इन्द्रिय के द्वारा प्राप्त पदार्थ
- साधु, मुनि
- जय, जीत
- बुराकार्य
- विदिशा में रहने वाली एक लौकान्तिक देवों की जाति
- कपट, छल
- बुरी आदत
- मूलसंघ की एक शाखा
- परिणाम, पर्याय
- दबाना, नष्ट करना
- सुखा हुआ
- धवल ग्रन्थ के लेखक आचार्य
- आचार्य श्री वीरनन्दि जी का एक ग्रन्थ
- भक्तामर स्तोत्र के रचयिता आचार्य
- नौ कषाय में से एक
- देव, अमर
- अनंत प्रदेशी द्रव्य
- अन्धकार, एक भाव
- पाँच स्थावरों में से एक
- पर, कीर्ति के लिए और देवत्व के सुखार्थ
- अन्धकार
- अलंकार चिन्तामणि के रचयिता आचार्य
- उपशम करने वाले
- प्रिय दृष्ट
- सात तत्वों में से एक
- एक बाह्य तप
- एक द्रव्य का भेद
- व्रत का एक देश भंग होना
- अन्तःकरण, चित्त
- गमन, गमना का एक भेद
- पाँच इन्द्रियों में एक
- वर्तमानकालीन एक तीर्थङ्कर
- कर्म को क्षय करने वाले,
दिगम्बर साधु - [[?]]
- गति का कारक
- [[?]]
- अधोलोक भवनवासी का चिह्न
- [[?]]
- चक्षुरिन्द्रिय का विषय
- [[?]]
- [[?]]
बायें से दायें
१. आभ्यन्तर तप का एक भेद
२. श्रुतज्ञान के ग्यारह अंगों में से एक
३. नाम का पुनः पुनः स्मरण करना
४. सदोष नद
५. ख्याति, प्रसिद्धि
६. आचार्य श्री बसवदेव जी के गुरु
७. जंगल, कानन
१५. अनिन्द्रिय वित्त
१७. तेरहवाँ स्वर्ग
१९. भगवान महावीर का एक नाम
२०. रति करना, रमना
२१. अहंकार, गर्व
२३. मुनि, यति, श्रमण
२८. लोकाकाश को व्यापने वाला एक वलय
३१. व्रत का एकदेश भंग होना,
३२. अन्त:करण, चित्त
३३. गमन, नामकर्म का एक भेद
३५. पाँच इन्द्रियों में एक
३६. वर्तमानकालीन एक तीर्थङ्कर
३९. कर्म को क्षय करने वाला,
सल्लेखनारत साधु
४०. उपासना, भक्ति
४४. शान्ति का धारक
४५. नमन, प्रणाम
४६. अनन्तनाथ भगवान का चिह्न
४७. द्रव्यकर्म का एक भेद
४८. चक्षुरिन्द्रिय का विषय
४९. दश प्राणों में से एक
५०. यान, रथ
ऊपर से नीचे
- इन्द्रिय के द्वारा प्राप्त पदार्थ
- साधु, मुनि
- जय, जीत
- बुराकार्य
- विदिशा में रहने वाली एक लौकान्तिकोंकोजाति
- कपट, छल
- बुरी आदत
- मूलसंघ की एक शाखा
- परिणाम, पर्याय
- दबाना, नष्ट करना
- झुका हुआ
- धवला ग्रन्थ के लेखक आचार्य
- आचार्य श्री वोरनन्दि जी का एक ग्रन्थ
- तीन प्रकारों में से एक
- भक्तामर स्तोत्र के रचयिता आचार्य
- नौ नोकषाय में से एक
- देव, अमर
- अनंत प्रदेशी द्रव्य
- अन्धकार, एक [[?]] का नाम
- पाँच स्थावरों में से एक
- यश:कीर्ति के शिष्य और देवनंदी के गुरू आच्
- अन्धकार
- अलंकार चिन्तामणि ग्रन्थ के रचयिता आचार्य
- उपशम करने वाले
- प्रिय, इष्ट
- सात तत्त्वों में से एक
- एक बाह्य परिग्रह
- एक द्रव्य कर्म. संज्ञ
अंकाख्यानम्
निम्नलिखित पारिभाषिक शब्दों के भेदों की संख्या जैनागम में निर्धारित है। इनका सहयोग
लेकर उन शब्दों को ऐसे जमाइये कि कहीं से भी गिनने पर सबका योग तीर्थंकर के अतिशयों
की संख्या के समतुल्य हो जावे।
धर्म द्रव्य
व्रत
पदार्थ
चारित्र
आकाश
द्रव्य
धर्म
गुणस्थान
गुप्ति
तत्त्व
प्रतिमा
प्रमाद
गति
मन
चक्र
पहला
निम्नलिखित चक्रों को संकेतों के आधार से पूर्ण कीजिए।
चक्र क्रमांक - 1
- कषाय सहित आस्रव
- मुनियों का एक आवश्यक
चक्र क्रमांक - 2
- श्रुतज्ञान का दूसरा अंग
- पाँच पापों में से एक
चक्र क्रमांक - 3
- मन:पर्ययज्ञान का एक भेद
- पाँच भावो में से एक
चक्र क्रमांक - 4 - गर्भज जीवों का एक भेद
- स्थितिकरण अंग में प्रसिद्ध
चक्र क्रमांक - 5
- नन्दीश्वरद्वीप का सफेद पर्वत
- परोपदेश के बिना होने वाला
सम्यग्दर्शन
चक्र क्रमांक - 6
- वह तत्त्व जिसके पाँच भेद हैं
- पहले अनुदिश का नाम
चक्र क्रमांक - 7 - केवली कौन से मुनि हैं
- आस्रव का वह प्रत्यय जिसके प-
भेद हैं
चक्र क्रमांक - 8
- जो आत्मा को करता है
- काल द्रव्य का प्रमुख उपकार
चक्र क्रमांक - 9
- सोलहकारण भावन में एक भा
- मनरहित जीव
शब्दों का मायाजाल
चित्र के मध्य में दिये गये शब्दों को यथोचित स्थान पर जमाइये।
आचारसार कमलाकर प्रत्यभिज्ञान
स्यणसार लब्धिप्रत्यय नामनिक्षेप
साधनाभास विभंगज्ञान कर्मप्रवाद
परम आतप नमन
समक्ष रम्यक नय
रसना प्रमाद यतीश
सकल ईश्वर मति
विनय ईश तिमिर
नरक समयसार साकार
उत्तर पंजिका
वाक्षर्ण व्यह प्रतियोगिता- 1.458
2.84 3. 45 लाख योजन 4. नमुचि 5. चिकना 6. नागकुमार 7. रविषेण 8. प
10. भाषा समिति 11. तियंच 12. चम्पापुर 13. रयणसार 14. रक्तोदा 15. दावानल 16. लवणसमुद्र 17. द्रव्यसं
18. हरिवंश 19. शस्त्रागार 20. रवि
21. विद्याधर ।
2. चक्र माया प्रतियोगिता- 1. अनुभाग बंध 2. अपाय विचय 3. अन्तकृत् केवली 4. अचक्षुदर्शन 5. अदन्तधोवन 6. असु
7. अनुमति त्याग 8. अगुरुलघुत्व 9. अकामनिर्जरा 10. अजितपुराण 11. अयोगकेवली 12. अपरिगृहीता 13. अशुभोपयोग
14. अंतरायकर्म 15. अनंतानुबंधी 16. अवधिदर्शन 17. अनिह्नवाचार 18. अपूर्वकरण 19. अनादिअनंत 20. अभयकुमार ।
3. ग्रन्थ अन्वेषण- 1. समयसार नाटक- पं. बनारसी दास 2. तत्त्वार्थराजवार्तिक- आचार्य अकलंक देव 3. सज्जन चित्त वत्लभ-1
आचार्य 4. भगवती आराधना- आचार्य शिवकोटी 5. सम्यक्त्व सारशतक- आचार्य ज्ञान सागर 6. अलंकार चिन्तामणि- अ
7. सत्यशासन परीक्षा- विद्यानंदी 8. भेरू मन्दरपुराण-वामनमुनि 9. गणितसार संग्रह- महावीराचार्य 10. शास्त्र सार समुच्चय-
योगीन्द्र 11. अनगार धर्मामृत- पं. आशाधर 12. सिद्धान्त सार दीपक-आचार्य सकल कीर्ति 13. कर्म प्रकृति रहस्य- आचार्य
नन्दी 14. तत्त्व ज्ञान तरंगिणी- आचार्य ज्ञानभूषण 15. गन्धहस्तिमहाभाष्य- आचार्य समन्तभद्र ।
-
खोजो तो जाने- 1. अजतार 2. योगत्याग 3. अग्रनिवृत्ति 4. प्रशान्ति 5. इन्द्रोपपाद 6. योगसम्मह 7. चक्रलाभ 8. व
-
दृढ्चर्या 10. कुलत्चर्या 11. वृतचर्या 12. चक्राभिषेक 13. आर्हन्त्य 14. वृतावतरण 15. यौवराज्य 16. दिग्विजय 17.
-
साम्राज्य
-
गृहत्याग 20. गणग्रह ।
-
वर्ग पहेली- बायें से दायें 1. जीवन्धरचम्पू 5. क्षमा 7. वर्ण 8. सर 10. नामकर्म 12. मार्दव 14. नप 15. गल 18. त्रस 20. गं
क्षपक 24. मन:पर्यय 25. थावर। ऊपर से नीचे 1. जीवसनास 2. वर्ण 3. रसना 4. चरम 6. मानस्तम्भ 9. धर्म 11. कमल 13. वचन 4 -
मन 16. आज्ञा 17. यति 19. समाचार 20. संयम 21. विकथा 22. तप 23. क्षय ।
-
स्वस्तिक पहेली- बायें से दायें 1. विनय 3. विपाक सूत्र 8. जाप 9. नयाभास 11. यश 13. शुभनंदी 14. वन 15. मन 18. म
-
हरिवंश 19. शस्त्रागार 20. रवि
-
विद्याधर।
-
चक्र माया प्रतियोगिता- 1. अनुभाग बंध 2. अपाय विचय 3. अन्तकृत् केवली 4. अचक्षुदर्शन 5. अदत्तधोवन 6. असु
-
अनुमति त्याग 8. अगुरुलघुत्व 9. अकामनिर्जरा 10. अजितपुराण 11. अयोगकेवली 12. अपरिगृहीता 13. अशुभोपयोग
-
अंतरायकर्म 15. अनंतानुबंधी 16. अवधिदर्शन 17. अनिह्नवाचार 18. अपूर्वकरण 19. अनादिअनंत 20. अभयकुमार।
-
ग्रन्थ अन्वेषण- 1. समयसार नाटक- पं. बनारसी दास 2. तत्त्वार्थराजवार्तिक- आचार्य अकलंक देव 3. सज्जन चित्त वल्लभ- 1
आचार्य 4. भगवती आराधना- आचार्य शिवकोटी 5. सम्यक्त्व सारशतक- आचार्य ज्ञान सागर 6. अलंकार चितामणि- अ -
सत्यशासन परीक्षा- विद्यानंदी 8. मेरू मन्दरपुराण-वामनमुनि 9. गणितसार संग्रह - महावीराचार्य 10. शास्त्र सार समुच्चय -
योगीन्द्र 11. अनगार धर्मामृत- पं. आशाधः 12. सिद्धान्त सार दीपक- आचार्य सकल कीर्ति 13. कर्म प्रकृति रहस्य- आचार्य
नन्दी 14. तत्व ज्ञान तरंगिणी- आचार्य ज्ञानभूषण 15. गन्धहस्तिमहाभाष्य- आचार्य समन्तभद्र। -
खोजो तो जाने - 1. अजतार 2. योगत्याग 3. अग्रनिवृत्ति 4. प्रशान्ति 5. इन्द्रोपपाद 6. योगसम्मह 7. चक्रलाभ 8. व
-
दृचर्या 10. कुलत्चर्या 11. वृतचर्या 12. चक्राभिषेक 13. आर्हन्त्य 14. वृतावतरण 15. यौजराज्य 16. दिग्विजय 17.
-
साम्राज्य 19. गृहत्याग 20. गणग्रह।
-
वर्ग पहेली - बायें से दायें 1. जीवन्धरचम्पू 5. क्षमा 7. वर्ण 8. सर 10. नामकर्म 12. मार्दव 14. नभ 15.गल 18. त्रस 20. मंत्र
क्षपक 24. मनः पर्यय 25. थावर। ऊपर से नीचे 1. जीवसनास 2. वंर्ण 3. रसना 4. चरम 6. मानस्तम्भ 9. धर्म 11. कमल 13. वचन 14 -
मन् 16. आज्ञा 17. यति 19. समाचार 20. संयम 21. विकथा 22. तप 23. क्षय।
-
स्वस्तिक पहेली- बायें से दायें 1. विनय 3. विपाक सूत्र 8. जप 9. नयाभास 11. यश 13. शुभनंदी 14. वा 15. मन 18. आन्
वीर 20. रमण 22. मान 23. साधु 26. घनवातवलय 31. अतिचार 32. मन 33. गत्ति 35. स्पर्शन 36. अर 38. क्षपक 40. स -
शम 45. नमस्कार 46. सेही 47. नाम 48. वर्ण 49 वचन 50. शक्ट। ऊपर से नीचे 1. विषय 2. यति 3. विजय 4. पाप 5.
-
माया 7. व्यसन 9. नन्दी 10. भाव 12. शमन 16. नत 17. वीरसेन 18. आचारसार 21. मधु 22. मानतुंग 24. रति 25. सुर 2
-
तम 29. वनस्पति 30. यशोनन्दी 34. तिमिर 36. अजितसेन 37. उपशमक 39. कम 40. आस्रव 41. पन 42. नाम 43.
-
नाश।
प
T -
माया 7. व्यसन 9. नन्दी 10. भाव 12. शमन 16. नत 17. वीरसेन
-
तम 29. वनस्पति 30. यशोनन्दी 34. तिमिर 36. अजितसेन 37.
-
नाश ।
-
अंकाख्यानम्
पंद्रव्य
गुणस्थान
प्रमाद
गति
अणुपेक्षा
प्रतिज्ञा
र
उर्ध्व
पदार्थ
द्रव्य
नय
गुप्ति
आकाश
चारित्र
- चक्र पहेली-चक्रक्र. 1. - 1 साम्परायिक 2 प्रतिक्रमण
चक्रक्र 2. -1 सूत्रवृत्त 2 परिग्रह, चक्रक्र 3. -1 ऋजुप्रकृति 2 औदयिक,
चक्रक्र 4. -1 जरायुज 2 वारिषेण, चक्रक्र 5. -1 दधिमुख 2 निसर्गज,
चक्रक्र 6. -1 अजीव 2 आदित्य, चक्रक्र 7. -1 स्नातक 2 प्रमाद,
चक्रक्र 8. -1 कषाय 2 वर्तना, चक्रक्र 9. -1 संवेग 2 असंज्ञी ।
तिचार 32. मन 33. गति 35. स्पर्शन 36. अर 38. क्षपक 40. म
50. शक्ट । ऊपर से नीचे 1. विषय 2. यति 3. विजय 4. पाप 5.
वीरसेन 18. आचारसार 21. मधु 22. मानतुंग 24. रति 25. सुर 2
बसेन 37. उपशमक 39. कम 40. आस्रव 41. पन 42. नाम 43.
प
र
म
स
म
हा
ति
मि
र
प
9. शब्दों का मायाजाल
र
सा
र
रा
ना
सा
का
र
प
प
नि
ना
क्षें
प
आ
त
प
क
र
चा
र
सा
र
घ
क
वि
र
च
र्प
भ
प्र
ज्ञा
या
न
र
च
द
म
पक,
प्र
मा
त्य
ला
न,
भि
का
ज्ञा
र
न
म
न
इं
स्व
र
य
लां
प्रा
रिक्त स्थान पहली
नाम
- तुम को बिन जाने जो
- हे
- तुमको पूजे
- जो
पाए सो तुम जाणत जिनेश
ज्ञान चारित्राणि मोक्षमार्गः ।
महाबल सेनानी उस को टाल सकेगा क्या ।
भव दुःख मेटो याते मैं पूजो प्रभु पाय ।
अहिपति नरपति देव ।
हूँ थाय सम्यग्दर्शन बिन दुःख पाय । - हूँ स्वतंत्र निश्चल निष्काम ज्ञाता दृष्टा
- वे
- मुनि सकलव्रती
- जजु भावना
- वीतराग सर्वज
महान जिन विचरे हमारे ध्यान में ।
सिद्ध भगवान आदर्श तुम्ही मेरे ।
भव भोगन में वैरागी ।
रत्नत्रय जा बिना शिव नही कदा ।
जह तरंग उछलत सुखदानी ।
भविजन की अब पूरो आस ।
14 देह जीव को एक गिने
15 सुख विस्तारवे को यही - हे अजेय
- ऐसे प्रभु की
- राजा राणा
21 मंगल
22.
तत्त्व मुधा है ।
हैं।
का हर्ता णनोकार यह मंत्र महा ।
में ज्ञान न लह्यो तरुण समय तरुणीरत रहो ।
को जलते करे ।
हाथिन के असवार ।
तेरी वाणी शुभजय के झरने झरते हैं ।
यह भवसागर
मंगलकरण वीतराग विज्ञान ।
अंताक्षरी
नामः
नोटः प्रथम प्रश्न के उत्तर के अंतिम अक्षर से दूसरे प्रश्न का उत्तर प्रारम्भ होगा-
- एक अनुयोग का नाम
- उन मुनिराज का नाम जिनके सिर पर जलती हुई सिगडी रखी गई थी
- पूजा का एक द्रव्य
- एक नारायण का नाम
- हमारा महामंत्र
- एक इन्द्रिय का नाम
- भगवान की दृष्टि कैसी होती हैं
- एक गुणस्थान का नाम
- २१. वे तीर्थकर का नाम
- तिर्यचगति का एक भेद
- नरक की एक पृथ्वी का नाम
- भरत के नाम से हमारा देश कहलाया
- षट आवश्यक में से एक
- एक लेश्या का नाम
- जम्बूस्वामी कहा से मोक्ष गए
- जिन्होंने अपने होनेवाले पति का अनुसरण किया
- एक द्वीप जहाँ रावण राज्य करता था
- जिनके साथ आचार्य मानतुंग का शास्त्रार्थ हुआ
- द्वितीय चक्रवर्ती
- आचार्य कुन्दकुन्द कृत आचरण विषयक १६७ गाथाओ में निबद्ध ग्रन्थ
१. उलट पुलट धर्म पहेली
नोट-: प्रत्येक खाने की लाईन के सामने शब्द को उलट पुलट कर लिखा गया है, आपको सही शब्द बनाकर खाने में लिखना है।
जैसे - दखजीशिखरमेर स म्मे द शि ख र
१- तदअर्थण्डतन
२- दभपुणराप
३- भावैग्यरानाव
४- व्यर्दआशका
५- रायांथश्रेना
६- कंमार्गक्षकामोप्रश
७- रितकापयचा
८- न्दकुआकुचान्दर्य
९- नरांधआरर्यचा
१०- लीहुभबातरब
११- नुदनर्शतिरवागू
१२- मीसाआमाप्त
१३- गैरसयसा
१४- वीज्ञानभाखव
१५- सात्रिकलोर
१६- तारमटोकररमाड
१७- वशागुस्त्रदेरु
१८- धबीसरनार्यचा
१९- थवत्तनाम्म
२०- त्वश्राकण्डरचायरकार
नाम-
पिता का नाम-
पता-
प्रस्तुति आश्विन नांगातटी
-
- तीर्थंकर ज्ञान पहली *
प्रस्तुति
अश्विन नाणावटी
निम्नलिखित वाक्यों के आधार पर चौबीस तीर्थंकरों के नाम पहिचानिए।
१ पंच बालयतियों में प्रथम बालयति। वासुपूज्य
सच्चे जिन ऐसे जिनके पिता थे। मुनिसुव्रत
सत्रहवें तीर्थंकर के नाम वाले जिनके प्रमुख गणधर थे। श्रेयांसनाथ
बानियों की बुद्धि। सुमतिनाथ
वर्तमान में गुलशासन नायक। महावीर
जिनपर उपसर्ग हुआ था ऐसे प्रथम तीर्थंकर। सुपार्श्वनाथ
पवित्र संसार में क्या चाहता है। शांतिनाथ
अतिथी के आने पर किया जाता है। अभिनंदननाथ
जिसका अंत न हो। अनंतनाथ
१० सूर्य उदय के साथ फूल खिलता है। पद्मप्रभ
११ जिनको श्वेताम्बर स्त्री पर्याय में मोक्ष मानते हैं। मल्लिनाथ
१२ कंचन वर्णी वाले पंद्रहवे तीर्थंकर। नेमीनाथ
१३ द्रव्यकर्म, भावकर्म एवं नोकर्म से रहित। विमलनाथ
१४ गर्मी में जिसकी जरुरत होती है। शीतलनाथ
१५ जिन्हें जीता न जा सके। अजितनाथ
१६ जिसके सम्पर्क से लोहा भी सोना हो जाता है। बा. पार्श्वनाथ
१७ माह में जो धीरे धीरे बढ़ता और घटता है। चन्द्रप्रभ
१८ हर प्राणी को हर स्थिति में करते रहना चाहिए। धर्मनाथ
१९ फलों के समान दंत पंक्ति भले। प्रणपदंत
२० जो कोई भी कार्य करने में असमर्थ न हो। संभवनाथ
२१ तीनपद के धारी अंतिम तीर्थंकर। आरहनाथ
२२ एक नारायण जिनके चचेरे भाई थे। नेमीनाथ
२३ जिन्होंने असि, मसि कृषि का ज्ञान कराया। आदिनाथ
इन छठवे चक्रवर्ती के प्रथम तीन कल्याणक हस्तिनापुर में हुए। कुंथुना
नाम -
पुमांके-
नामक
अनुयोग पहेली
प्रस्तुति
अश्विन नानावटी
“सारथी”
अभव्य
अरवाचे
अग्निमायिक
अधुर नातिद
भवचिमन
आपवल
असल
अमृतगंदावल
अयुसलधुत्त
नियम-1. सभी उत्तर “अ” से प्रारंभ होगे।
2. उत्तर एक शब्द में होना चाहिए।
3. अधिक प्रतियोगियों के उत्तर सही होने पर
- सिद्धो का एक दूसरा नाम ?
- सबसे अधिक तीर्थकर किस तीर्थकर के काल
- में हुए थे ?
- तीन पदवी के धारक तीर्थकर का नाम ?
- वे तीर्थंकर जो चैत न्युक्ल त्रयोदशी को जन्मेर
- तत्त्वार्थ राजवार्तिक के रचयिता ?
- श्रावक के मूलगुणों की संख्या ?
- 14 गुणस्थानों में से एक ?
- आकाश हुत्य का एक भेद ?
- वे देव जी नारकियों को लड़ाने का कार्य करे
- पंच स्थावरो मे से एक का नाम ?
- पौन्च ज्ञानों में से एक का नामर
- तत्त्वों में से एक तत्व का नाम ?
13 सामान्य गुणों में से एक गुण ? - सिद्धों के अष्ट गुणों में से एक गुण ?
15 जिसमें मोक्ष जाने की पात्रता न हो ? - नव नोकषाय में एक कषाय का नाम ?
17 साधु के मूलगुणों की संख्या ?
18 46 गुणों के धाररु होते है ?
19 पाँच पावों में से एक पाप का अपर नाम? - मिथ्यात्व के पंच प्रकारो में एक ?
- अणुव्रतों का एक भेद ?
22 बारह भावना में से एक भावना।
23 कुन्दपुन्दाचार्य का एक ग्रुप ?
24 वे कौन थे जिन मुनिरान’ ने आत्मा
की 47 शक्तियों का वर्णन लिवारे
ओमेवादन में जय जिनेन्द्र बोलें
खोजो पाओ
- व 2. र्ण 3. ना 4. ज्ञा 5. क 6. र्ति 7. वा 8. ज 9. रा 10. वि
- र 12. त्न 13. क 14. र 15. ण्ड 16. श्रा 17. व 18. का 19. चा 20. र
- मो 22. क्ष 23. मा 24. र्ग 25. प्र 26. का 27. श 28. क 29. सा 30. य
- क्ष 32. प 33. द्म 34. पु 35. रा 36. ण 37. ट 38. र्म 39. र 40. ण
- शा 42. ण 43. र 44. यो 45. मी 46. ना 47. ध 48. र 49. मो 50. सा
- स्त्र 52. सा 53. सा 54. ग 55. र 56. गो 57. म्म 58. ट 59. सा 60. र
- शा 62. र 63. म 64. सा 65. चा 66. सं 67. त 68. रा 69. र 70. म
- र्मा 72. र्म 73. य 74. र 75. ला 76. ला 77. व्य 78. मृ 79. क 80. स
- ध 82. म 83. नि 84. व 85. मू 86. रि 87. रु 88. द्र 89. र्मा 90. र्म
- स 92. र्व 93. ध 94. र्म 95. प 96. री 97. क्षा 98. मु 99. ख 100. ध
इन खंडो में कुछ ग्रंथो के नाम छिपे हुए हैं, आपको कोई १० ग्रंथो का नाम ढूंढकर उनका प्रारंभिक व
अंतिम नंबर लिखना हैं । रचियता का नाम भी लिखना हैं । शब्द क्रमशः होने चाहिए । वह नीचे से ऊपर,
ऊपर से नीचे, बाए से दॉए, दॉए से बाए अथवा तिरछे भी हो सकते हैं
ग्रन्थ का नाम नंबर से नंबर तक ग्रंथकार
जैसे मोक्षमार्ग प्रकाशक 21 से 28 टोडरमल जी
से
से
से
से
से
से
से
से
से
से
अक्षर प्रतियागिता
नाम
अ एक आचार्य का नाम
आ सात सत्त्वों में से एक तत्त्व
इ तीर्थंकर बालक को जो गोद में लेती है
ई मतिज्ञान का एक भेद
उ आठ अंग में से एक अंग
ऊ एक सिद्ध क्षेत्र का नाम
ए शुक्लध्यान का एक भेद
ऐ 16 स्वप्नों में से एक मपा
ओ तीर्थंकर परमात्मा की दिव्यध्वनि होती है
औ एक शरीर का प्रकार
अं एक कर्म का नाम
क पार्श्वनाथ पर उपसर्व किया था वह
ख आकाश का पर्यायवाची शब्द
ग जम्बूद्वीप की एक नदी का नाम
घ एक बात वलय तथा एक समुद्र का नाम
च चार अनुयोगों में से एक
छ 4 से 12 गुणस्थान तक के जीव होते हैं
ज पद्मश्री, कनकश्री, विनयश्री, रूपश्री जिनकी पत्नियाँ थी
झ परम गुरु वर [[?]]
त एक नरक भूमि का नाम
थ तिर्यंच गति के जीव का एक भेद
द सोलह कारण भावनाओं में से एक भावना
ध एक आचार्य का नाम
न जो पदार्थ के एक अंग को ग्रहण करता है
प एक ग्रन्थ का नाम
फ नरेन्द्र … सुरेन्द्र अधिष्ठ
ब सात-तत्त्वों में से एक तत्त्व का नाम
भ सभी जीव स्वभाव से
म जम्बूस्वामी जहाँ से मोक्ष पधारे, उस भूमि का नाम
य सम्यक का एक पर्यायवाची
र सम्यग्दर्शन - ज्ञान - चारित्र को एक अक्षर में कहा जाये तो
ल एक राग का नाम
व मूलाचार ग्रन्थ के रचियता का नाम
श नो कर्म जिसे कहा जाता है वह
ष एक ग्रन्थ का नाम
स निर्जरा का एक प्रकार
ह जिनके घिरने से शिला टूट कर चकनाचूर हो गई
क्ष जो रक्षा करते हैं तथा जिनका दशहरा पर्व होता है
पहचानों मैं कौन हूँ (अपर नाम बताइये)
नाम : …
पिता श्री…
- जिनके गिरने से शिला टूट कर चकनाचूर हो गई और ‘श्रीशैल’ नाम विख्यात हुआ…
- शास्त्र सुनते समय गरदन टेढ़ी हो जाने से नाम ‘वक्रग्रीवाचार्य’ प्रसिद्ध हुआ…
- भगवान वीर के गणधर हुए और नाम ‘गौतम’ विख्यात हुआ…
- भद्रबाहु के शिष्य थे और मुरा के पुत्र होने से ‘मौर्य’ कहलाये…
- जनक की पुत्री होने के कारण ‘जानकी’ नाम विख्यात हुआ…
- भूत जाति के देवों द्वारा दंतपंक्ति सुन्दर करने के कारण नाम ‘पुष्पदंत’ प्रसिद्ध हुआ…
- तीनों लोकों का मानदण्ड है अतः ‘मेरु’ नाम प्रसिद्ध हुआ…
- गोमट्ट राजा की प्ररेणा द्वारा रचित होने के कारण नाम ‘गोमट्टसार’ विख्यात हुआ…
- जिनके कारण श्रवणबेलगोला स्थित प्रतिमा ‘गोमटेश्वर’ नाम से विख्यात हुई…
- सृष्टि की आदि में उत्पन्न होने से ‘आदिपुरुष’ विख्यात हुए…
- एकान्त मतो के निराकरण और भगवान महावीर में आप्ततत्त्व की सिद्धि के कारण नाम ‘आप्तमीमांसा’ प्रसिद्ध हुआ…
- बालि मुनि के अंगुठे के नीचे दबने से रूदन करने के कारण ‘रावण’ नाम प्रसिद्ध हुआ…
- बनारस यात्रा के समय पार्श्वनाथ की जन्मभूमि वाराणासी के नाम पर इनका नाम ‘बनारसीदास’ रखा गया…
- प्रथम सूत्र ग्रन्थ रचनाकार. जो मयूर पीछी गिरने से गीध पंखो की पीछी लेने से ‘गृधपिच्छाचार्य’ नाम से प्रसिद्ध हुए…
- कमल की पंखुडी के समान नेत्र होने के कारण ‘पद्म’ नाम प्रसिद्ध हुआ…
अन्तरात्मा
सभी प्रश्नों के उत्तर ‘अ, आ’ से दें
प्र.1. इस युग के धर्म के प्रथम प्रचारक कौन थे ?
प्र.2. प्रथमानुयोग का एक महाग्रंथ ?
प्र.3. किंचित मात्र भी परिग्रह संग्रह न करना ?
प्र.4. जिन्होने चार घातिया कर्म नष्ट कर दिये वह ?
प्र.5. जो संघ के नायक होते हैं ?
प्र.6. बारह तपों में एक तप ?
प्र.7. [[?]]
प्र.8. जो जीव कभी मोक्ष नहीं पा सकता ?
प्र.9. पाँचों पापों का एक देश त्याग करना ?
प्र.10. दूसरों की वस्तु बिना आज्ञा के ग्रहण नहीं करना ?
प्र.11. भूतकाल के तेईसवें तीर्थंकर का नाम ?
प्र.12. भविष्यकाल के बारहवें तीर्थंकर का नाम ?
प्र.13. कैकई कौन सी विद्या में निपुण थी ?
प्र.14. आदिनाथ के भी पहले मोक्ष गये ?
प्र.15. वे मुनिराज जिन्होने छह माह तक देवी से शास्त्रार्थ किया ?
प्र.16. दशरथ की एक रानी का नाम ?
प्र.17. चार दानों में एक का नाम ?
प्र.18. पाँचवें नरक का नाम ?
प्र.19. जो देव आपस में लड़ाते हैं ?
प्र.20. पंचमेरू में एक का नाम ?
प्र.21. तेरहवें स्वर्ग का नाम ?
प्र.22. आठवीं प्रतिमा का नाम ?
प्र.23. भरत जी को कितने समय में कैवल्य ज्ञान हुआ ?
प्र.24. कर्मों के आने के द्वार को कहते हैं ?
नाम … पिता का नाम … उम्र …
पता … दूरभाष …
शब्द रचना पहेली
नोट रिक्त स्थान भरे ।
1 आ ______ पु ______ ण
2 प ______ मे ______ ठी
3 स्व ______ म्भ ______ म
4 गु ______ स्था ______
5 चै ______ ल ______
6 के ______ ज्ञा ______
7 ष ______ आ ______ क
8 ______ क्षमा ______ का ______ क
9 त ______ सू ______
10 ग ______ ह ______ म ______ भा ______
11 प ______ ल्या ______
12 प्र ______ ल ______ तेण्ड
13 कु ______ कु ______
14 ______ न ______ णी
15 छ ______ ला ______
16 नि ______ म ______ र
17 श्लो ______ वा ______ क
18 स ______ सि ______
19 पु ______ षा ______ सि ______
20 द ______ ल ______ ण
21 द्र ______ नुयो ______
22 जा ______ भा ______ ना
23 म ______ वी ______
24 ______ म्मट ______ र
25 ______ ष्टोप ______ श
शब्द रचना पहली
नोटः रिक्त स्थान भरे ।
1 आ ____ पु ____ ण
2 प ____ मे ____ ठी
3 स्व ____ म्भू ____ म
4 गु ____ स्था ____
5 चै ____ ल ____
6 के ____ ज्ञा ____
7 ब ____ आ ____ क
8 ____ क्षमा ____ का ____ क
9. त ____ सू ____
10 ग ____ ह ____ म ____ भा ____
11 प ____ ल्या ____
12 प्र ____ ल ____ तेण्ड
13 कु ____ कु ____
14 ____ न ____ णी
15. छ ____ ला ____
16 नि ____ म ____ र
17 श्लो ____ वा ____ क
18 स ____ सि ____
19. पु ____ षा ____ सि ____
20 द ____ ल ____ ण
21 द ____ नुयो ____
22 बा ____ भा ____ ना
23. म ____ ती ____
24 ____ म्मट ____ र
25 ____ ष्टोप ____ श
पर्यूषण पर्व के पावन प्रसंग पर चौबीस तीर्थंकरों पर आधारित
तीर्थंकर ज्ञान प्रतियोगिता
- भगवान आदिनाथ के समवशरण में प्रथम जोता कौन थे ?
- भगवान श्री अजितनाथ के वैराग्य का क्या कारण था ?
- भगवान श्री सम्भवनाथ के जन्म का स्थान बताइए।
- श्री अभिनन्दननाथ भगवान ने कितने वर्षों तक तप किया था ?
- श्री सुमतिनाथ भगवान को केवलज्ञान कौनसी तिथि को हुआ था ?
- श्री पद्मप्रभु भगवान की माता का नाम बताइए।
- श्री सुपार्श्वनाथ भगवान ने कौनसे नगर में दीक्षा ली थी ?
- श्री चन्द्रप्रभ भगवान के शरीर का वर्ण बताइए।
- श्री पुष्पदन्त भगवान की ऊँचाई कितनी थी ?
- भगवान शीतलानाथ कौनसे वंश में हुए थे ?
- भगवान श्रेयांसनाथ की पूर्व पर्याय का क्या नाम था ?
- भगवान वासुपूज्य के पाँचों कल्याणक एक ही स्थान पर कहाँ हुए हैं ?
- श्री विमलनाथ भगवान के दीक्षावृक्ष का नाम बताइए।
- भगवान अनन्तनाथ के जन्मस्थान अयोध्या नगरी का दूसरा नाम बताइए।
- धर्मनाथ भगवान का प्रथम आहार किस नगर में हुआ था ?
- भगवान शान्तिनाथ कौनसे नम्बर के कामदेव व चक्रवर्ती हुए थे ?
- श्री कुन्थुनाथ तीर्थकर कहाँ से च्युत होकर माता के गर्भ में आये थे ?
- स्वयं चक्रवर्ती अरहनाथ भगवान के काल में कौन दूसरे चक्रवर्ती हुए ?
- श्री मल्लिनाथ भगवान ने सर्वप्रथम किस वस्तु का आहार लिया था ?
- भगवान मुनिसुव्रत का जन्म किस वंश में हुआ था ?
- श्री नमिनाथ भगवान के शरीर की ऊँचाई कितनी थी ?
- श्री नेमिनाथ भगवान के समवशरण के प्रथम श्रोता कौन थे ?
- भगवान पार्श्वनाथ के कितने गणधर हुए थे ?
- श्री भगवान महावीर के कितने अनुबद्ध केवली थे ?
नियम-
- सभी प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में ही होने चाहिए।
- प्रश्नों के उत्तर आगे दी हुई जगह में लिखिए।
नाम
फटाफट प्रतियोगिता भाग २ ( 25.09.2012 )
नियम :- निर्देशानुसार समय - 10 मिनट पूर्णांक - 100 अंक
संख्या बराबर क्या ?
- व्युत्सर्ग ✓ रौद्र ध्यान ये दोनों इनमें से कुछ नहीं -
- आहार तप ✓ ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- मकार ✓ भय ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- कषाय एक योजन में कोश ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- परमेष्ठी परमागम ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- आवश्यक कार्य बाह्य तप ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- व्यसन नरक ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- द्रव्य ✓ मोक्षगामी चक्रवर्ती ये दोनों इनमें से कुछ नहीं -
- अंतरंग तप नारायण ✓ ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- धर्म पार्श्वनाथ जी के गणधर ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- रुद्र ✓ बलभद्र ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- चक्रवर्ती ✓ महावीर जी के गणधर ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- विमलनाथ जी का नं. महावीर जयंती की तिथि ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- कुलकर नेमिनाथ जी के गणधर ये दोनों इनमें से कुछ नहीं -
- घातिया कर्म धर्मनाथ जी का नं. ✓ ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- स्वर्ग भावनायें ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- इक्ष्वाकु वंश के तीर्थंकर ✓ चैत्र माह के कल्याणक ये दोनों इनमें से कुछ नहीं -
- मुनिसुव्रत जी के गणधर दोष ये दोनों ✓ इनमें से कुछ नहीं +
- कल्पवृक्ष समवशरण की भूमियाँ ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- विद्यमान तीर्थंकर ✓ आदिनाथ समोवशरण में केवली ये दोनों इनमें से कुछ नहीं -
- नमिनाथ जी का नं. ✓ प्रतिक्रमण ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- परिकर्म साधु के मूलगुण ये दोनों इनमें से कुछ नहीं ✓
- पार्श्वनाथ जी का नं. ✓ परीषह ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- तीर्थंकर ✓ शिखर जी की टोंकें ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
- कामदेव उपाध्याय के मूलगुण ✓ ये दोनों इनमें से कुछ नहीं +
नाम :- पवन जैन पिता का नाम-
- = 19 / - = 6 / 16 x 4 2 (64)
फटाफट प्रतियोगिता भाग २ (26.09.2012)
नियम - निर्देशानुसार समय - 10 मिनट पूर्णांक - 100 अंक
बेमेल पहचानो
- देव शास्त्र गुरु जिनवाणी +
- सम्यक ज्ञान सम्यक दर्शन सम्यक चारित्र सम्यक वाणी +
- आदिनाथ नेमिनाथ बाहुबली नमिनाथ +
- क्रोध हिंसा माया मान +
- गर्व तप नामकरण ज्ञान +
- अरहत साधु श्रावक सिद्ध + 2° = +
- सत्य क्षमा त्याग अहिंसा + 5 = +
- नारद नारायण रुक्म बलदेव 17.5x4
- हनुमान अनंत वीर्य जम्बू स्वामी श्री पाल 70
- काल भीम महाकाल बलभज -
- ऐरावत हाथी कलश युगल चक्र रत्न सूर्य -
- विमलनाथ नेमिनाथ पार्श्वनाथ मल्लिनाथ +
- शिखर जी पावापुरी श्रवणबेलगोला गिरनार जी +
- सीमंधर संजातक युगंधर भूत बलि +
- अयोध्या कम्पिल जी अछत्र शौरीपुर +
- पुष्पदन्त जी आदिनाथ जी शीतल नाथ जी महावीर स्वामी +
- संयम तप देव दर्शन वैय्यावृत्त -
- महावीर जी सांगानेर चम्पापुर तिजारा जी +
- गणित वाणिज्य शिल्प कृषि +
- चक्षुमान यशस्वी प्रसेन जित नाग कुमार +
- भरत मधु कैटभ सुयोग हरि घेण +
- सहदेव नकुल कृष्ण भीम +
- नमिनाथ शांतिनाथ कृष्णनाथ अरहनाथ +
- गद्य गाँस मदिरा मकार +
- इह लोक पर लोक मध्य लोक वेदना +
नाम :- पतन जैन पिता का नाम
शिखर प्रतियोगिता
जैनदर्शनाचार्य
सिद्ध क्षेत्रों के नाम लिखें
प्र.1. हठी कथमिवान्धी
प्र.2. महाभारत के समय के एक गुरु :
प्र.3. जिससे आँखों की याद आती है?
प्र.4. नारी का एक गहना ?
प्र.5. एक धातु का नाम ?
प्र.6 जिस पर पूरी दुनिया की निगाह हो?
एक फूल का नाम
चन्द्रमा का दूसरा नाम
प्र.9. एक परनष्ठी का नाम
प्र.10. एक महल में जहाँ शाखा रहता है।
प्र.11. शाश्वत सिद्ध क्षेत्र का नाम।
नाम
प्रतियोगिता क्रमांक
-
-
- आओ करें नवदेवता पूजन * * *
-
| जिन धर्म | सर्व साधु | | जिनागम | | | | | जिन चैत्यालय |
| | | | | उपाध्याय | | | | |
| उपाध्याय | | | | | जिन चैत्य | सिद्ध | | |
| | अरहंत | जिन चैत्यालय | सिद्ध | आचार्य | | | | |
| | | | | | | | | |
| | | | उपाध्याय | | जिन चैत्य | अरहंत | जिन धर्म | |
| | जिन चैत्यालय | आचार्य | | | | | | जिन चैत्य |
| | | | उपाध्याय | | | ८ | | |
| सर्व साधु | | | आचार्य | | | जिन धर्म | | सिद्ध |
नोट - 1. प्रत्येक पंक्ति में पूरे नौ देवता के नाम भरे जाना आवश्यक है।
2. आड़ी और खड़ी पंक्ति में एक 3 x 3 के वर्ग में किसी भी
नव देवता का नाम दुबारा ना आये।
नाम
“खोजो और पाओ” वर्ग पहेली
मार्ग
रत्न
क्षेत्र
आचार
मैं
तुमी
पञ्च
बेल मेरी
तुग पार्श्वनाथ
क्षेत्र प्रतिष्ठा
काण्ड
सव्व
पुराण
साहुणं
पद्म
णमो
मांगी
मण्डल
त्रिलोक
गोला
अस्ति
करण्ड
समय
श्रवण
भक्तामर
गोमट
हरि
मोक्ष
लोए
श्रावक
वंश आचार्य
सार महोत्सव
मान
निर्वाण
भावना
प्रकाशक
सिद्ध
प्रतिष्ठा
काय
कल्याणक
रत्न करण्ड श्रावकाचार
10927
नोट - 1. इस वर्ग पहेली में दस आकृतीया दि गई है तथा इन गोलो में आचार्यो, भगवतो, ग्रंथ, व तीर्थ क्षेत्रों
के नाम अलग-अलग करके लिखे गये है। अब इसमें आपको गोलो व शब्दो की संख्याओ के माध्यम से आचार्यों,
भगवन्तो, ग्रंथ, व तीर्थ क्षेत्रों के नाम सही क्रम से जमा कर अपने ज्ञान की पहचान करनी है।
2. निर्णायको का निर्णय अन्तिम होगा।
खोजिए शास्त्रों के नाम और स्वचिता
उदाहरण - जिसमें पाँच अस्तिकाय हैं - पंचास्तिकाय
- जो स्वच्छ है
- जिसमें तत्वों का अर्थ है
- आत्मा का जो अनुशासन है
- नियम से सार है
- मुक्ति के मार्ग का प्रकाशन करने वाला है
- जो स्वरूप से जोड़ता है
- परमेश्वर को जो प्रकाशित करता है
- हर समय मक्खन है
- जो तपस्या करने से प्रकट होती है
- समाधि ही समाधि
- रत्नों का खजाना
- उत्कृष्ट वचनों में सार
- एक अनुत्तर विमान
- जिसमें हर प्रश्न का उत्तर है
- जिसमें भगवान की परीक्षा की गई हो
- जिसका हर उपदेश इष्ट है
- जिसमें एक वंश का नाम है
- जिसके आचरण में ज्ञान आनंद है
- जिसमें तीन लोक का स्वरूप है
- न्याय का मुख
संयोजक - अभय अंकुश (उपाध्याय वरिष्ठ)
अंताक्षरी व्यूह प्रतियोगिता
S
2.8
- मध्यलोक में अकृत्रिम जिनालय
- सूर्य की गलियाँ
- मनुष्य क्षेत्र का विस्तार
- हस्तिनापुर के राजा पद्म का मंत्री
- पुद्गल का एक गुण
- भवनवासी देवों का एक भेद
- सातवीं शताब्दी के एक आचार्य
- सर्व विप्रभाशक एक मंत्र
- अपोलोक की एक पृथ्वी
- मुनियों का एक मूलगुण
- एक गति का नाम
श्रमण संस्कृति - एक सिद्ध क्षेत्र का नाम
- आचार्य कुन्दकुन्द का एक पंथ
- ऐरावत क्षेत्र की एक नदी
- जंगल की अग्नि
- एक समुद्र का नाम
- 58 गाथा वाली एक ग्रन्थ
- श्रीकृष्ण का वंश
- चक्कल का उद्गम स्थल
- ज्योतिषी देवों का प्रतीन्द्र
- आचार्य श्री विद्यासागर जी
के गृहस्थ अवस्था का नाम
क्षणभंगुर संसार (नाटिका)
आशाओं का हुआ खातमा, दिल की तमन्ना पड़ी रही।
बस परदेशी हुआ रवाना, प्यारी काया पड़ी रही ।।
करना-करना आठों पहर ही मूरख इक लगता है,
मरना-मरना मुझको कभी नहीं, लब्ज़ जुबा पर लाता है।
पर सब ही है झरने वाले शान किसी की नहीं रही ।।
बस परदेशी हुआ रवाना…
पण्डित जी:-
एक पण्डितजी पत्रिका लेकर गणित हिसाब लगाते थे,
समय काल तेजी - मंदी की होनहार बतलाते थे।
आया काल चले पंडितजी पत्रिका हाथ में धरी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
वकील साहबः-
एक वकील आफिस में बैठे, सोच रहे वे अपने दिल,
फला दफा पर बहस करूँगा, पोइन्ट मेरा बड़ा प्रबल।
इधर कटा वारन्ट मौत का, वक़्त की पेशी धरी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
मुनीम जी
एक मुनीम बैठे दुकान पर, जमा खर्च यों जोड़ रहे,
इतना देना इतना लेना, बड़े गौर से सोच रहे।
काल बली की लगी चोट, जब कलम कान में पड़ी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
मोडर्न गर्ल:-
एक लड़की फैशन में हरदम इधर उधर इठलाती थी,
चार पाँच थी फ्रेंड साथ में, बातें बहुत बनाती थी।
कट गयी टिकट चली मैडमजी, पर्स हाथ में दबा रहा,
बस परदेशी हुआ रवाना
जेन्टल मैनः -
जेन्टल मैन घूमने को एक वक्त शाम को जाता था,
चार पाँच थे दोस्त साथ में, बातें बड़ी बनाता था।
लगी जो ठोकर गिरे बाबूजी छड़ी हाथ में लगी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
सास जीः-
एक सास भरी ऐंट में गाली खूब सुनाती थी,
चिमटा बेलन दिखा दिखाकर, बहू को खूब सताती थी।
आया वक्त चली सेठानी पाप की गठरी पड़ी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
नेताजीः-
एक नेताजी खड़े मंच पर, भाषण खूब सुनाते थे,
ये कर दूँगा, वो कर दूँगा, गप्पें खूब लगाते थे।
फटा जो बम उड़ गये नेताजी, टोपी सिर पर पड़ी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
डॉक्टर साहबः-
इलाज करने को इन सबका, डॉक्टर जी तैयार हुए,
विविध दवाँ औजार साथ ले, मोटर कार सवार हुए।
आया वक्त उलट गयी मोटर, दवाँ बॉक्स में धरी रही,
बस परदेशी हुआ रवाना…
आशाओं का हुआ खातमा, दिल की तमन्ना पड़ी रही।
बस परदेशी हुआ रवाना, प्यारी काया पड़ी रही।।
सचिन जैन शास्त्री
गढ़ी (बाँसवाड़ा)
प्र०163- तीन लोक में जीव क्या चाहते है। सुख
प्र०164- पंचेन्द्रिय कितने प्रकार के होते है। दो, एही भाजी प्र०165- सहन करने की अनिच्छा होने पर भी जीव रोग शुघादि सहन करता है उसे क्या कहते हैं। शकाल निजी प्र०166- तीन काल में किसी भी समय रत्त्रय कि प्राप्ति की योग्यता रखने वाले जीव को क्या कहते है। सत्य प्र०167- प्रयोजनभूत तत्व कितने है। सात
प्र०168- छः द्रव्यों को अवगाहना कौन सा द्रव्य देता है। आकाश द्रव्य प्र०169- कितने सेवन से गृहीत मिथ्यात्व होता है। कुदेव, कुगुरू, कुधर्म प्र०170- आत्मा का सुख किससे रहित है। आकुलता से
प्र०171- सम्यक्ज्ञान, चारित्र किसके बिना नहीं होते। सम्यक दर्शन प्र०172- कुदेव, कुगुरू, कुधर्म तथा इनके सेवक ये किसके भेद है। ५ अनायतन प्र०173- धार्मिक कार्यों में अनुत्साह क्या है प्रमाद
प्र०174- निक्षेप के भेद कितने व कौन से है। 14
प्र०175- सम्यकचारित्र के कितने भेद है 13
प्र०176- सोहलवे स्वर्ग से ऊपर तथा प्रथम अनुदिश से नीचे देवों के रहने का स्थान क्या है। शब्यक प्र०177- द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव और भव किसके मेद है। परावर्तत के प्र०178- गुणस्थान कितने होते है। 14
प्र०179- तीन लोक की ऊँचाई कितनी है। 14 राजू
प्र०180- पाँचवे नरक का नाम क्या है। धूम प्रभा
प्र०181- छः लेश्याएँ कौन-कौन सी है। कृष्ण, नील, कापोत, पीत, पद्म, शुक्ल प्र०182- नरक् गति के जीवों की उत्कृष्ट आयु कितनी है। 33 सागर प्र०183- कौन से पर्वत के आगे मनुष्य नहीं जा सकता। मानुर्णत्तर पर्वत प्र०184- संस्थान तथा संहन कितने प्रकार के होते है। 6
प्र०185- 16 स्वर्ग में कितने इन्द्र होते है। 12
प्र०186- नन्दीश्वर द्वीप किस लोक का कौन या द्वीप है। 2, मध्यलोक प्र०187- लानत्व स्वर्ग कौन सा स्वर्ग है। 7
प्र०188- जम्मूदीप में कितने क्षेत्र होते है। 7
प्र०189- जीवों की उत्पत्ति स्थान को क्या कहते है। योनी
प्र०190- शरीर कितने प्रकार के होते है। 5
प्र०191- नारायण कितने होते है। 9
प्र०194- स्वर्ग के देवों की जघन्य आयु कितनी होती हैं। 10 हजार वर्ष प्र०195- जिनेन्द्र भगवान कितने इन्द्रों से पूजित है। 100 555 प्र०196- मध्य लोक में कितने अकृत्रिम चैत्यालय होते है। 458 प्र०197- नरक के बिल कुल कितने होते है।
- अंश यहाँ समाप्त; पूर्ण ग्रंथ के लिए नीचे संलग्न PDF देखें -
मूल दस्तावेज़ (PDF): 165.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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