हमारे ग्रंथ - जैन स्वाध्याय सामग्री | Hamare Granth

हमारे ग्रंथ

जिनम् ज्ञानशाला

शुक्रवार Activity
हमारे ग्रंथ

  1. यह ग्रन्थ अपूर्ण ही रह गया था
  2. इस ग्रंथ में 9 अधिकार हैं।
  3. यह ग्रन्थ मूलतः: ढूंढारी भाषा में लिखा गया था, बाद में बहुत सी भाषाओं में इसके अनुवाद हुये
  4. इस ग्रन्थ के लेखक को हाथी के पैर के नीचे कुचल वा दिया गया था

मोक्षमार्ग प्रकाशक

  1. इस ग्रंथ को दो आचार्यों ने लिखा था
  2. यह प्रथम शताब्दी में लिखा गया था
  3. इस ग्रंथ के लेखकों के गुरु आचार्य धरसेन थे
  4. इस ग्रंथ में 6 खण्ड हैं
  5. इस ग्रन्थ का मंगलाचरण णमोकार मंत्र है

षट्खंडागम

  1. यह चरणानुयोग का बहुत ही प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं
  2. इस ग्रन्थ में 8 अधिकार हैं
  3. इस ग्रन्थ के लेखक द्वारा अरहत भगवान् की भी परीक्षा की गई है!
  4. इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य को भस्मक व्याधि रोग भी हो गया था

रत्नकरंड श्रावकाचार

  1. इस ग्रन्थ के लेखक का दूसरा ग्रन्थ समाधितन्त्र भी है
  2. इसमें कुल 51 श्लोक ही हैं।
  3. इस ग्रन्थ के अंत में जीव जुदा पुद्गल जुदा, यही तत्व का सार बताया गया है
  4. यह आचार्य पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित ग्रन्थ है।

इष्टोपदेश

  1. यह एक प्रथमानुयोग का ग्रन्थ है
  2. इस ग्रन्थ के तीन भाग है।
  3. यह आचार्य रविषेण द्वारा रचित है।
  4. इसमें वर्णित कथा मुनिसुव्रत नाथ तीर्थंकर के काल के किसी महापुरुष से सम्बन्धित है।
  5. इसकी कथा राम रावण के युद्ध पर आधारित है

पद्मपुराण

  1. इस ग्रन्थ में 96 छन्द हैं
  2. इस ग्रन्थ में संसार से लेकर मोक्ष तक की यात्रा का वर्णन मिलता है
  3. इसको छोटा समयसार भी कहा जाता है।
  4. इसके रचयिता पं. दौलतराम जी हैं

छहढाला

  1. यह द्वितीय शताब्दी का ग्रन्थ है।
  2. यह संस्कृत भाषा का सर्वप्रथम ग्रन्थ है।
  3. इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य का नाम गृद्धपिच्छाचार्य भी था।
  4. यह ग्रन्थ सूत्रात्मक रूप में लिखा गया है।
  5. इस ग्रन्थ का दूसरा नाम मोक्ष शास्त्र भी है।

तत्वार्थसूत्र

  1. इस ग्रन्थ में जीव और अजीव द्वारा
    नाटक का मंचन किया गया है।
  2. इस ग्रन्थ में 10 अधिकार हैं
  3. इस ग्रन्थ में मुख्य रूप से
    एकत्व विभक्त आत्मा को चर्चा
    का विषय बनाया गया है।
  4. इस ग्रन्थ की टीका आचार्य
    जयसेन द्वारा भी की गई है
  5. इस ग्रन्थ में 415 गाथाएँ हैं

समयसार

  1. इस ग्रन्थ के कुछ श्लोकों में अष्ट
    प्रातिहार्यों का वर्णन भी किया गया है।
  2. इस ग्रन्थ में आदिनाथ भगवान्
    की स्तुति को मुख्य आधार
    बनाया गया है।
  3. इस ग्रन्थ के रचयिता आचार्य ने
    जेल में बैठ कर इसकी रचना की थी।
  4. इस ग्रन्थ में 48 श्लोक हैं

भक्तामर

  1. यह ग्रन्थ दो भागों में है।
  2. यह करणानुयोग का प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
  3. यह ग्रन्थ राजा चामुण्डराय के निवेदन से लिखा गया था।
  4. इस ग्रन्थ पर पं. टोडरमल जी भाषा टीका भी लिखी है।
  5. यह ग्रन्थ आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती द्वारा रचित है।

गोम्मटसार

पंचास्तिकाय

  1. इस ग्रन्थ में एक काल द्रव्य को गौण
    करकर अन्य पांच द्रव्यों को चर्चा का मुख्य
    विषय बनाया गया है।

  2. इस ग्रन्थ के रचयिता के पांच नाम
    प्रसिद्ध हैं

  3. इस ग्रन्थ की टीका आचार्य अमृतचन्द्र
    देव द्वारा लिखी गई है।

  4. इसमें 173 गाथाएँ हैं।

  5. यह ग्रन्थ पंचपरमागमों में से
    एक ग्रन्थ है।

  6. यह अमृतचन्द्र आचार्य का मूल ग्रन्थ है

  7. यह ग्रन्थ संस्कृत भाषा में तथा
    चरणानुयोग पर आधारित है

  8. इस ग्रन्थ में सम्यग्दर्शन ज्ञान
    चारित्र का वर्णन विस्तृत रूप से किया
    गया है।

  9. इस ग्रन्थ का हिंसा अहिंसा सम्बन्धि
    “आप्रादुर्भावः खलु…” श्लोक बहुत प्रसिद्ध है।

पुरुषार्थसिद्धिउपाय

धन्यवाद !! जय जिनेंद्र !!!
पुनः मिलेंगे अगले शुक्रवार.


:paperclip: मूल दस्तावेज़ (PDF): 3021.pdf

स्रोत: Gyata संग्रह।

प्रूफरीडिंग बाकी है