हमारे ग्रंथ
जिनम् ज्ञानशाला
शुक्रवार Activity
हमारे ग्रंथ
- यह ग्रन्थ अपूर्ण ही रह गया था
- इस ग्रंथ में 9 अधिकार हैं।
- यह ग्रन्थ मूलतः: ढूंढारी भाषा में लिखा गया था, बाद में बहुत सी भाषाओं में इसके अनुवाद हुये
- इस ग्रन्थ के लेखक को हाथी के पैर के नीचे कुचल वा दिया गया था
मोक्षमार्ग प्रकाशक
- इस ग्रंथ को दो आचार्यों ने लिखा था
- यह प्रथम शताब्दी में लिखा गया था
- इस ग्रंथ के लेखकों के गुरु आचार्य धरसेन थे
- इस ग्रंथ में 6 खण्ड हैं
- इस ग्रन्थ का मंगलाचरण णमोकार मंत्र है
षट्खंडागम
- यह चरणानुयोग का बहुत ही प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं
- इस ग्रन्थ में 8 अधिकार हैं
- इस ग्रन्थ के लेखक द्वारा अरहत भगवान् की भी परीक्षा की गई है!
- इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य को भस्मक व्याधि रोग भी हो गया था
रत्नकरंड श्रावकाचार
- इस ग्रन्थ के लेखक का दूसरा ग्रन्थ समाधितन्त्र भी है
- इसमें कुल 51 श्लोक ही हैं।
- इस ग्रन्थ के अंत में जीव जुदा पुद्गल जुदा, यही तत्व का सार बताया गया है
- यह आचार्य पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित ग्रन्थ है।
इष्टोपदेश
- यह एक प्रथमानुयोग का ग्रन्थ है
- इस ग्रन्थ के तीन भाग है।
- यह आचार्य रविषेण द्वारा रचित है।
- इसमें वर्णित कथा मुनिसुव्रत नाथ तीर्थंकर के काल के किसी महापुरुष से सम्बन्धित है।
- इसकी कथा राम रावण के युद्ध पर आधारित है
पद्मपुराण
- इस ग्रन्थ में 96 छन्द हैं
- इस ग्रन्थ में संसार से लेकर मोक्ष तक की यात्रा का वर्णन मिलता है
- इसको छोटा समयसार भी कहा जाता है।
- इसके रचयिता पं. दौलतराम जी हैं
छहढाला
- यह द्वितीय शताब्दी का ग्रन्थ है।
- यह संस्कृत भाषा का सर्वप्रथम ग्रन्थ है।
- इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य का नाम गृद्धपिच्छाचार्य भी था।
- यह ग्रन्थ सूत्रात्मक रूप में लिखा गया है।
- इस ग्रन्थ का दूसरा नाम मोक्ष शास्त्र भी है।
तत्वार्थसूत्र
- इस ग्रन्थ में जीव और अजीव द्वारा
नाटक का मंचन किया गया है। - इस ग्रन्थ में 10 अधिकार हैं
- इस ग्रन्थ में मुख्य रूप से
एकत्व विभक्त आत्मा को चर्चा
का विषय बनाया गया है। - इस ग्रन्थ की टीका आचार्य
जयसेन द्वारा भी की गई है - इस ग्रन्थ में 415 गाथाएँ हैं
समयसार
- इस ग्रन्थ के कुछ श्लोकों में अष्ट
प्रातिहार्यों का वर्णन भी किया गया है। - इस ग्रन्थ में आदिनाथ भगवान्
की स्तुति को मुख्य आधार
बनाया गया है। - इस ग्रन्थ के रचयिता आचार्य ने
जेल में बैठ कर इसकी रचना की थी। - इस ग्रन्थ में 48 श्लोक हैं
भक्तामर
- यह ग्रन्थ दो भागों में है।
- यह करणानुयोग का प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
- यह ग्रन्थ राजा चामुण्डराय के निवेदन से लिखा गया था।
- इस ग्रन्थ पर पं. टोडरमल जी भाषा टीका भी लिखी है।
- यह ग्रन्थ आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती द्वारा रचित है।
गोम्मटसार
पंचास्तिकाय
-
इस ग्रन्थ में एक काल द्रव्य को गौण
करकर अन्य पांच द्रव्यों को चर्चा का मुख्य
विषय बनाया गया है। -
इस ग्रन्थ के रचयिता के पांच नाम
प्रसिद्ध हैं -
इस ग्रन्थ की टीका आचार्य अमृतचन्द्र
देव द्वारा लिखी गई है। -
इसमें 173 गाथाएँ हैं।
-
यह ग्रन्थ पंचपरमागमों में से
एक ग्रन्थ है। -
यह अमृतचन्द्र आचार्य का मूल ग्रन्थ है
-
यह ग्रन्थ संस्कृत भाषा में तथा
चरणानुयोग पर आधारित है -
इस ग्रन्थ में सम्यग्दर्शन ज्ञान
चारित्र का वर्णन विस्तृत रूप से किया
गया है। -
इस ग्रन्थ का हिंसा अहिंसा सम्बन्धि
“आप्रादुर्भावः खलु…” श्लोक बहुत प्रसिद्ध है।
पुरुषार्थसिद्धिउपाय
धन्यवाद !! जय जिनेंद्र !!!
पुनः मिलेंगे अगले शुक्रवार.
मूल दस्तावेज़ (PDF): 3021.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है