भाग 4: च से ज
च (जारी)
छ
ज
- जं अण्णाणी कम्मं खवेदि भवसयसहस्सकोडीहिं (प्रवचनसार 238) · अर्थ
- जं अण्णाणी कम्मं खवेदि भवसयसहस्सकोडीहिं (भगवती आराधना 107) · अर्थ
- जं अत्ताणो णिप्पडियम्मो बहुवेदणुद्दिओ पडिओ (भगवती आराधना 1579) · अर्थ
- जं अल्लीणा जीवा तरंति संसारसायरं विसमं (तत्त्वसार 73) · अर्थ
- जं अवउद्दो उप्पाडिदाणि अच्छीणि णिरयवासम्मि (भगवती आराधना 1567) · अर्थ
- जं अवियप्पं तच्चं तं सारं मोक्खकारणं तं च (तत्त्वसार 9) · अर्थ
- जं असभूदुब्भावणमेदं बिदियं असंतवयणं तु (भगवती आराधना 820) · अर्थ
- जं उप्पज्जइ दव्वं तं कायव्वं च बुद्धिवंत्तेण (भावसंग्रह 578) · अर्थ
- जं एवं तेलोक्कं णग्घदि सव्वस्स जीविदं तम्हा (भगवती आराधना 782) · अर्थ
- जं कम्मं दिढवद्धं जीव पएसेहि तिविहजोएण (भावसंग्रह 19) · अर्थ
- जं किंचि कयं दोसं मणवयकाएहिं असुहभावेण (अष्टपाहुड 106) · अर्थ
- जं किं चि खादि जं किं चि कुणदि जं किं चि जंपदि अलज्जो (भगवती आराधना 1018) · अर्थ
- जं किंचि मे दुच्चरितं सव्वं तिविहेण वोसरे (नियमसार 103) · अर्थ
- जं किंचिवि उप्पण्णं, तस्स विणासो हवेइ णियमेण (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 4) · अर्थ
- जं किंचिवि चिंतंतो णिरीहवित्ती हवे जदा साहू (बृहद् द्रव्यसंग्रह 55) · अर्थ
- जं किं पि तेण दिण्णं, तं सव्वं सो करेदि सद्धाए (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 451) · अर्थ
- जं कुणदि भावमादा कत्ता सो होदि तस्स कम्मस्स (समयसार 126) · अर्थ
- जं कुणदि भावमादा कत्ता सो होदि तस्स भावस्स (समयसार 91) · अर्थ
- जं कूडसामलीए दुक्खं पत्तोसि जं च सूलम्मि (भगवती आराधना 1562) · अर्थ
- जं केवलं ति णाणं तं सोक्खं परिणमं च सो चेव (प्रवचनसार 60) · अर्थ
- जं खाविओसि अवसो लोहंगारे य पज्जलंते तं (भगवती आराधना 1565) · अर्थ
- जं गब्भवासकुणिमं कुणिमाहारं छुहादिदुक्खं च (भगवती आराधना 1596) · अर्थ
- जं चडवडिंतकरचरणंगो पत्तो सि वेदणं तिव्वं (भगवती आराधना 1575) · अर्थ
- जं च दिसावेरमणं अणत्थदंडेहिं जं च वेरमणं (भगवती आराधना 2075) · अर्थ
- जं चरदि सुद्धचरणं जाणइ णिच्छेइ सुद्धसम्मत्तं (अष्टपाहुड 11) · अर्थ
- जं छोडिओसि जं मोडिओसि जं फाडिओसि मलिदोसि (भगवती आराधना 1572) · अर्थ
- जं जं अक्खाण सुहं तं तं तिव्वं करेइ बहु-दुक्खं (रयणसार 130) · अर्थ
- जं जं करेइ कम्मं देही मणवयणकायचिठ्ठाहिं (लघु नयचक्र 43) · अर्थ
- जं जं सयमादरियं तं तं णिरूयायमेण अलिएण (भावसंग्रह 136) · अर्थ
- जं जस्स जम्मिदेसे, जेण विहाणेण जम्मि कालम्मि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 321) · अर्थ
- जं जस्स दु संठाणं चरिमसरीरस्स जोगजहणम्मि (भगवती आराधना 2129) · अर्थ
- जं जाइ-जरा-मरणं दुह-दुट्ठ-विसाहि-विस-विणासयरं (रयणसार 146) · अर्थ
- जं जाणइ तं णाणं जं पिच्छइ तं च दंसणं णेयं (अष्टपाहुड 37) · अर्थ
- जं जाणइ तं णाणं जं पेच्छइ तं च दंसणं भणियं (अष्टपाहुड 3) · अर्थ
- जं जाणिऊण जोई जोअत्थो जोइऊण अणवरयं (अष्टपाहुड 3) · अर्थ
- जं जाणिऊण जोई परिहारं कुणइ पुण्णपावाणं (अष्टपाहुड 42) · अर्थ
- जं जाणिज्जइ जीवो, इन्दियवावारकायचिट्ठाहिं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 267) · अर्थ
- जं जीवणिकायवहेण विणा इंदियकयं सुहं णत्थि (भगवती आराधना 810) · अर्थ
- जं णत्थि बंधहेदुं देहग्गहणं ण तस्स तेण पुणो (भगवती आराधना 2131) · अर्थ
- जं णत्थि सव्वबाधाओ तस्स सव्वं च जाणइ जदो से (भगवती आराधना 2140) · अर्थ
- जं णाणीण वियप्पं सुयभेयं वत्थुयंससंगहणं (लघु नयचक्र 2) · अर्थ
- जं णिज्जरेदि कम्मं असंवुडो सुमहदावि कालेण (भगवती आराधना 236) · अर्थ
- जं णिम्मलं सुधम्मं सम्मत्तं संजमं तवं णाणं (अष्टपाहुड 27) · अर्थ
- जं णीलमंडवे तत्तलोहपडिमाउले तुमे पत्तं (भगवती आराधना 1564) · अर्थ
- जंतं मंतं तंतं परिचरियं पक्खवाय-पियवयणं (रयणसार 28) · अर्थ
- जं तक्कालियमिदरं जाणदि जुगवं समंतदो सव्वं (प्रवचनसार 47) · अर्थ
- जं तु दिसावेरमणं गमणस्स दु जं च परिमाणं (धम्मरसायण 148) · अर्थ
- जंतेण कोद्दवं वा, पढमुवसमसम्मभावजंतेण (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 26) · अर्थ
- जं दव्वं तं ण गुणो जो वि गुणो सो ण तच्चमत्थादो (प्रवचनसार 108) · अर्थ
- जं दीहकालसंवासदाए ममकारणेहरागेण (भगवती आराधना 279) · अर्थ
- जं दुक्खं संपत्तो अणंतखुत्तो मणे सरीरे य (भगवती आराधना 1592) · अर्थ
- जं दुक्खु वि तं सुक्खु किउ जं सुहु तं पि य दुक्खु (पाहुडदोहा 11) · अर्थ
- जंपणपरिभवणियडिपरिवादरिपूरोगसोगधणणासो (भगवती आराधना 915) · अर्थ
- जं परदो विण्णाणं तं तु परोक्खं ति भणिदमट्ठेसु (प्रवचनसार 58) · अर्थ
- जं परमप्पय तच्चं तमेव विसकामतत्तमिह भणियं (णाणसार 48) · अर्थ
- जं परिमाणं कीरदि, दिसाण सव्वाणं सुप्पसिद्धाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 342) · अर्थ
- जंपरिमाणविरहिया परिग्गहा गिण्हिया मए आसि (धम्मरसायण 26) · अर्थ
- जं पाणयपरियम्मम्मि पाणयं छव्विहं समक्खादं (भगवती आराधना 708) · अर्थ
- जं पीयं सुरयाणं जं च जणो डंभियो मए सव्वो (धम्मरसायण 28) · अर्थ
- जं पुण रुपी दव्वं गंधरफास वण्ण संजुत्तं (भावसंग्रह 317) · अर्थ
- जं पुण संपइ गहियं एय अम्हेहि किंपि आयरणं (भावसंग्रह 150) · अर्थ
- जं पुणु सगयं तच्चं सवियप्पं हवइ तह य अवियप्पं (तत्त्वसार 5) · अर्थ
- जं पेच्छदो अमुत्तं मुत्तेसु अदिंदियं च पच्छण्णं (प्रवचनसार 54) · अर्थ
- जं बद्धमसंखेज्जाहिं रयं भवसदसहस्सकोडीहिं (भगवती आराधना 716) · अर्थ
- जंबूदीवं भरहं कोसलसागेदतग्घराइं वा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 195)
- जं भज्जिदोसि भज्जिदगंपि व जं गालिओसि रसयं व (भगवती आराधना 1569) · अर्थ
- जं भावं सुहमसुहं करेदि आदा स तस्स खलु कत्ता (समयसार 102) · अर्थ
- जं भासियं असच्चं तेणिक्कजं मए कयं आसि (धम्मरसायण 27) · अर्थ
- जं मया दिस्सदे रूवं तं ण जाणादि सव्वहा (अष्टपाहुड 29) · अर्थ
- जं रयणत्तय रहियं मिच्छमय कहियधम्म अणुलग्गं (भावसंग्रह 530) · अर्थ
- जं लिहिउ ण पुच्छिउ कहण जाइ, (पाहुडदोहा 167) · अर्थ
- जं वडमज्झहँ बीउ फुडु, बीयहँ वडु वि हु जाणु (योगसार 74) · अर्थ
- जं वत्थु अणयंतं, एयंतं तं पि होदि सविपेक्खं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 261) · अर्थ
- जं वत्थु अणेयंतं, तं चिय कज्जं करेदि णियमेण (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 225) · अर्थ
- जं वा गरहिदवयणं जं वा सावज्जसंजुदं वयणं (भगवती आराधना 823) · अर्थ
- जं वा दिसमुवणीदं सरीरयं खगचदुप्पदगणेहिं (भगवती आराधना 1992) · अर्थ
- जं वेलं कालगदो भिक्खू तं वेलमेव णीहरणं (भगवती आराधना 1968) · अर्थ
- जं संगहेण गहियं भेयइ अत्थं असुद्ध सुद्धं वा (लघु नयचक्र 37) · अर्थ
- जं सक्कइ तं कीरइ जं च ण सक्केइ तं च सद्दहणं (अष्टपाहुड 22) · अर्थ
- जं सवणं सत्थाणं, भंडणवसियरणकामसत्थाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 348) · अर्थ
- जं सव्वं पि पयासदि, दव्वपज्जायसंजुदं लोयं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 254) · अर्थ
- जं सव्वं पि य संतं, तासो वि असंतओ कहं होदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 251) · अर्थ
- जं सव्वलोयसिद्धं, देहं गेहादिबाहिरं अत्थं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 249) · अर्थ
- जं सव्वे देवगणा अच्छरसहिया सुहं अणुहवंति (भगवती आराधना 2144) · अर्थ
- जं सामण्णं गहणं भावाणं णेव कट्टुमायारं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 482)
- जं सामण्णं गहणं भावाणं णेव कट्टुमायारं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 43) · अर्थ
- जं सुत्तं जिणउत्तं ववहारो तह य जाण परमत्थो (अष्टपाहुड 6) · अर्थ
- जं सुद्धो तं अप्पा सकायरहिओ य कुणइ णहु किं पि (भावसंग्रह 433) · अर्थ
- जं सुहमसुहमुदिण्णं भावं रत्तो करेदि जदि अप्पा (पंचास्तिकाय 147) · अर्थ
- जं सुहमसुहमुदिण्णं संपडि य अणेयवित्थरविसेसं (समयसार 385) · अर्थ
- जं सुहु विसयपरंमुहउ णिय अप्पा झायंतु (पाहुडदोहा 4) · अर्थ
- जं होइ भुंजियव्वं कम्मं उदयस्स आणियं तवसा (तत्त्वसार 50) · अर्थ
- जं होदि अण्णदिट्ठं तं आलोचेदि गुरुसयासम्मि (भगवती आराधना 576) · अर्थ
- जइ इच्छइ उत्तरिदुं अज्झाणमहोवहिं सुलीलाए (लघु नयचक्र 86) · अर्थ
- जइ इच्छइ परमपयं अव्वावाहं अणोवमं सोक्खं (धम्मरसायण 131) · अर्थ
- जइ इच्छहि कम्मखयं सुण्णं धारेहि णियमणो झत्ति (आराधनासार 74) · अर्थ
- जइ ईसरणाम णरो भिक्खं भमिऊण भुंजए को वि (धम्मरसायण 129) · अर्थ
- जइ उप्पज्जइ दुक्खं कक्कससंथारगहणदोसेण (आराधनासार 94) · अर्थ
- जइ उवरत्थं तिजयं ता सो किं तत्थ वाणरा रिच्छा (भावसंग्रह 228) · अर्थ
- जइ एक्कहि पावीसि पिउ अक्किय कोडि करीसु (पाहुडदोहा 178) · अर्थ
- जइ एरिसो वि धम्मो तो पुण सो केरिसो हवे पावो (धम्मरसायण 18) · अर्थ
- जइ एरिसो वि मूढो परमप्पा वुच्चए एवं (धम्मरसायण 105) · अर्थ
- जइ एरिसो वि लोए कामुम्मत्तो वि होइ परमप्पो (धम्मरसायण 101) · अर्थ
- जइ एवं तो इत्थि धीवरि कल्लालि वेसअईणं (भावसंग्रह 97) · अर्थ
- जइ एवं तो पियरो सग्गं पत्तो वि जाइ णरयम्भि (भावसंग्रह 35) · अर्थ
- जइ कणय मज्ज कोद्दव महुरामोहेण मोहियो संतो (भावसंग्रह 15) · अर्थ
- जइ कहव तत्थ णिग्गइ उप्पज्जइ पुणु वि तिरियजोणिसु (भावसंग्रह 59) · अर्थ
- जइ कहवि कसायग्गी समुट्ठिदो होज्ज विज्झवेदव्वो (भगवती आराधना 265) · अर्थ
- जइ कह वि हु एयाइं पावइं सव्वाइं तो ण पावेई (भावसंग्रह 171) · अर्थ
- जइ खणियत्तो जीवो तरिहि भवे कस्य कम्मसंबन्धो (भावसंग्रह 64) · अर्थ
- जइ गिरिणई तलाए अणवरयं पविसए सलिल परिपुण्णं (भावसंग्रह 392) · अर्थ
- जइ गिहवंतो सिज्झइ अगहिय णिग्गंथलिंग सग्गंथो (भावसंग्रह 102) · अर्थ
- जइगुडधादइ जोए पिठरे जाएइ मज्जिरा सत्ती (भावसंग्रह 173) · अर्थ
- जइ चेयणा अणिच्चा तो किं चिरजाय वाहि समराई (भावसंग्रह 67) · अर्थ
- जइ जर-मरण-करालियउ, तो जिय धम्म करेहि (योगसार 46) · अर्थ
- जइ जलण्हाणपउत्ता जीवा मुच्चेइ णिययपावेण (भावसंग्रह 18) · अर्थ
- जइ जाय लिंगधारी विसयविरत्तो य णिहयसकसाओ (भावसंग्रह 192) · अर्थ
- जइ जीवेण सह च्चिय पोग्गलदव्वस्स कम्मपरिणामो (समयसार 139) · अर्थ
- जइ ण वि कुणदिच्छेदं ण मुच्चदे तेण बंधणवसो सं (समयसार 289) · अर्थ
- जइ णाणेण विसोहो सीलेण विणा बुहेहिं णिद्दिट्ठो (अष्टपाहुड 31) · अर्थ
- जइ णिक्कलो महप्पा विण्हू णिस्सेसकम्ममलचत्तो (भावसंग्रह 238) · अर्थ
- जइ णिम्मल अप्पा मुणइ, वय-संजम-संजुत्तु (योगसार 30) · अर्थ
- जइ णिम्मलु अप्पा मुणहि, छंडिवि सहु ववहारु (योगसार 37) · अर्थ
- जइ तप्पइ उग्गतवं मासे मासे य पारणं कुणइ (भावसंग्रह 92) · अर्थ
- जइ तिजयपालणत्थे संजाया तस्स एरिसी सत्ती (भावसंग्रह 231) · अर्थ
- जइ तुप्पं णवणीयं णवणीयं पुणवि होइजइ दुद्धं (भावसंग्रह 236) · अर्थ
- जइ ते हवंति देवा एए सव्वे वि हरिहराईया (धम्मरसायण 115) · अर्थ
- जइ ते होंती समत्था कत्थ गया पंडवाइया पुरिसा (भावसंग्रह 78) · अर्थ
- जइ तो वत्थब्भूओ रइओ लोओ विरंचिणा तिविहो (भावसंग्रह 219) · अर्थ
- जइ दंसणेण सुद्धा उत्ता मग्गेण सावि संजुत्ता (अष्टपाहुड 25) · अर्थ
- जइदा उच्चत्तादिणिदाणं संसारवड्ढणं होदि (भगवती आराधना 1233) · अर्थ
- जइदा खंडसिलोगेण जमो मरणादु फेडिदो राया (भगवती आराधना 771) · अर्थ
- जइ दुत्तदिण्णदाणे पियरा तिप्पंति चउगइ गया वि (भावसंग्रह 33) · अर्थ
- जइ दे कदा पमाणं अरहंतादी हवेज्ज खवएण (भगवती आराधना 1630) · अर्थ
- जइ देवयं देइ सुयं तो किं रुद्देण सेविया गउरी (भावसंग्रह 79) · अर्थ
- जइ देवो वि य रक्खदि, मंतो तंतो य खेत्तपालो य (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 25) · अर्थ
- जइ देवो हणिऊणं मंसं गणिऊण गम्मए सग्गं (भावसंग्रह 43) · अर्थ
- जइ पउमणंदिणाहो सीमंधरसामिदिव्वणाणेण (दर्शनसार 43) · अर्थ
- जइ पावइ उच्चत्तं चिरकालं पाविऊण णीयत्तं (धम्मरसायण 82) · अर्थ
- जइ पाहाण नरंदे लग्गो पुरिसो हु तरिणी तोये (भावसंग्रह 187) · अर्थ
- जइ पुज्जइ को वि णरो उद्धारित्ता गुरुवएसेण (भावसंग्रह 449) · अर्थ
- जइ पुण सुद्धसहावा, सव्वेजीवा अणाइकाले वि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 200) · अर्थ
- जइ फलइ कह वि दाणं कुच्छिय जाईहिं कुच्छिय सरीरं (भावसंग्रह 402) · अर्थ
- जइ बद्धउ मुक्कउ मुणहि, तो बंधियहि णिभंतु (योगसार 87) · अर्थ
- जइ बीहउ चउ-गइ-गमण, तो पर-भाव चएहि (योगसार 5) · अर्थ
- जइ भंडयारि पुरिसो धणं णिवारेइ रायणा दिण्णं (भावसंग्रह 338) · अर्थ
- जइ भाविज्जइ गंधेण मट्टिया सुरभिणा व इदरेण (भगवती आराधना 344) · अर्थ
- जइ मणइ को वि एवं गिहवावारेसु वट्टमाणो वि (भावसंग्रह 389) · अर्थ
- जइ मणि कोहु करिवि कलहिज्जइ (पाहुडदोहा 141) · अर्थ
- जइया इमेण जीवेण अप्पणो आसवाण य तहेव (समयसार 71) · अर्थ
- जइ या दहरइ पुत्तो रामो णिवसेइ दंडरइणम्मि (भावसंग्रह 226) · अर्थ
- जइया मणु णिग्गंथु जिय, तइया तुहुँ णिग्गंथु (योगसार 73) · अर्थ
- जइया स एव संखो सेदसहावं तयं पजहिदूण (समयसार 222) · अर्थ
- जइ रायकुलपसूओ जोग्गं णिच्चमवि कुणइ परियम्मं (भगवती आराधना 20) · अर्थ
- जइ लद्धउ माणिक्कडउ जोइय पुहवि भमंत (पाहुडदोहा 217) · अर्थ
- जइ वंभो कुणइ जयं तो किं सग्गिंदरज्ज कज्जेण (भावसंग्रह 204) · अर्थ
- जइ वारउं तो तहिं जि पर अप्पहं मणु ण धरेइ (पाहुडदोहा 119) · अर्थ
- जइ वि खिविज्जे कोई णरए गिरिरायमेत्तलोहुंडं (धम्मरसायण 67) · अर्थ
- जइ विबिकरिओ रइओ विज्जाथामेण तेणवंभेण (भावसंग्रह 220) · अर्थ
- जइ विसयलोलएहिं णाणीहि हविज्ज साहिदो मोक्खो (अष्टपाहुड 30) · अर्थ
- जइ वि सुजायं बीयं ववसाय पउत्तओ बिजइ कसओ (भावसंग्रह 401) · अर्थ
- जइ संति तस्स दोसा केत्तियमित्ता छुहाइ जे भणिया (भावसंग्रह 109) · अर्थ
- जइ सग्गन्थो मुक्खं तित्थयरो किं मुंचहि णियरज्जे (भावसंग्रह 88) · अर्थ
- जइ सव्व देवयाओ मणुयं रक्खंति पुज्जियाओ य (भावसंग्रह 82) · अर्थ
- जइ हुंति कहवि जइणो उवसग्गा बहुविहा हु दुहजणया (आराधनासार 47) · अर्थ
- जइ होइ एयमुत्ती बम्हाण तिलोयणाय महुमहणो (धम्मरसायण 110) · अर्थ
- जक्खय णायाईणं दुग्गाखंधाइ अण्णदेवाणं (भावसंग्रह 75) · अर्थ
- जच्चंधबहिरमूओ छादो तिसिओ वणे व एयाई (भगवती आराधना 1782) · अर्थ
- जडसब्भावो णहु मे जह्मा तं जाण भिण्णजडदव्वे (लघु नयचक्र 81) · अर्थ
- जणणमरणादिरोगादुरस्स सुतवो वरोसधं होदि (भगवती आराधना 1456) · अर्थ
- जणणी वसंततिलया भगिणी कमला य आसि भज्जाओ (भगवती आराधना 1794) · अर्थ
- जणपायडो वि दोसो दोसोत्ति ण घेप्पए सभागस्स (भगवती आराधना 1428) · अर्थ
- जणवदसंउदिट्ठवणाणामे रूवे पडुच्चववहारे (गोम्मटसार जीवकाण्ड 222)
- जत्तस्स पहं ठत्तस्स आसणं णिवसगस्स वसदी वा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 567)
- जत्तासाधणचिह्नकरणं खु जगपच्चयादठिदिकरणं (भगवती आराधना 81) · अर्थ
- जत्तो दिसाए गामो तत्तो सीसं करित्तु सोवधियं (भगवती आराधना 1980) · अर्थ
- जत्तो पाणवधादी दोसा जायंति सावज्जवयणं च (भगवती आराधना 825) · अर्थ
- जत्थ गुणा सुविसुद्धा, उवसमखमणं च जत्थ कम्माणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 481) · अर्थ
- जत्थ ण कटयभग्गो पाए णयणम्मि रय पविट्ठम्मि (भावसंग्रह 120) · अर्थ
- जत्थ ण करणं चिंता अक्खर रूवं ण धारणा धेयं (भावसंग्रह 629) · अर्थ
- जत्थ ण कलयलसद्दो, वहुजणसंघट्टणं ण जत्थत्थि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 353) · अर्थ
- जत्थ ण जादो ण मदो हवेज्ज जीवो अणंतसो चेव (भगवती आराधना 1770) · अर्थ
- जत्थ ण झाणं झेयं झायारो णेव चिंतणं किंपि (आराधनासार 78) · अर्थ
- जत्थ ण विसोत्तिग अत्थि दु सद्दरसरूवगन्धफासेहिं (भगवती आराधना 230) · अर्थ
- जत्थ ण होज्ज तणाइं चुण्णेहिं वि तत्थ केसरेहिं वा (भगवती आराधना 1978) · अर्थ
- जत्थ वहो जीवाणं भासिज्जइ जत्थ अलियवयणं च (धम्मरसायण 15) · अर्थ
- जत्थेक्क मरइ जीवो तत्थ दु मरणं हवे अणंताणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 193)
- जत्थेव चरइ बालो परिहारण्हू वि चरइ तत्थेव (भगवती आराधना 1197) · अर्थ
- जदणाए जोगपरिभाविदस्स जिणवयणमणुगदमणस्स (भगवती आराधना 197) · अर्थ
- जदणेण कुणइ पावं, विसयणिमित्तं हि अहणिसं जीवो (बारस अणुवेक्खा 34) · अर्थ
- जदा विमुंचए चेदा कम्मफलमणंतयं (समयसार 315) · अर्थ
- जदि अधिबाधिज्ज तुमं णिद्दा तो तं करेहि सज्झायं (भगवती आराधना 1435) · अर्थ
- जदि कुणदि कायखेदं वेज्जावच्चत्थमुज्जदो समणो (प्रवचनसार 250) · अर्थ
- जदि कोइ मेरुमत्तं लोहुण्डं पक्खिविज्ज णिरयम्मि (भगवती आराधना 1558) · अर्थ
- जदि जीवादो भिण्णं, सव्वपयारेण हवदि तं णाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 179) · अर्थ
- जदि जीवो ण सरीरं तित्थयरायरियसंथुदी चेव (समयसार 26) · अर्थ
- जदि ण य हवेदि जीओ, ता को वेदेदि सुक्खदुक्खाणि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 183) · अर्थ
- जदि ण हवदि सव्वण्हू, ता को जाणदि अदिदियं अत्थं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 303) · अर्थ
- जदि ण हवदि सा सत्ती, सहावभूदा हि सव्वदव्वाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 215) · अर्थ
- जदि तस्स उत्तमंगं दिस्सदि दंता च उवरिगिरिसिहरे (भगवती आराधना 1993) · अर्थ
- जदि तारिसया तण्हा छुधा य अवसेण ते तदा सोढा (भगवती आराधना 1602) · अर्थ
- जदि तारिसाओ तुम्हे सोढाओ वेदणाओ अवसेण (भगवती आराधना 1599) · अर्थ
- जदि ते ण संति अट्ठा णाणे णाणं ण होदि सव्वगयं (प्रवचनसार 31) · अर्थ
- जदि ते विसयकसाया पाव त्ति परूविदा व सत्थेसु (प्रवचनसार 258) · अर्थ
- जदि तेसिं वाघादो दट्ठव्वा पुव्वदक्खिणा होइ (भगवती आराधना 1966) · अर्थ
- जदि दव्वे पज्जाया, वि विज्जमाणा तिरोहिदा संति (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 243) · अर्थ
- जदिदा अभूदपुव्वं अण्णेसिं दुक्खमप्पणो चेव (भगवती आराधना 1625) · अर्थ
- जदिदा एवं एदे अणगारा तिव्ववेदणट्टा वि (भगवती आराधना 1553) · अर्थ
- जदि दा जणेइ मेहुणसेवा प्पवंस दारम्मि (भगवती आराधना 922) · अर्थ
- जदिदा तह अण्णाणी संसारपवड्ढणाए लेस्साए (भगवती आराधना 1525) · अर्थ
- जदिदा रोगा एक्कम्मि चेव अच्छिम्मि होंति छण्णउदी (भगवती आराधना 1048) · अर्थ
- जदि दाव विहिंसज्जइ बत्थीए मुहं परस्स आलेद्टुं (भगवती आराधना 1015) · अर्थ
- जदि दा विहिंसदि णरो आलद्धुं पडिदमप्पणो खेलं (भगवती आराधना 1043) · अर्थ
- जदिदा सवदि असंतेण परो तं णत्थि मेत्ति खमिदव्वं (भगवती आराधना 1415) · अर्थ
- जदि दा सुभाविदप्पा वि चरिमकालम्मि संकिलेसेण (भगवती आराधना 1942) · अर्थ
- जदि दिवसे संचिट्ठदि तमणालद्धं च अक्खदं मडयं (भगवती आराधना 1991) · अर्थ
- जदि धरिसणमेरिसयं करेदि सिस्सस्स चेव आयरिओ (भगवती आराधना 496) · अर्थ
- जदि पच्चक्खमजादं पज्जायं पलयिदं च णाणस्स (प्रवचनसार 39) · अर्थ
- जदि पढदि बहु सुदाणि य जदि काहिदि बहुविहं च चारित्तं (अष्टपाहुड 100) · अर्थ
- जदि पवयणस्स सारो मरणे आराहणा हवदि दिट्ठा (भगवती आराधना 18) · अर्थ
- जदि पोग्गलकम्ममिणं कुव्वदि तं चेव वेदयदि आदा (समयसार 85) · अर्थ
- जदि मूलगुणे उत्तरगुणे य कस्सइ विराहणा होज्ज (भगवती आराधना 586) · अर्थ
- जदि वत्थुदो विभेदो, पज्जयदव्वाण मण्णसे मूढ़ (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 246) · अर्थ
- जदि वा एस ण कीरेज्ज विधि तो तत्थ देवदा कोई (भगवती आराधना 1971) · अर्थ
- जदि वा सवेज्ज संतेण परो तह वि पुरिसेण खमिदव्वं (भगवती आराधना 1416) · अर्थ
- जदि वि कहंचि वि गंथा संचीएजण्ह तह वि से णत्थि (भगवती आराधना 1136) · अर्थ
- जदि विक्खादा भत्तपइण्णा अज्जा व होज्ज कालगदा (भगवती आराधना 1973) · अर्थ
- जदि वि य से चरिमंते समुदीरदि मारणंतियमसायं (भगवती आराधना 1685) · अर्थ
- जदि वि विकिंचादि जंतू दोसा ते चेव हुंति से लग्गा (भगवती आराधना 1155) · अर्थ
- जदि विसमो संथारो उवरिं मज्झे व होज्ज हेट्ठा वा (भगवती आराधना 1979) · अर्थ
- जदि वि सयं थिरबुद्धी तहा वि संसग्गिलद्धपसराए (भगवती आराधना 335) · अर्थ
- जदि विसयगंधहत्थी अदिणिज्जदि रागदोसमयमत्ता (भगवती आराधना 1406) · अर्थ
- जदि संति हि पुण्णाणि य परिणामसमुब्भवाणि विविहाणि (प्रवचनसार 74) · अर्थ
- जदि सक्कदि कादुं जे पडिकमणादिं करेज्ज झाणमयं (नियमसार 154) · अर्थ
- जदि सत्तरिस्स एत्तियमेत्तं किं होदि तीसियादीणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 145) · अर्थ
- जदि सव्वमेव णाणं, णाणारूवेहि संठिदं एक्कं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 247) · अर्थ
- जदि सो तत्थ मरिज्जो गंथो भोगा य कस्स ते होज्ज (भगवती आराधना 1131) · अर्थ
- जदि सो परदव्वाणि य करेज्ज णियमेण तम्मओ होज्ज (समयसार 99) · अर्थ
- जदि सो पोग्गलदव्वीभूदो जीवत्तमागदं इदरं (समयसार 25) · अर्थ
- जदि सो सुहो व असुहो ण हवदि आदा सयं सहावेण (प्रवचनसार 46) · अर्थ
- जदि हवदि गमणहेदू आगासं ठाणकारणं तेसिं (पंचास्तिकाय 94) · अर्थ
- जदि हवदि दव्वमण्णं गुणदो य गुणा य दव्वदो अण्णे (पंचास्तिकाय 44) · अर्थ
- जदि होज्ज मच्छियापत्तसरिसियाए णो थगिदं (भगवती आराधना 1033) · अर्थ
- जध इंधणेहिं अग्गी लवणसमुद्दो णदीसहस्सेहिं (भगवती आराधना 1137) · अर्थ
- जध उग्गविसो उरगो दब्भतणंकुरहदो पकुप्पंतो (भगवती आराधना 1362) · अर्थ
- जध करिसयस्स धण्णं वरिसेण समज्जिदं खलं पत्तं (भगवती आराधना 1361) · अर्थ
- जध कोडिसमिद्धो वि ससल्लो ण लभदि सरीरणिव्वाणं (भगवती आराधना 1376) · अर्थ
- जधजादरूवजादं उप्पाडिदकेसमंसुगं सुद्धं (प्रवचनसार 205) · अर्थ
- जध तंडुलस्स कोण्डयसोधी सतुसस्स तीरदि ण कादुं (भगवती आराधना 1911) · अर्थ
- जध ते णभप्पदेसा तधप्पदेसा हवंति सेसाणं (प्रवचनसार 137) · अर्थ
- जध भिक्खं हिंडंतो मउडादि अलंकिदो गहिदसत्थो (भगवती आराधना 1329) · अर्थ
- जध सण्णद्धो पग्गहिदचावकंडो रधी पलायंतो (भगवती आराधना 1328) · अर्थ
- ज पुणु वि निरालंबं तं झाणं गयपमाय गुणठाणे (भावसंग्रह 381) · अर्थ
- जमणिच्छंती महिलं अवसं परिभुंजदे जहिच्छाए (भगवती आराधना 925) · अर्थ
- जम्मं खलु संमुच्छणगब्भुववादा दु होदि तज्जोणी (गोम्मटसार जीवकाण्ड 83)
- जम्मंधमूयबहिरो उप्पजइ सो फलेण पावस्स (धम्मरसायण 83) · अर्थ
- जम्मं मरणेण समं, संपज्जइ जोव्वणं जरासहियं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 5) · अर्थ
- जम्मजरमरणतिदयं जम्हा दड्ढं जिणेण णिस्सेसं (धम्मरसायण 136) · अर्थ
- जम्मणअभिणिक्खवणे णाणुप्पत्ती य तित्थचिण्हणिसिहीओ (भगवती आराधना 145) · अर्थ
- जम्मणमरणजलोघं दुक्खसंकिलेससोगवीचीयं (भगवती आराधना 2152) · अर्थ
- जम्मण-मरणविमुक्का अप्पपएसेहिं सव्वसामण्णा (तत्त्वसार 38) · अर्थ
- जम्मसमुद्दे बहुदोसवीचिए दुक्खजलचराकिण्णे (बारस अणुवेक्खा 56) · अर्थ
- जम्मसमुद्दे बहुदोसवीचिए दुक्खजलयराइण्णे (भगवती आराधना 1815) · अर्थ
- जम्हा अरिहंत हवइ णिराउहो णिब्भओ हवे तम्हा (धम्मरसायण 132) · अर्थ
- जम्हा असच्चवयणादिएहिं दुक्खं परस्स होदित्ति (भगवती आराधना 790) · अर्थ
- जम्हा उवरिट्ठाणं सिद्धाणं जिणवरेहिं पण्णत्तं (पंचास्तिकाय 93) · अर्थ
- जम्हा उवरिमभावा हेट्ठिमभावेहिं सरिसगा होंति (गोम्मटसार जीवकाण्ड 48)
- जम्हा कम्मं कुव्वदि कम्मं देदि हरदि त्ति जं किंचि (समयसार 335) · अर्थ
- जम्हा कम्मस्स फलं विसयं फासेहिं भुंजदे णियदं (पंचास्तिकाय 133) · अर्थ
- जम्हा घादेदि परं परेण घादिज्जदे य सा पयडी (समयसार 338) · अर्थ
- जम्हा चरित्तसारो भणिया आराहणा पवयणम्मि (भगवती आराधना 14) · अर्थ
- जम्हा छुहतण्हाओ तस्स ण पीडंति परमघोराओ (धम्मरसायण 133) · अर्थ
- जम्हा जाणदि णिच्चं तम्हा जीवो दु जाणगो णाणी (समयसार 403) · अर्थ
- जम्हा णिग्गंथो सो वादादवसीददंसमसयाणं (भगवती आराधना 1166) · अर्थ
- जम्हा दु अत्तभावं पोग्गलभावं च दो वि कुव्वंति (समयसार 86) · अर्थ
- जम्हा दु जहण्णादो णाणगुणादो पुणो वि परिणमदि (समयसार 171) · अर्थ
- जम्हा पंच पहाणा भावा अत्थित्ति सुत्त णिद्दिट्ठा (भावसंग्रह 271) · अर्थ
- जम्हा सुदं वितक्कं जम्हा पुव्वगदअत्थकुसलो य (भगवती आराधना 1875) · अर्थ
- जम्हा सुदं वितक्कं जम्हा पुव्वगदअत्थकुसलो य (भगवती आराधना 1878) · अर्थ
- जम्हि भवे जे देहं तम्हि भवे तप्पमाणओ अप्पा (भावसंग्रह 295) · अर्थ
- जम्हि य वारिदमेत्ते सव्वे संसारकारया दोसा (भगवती आराधना 140) · अर्थ
- जयमंगलभूदाणं विमलाणं गाणदंसणमयाणं (दश भक्ति पाठ 6)
- जरइ ण मरइ ण संभवइ जो परि को वि अणंतु (पाहुडदोहा 55) · अर्थ
- जरउद्दसेय अंडय सव्वे एयाइं भूयगामाइं (भावसंग्रह 205) · अर्थ
- जरमरणजम्मरहिओ कम्मविहीणो विमुक्कवावारो (णाणसार 33) · अर्थ
- जर-मरण-जम्म-रहिदा, ते सिद्धा मम सुभत्ति-जुत्तस्स (अट्ठविह कम्म मुक्के 11)
- जरवग्धिणी ण चंपइ जाम ण वियलाइ हुंति अक्खाइं (आराधनासार 25) · अर्थ
- जरवाहिजम्ममरणं चउगइगमणं च पुण्णपावं च (अष्टपाहुड 30) · अर्थ
- जरवाहिदुक्खरहियं आहारणिहारवज्जियं विमलं (अष्टपाहुड 37) · अर्थ
- जरसोय वाहि वेअण कासं सासं च जिंभणं छिक्का (भावसंग्रह 592) · अर्थ
- जलथलआयासयले सव्वेसु वि पव्वएसु रुक्खेसु (धम्मरसायण 106) · अर्थ
- जलथलसिहिपवणंवरगिरिसरिदरितरुवणाइ सव्वत्थ (अष्टपाहुड 21) · अर्थ
- जलबुब्बुद-सक्कधणु-खणरुचि-घणसोहमिव थिरं ण हवे (बारस अणुवेक्खा 5) · अर्थ
- जल बुब्बुय-सारिच्छं, धणजोव्वण जीवियं पि पेच्छंता (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 21) · अर्थ
- जलमलमइलिअंगा पावमलविवज्जिया महामुणिणो (धम्मरसायण 187) · अर्थ
- जल वरिसणवा याई गमणे भग्गे य जम्म छम्मासं (भावसंग्रह 121) · अर्थ
- जलिदो हु कसायग्गी चरित्तसारं डहेज्ज कसिणं पि (भगवती आराधना 268) · अर्थ
- जल्लमललित्तगत्तो, दुस्सहवाहीसु णिप्पडीयारो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 465) · अर्थ
- जल्लविलित्तो देहो लुक्खो लोयकदवियडबीभत्थो (भगवती आराधना 94) · अर्थ
- जसकित्ति-पुण्णलाहे देइ सुबहुगं पि जत्थ तत्थेव (रयणसार 27) · अर्थ
- जसरह-रायस्स सुआ पञ्चसया कलिंग-देसम्मि (निर्वाणकाण्ड 18)
- जसु जीवंतहं मणु मुवउ पंचेंदियहं समाणु (पाहुडदोहा 124) · अर्थ
- जसु मणि णाणु ण विप्फुरइ कम्महं हेउ करंतु (पाहुडदोहा 25) · अर्थ
- जसु मणि णाणु ण विप्फुरइ सव्व वियप्प हणंतु (पाहुडदोहा 66) · अर्थ
- जसु मणि णिवसइ परमपउ सयलइं चिंत चवेवि (पाहुडदोहा 67) · अर्थ
- जस्स अणेसणमप्पा तं पि तवो तप्पडिच्छगा समणा (प्रवचनसार 227) · अर्थ
- जस्स गुरू सुरहिसुओ गं तोएण फिट्टए हच्चा (भावसंग्रह 251) · अर्थ
- जस्स जदा खलु पुण्णं जोगे पावं च णत्थि विरदस्स (पंचास्तिकाय 143) · अर्थ
- जस्स ण कोहो माणो माया लोहो य सल्ल लेस्साओ (तत्त्वसार 19) · अर्थ
- जस्स ण गया ण चक्कं णो संखो णेय गोविसंघाओ (भावसंग्रह 276) · अर्थ
- जस्स ण गोरी गंगा कावालं णेव विसहरो कंठे (भावसंग्रह 275) · अर्थ
- जस्सण णहगामित्तं पायविलेवो ण ओसही लेवो (भावसंग्रह 611) · अर्थ
- जस्स ण तवो ण चरणं ण चावि जस्सत्थि वर गुणो कोई (भावसंग्रह 531) · अर्थ
- जस्स ण विज्जदि रागो दोसो मोहो व जोगपरिकम्मो (पंचास्तिकाय 146) · अर्थ
- जस्स ण विज्जदि रागो दोसो मोहो व सव्वदव्वेसु (पंचास्तिकाय 142) · अर्थ
- जस्स ण संति पदेसा पदेसमेत्तं व तच्चदो णादुं (प्रवचनसार 144) · अर्थ
- जस्स त्थि भयं वि(चि) त्ते सो गिण्हइ आउहं करग्गेणा (धम्मरसायण 116) · अर्थ
- जस्स परिग्गहगहणं अप्पं बहुयं च हवइ लिंगस्स (अष्टपाहुड 19) · अर्थ
- जस्स पुण उत्तमट्ठमरणम्मि भत्ती ण विज्जदे तस्स (भगवती आराधना 683) · अर्थ
- जस्स पुण मिच्छदिट्ठिस्स णत्थि सीलं वदं गुणो चावि (भगवती आराधना 60) · अर्थ
- जस्स य कदेण जीवा संसारमणंतयं परिभमंति (भगवती आराधना 139) · अर्थ
- जस्स रडंतस्स पुणो उण्हाए णिक्खंति सिगदाए (धम्मरसायण 43) · अर्थ
- जस्स रागो दु दोसो दु विगडिं ण जणेइ दु (नियमसार 128) · अर्थ
- जस्स वि अव्वभिचारी दोसो तिट्ठाणिगो विहारम्मि (भगवती आराधना 77) · अर्थ
- जस्स सण्णिहिदो अप्पा संजमे णियमे तवे (नियमसार 127) · अर्थ
- जस्स हिदएणुमेत्तं वा परदव्वम्हि विज्जदे रागो (पंचास्तिकाय 167) · अर्थ
- जहं जहं पीडा जायइ भुक्खाइपरीसहेहिं देहस्स (आराधनासार 96) · अर्थ
- जहं जहं विसएसु रई पसमइ पुरिसस्स णाणमासिज्ज (आराधनासार 66) · अर्थ
- जह अणियट्टि पउत्तं खाइय उवसमिय सेढि संजुत्तं (भावसंग्रह 652) · अर्थ
- जह अप्पणो गणस्य य संघस्स य वित्थुदा हवदि कित्ती (भगवती आराधना 1478) · अर्थ
- जह आइच्चमुदिंतं कोई वारंतओ जगे णत्थि (भगवती आराधना 1735) · अर्थ
- जह इंधणेहिं अग्गी जह य समुद्दो णदीसहस्सेहिं (भगवती आराधना 1649) · अर्थ
- जह इंधणेहिं अग्गी वड्ढइ विज्झाइ इंधणेहिं विणा (भगवती आराधना 1907) · अर्थ
- जह इंधणेहि अग्गी जह व समुद्दो णदीसहस्सेहिं (भगवती आराधना 1258) · अर्थ
- जह कंचणं विसुद्धं धम्मइयं खडियलवणलेवेण (अष्टपाहुड 9) · अर्थ
- जह कंचणमग्गिगयं मुंचइ किट्टेण कालियाए य (गोम्मटसार जीवकाण्ड 203)
- जह कंटएण विद्धो सव्वंगे वेदणुद्धुदो होदि (भगवती आराधना 538) · अर्थ
- जह कंसियभिंगारो अंतो णीलमइलो बहिं चोक्खो (भगवती आराधना 581) · अर्थ
- जह कणयमग्गितवियं पि कणयभावं ण तं परिच्चयदि (समयसार 184) · अर्थ
- जह कवचेण अभिज्जेण कवचिओ रणमुहम्मि सत्तूणं (भगवती आराधना 1676) · अर्थ
- जह कालेण तवेण य भुत्तरसं कम्मपुग्गलं जेण (बृहद् द्रव्यसंग्रह 36) · अर्थ
- जह कुंडओ ण सक्को सोधेदुं तंदुलस्स सतुसस्स (भगवती आराधना 1114) · अर्थ
- जह कुणइ को वि भेयं पाणिय-दुद्धाण तक्कजोएणं (तत्त्वसार 24) · अर्थ
- जह कोइ तत्तलोहं गहाय रुट्ठो परं हणामित्ति (भगवती आराधना 1356) · अर्थ
- जह कोइ लोहिदकयं वत्थं धोवेज्ज लोहिदेणेव (भगवती आराधना 606) · अर्थ
- जह कोडिल्लो अग्गिं तप्पंतो णेव उवसमं लभदि (भगवती आराधना 1245) · अर्थ
- जह को वि णरो जंपदि अम्हं गामविसयणयररट्ठं (समयसार 325) · अर्थ
- जह कोसुं भय वत्थं होइ सया सुहुमराग स जुत्तं (भावसंग्रह 654) · अर्थ
- जहखादसंजमो पुण उवसमदो होदि मोहणीयस्स (गोम्मटसार जीवकाण्ड 468)
- जह गहिदवेयणो वि य अदयाकज्जे णिउज्जदे भिच्चो (भगवती आराधना 1470) · अर्थ
- जह चिरकालो लग्गइ अतिक्ख परसेण रुकव विच्छेए (भावसंग्रह 647) · अर्थ
- जह चेट्ठं कुव्वंतो दु सिप्पिओ णिच्चदुक्खिओ होदि (समयसार 355) · अर्थ
- जह जह गुणपरिणामो तह तह आरुहइ धम्मगुणसेढिं (भगवती आराधना 317) · अर्थ
- जह जह णिव्वेदसमं वेरग्गदयादमा पवड्ढंति (भगवती आराधना 1858) · अर्थ
- जह जह भुंजइ भोगे तह तह भोगेसु वड्ढदे तण्हा (भगवती आराधना 1256) · अर्थ
- जह जह मणसंचारा इंदियविसया वि उवसमं जंति (तत्त्वसार 30) · अर्थ
- जह जह मण्णेइ णरो तह तह परिभवइ तं णरं महिला (भगवती आराधना 952) · अर्थ
- जह जह वड्ढइ लच्छी तह तह दाणाइं देह पत्तेसु (भावसंग्रह 568) · अर्थ
- जह जह वयपरिणामो तह तह णस्सदि णरस्स बलरूवं (भगवती आराधना 1065) · अर्थ
- जहजायरूवरूवं सुसंजयं सव्वसंगपरिचत्तं (अष्टपाहुड 91) · अर्थ
- जहजायरूवसरिसा अवलंबियभुय णिराउहा संता (अष्टपाहुड 51) · अर्थ
- जहजायरूवसरिसो तिलतुसमेत्तं ण गिहदि हत्थेसु (अष्टपाहुड 18) · अर्थ
- जह जीवस्स अणण्णुवओगो कोहो वि तह जदि अणण्णो (समयसार 113) · अर्थ
- जह जीवो कुणइ रइं, पुत्तकलत्तेसु कामभोगेसु (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 426) · अर्थ
- जह ण करेदि तिगिंछं वाधिस्स तिगिंछओ अणिम्मादो (भगवती आराधना 455) · अर्थ
- जह ण विभुंजइ रज्जं राओ गिहभेयणेण परिहीणो (लघु नयचक्र 7) · अर्थ
- जह णवि लहदि हु लक्खं रहिओ कंडस्स वेज्झयविहीणो (अष्टपाहुड 21) · अर्थ
- जह ण वि सक्कमणज्जो अणज्जभासं विणा दु गाहेदुं (समयसार 8) · अर्थ
- जह णाम कोवि पुरिसो कुच्छियसीलं जणं वियाणित्ता (समयसार 148) · अर्थ
- जह णाम को वि पुरिसो णेहब्भत्तो दु रेणुबहुलम्मि (समयसार 237) · अर्थ
- जह णाम कोवि पुरिसो परदव्वमिणं ति जाणिदुं चयदि (समयसार 35) · अर्थ
- जह णाम को वि पुरिसो बंधणयम्हि चिरकालपडिबद्धो (समयसार 288) · अर्थ
- जह णाम को वि पुरिसो रायाणं जाणिऊण सद्दहदि (समयसार 17) · अर्थ
- जह णाम दव्वसल्ले अणुद्धुदे वेदणुद्दिदो होदि (भगवती आराधना 466) · अर्थ
- जह णावा णिच्छिदा गुणमइया विविह रयण परिपुण्णा (भावसंग्रह 509) · अर्थ
- जह णीरं उच्छुगयं कालं परिणवइ अमिय रूवेण (भावसंग्रह 503) · अर्थ
- जह णीरसं पि कडुयं ओसहं जीविदत्थिओ पिबदि (भगवती आराधना 1409) · अर्थ
- जह तं अपुव्वणामं अणियट्टी तह य होई णायव्वं (भावसंग्रह 649) · अर्थ
- जह तारयाण चंदो मयराओ मयउलाण सव्वाणं (अष्टपाहुड 144) · अर्थ
- जह तारायणसहियं ससहरबिंबं खमंडले विमले (अष्टपाहुड 146) · अर्थ
- जह ते ण पियं दुक्खं तहेव तेसिंपि जाण जीवाणं (भगवती आराधना 776) · अर्थ
- जहदि य णिययं दोसं पि दुज्जणो सुयणवइयरगुणेण (भगवती आराधना 352) · अर्थ
- जह दीवो गब्भहरे मारुयबाहाविवज्जिओ जलइ (अष्टपाहुड 123) · अर्थ
- जह धरिसिदो इमो तह अम्हं पि करिज्ज धरिसणमिमोत्ति (भगवती आराधना 494) · अर्थ
- जह पउमराय रयणं खित्तं खीरे पभासयदि खीरं (पंचास्तिकाय 33) · अर्थ
- जह पक्खुभिदुम्मीए पोदं रदणभरिदं समुद्दम्मि (भगवती आराधना 505) · अर्थ
- जह पढमं तह विदियं तदियं णिस्सेणियव्व चडमाणो (णाणसार 38) · अर्थ
- जह पत्थरो ण भिज्जइ परिट्ठिओ दीहकालमुदएण (अष्टपाहुड 95) · अर्थ
- जह पत्थरो पडंतो खोभेइ दहे पसण्णमवि पंकं (भगवती आराधना 1908) · अर्थ
- जह परदव्वं सेडदि हु सेडिया अप्पणो सहावेण (समयसार 361) · अर्थ
- जह परदव्वं सेडदि हु सेडिया अप्पणो सहावेण (समयसार 362) · अर्थ
- जह परदव्वं सेडदि हु सेडिया अप्पणो सहावेण (समयसार 363) · अर्थ
- जह परदव्वं सेडदि हु सेडिया अप्पणो सहावेण (समयसार 364) · अर्थ
- जह परमण्णस्स विसं विणासयं जह व जोव्वणस्स जरा (भगवती आराधना 839) · अर्थ
- जह पव्वदेसु मेरू उच्चावो होइ सव्वलोयम्मि (भगवती आराधना 784) · अर्थ
- जह पुण सो चेव णरो णेहे सव्वम्हि अवणिदे संते (समयसार 242) · अर्थ
- जह पुण सो च्चिय पुरिसो वित्तिणिमित्तं ण सेवदे रायं (समयसार 226) · अर्थ
- जह पुण्णापुण्णाइं गिहघडवत्थादियाइ दव्वाइं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 118)
- जह पुरिसेणाहारो गहिदो परिणमदि सो अणेयविहं (समयसार 179) · अर्थ
- जह पोग्गलदव्वाणं बहुप्पयारेहिं खंधणिव्वत्ती (पंचास्तिकाय 66) · अर्थ
- जह फणिराओ सोहइ फणमणिमाणिक्ककिरणविप्फुरिओ (अष्टपाहुड 145) · अर्थ
- जह फलिहमणि विसुद्धो परदव्वजुदो हवेइ अण्णं सो (अष्टपाहुड 51) · अर्थ
- जह फलिहमणी सुद्धो ण सयं परिणमदि रागामादीहिं (समयसार 278) · अर्थ
- जह फुल्लं गंधमयं भवति हु खीरं स घियमयं चावि (अष्टपाहुड 15) · अर्थ
- जह बंधे चिंतंतो बंधणबद्धो ण पावदि विमोक्खं (समयसार 291) · अर्थ
- जह बंधे छेत्तूण य बंधणबद्धो दु पावदि विमोक्खं (समयसार 292) · अर्थ
- जह बालो जंपंतो कज्जमकज्जं व उज्जुअं भणइ (भगवती आराधना 549) · अर्थ
- जह बाहिरलेस्साओ किण्हादीओ हवंति पुरिसस्स (भगवती आराधना 1901) · अर्थ
- जह बीयम्मि य दड्ढे ण वि रोहइ अंकुरो य महिवीढे (अष्टपाहुड 126) · अर्थ
- जह भारवहो पुरिसो वहइ भरं गेण्हियूण कावलियं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 202)
- जह भेसजं पि दोसं आवहइ विसेण संजुदं संतं (भगवती आराधना 57) · अर्थ
- जह मक्कडओ खणमवि मज्झत्थो अत्थिदुं ण सक्केइ (भगवती आराधना 763) · अर्थ
- जह मक्कडओ धादो वि फलं दट्ठूण लोहिदं तस्स (भगवती आराधना 848) · अर्थ
- जह मज्जं पिबमाणो अरदीभावेण मज्जदि ण पुरिसो (समयसार 196) · अर्थ
- जह मारुओ पवड्ढइ खणेण वित्थरइ अब्भयं च जहा (भगवती आराधना 850) · अर्थ
- जह मूलम्मि विणट्ठे दुमस्स परिवार णत्थि परवड्ढी (अष्टपाहुड 10) · अर्थ
- जह मूलाओ खंधो साहापरिवार बहुगुणो होइ (अष्टपाहुड 11) · अर्थ
- जह रयणाणं पवरं वज्जं जह तरुगणाण गोसीरं (अष्टपाहुड 82) · अर्थ
- जह रयणाण वइरं सेलेसु य उत्तमो जहा मेरू (भावसंग्रह 526) · अर्थ
- जह रससिद्धो वाई हेमं काऊण भुंजये भोगं (लघु नयचक्र 77) · अर्थ
- जह राया ववहारा दोसगुणुप्पादगो त्ति आलविदो (समयसार 108) · अर्थ
- जह लोहणासणट्ठं, संगपमाणं हवेइ जीवस्स (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 341) · अर्थ
- जह लोहम्मिय णियउ बुह, तह सुण्णम्मिय जाणि (योगसार 72) · अर्थ
- जह वा अग्गिस्स सिहा सहावदो चेव होहि उड्ढगदी (भगवती आराधना 2124) · अर्थ
- जह वाणियगा सागरजलम्मि णावाहिं रयणपुण्णाहिं (भगवती आराधना 1668) · अर्थ
- जह वाणिया य पणियं लाभत्थं विक्किणंति लोभेण (भगवती आराधना 1238) · अर्थ
- जह वालुयाए अवडो पूरदि उक्कीरमाणओ चेव (भगवती आराधना 578) · अर्थ
- जह विसमुवभुंजंतो वेज्जो पुरिसो ण मरणमुवयादि (समयसार 195) · अर्थ
- जह विसयलुद्ध विसदो तह थावरजंगमाण घोराणं (अष्टपाहुड 21) · अर्थ
- जह सद्धाणंमाई सम्मत्तं जह तवाइगुणणिलये (लघु नयचक्र 4) · अर्थ
- जह सलिलेण ण लिप्पइ कमलिणिपत्तं सहावपयडीए (अष्टपाहुड 154) · अर्थ
- जह सलिलेण ण लिप्पियइ, कमलणि-पत्त कया वि (योगसार 92) · अर्थ
- जह सिप्पिओ दु कम्मं कुव्वदि ण य सो दु तम्मओ होदि (समयसार 349) · अर्थ
- जह सिप्पिओ दु करणाणि गिण्हदि ण सो दु तम्मओ होदि (समयसार 351) · अर्थ
- जह सिप्पिओ दु करणेहिं कुव्वदि ण य सो दु तम्मओ होदि (समयसार 350) · अर्थ
- जह सिप्पिओ दु चेट्ठं कुव्वदि हवदि य तहा अणण्णो से (समयसार 354) · अर्थ
- जह सिप्पि दु कम्मफलं भुंजदि ण सो दु तम्मओ होदि (समयसार 352) · अर्थ
- जह सीलरक्खयाणं पुरिसाणं णिंदिदाओ महिलाओ (भगवती आराधना 988) · अर्थ
- जह सुकुसलो वि वेज्जो अण्णस्स कहेदि आदुरो रोगं (भगवती आराधना 530) · अर्थ
- जह सुत्तबद्धसउणो दूरंपि गदो पुणो व एदि तहिं (भगवती आराधना 1272) · अर्थ
- जह सुद्ध फलिय भायणि खितं णीरं खु णिम्मलं सुद्धं (भावसंग्रह 662) · अर्थ
- जह सेडिया दु ण परस्स सेडिया सेडिया य सा होदि (समयसार 356) · अर्थ
- जह सेडिया दु ण परस्स सेडिया सेडिया य सा होदि (समयसार 357) · अर्थ
- जह सेडिया दु ण परस्स सेडिया सेडिया य सा होदि (समयसार 358) · अर्थ
- जह सेडिया दु ण परस्स सेडिया सेडिया य सा होदि (समयसार 359) · अर्थ
- जह हवदि धम्मदव्वं तह तं जाणेह दव्वमधमक्खं (पंचास्तिकाय 86) · अर्थ
- जहिँ अप्पा तहिँ सयल-गुण, केवलि एम भणंति (योगसार 85) · अर्थ
- जह्मा ण णएण विणा होई णरस्स सियवायपडिवत्ती (लघु नयचक्र 3) · अर्थ
- जह्मा सो परमसुही परमसिवो वुच्चए जिणो तह्मा (धम्मरसायण 124) · अर्थ
- जा अवरदक्खिणाए व दक्खिणाए व अहव अवराए (भगवती आराधना 1964) · अर्थ
- जाइजरमरणरहियं परमं कम्मट्ठवज्जियं सुद्धं (नियमसार 177) · अर्थ
- जाइजरामरणभया संयोगविजोगदुक्खसण्णाओ (गोम्मटसार जीवकाण्ड 152)
- जाइ-जरा-मरण-रुजा-भयदो रक्खेदि अप्पणो अप्पा (बारस अणुवेक्खा 11) · अर्थ
- जाई अविणाभावीतसथावरउदयजो हवे काओ (गोम्मटसार जीवकाण्ड 181)
- जा उज्जमो ण वियलइ संजमतवणाणझाणजोएसु (आराधनासार 28) · अर्थ
- जा उवरि उवरि गुणपडिवत्ती सा भावदो सिदी होदि (भगवती आराधना 173) · अर्थ
- जाए विसयविरत्तो सो गमयदि णरयवेयणा पउरा (अष्टपाहुड 32) · अर्थ
- जा एस पयडीअट्ठं चेदा णेव विमुंचए (समयसार 314) · अर्थ
- जा किंचि वि चलइ मणो झाणे जोइस्स गहियजोयस्स (तत्त्वसार 60) · अर्थ
- जागरणत्थं इच्चेवमादिकं कुण कमं सदा उत्तो (भगवती आराधना 1438) · अर्थ
- जाणंतस्सादहिदं अहिदणियत्ती य हिदपवत्ती य (भगवती आराधना 102) · अर्थ
- जाणंतो पस्संतो ईहापुव्वं ण होइ केवलिणो (नियमसार 172) · अर्थ
- जाणंतो पिच्छंतो कालत्तयवट्टियाइं दव्वाइं (भावसंग्रह 674) · अर्थ
- जाणइ कज्जाकज्जं सेयमसेयं च सव्वसमपासी (गोम्मटसार जीवकाण्ड 515)
- जाणइ तिकालविसए दव्वगुणे पज्जए य बहुभेदे (गोम्मटसार जीवकाण्ड 299)
- जाणइ पस्सइ सव्वं लोयालोयं च दव्वगुणजुत्तं (आराधनासार 88) · अर्थ
- जाणइ पिच्छइ सपलं लोयालोयं च एक्कहेलाए (भावसंग्रह 695) · अर्थ
- जाणइ य मज्झ एसो सुहसीलत्तं च सव्वदोसे य (भगवती आराधना 604) · अर्थ
- जाणगसरीर भवियं, तव्वदिरित्तं तु होदि जं विदियं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 55) · अर्थ
- जाणदि पस्सदि सव्वं इच्छदि सुक्खं बिभेदि दुक्खादो (पंचास्तिकाय 122) · अर्थ
- जाणदि पस्सदि सव्वं ववहारणएण केवली भगवं (नियमसार 159) · अर्थ
- जाणदि फासुयदव्वं उवकप्पेदुं तहा उदिण्णाणं (भगवती आराधना 446) · अर्थ
- जाणह य मज्झ थामं अंगाणं दुब्बलदा अणारोगं (भगवती आराधना 572) · अर्थ
- जाणहि भावं पढमं किं ते लिंगेण भावरहिएण (अष्टपाहुड 6) · अर्थ
- जाणित्ता संपत्ती, भोयणतंबोलवत्थमादिणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 350) · अर्थ
- जादं सयं समंतं णाणमणंतत्थवित्थडं विमलं (प्रवचनसार 59) · अर्थ
- जादिकुलं संवासं धम्मं णियबंधवम्मि अगणित्ता (भगवती आराधना 893) · अर्थ
- जादो अलोगलोगो जेसिं सब्भावदो य गमणठिदी (पंचास्तिकाय 87) · अर्थ
- जादो खु चारुदत्तो गोट्ठीदोसेण तह विणीदो वि (भगवती आराधना 1076) · अर्थ
- जादो सयं स चेदा सव्वण्हू सव्वलोगदरिसी य (पंचास्तिकाय 29) · अर्थ
- जाधे पुण उवसग्गा देवा माणुस्सिया व तेरिच्छा (भगवती आराधना 2037) · अर्थ
- जाम ण गंथंछंडइ ताम ण चित्तस्स मलिणिमा मुंचइ (आराधनासार 32) · अर्थ
- जाम ण छंडइ गेहं ताम ण परिहरइ इंतयं पावं (भावसंग्रह 393) · अर्थ
- जाम ण भावहि जीव तुहुँ, णिम्मल अप्प-सहाउ (योगसार 27) · अर्थ
- जाम ण सिढिलायंति य अंगोवंगाइ संधिबंधाइं (आराधनासार 27) · अर्थ
- जाम ण हणइ कसाए स कसाई णेव संजमी होइ (आराधनासार 37) · अर्थ
- जाम वियप्पो कोई जायइ जोइस्स झाणजुत्तस्स (आराधनासार 83) · अर्थ
- जायदि जीवस्सेवं भावो संसारचक्कवालम्मि (पंचास्तिकाय 130) · अर्थ
- जायदि णेव ण णस्सदि खणभंगसमुब्भवे जणे कोई (प्रवचनसार 119) · अर्थ
- जा रागादिणियत्ती मणस्स जाणाहि तं मणोगुत्तिं (भगवती आराधना 1181) · अर्थ
- जा रायादिणियत्ती मणस्स जाणीहि तं मणोगुत्ती (नियमसार 69) · अर्थ
- जारिसिया सिद्धप्पा भवमल्लिय जीव तारिसा होंति (नियमसार 47) · अर्थ
- जालस्स जहा अंते रमंति मच्छा भयं अयाणंता (भगवती आराधना 1269) · अर्थ
- जावं अप्पडिकमणं अपच्चखाणं च दव्वभावाणं (समयसार 285) · अर्थ
- जावंत किंचि दुक्खं सारीरं माणसं च संसारे (भगवती आराधना 1662) · अर्थ
- जावंति केइ भोगा पत्ता सव्वे अणंतखुत्ता ते (भगवती आराधना 1255) · अर्थ
- जावंति केइ संगा उदीरया होंति रागदोसाणं (भगवती आराधना 266) · अर्थ
- जावंति केइ संगा विराधया तिविहकालसंभूदा (भगवती आराधना 1174) · अर्थ
- जावं तु किंचि लोए सारीरं माणसं च सुहदुक्खं (भगवती आराधना 2139) · अर्थ
- जावंतु केइ संगा उदीरया होति रागदोसाणं (भगवती आराधना 180) · अर्थ
- जावइयाइं तणाइं वीचीओ वालिगाव रोमाइं (भगवती आराधना 956) · अर्थ
- जावइयाइं दुक्खाइं होंति लोयम्मि चदुगदिगदाइं (भगवती आराधना 799) · अर्थ
- जावइया किर दोसा इहपरलोए दुहावहा होंति (भगवती आराधना 877) · अर्थ
- जावज्जीवं सव्वाहारं तिविहं च वोसरिहिदित्ति (भगवती आराधना 703) · अर्थ
- जाव ण जाणइ अप्पा अप्पाणं दुक्खमप्पणो ताव (रयणसार 85) · अर्थ
- जाव ण तवग्गितत्तं सदेहमूसाइं णाणपवणेण (आराधनासार 100) · अर्थ
- जाव ण भावइ तच्चं जाव ण चिंतेइ चिंतणीयाइं (अष्टपाहुड 115) · अर्थ
- जाव ण वाया खिप्पदि बलं च विरियं च जाव कायम्मि (भगवती आराधना 2013) · अर्थ
- जाव ण वेदि विसेसंतरं तु आदासवाण दोण्हं पि (समयसार 69) · अर्थ
- जावदियं आयासं अविभागीपुग्गलाणुउट्टद्धं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 27) · अर्थ
- जावदियाइं कल्लाणाइं माणुस्स-देवलोगे य (भगवती आराधना 1853) · अर्थ
- जावदियाइं सुहाइं होंति लोगम्मि सव्वजोणीसु (भगवती आराधना 1779) · अर्थ
- जावदिया रिद्धीओ हवंति इंदियगदाणि य सुहाणि (भगवती आराधना 1933) · अर्थ
- जाव पमाए वट्टइ जावथिरं थाइ णिच्चल झाणं (भावसंग्रह 605) · अर्थ
- जाव य खेमसुभिक्खं आयरिया जाव णिज्जवणजोग्गा (भगवती आराधना 161) · अर्थ
- जावय बलविरियं से सो विहरदि ताव णिप्पडीयारो (भगवती आराधना 2008) · अर्थ
- जाव य सुदी ण णस्सदि जाव य जोगा ण मे पराहीणा (भगवती आराधना 160) · अर्थ
- जा संकप्पवियप्पो ता कम्मं असुइ सुह य दायारं (भावसंग्रह 322) · अर्थ
- जा संकप्पो चित्ते सुहासुहो भोयणाइ किरियाओ (भावसंग्रह 612) · अर्थ
- जा सव्वसुंदरंगी सविलासा पढमजोव्वणे कंता (भगवती आराधना 1050) · अर्थ
- जा सासया ण लच्छी, चक्कहराणं पि पुण्णवंताणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 10) · अर्थ
- जाहि व जासु व जीवा मग्गिज्जंते जहा तहा दिट्ठा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 141)
- जाहे सरीरचेट्ठा विगदत्थामस्स से यदणुभूदा (भगवती आराधना 1687) · अर्थ
- जिणकहियपरमसुत्ते पडिकमणादिय परीक्खऊण फुडं (नियमसार 155) · अर्थ
- जिणणाणदिट्ठिसुद्धं पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं (अष्टपाहुड 5) · अर्थ
- जिणपडिरूवं विरियायारो रागादिदोसपरिहरणं (भगवती आराधना 84) · अर्थ
- जिणपूया मुणिदाणं करेइ जो देइ सत्ति-रूवेण (रयणसार 13) · अर्थ
- जिणबिंबं णाणमयं संजमसुद्धं सुवीयरायं च (अष्टपाहुड 16) · अर्थ
- जिणमग्गबाहिरं जं तच्चं संदरसिऊण पावमणो (दर्शनसार 23) · अर्थ
- जिणमग्गे पव्वज्जा छहसंहणणेसु भणिय णिग्गंथा (अष्टपाहुड 54) · अर्थ
- जिणमुद्दं सिद्धिसुहं हवेइ णियमेण जिणवरुद्दिट्ठं (अष्टपाहुड 47) · अर्थ
- जिण-लिंग-धरो जोई विराय-सम्मत्त-संजुदो णाणी (रयणसार 144) · अर्थ
- जिणवयणगहिदसारा विसयविरत्ता तवोधणा धीरा (अष्टपाहुड 38) · अर्थ
- जिणवयणभावणट्ठं, सामिकुमारेण परमसद्धाए (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 487) · अर्थ
- जिणवयणममिदभूदं महुरं कण्णाहुदिं सुणंतेण (भगवती आराधना 1555) · अर्थ
- जिणवयणमेव भासदि, तं पालेदुं असक्कमाणो वि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 398) · अर्थ
- जिणवयणमोसहमिणं विसयसुहविरेयणं अमिदभूदं (अष्टपाहुड 17) · अर्थ
- जिणवयणेयग्गमणो, संवुडकाओ य अंजलिं किच्चा (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 356) · अर्थ
- जिणवरचरणंबुरुहं णमंति जे परमभत्तिराएण (अष्टपाहुड 153) · अर्थ
- जिणवरमएण जोई झाणे झाएह सुद्धमप्पाणं (अष्टपाहुड 20) · अर्थ
- जिणवर सासण मतुलं जयउ चिरं सूरि सपर उवयारी (भावसंग्रह 699) · अर्थ
- जिणवरु झायहि जीव तुहु विसयकसायहं खोइ (पाहुडदोहा 198) · अर्थ
- जिणसत्थादो अट्ठे पच्चक्खादीहिं बुज्झदो णियमा (प्रवचनसार 86) · अर्थ
- जिणसासणमाहप्पं, बहुविहजुत्तीहि जो पयासेदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 422) · अर्थ
- जिणसिद्धसाहुधम्मा अणागदातीदवट्टमाणगदा (भगवती आराधना 324) · अर्थ
- जिणु सुमिरहु जिणु चिंतवहु, जिणु झायहु सुमणेण (योगसार 19) · अर्थ
- जिण्णुद्धार-पइट्ठा-जिणपूया-तित्थवंदण-सेसधणं (रयणसार 32) · अर्थ
- जिदणिद्दा तल्लिच्छा रादो जग्गंति तह य चत्तारि (भगवती आराधना 666) · अर्थ
- जिदमोहस्स दु जइया खीणो मोहो हविज्ज साहुस्स (समयसार 33) · अर्थ
- जिदरागो जिददोसो जिदिंदिओ जिदभओ जिदकसाओ (भगवती आराधना 1693) · अर्थ
- जिब्भाए वि लिहंतो ण भद्दओ जत्थ सारणा णत्थि (भगवती आराधना 483) · अर्थ
- जिब्भामूलं बोलेइ वेगदो वरहओव्व आहारो (भगवती आराधना 1656) · अर्थ
- जिम लोणु विलिज्जइ पाणियहं तिम जइ चित्तु विलिज्ज (पाहुडदोहा 177) · अर्थ
- जियकोहो जियमाणो जियमायालोहमोह जियमयओ (धम्मरसायण 135) · अर्थ
- जीरदि समयपबद्धं, पओगदो णेगसमयबद्धं वा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 5) · अर्थ
- जीव कम्माण उहयं अण्णोण्णं जो पएस पवेसो हु (भावसंग्रह 324) · अर्थ
- जीवगदमजीवगदं समासदो होदि दुविहमधिकरणं (भगवती आराधना 804) · अर्थ
- जीवणिबद्धं देहं, खीरोदयमिव विणस्सदे सिग्घं (बारस अणुवेक्खा 6) · अर्थ
- जीवणिबद्धा एदे अध्रुव अणिच्चा तहा असरणा य (समयसार 74) · अर्थ
- जीवदया दम सच्चं अचोरियं बंभचेरसंतोसे (अष्टपाहुड 19) · अर्थ
- जीवदुगं उत्तत्थं जीवा पुण्णा हु सम्मगुण सहिदा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 622)
- जीवपएसेक्केक्के कम्मपएसा हु अंतपरिहीणा (भावसंग्रह 325) · अर्थ
- जीवपरिणामहेदुं कम्मत्तं पोग्गला परिणमंति (समयसार 80) · अर्थ
- जीवप्पदेसपचयं पुरिसायारं हि णिययदेहत्थं (भावसंग्रह 622) · अर्थ
- जीव म जाणहि अप्पणा विसया होसहिं मज्झु (पाहुडदोहा 120) · अर्थ
- जीवमजीवं दव्वं जिणवरवसहेण जेण णिद्दिट्ठं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 1) · अर्थ
- जीवम्हि हेदुभूदे बंधस्स दु पस्सिदूण परिणामं (समयसार 105) · अर्थ
- जीव वहंतइ णरयगइ अभयपदाणें सग्गु (पाहुडदोहा 106) · अर्थ
- जीववहो अप्पवहो जीवदया होइ अप्पणो हु दया (भगवती आराधना 793) · अर्थ
- जीवविमुक्को सबओ दंसणमुक्को य होइ चलसबओ (अष्टपाहुड 143) · अर्थ
- जीवसहावं णाणं अप्पडिहददंसणं अणण्णमयं (पंचास्तिकाय 154) · अर्थ
- जीवस्स कुजोणिगदस्स तस्स दुक्खाणि वेदयंतस्स (भगवती आराधना 1271) · अर्थ
- जीवस्स जीवरूवं वित्थरदो जाण लोगमेत्तं खु (समयसार 343) · अर्थ
- जीवस्स जे गुणा केइ णत्थि खलु ते परेसु दव्वेसु (समयसार 370) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि केई जोयट्ठाणा ण बंधठाणा वा (समयसार 53) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि तित्ती चिरंपि भुंजंतस्य आहारं (भगवती आराधना 1648) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि तित्ती चिरं पि भोएहिं भुंजमाणेहिं (भगवती आराधना 1257) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि रागो ण वि दोसो णेव विज्जदे मोहो (समयसार 51) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि वग्गो ण वग्गणा णेव फड्ढया केई (समयसार 52) · अर्थ
- जीवस्स णत्थि वण्णो ण वि गंधो ण वि रसो ण वि य फासो (समयसार 50) · अर्थ
- जीवस्स ण संवरणं, परमट्ठणयेण सुद्धभावेण (बारस अणुवेक्खा 65) · अर्थ
- जीवस्स णिच्चयादो, धम्मो दहलक्खणो हवे सुयणो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 78) · अर्थ
- जीवस्स दु कम्मेण य सह परिणामा हु होंति रागादी (समयसार 137) · अर्थ
- जीवस्स बहुपयारं, उवयारं कुणदि पुग्गलं दव्वं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 208) · अर्थ
- जीवस्स वि णाणस्स वि, गुणगुणिभावेण कीरए भेओ (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 180) · अर्थ
- जीवस्स हुंति भावा जीवा पुण दुविह भेयसंजुत्ता (भावसंग्रह 2) · अर्थ
- जीवस्साजीवस्स दु जे परिणामा दु देसिदा सुत्ते (समयसार 309) · अर्थ
- जीवा अणंतसंखाणंतगुणा पुग्गला हु तत्तो दु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 588)
- जीवा अणाइणिहणा संता णंता य जीवभावादो (पंचास्तिकाय 53) · अर्थ
- जीवाइ जे पयत्था कायव्वा ते जहट्ठिया चेव (णाणसार 17) · अर्थ
- जीवा चोद्दसभेया इंदियविसया तहट्ठवीसं तु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 478)
- जीवाजीवं दव्वं रूवारूवित्ति होदि पत्तेयं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 563)
- जीवाजीवविभत्ती जो जाणइ सो हवेइ सण्णाणी (अष्टपाहुड 39) · अर्थ
- जीवाजीवविहत्ती जोई जाणेइ जिणवरमएण (अष्टपाहुड 41) · अर्थ
- जीवाजीवहँ भेउ, जो जाणइ तिं जाणियउ (योगसार 38) · अर्थ