भाग 1: अ से आ
अ
- अंगसुदे य बहुविधे णो अंगसुदे य बहुविधविभत्ते (भगवती आराधना 501) · अर्थ
- अंगुल असंखगुणिदा खेत्तवियप्पा य दव्वभेदा हु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 390)
- अंगुलअसंखभागं अवरं उक्कस्सयं हवे लोगो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 391)
- अंगुल असंखभागं धुवरूवेण य असंख वारं तु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 401)
- अंगुल असंखभागं संखं वा अंगुलं च तस्सेव (गोम्मटसार जीवकाण्ड 409)
- अंगुलअसंखभागं संखेज्जगुणं तदो विसेसहियं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 172)
- अंगुल-असंखभाग-प्पमाणमेत्तवर-फड्ढया-वड्ढी (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 230) · अर्थ
- अंगुल असंखभागे दव्ववियप्पे गदे दु खेत्तम्मि (गोम्मटसार जीवकाण्ड 399)
- अंगुल असंखभागे पुव्वगवड्ढीगदे दु परवड्ढी (गोम्मटसार जीवकाण्ड 326)
- अंगुलअसंखभागो, एयक्खचउक्कदेहपरिमाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 166) · अर्थ
- अंगुलअसंखभागो कालो आहारयस्स उक्कस्सो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 670)
- अंगुलमावलियाए भागमसंखेज्जदो वि संखेज्जा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 404)
- अंगे णासं किच्चा इंदो हं कप्पिऊण णियकाए (भावसंग्रह 436) · अर्थ
- अंगोवंगुदयादो दव्वमणट्ठं जिणिंदचंदम्हि (गोम्मटसार जीवकाण्ड 229)
- अंडेसु पवड्ढंता गब्भत्था माणुसा य मुच्छगया (पंचास्तिकाय 113) · अर्थ
- अंतज्जोई कमलं बिंदुं णादं च तहय चउभेयं (णाणसार 50) · अर्थ
- अंतरतच्चं जीवो, बाहिरतच्चं हवंति सेसाणि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 205) · अर्थ
- अंतरबाहिरजप्पे जो वट्टइ सो हवेइ बहिरप्पा (नियमसार 150) · अर्थ
- अंतरभावप्पबहू अहियारा सोलसा हवंतित्ति (गोम्मटसार जीवकाण्ड 492)
- अंतरमवरुक्कस्सं किण्हतियाणं मुहुत्तअंतं तु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 553)
- अंतरमुवरीवि पुणो, तत्पुण्णाणं च उवरि अंतरियं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 239) · अर्थ
- अंतर मुहुत्त कालो हवइ जहण्णो वि उत्तमो तेसिं (भावसंग्रह 678) · अर्थ
- अंतरमुहुत्तमज्झे देहं चइऊण माणुसं कुणिमं (भावसंग्रह 406) · अर्थ
- अंतिम-तिय-संहडणस्सुदओ पुण कम्मभूमि-महिलाणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 32) · अर्थ
- अंतो कोडाकोडिट्ठिदिस्स अंतोमुहुत्तमाबाहा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 157) · अर्थ
- अंतो णत्थि सुईणं कालो थोओ वि अम्ह दुम्मेहा (पाहुडदोहा 99) · अर्थ
- अंतो बहिं च मज्झे व कोइ सारो सरीरगे णत्थि (भगवती आराधना 1044) · अर्थ
- अंतोमुहुत्तकालं गमिऊण अधापवत्तकरणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 50)
- अंतोमुहुत्तपक्खं, छम्मासं संखऽसंखणंतभवं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 46) · अर्थ
- अंतोमुहुत्तमेत्तं गुणहाणी होदि आदिमतिगाणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 253)
- अंतो मुहुत्तमेत्तं, लीणं वत्थुम्मि माणसं णाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 468) · अर्थ
- अंतोमुहुत्तमेत्ता चउमणजोगा कमेण संखगुणा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 262)
- अंतोमुहुत्तमेत्ते पडिसमयमसंखलोगपरिणामा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 53)
- अंतोमुहुत्तमेत्तो तक्कालो होदि तत्थ परिणामा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 49)
- अंधलयबहिरमूओ व्व मणो लहुमेव विप्पणासेइ (भगवती आराधना 137) · अर्थ
- अंबरसहिओ वि जई सिज्झइ वीरस्स गब्भचारत्तं (दर्शनसार 14) · अर्थ
- अंबरि विविहु सद्दु जो सुम्मइ (पाहुडदोहा 169) · अर्थ
- अइ उच्चमसंहणणो उत्तमपुरिसो कुलग्गओ संतो (भावसंग्रह 99) · अर्थ
- अइ कुणउ तवं पालेउ संजमं पढउ सयलसत्थाइं (आराधनासार 111) · अर्थ
- अइतिव्ववेयणाए अक्कंतो कुणसि भावणा सुसमा (आराधनासार 43) · अर्थ
- अइथूलथूल थूलं थूलसुहुमं च सुहुमथूलं च (नियमसार 21) · अर्थ
- अइ-बलिओ वि रउद्दो मरण-विहीणो ण दीसए को वि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 26) · अर्थ
- अइभीमदंसणेण य तस्सुवजोगेण ओमसत्ताए (गोम्मटसार जीवकाण्ड 136)
- अइलालिओ वि देहो, ण्हाण सुयंधेहिं विविह भक्खेहिं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 9) · अर्थ
- अइसयमादसमुत्थं विसयातीदं अणोवममणंतं (प्रवचनसार 13) · अर्थ
- अइसोहणजोएणं सुद्धं हेमं हवेइ जह तह य (अष्टपाहुड 24) · अर्थ
- अउदइउ परिणामउ खय उवसमिउ तहा उवसमो खइओ (भावसंग्रह 8) · अर्थ
- अकइयणियाणसम्मो पुण्णं काऊण णाणचरणट्ठो (भावसंग्रह 405) · अर्थ
- अकडुगमतिक्खमणंबिलंच अकसायमलवणममधुरं (भगवती आराधना 1485) · अर्थ
- अकदम्मि वि अवराधे ताओ वीसत्थमिच्छमाणीओ (भगवती आराधना 941) · अर्थ
- अकसायत्तमवेदत्तमकारकदा विदेहदा चेव (भगवती आराधना 2151) · अर्थ
- अक्कट्टिमा अणिहणा ससिसूराईण पज्जया गिह्णइ (लघु नयचक्र 27) · अर्थ
- अक्खरचडिया मसिमिलिया पाढंता गय खीण (पाहुडदोहा 174) · अर्थ
- अक्खरडेहिं जि गव्विया कारणु ते ण मुणंति (पाहुडदोहा 87) · अर्थ
- अक्खलिदममिलिदमव्वाइद्धमणुच्चमविलंबिदममंदं (भगवती आराधना 651) · अर्थ
- अक्खाणं अणुभवणं, वेयणियं सुहसरूवयं सादं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 14) · अर्थ
- अक्खाणि बाहिरप्पा अंतरअप्पा तु अप्पसंकप्पो (अष्टपाहुड 5) · अर्थ
- अखइ णिरामइ परमगइ अज्ज वि लउ ण लहंति (पाहुडदोहा 170) · अर्थ
- अखइ णिरामइ परमगइ मणु घल्लेप्पिणु मिल्लि (पाहुडदोहा 172) · अर्थ
- अगुरुलघुगेहिं सया तेहिं अणंतेहिं परिणदं णिच्चं (पंचास्तिकाय 84) · अर्थ
- अगुरुलहुगा अणंता तेहिं अणंतेहिं परिणदा सव्वे (पंचास्तिकाय 31) · अर्थ
- अग्गइं पच्छइं दहदिहहिं जहिं जोवउं तहिं सोइ (पाहुडदोहा 176) · अर्थ
- अग्गि तिकोणो रत्तो किण्हो य पहंजणो तहा वित्तो (णाणसार 57) · अर्थ
- अग्गितियंगुलमाणो छंगुल पवणो य पुहइतच्चि उणो (णाणसार 55) · अर्थ
- अग्गिपरिक्खित्तादो सउणो रुक्खादु उप्पडित्ताणं (भगवती आराधना 1316) · अर्थ
- अग्गिविसकिण्हसप्पादियाणि दोसं करंति एयभवे (भगवती आराधना 729) · अर्थ
- अग्गिविसकिण्हसप्पादियाणि दोसं ण तं करेज्जण्हू (भगवती आराधना 728) · अर्थ
- अग्गिविससत्तुसप्पादिवालसत्थाभिघादघादेहिं (भगवती आराधना 1591) · अर्थ
- अग्गीवि य डहिदुं जे मदोव पुरिसस्स मुज्झिदुं महिला (भगवती आराधना 982) · अर्थ
- अग्गी वि य होदि हिमं, होदि भुयंगो वि उत्तम रयणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 431) · अर्थ
- अघसे समे असुसिरे अहिसुयअबिले य अप्पपाणे य (भगवती आराधना 640) · अर्थ
- अङ्गाणंगकुमारा विक्खा-पञ्चद्ध-कोडि-रिसिसहिया (निर्वाणकाण्ड 9)
- अच्चलपुर-वर-णयरे ईसाणभाए मेढगिरि-सिहरे (निर्वाणकाण्ड 16)
- अच्चेयणं पि चेदा जो मण्णइ सो हवेइ अण्णाणी (अष्टपाहुड 58) · अर्थ
- अच्चेलक्कं लोचो वोसट्टसरीरदा य पडिलिहणं (भगवती आराधना 79) · अर्थ
- अच्छउ भोयणु ताह घरि सिद्धु हरेप्पिणु जेत्थु (पाहुडदोहा 216) · अर्थ
- अच्छरतिलोत्तमाए णट्टं दट्ठूण रायरस रसिओ (भावसंग्रह 210) · अर्थ
- अच्छाय-सच्छं जलकंत गंडं, आबाहु दोलंत सुकण्ण पासं (गोम्मटेश स्तुति 2) · अर्थ
- अच्छाहि ताव सुविहिद वीसत्थो मा य होहि उव्वादो (भगवती आराधना 516) · अर्थ
- अच्छिणिमिसेणमेत्तो आहारसुहस्स सो हवइ कालो (भगवती आराधना 1657) · अर्थ
- अच्छीणि संघसिरिणो मिच्छत्तणिकाचणेण पडिदाइं (भगवती आराधना 731) · अर्थ
- अच्छीहिं पिच्छमाणो, जीवाजीवादि बहुविहं अत्थं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 250) · अर्थ
- अजधाचारविजुत्तो जधत्थपदणिच्छिदो पसंतप्पा (प्रवचनसार 272) · अर्थ
- अजरु अमरु गुण-गण-णिलउ, जहिँ अप्पा थिरु ठाइ (योगसार 91) · अर्थ
- अजहण्णट्ठिदि बंधो, चउव्विहो सत्तमूलपयडीणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 152) · अर्थ
- अज्जजिणणंदिगणि-सव्वगुत्तगणि-अज्जमित्तणंदीणं (भगवती आराधना 2159) · अर्थ
- अज्जज्जसेणगुणगणसमूहसंधारि अजियसेणगुरु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 734)
- अज्जवमलेच्छमणुए तिदु भोगकुभोगभूमिजे दोद्दो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 80)
- अज्जव मिलेच्छखंडे, भोगभूमीसु वि कुभोगभूमीसु (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 132) · अर्थ
- अज्जवसप्पिणि भरहे धम्मज्झाणं पमाद-रहिदो त्ति (रयणसार 56) · अर्थ
- अज्जवसप्पिणि भरहे पंचमयाले मिच्छपुव्वया सुलहा (रयणसार 55) · अर्थ
- अज्जवसप्पिणि भरहे पउरा रुद्दट्ठ-झाणया दिट्ठा (रयणसार 54) · अर्थ
- अज्जवि तिरयणवंता अप्पा झाऊण जंति सुर-लोए (तत्त्वसार 15) · अर्थ
- अज्ज वि तिरयणसुद्धा अप्पा झाएवि लहहिं इंदत्तं (अष्टपाहुड 77) · अर्थ
- अज्जवि सा वलिपूआ पढमयरं विंति तस्स णामेण (भावसंग्रह 159) · अर्थ
- अज्जीवेसु य रूवी पोग्गलदव्वाणि धम्म इदरो वि (गोम्मटसार जीवकाण्ड 564)
- अज्जीवो पुण णेओ पुग्गलधम्मो अधम्म आयासं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 15) · अर्थ
- अज्जु जिणिज्जइ करहुलउ जइ पइं देविणु लक्खु (पाहुडदोहा 112) · अर्थ
- अज्झयणमेव झाणं पंचेंदिय-णिग्गहं कसायं पि (रयणसार 90) · अर्थ
- अज्झवसाणठाणंतराणि जीवो विकुव्वइ इमो हु (भगवती आराधना 1775) · अर्थ
- अज्झवसाणणिमित्तं जीवा बज्झंति कम्मणा जदि हि (समयसार 267) · अर्थ
- अज्झवसाणविसुद्धीए वज्जिदा जे तवं विगट्ठंपि (भगवती आराधना 259) · अर्थ
- अज्झवसाणविसुद्धी कसायकलुसीकदस्स णत्थित्ति (भगवती आराधना 261) · अर्थ
- अज्झवसिदेण बंधो सत्ते मारेउ मा व मारेउ (समयसार 262) · अर्थ
- अज्झावयगुण जुत्तो धम्मोवदेसयारि चरियट्ठो (भावसंग्रह 378) · अर्थ
- अट्टज्झाण पउत्तो बंधइ पावं णिरंतरं जीवो (भावसंग्रह 360) · अर्थ
- अट्टरउद्दं झाणं तिरिक्खणारययदुक्ख सयकरणं (णाणसार 14) · अर्थ
- अट्टरउद्दं झाणं भद्दं अत्थित्ति तम्हि गुणठाणे (भावसंग्रह 357) · अर्थ
- अट्टरउद्दं झायइ देवा सव्वे वि हुंति णमणीया (भावसंग्रह 201) · अर्थ
- अट्टे चउप्पयारे रुद्दे य चउव्विधे य जे भेदा (भगवती आराधना 1696) · अर्थ
- अट्ठ चदु णाणदंसण सामण्णं जीवलक्खणं भणियं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 6) · अर्थ
- अट्ठण्हं कम्माणं समयपबद्धं विविस्ससोवचयं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 453)
- अट्ठत्तीसद्धलवा नाली बे नालिया मुहुत्तं तु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 575)
- अट्ठदलकमलमज्झे अरुहं वेढेह परमवीयेहिं (णाणसार 26) · अर्थ
- अट्ठदस पंच पंच य मूलगुणा सव्वतो सदाणयाराणं (धम्मरसायण 183) · अर्थ
- अट्ठपदेसे मुत्तूण इमो सेसेसु सगपदेसेसु (भगवती आराधना 1773) · अर्थ
- अट्ठमवग्गचउत्थं सत्तय वग्गस्स वीयवण्णेण (णाणसार 21) · अर्थ
- अट्ठविकर्मविघडा सीदीभूदा णिरंजणा णिच्चा (दश भक्ति पाठ 3)
- अट्ठ वि गब्भज दुविहा, तिविहा सम्मुच्छिणो वि तेवीसा (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 131) · अर्थ
- अट्ठवियप्पे कम्मे णोकम्मे चावि णत्थि उवओगो (समयसार 182) · अर्थ
- अट्ठविहं पि य कम्मं सव्वं पोग्गलमयं जिणा बेंति (समयसार 45) · अर्थ
- अट्ठ विह अच्चणाए पुज्जेयव्वं इमं खु णियमेण (भावसंग्रह 455) · अर्थ
- अट्ठविह-कम्म-मुक्के, अट्ठगुणे अणो वमे सिद्धे (अट्ठविह कम्म मुक्के 1)
- अट्ठविहकम्मवियडा (ला) सीदीभूदा णिरंजणा णिच्चा (धम्मरसायण 191) · अर्थ
- अट्ठविहकम्मवियला सीदीभूदा णिरंजणा णिच्चा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 68)
- अट्ठविहच्चण काउं पुव्व पउत्तम्मि ठावियं पडिमा (भावसंग्रह 469) · अर्थ
- अट्ठसमयस्स थोवा, उभयदिसासुवि असंखसंगुणिदा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 243) · अर्थ
- अट्ठारस छत्तीसं बादालं अडकदी अडबिछप्पण्णं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 358)
- अट्ठावयम्मि उसहो चंपाए वासुपुज्ज-जिणणाहो (निर्वाणकाण्ड 1)
- अट्ठिदलिया छिरावक्कवद्धिया मंसमट्टियालित्ता (भगवती आराधना 1810) · अर्थ
- अट्ठीणि हुंति तिण्णि दु सदाणि भरिदाणि कुणिममज्जाए (भगवती आराधना 1021) · अर्थ
- अट्ठीहिं पडिबद्धं, मंसविलित्तं तएण ओच्छण्णं (बारस अणुवेक्खा 43) · अर्थ
- अट्ठे अजधागहणं करुणाभावो य तिरियमणुएसु (प्रवचनसार 85) · अर्थ
- अट्ठेव सयसहस्सा अट्ठाणउदी तहा सहस्साणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 629)
- अट्ठेसु जो ण मुज्झदि ण हि रज्जदि णेव दोसमुवयादि (प्रवचनसार 244) · अर्थ
- अठ्ठगुणाणं लद्धी लोयं सिहरग्गखेतसंवासो (भावसंग्रह 638) · अर्थ
- अडईगिरिदरिसागरजुद्धाणि अडंति अत्थलोभादो (भगवती आराधना 854) · अर्थ
- अडकोडिएयलक्खा अट्ठसहस्सा य एयसदिगं च (गोम्मटसार जीवकाण्ड 351)
- अणउदयादो छण्हं, सजाइरूवेण उदयमाणाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 309) · अर्थ
- अणणुण्णादग्गहणं असंगबुद्धी अणुण्णवित्ता वि (भगवती आराधना 1202) · अर्थ
- अण-णो-कम्मं मिच्छत्तायदणादी हु होदि सेसाणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 75) · अर्थ
- अणथीणतियं मिच्छं, मिच्छे अयदे हु बिदियकोधादी (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 171) · अर्थ
- अणयारपरमधम्मं धीरा काऊण सुद्धसम्मत्ता (धम्मरसायण 189) · अर्थ
- अणयाराणं वेज्जावच्चं कुज्जा जहेह जाणिज्जा (रयणसार 25) · अर्थ
- अणवरयं जो संचदि, लच्छिं ण य देदि णेय भुञ्जेदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 15) · अर्थ
- अणसण अवमोयरियं चाओ य रसाण वुत्तिपरिसंखा (भगवती आराधना 210) · अर्थ
- अणहउ अक्खरु जं उप्पज्जइ (पाहुडदोहा 145) · अर्थ
- अणिगूहिदबलविरिओ वेज्जावच्चं जिणोवदेसेण (भगवती आराधना 309) · अर्थ
- अणिदाणो य मुणिवरो दंसणणाणचरणं विसोधेदि (भगवती आराधना 1277) · अर्थ
- अणिमं महिमं लहिमं पत्ती पायम्म कामरूवित्तं (धम्मरसायण 177) · अर्थ
- अणिमा महिमा लहिमा पावइ पागम्म तइ य ईसत्तं (भावसंग्रह 410) · अर्थ
- अणिवित्तिकरणणामं णवमं गुणठाणयं च अधिगम्म (भगवती आराधना 2088) · अर्थ
- अणिहुदपरगदहिदया ताओ वग्घीव दुट्ठहिदयाओ (भगवती आराधना 954) · अर्थ
- अणिहुदमणसा इंदियसप्पाणि णिगेण्हिदुं ण तीरंति (भगवती आराधना 1832) · अर्थ
- अणुकंपासुद्धुवओगो वि य पुण्णस्स आसवदुवारं (भगवती आराधना 1828) · अर्थ
- अणुकूलं परियणयं तरलियणयणं च अच्छराणिवहं (भावसंग्रह 413) · अर्थ
- अणुखंधवियप्पेण दु पोग्गलदव्वं हवेइ दुवियप्पं (नियमसार 20) · अर्थ
- अणुगुरुदेहपमाणो उवसंहारप्पसप्पदो चेदा (बृहद् द्रव्यसंग्रह 10) · अर्थ
- अणुगुरुदेहपमाणो उवसंहारप्पसप्पदो चेदा (लघु नयचक्र 48) · अर्थ
- अणुदयतदियं णीचमजोगिदुचरिमम्मि सत्तवोच्छिण्णा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 341) · अर्थ
- अणुपरिमाणं तच्चं, अंसविहीणं च मण्णदे जदि हि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 235) · अर्थ
- अणुपालिदा य आणा संजमजोगा य पालिदा होंति (भगवती आराधना 328) · अर्थ
- अणुपालिदो य दीहो परियाओ वायणा य मे दिण्णा (भगवती आराधना 156) · अर्थ
- अणुपुव्वेण य ठविदो संवट्टेदूण सव्वमाहारं (भगवती आराधना 698) · अर्थ
- अणुपुव्वेणाहारं संवट्टंतो य सल्लिहइ देहं (भगवती आराधना 249) · अर्थ
- अणुपेहा बारह वि जिय भाविवि एक्कमणेण (पाहुडदोहा 212) · अर्थ
- अणुबद्धरोसविग्गहसंसत्ततवो णिमित्तपडिसेवी (भगवती आराधना 185) · अर्थ
- अणुभयवचिवियलजुदा, ओघमुराले ण हारदेवाऊ (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 311) · अर्थ
- अणुभागाणं बंधज्झवसाणमसंखलोगगुणिदमदो (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 260) · अर्थ
- अणुमाणेदूण गुरुं एवं आलोचणं तदो पच्छा (भगवती आराधना 574) · अर्थ
- अणुलोमा वा सत्तू चारित्तविणासया हवे जस्स (भगवती आराधना 71) · अर्थ
- अणुलोहं वेदंतो जीवो उवसामगो व खवगो वा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 60)
- अणुलोहं वेदंतो जीवो उवसामगो व खवगो वा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 474)
- अणुवत्तणाए गुणवयणेहिं य चित्तं हरंति पुरिसस्स (भगवती आराधना 962) · अर्थ
- अणुवममभेयमक्खयममलमजरमरुजमभयमभवं च (भगवती आराधना 2147) · अर्थ
- अणुसंखासंखेज्जाणंता य अगेज्झगेहि अंतरिया (गोम्मटसार जीवकाण्ड 594)
- अणुसज्जमाणए पुण समाधिकामस्स सव्वमुवहरिय (भगवती आराधना 697) · अर्थ
- अणुसट्ठिं दादूण य जावज्जीवाय विप्पओगच्छी (भगवती आराधना 2028) · अर्थ
- अणुसूरी पडिसूरी य उड्ढसूरी य तिरियसूरी य (भगवती आराधना 224) · अर्थ
- अण्णं अवरज्झंतस्स दिंति णियये घरम्मि ओगासं (भगवती आराधना 858) · अर्थ
- अण्णं इमं सरीरं अण्णो जीवोत्ति णिच्छिदमदीओ (भगवती आराधना 1665) · अर्थ
- अण्णं इमं सरीरादिगं पि जं होज्ज बाहिरं दव्वं (बारस अणुवेक्खा 23) · अर्थ
- अण्णं इयणि सुणिज्जइ सत्थे हरिवंभरुद्दभत्ताणं (भावसंग्रह 46) · अर्थ
- अण्णं गिण्हदि देहं तं पुण मुत्तूण गिण्हदे अण्णं (भगवती आराधना 1768) · अर्थ
- अण्णं च एवमाइ आगमदुट्ठाइं मित्थसत्थाइं (दर्शनसार 15) · अर्थ
- अण्णं च एवमादिय सुपसत्थं हवइ जं ठाणं (भगवती आराधना 561) · अर्थ
- अण्णं च वसिट्ठमुणी पत्तो दुक्खं णियाणदोसेण (अष्टपाहुड 46) · अर्थ
- अण्णं जं इय उत्तं संसयमिच्छत्तकलियभावेण (भावसंग्रह 116) · अर्थ
- अण्णं देहं गिह्वदि, जणणी अण्णा य होदि कम्मादो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 80) · अर्थ
- अण्णं पि एवमाई, उवयारं कुणदि जाव संसारं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 209) · अर्थ
- अण्णं पि तहा वत्थुं जं जं साधुस्स बंधणं कुणदि (भगवती आराधना 340) · अर्थ
- अण्णं व एवमादी य अप्पसत्थं हवेज्ज जं ठाणं (भगवती आराधना 559) · अर्थ
- अण्णइरूवं दव्वं, विसेसरूवो हवेइ पज्जाओ (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 240) · अर्थ
- अण्णकए गुण दोसे अण्णो जइ जाइ सग्ग णरयम्मि (भावसंग्रह 36) · अर्थ
- अण्णणिरावेक्खो जो परिणामो सो सहावपज्जाओ (नियमसार 28) · अर्थ
- अण्णदविएण अण्णदवियस्स णो कीरए गुणुप्पाओ (समयसार 372) · अर्थ
- अण्ण-भवे जो सुयणो, सो वि य णरये हणेइ अइ-कुविदो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 39) · अर्थ
- अण्णम्मि चावि एदारिसंमि आगाढकारणे जादे (भगवती आराधना 73) · अर्थ
- अण्णम्मि भुंजमाणे अण्णो जइ धाइएत्थ पच्चक्खं (भावसंग्रह 32) · अर्थ
- अण्णस्स अप्पणो वा वि धम्मिए विद्दवंतए कज्जे (भगवती आराधना 830) · अर्थ
- अण्णस्स अप्पणो वा सिंहाणयखेलमुत्तपुरिसाणि (भगवती आराधना 1017) · अर्थ
- अण्णाणं मिच्छत्तं वज्जह णाणे विसुद्धसम्मत्ते (अष्टपाहुड 15) · अर्थ
- अण्णाणतियं होदि हु सण्णाणतियं खु मिच्छ अणउदए (गोम्मटसार जीवकाण्ड 301)
- अण्णाण धम्मलग्गो जीवो दुक्खाण पूरिओ होइ (भावसंग्रह 186) · अर्थ
- अण्णाणमओ भावो अणाणिणो कुणदि तेण कम्माणि (समयसार 127) · अर्थ
- अण्णाणमया भावा अणाणिणो बहुविहा वि जायंते (समयसार 131) · अर्थ
- अण्णाणमया भावा अण्णाणो चेव जायदे भावो (समयसार 129) · अर्थ
- अण्णाणमोहिएहिं य पंचेंदियलोलुएहिं पुरिसेहिं (धम्मरसायण 128) · अर्थ
- अण्णाणमोहिदमदी मज्झमिणं भणदि पोग्गलं दव्वं (समयसार 23) · अर्थ
- अण्णाणस्स स उदओ जा जीवाणं अतच्चउवलद्धी (समयसार 132) · अर्थ
- अण्णाणाओ मोक्खं एवं लोयाण पयडमाणो हु (भावसंग्रह 164) · अर्थ
- अण्णाणाण विणासो विमलाण भवइ बोहयरो (धम्मरसायण 127) · अर्थ
- अण्णाणादो णाणी जदि मण्णदि सुद्धसंपओगादो (पंचास्तिकाय 165) · अर्थ
- अण्णाणादो मोक्खो णाणं णत्थीति मुत्तजीवाणं (दर्शनसार 21) · अर्थ
- अण्णाणि य रइयाइ एत्थ पुराणाइं अघडमाणाइं (भावसंग्रह 256) · अर्थ
- अण्णाणी कम्मफलं पयडिसहावट्ठिदो दु वेदेदि (समयसार 316) · अर्थ
- अण्णाणी पुण रत्तो सव्वदव्वेसु कम्ममज्झगदो (समयसार 219) · अर्थ
- अण्णाणी वि य गोवो आराधित्ता मदो णमोक्कारं (भगवती आराधना 758) · अर्थ
- अण्णाणी-विसय-विरत्तादो जो होइ सय-सहस्स-गुणो (रयणसार 70) · अर्थ
- अण्णु जि जीउ म चिंति तुहु जइ वीहउ दुक्खस्स (पाहुडदोहा 75) · अर्थ
- अण्णु णिरंजणु देउ णवि अप्पा दंसणणाणु (पाहुडदोहा 80) · अर्थ
- अण्णु तुहारउ णाणमउ लक्खिउ जाम ण भाउ (पाहुडदोहा 57) · अर्थ
- अण्णु म जाणहि अप्पणउ घरु-परियणु जो इटठु (पाहुडदोहा 10) · अर्थ
- अण्णे कुमरणमरणं अणेयजम्मंतराइं मरिओ सि (अष्टपाहुड 32) · अर्थ
- अण्णेसिंं अण्णगुणा भणइ असब्भूय तिविहभेदेवि (लघु नयचक्र 50) · अर्थ
- अण्णो अण्णं सोयदि, मदोत्ति मम णाहगो त्ति मण्णंतो (बारस अणुवेक्खा 22) · अर्थ
- अण्णो करेदि अण्णो परिभुंजदि जस्स एस सिद्धंतो (समयसार 348) · अर्थ
- अण्णो करेदि कम्मं अण्णो तं भुंजदीदि सिद्धंतं (दर्शनसार 10) · अर्थ
- अण्णोण्णं खज्जंता, तिरियां पावंति दारुणं दुक्खं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 42) · अर्थ
- अण्णोण्णं पविसंता देंता ओगासमण्णमण्णस्स (पंचास्तिकाय 7) · अर्थ
- अण्णोण्णगुणिद-रासी, पल्लासंखेज्जभाग-मेत्तं तु (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 249) · अर्थ
- अण्णोण्णपवेसेण य, दव्वाणं अच्छणं भवे लोओ (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 116) · अर्थ
- अण्णोण्णुवयारेण य जीवा वट्टंति पोग्गलाणि पुणो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 606)
- अण्णो वि को वि ण गुणोत्थ संकिलेसेण होइ खवयस्स (भगवती आराधना 1619) · अर्थ
- अत्तरउद्दारुढो विसमे काऊण विविहपावाइं (भावसंग्रह 168) · अर्थ
- अत्ता कुणदि सभावं तत्थ गदा पोग्गला सभावेहिं (पंचास्तिकाय 65) · अर्थ
- अत्तागमतच्चाणं सद्दहणादो हवेइ सम्मत्तं (नियमसार 5) · अर्थ
- अत्ता जस्सामुत्तो ण हु सो आहारगो हवदि एवं (समयसार 405) · अर्थ
- अत्तादि अत्तमज्झं अत्तंतं णेव इंदियग्गेज्झं (नियमसार 26) · अर्थ
- अत्थं अक्खणिवदिदं ईहापुव्वेहिं जे विजाणंति (प्रवचनसार 40) · अर्थ
- अत्थं देक्खिय जाणदि, पच्छा सद्दहदि सत्तभंगीहिं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 15) · अर्थ
- अत्थक्खरं च पदसंघादं पडिवत्तियाणियोगं च (गोम्मटसार जीवकाण्ड 348)
- अत्थणिमित्तमदिभयं जादं चोराणमेक्कमेक्केहिं (भगवती आराधना 1123) · अर्थ
- अत्थम्मि हिदे पुरिसो उम्मत्तो विगयचेयणो होदि (भगवती आराधना 853) · अर्थ
- अत्थाण वंजणाण य जोगाणं संकमो हु वीचारो (भगवती आराधना 1879) · अर्थ
- अत्थाण वंजणाण य जोगाण य संकमो हु वीचारो (भगवती आराधना 1876) · अर्थ
- अत्थादो अत्यंतरमुवलंभं तं भणंति सुदणाणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 315)
- अत्थि अणंता जीवा जेहि ण पत्तो तसाण परिणामो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 197)
- अत्थि अमुत्तं मुत्तं अदिंदियं इंदियं च अत्थेसु (प्रवचनसार 53) · अर्थ
- अत्थि कसाया बलिया सुदुज्जया जेहि तिहुवणं सयलं (आराधनासार 36) · अर्थ
- अत्थि जिणयमि कहियं वेए कहियं च हरिपुराणे य (भावसंग्रह 202) · अर्थ
- अत्थि ण उब्भउ जरमरणु रोय वि लिंगइं वण्ण (पाहुडदोहा 36) · अर्थ
- अत्थित्तणिच्छिदस्स हि अत्थस्सथंतरम्हि संभूदो (प्रवचनसार 152) · अर्थ
- अत्थि त्ति पुणो भणिया णएण ववहारिएण ए सव्वे (तत्त्वसार 22) · अर्थ
- अत्थि त्ति य णत्थि त्ति य हवदि अवत्तव्वमिदि पुणो दव्वं (प्रवचनसार 115) · अर्थ
- अत्थि हु अणाइभूया बधो जीवस्स विविह कम्मेण (भावसंग्रह 326) · अर्थ
- अत्थे संतम्मि सुहं जीवदि सकलत्तपुत्तसंबंधी (भगवती आराधना 855) · अर्थ
- अत्थो खलु दव्वमओ दव्वाणि गुणप्पगाणि भणिदाणि (प्रवचनसार 93) · अर्थ
- अथिरं परिणय-सयणं, पुत्त-कलत्तं सुमित्त-लावण्णं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 6) · अर्थ
- अथिरेण थिरा मइलेण णिम्मला णिग्गुणेण गुणसारा (पाहुडदोहा 20) · अर्थ
- अदहिदपइण्णा भावसंवरो णवणवो या संवेगो (भगवती आराधना 99) · अर्थ
- अदिगूहिदा वि दोसा जणेण कालंतरेण णज्जंति (भगवती आराधना 1426) · अर्थ
- अदिलहुयगे वि दोसे कदम्मि सुकदस्सहस्समगणंती (भगवती आराधना 939) · अर्थ
- अदिवडइ बलं खिप्पं रूवं धूलीकदंबरछाए (भगवती आराधना 1721) · अर्थ
- अदिसंजदो वि दुज्जणकएण दोसेण पाउणइ दोसं (भगवती आराधना 350) · अर्थ
- अदिसयदाणं दत्तं णिव्विदिगिंछा दरिसिदा होइ (भगवती आराधना 329) · अर्थ
- अदिसय-मव्वाबाहं, सोक्खमणंतं अणोवमं परमं (अट्ठविह कम्म मुक्के 9)
- अदि-सोहण-जोगेण सुद्धं हेमं हवेइ जह तह य (रयणसार 163) · अर्थ
- अद्धं तेरस बारस दसयं कुलकोडिसदसहस्साइं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 115)
- अद्धाणतेण सावयरायणदीरोधगासिवे ऊमे (भगवती आराधना 308) · अर्थ
- अद्धाण रोहगे जणवए य रादो दिवा सिवे ऊमे (भगवती आराधना 613) · अर्थ
- अद्धाणसणं सव्वाणसणं दुविहं तु अणसणं भणियं (भगवती आराधना 211) · अर्थ
- अद्धुव असरण भणिया, संसारामेगमण्णमसुइत्तं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 2) · अर्थ
- अद्धुवमसरणमेगत्तमण्णसंसारलोयमसुइत्तं (भगवती आराधना 1710) · अर्थ
- अद्धुव-मसरणमेयत्त-मण्ण-संसार-लोग-मसुचित्तं (बारस अणुवेक्खा 2) · अर्थ
- अध खवयसेढिमधिगम्म कुणइ साधू अपुव्वकरणं सो (भगवती आराधना 2087) · अर्थ
- अध तेउपउमसुक्कं अदिच्छिदो णाणदंसणसमग्गो (भगवती आराधना 1917) · अर्थ
- अध लोभसुहुमकिट्टिं वेदंतो सुहुमसंपरायत्तं (भगवती आराधना 2092) · अर्थ
- अधिगगुणा सामण्णे वट्टंति गुणाधरेहिं किरियासु (प्रवचनसार 267) · अर्थ
- अधिगेसु बहुसु संतेसु ममादो एत्थ को मह माणो (भगवती आराधना 1423) · अर्थ
- अधिवासे व विवासे छेदविहूणो भवीय सामण्णे (प्रवचनसार 213) · अर्थ
- अन्तरगा तदसंखेज्जदिमा सेढी असंखभागा हु (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 255) · अर्थ
- अपडिग्गहस्स मुणिणो सद्दफरिसरसरूवगंधेसु (भगवती आराधना 1205) · अर्थ
- अपदिट्ठिदपत्तेयं बितिचपतिचवि अपदिट्ठिदं सयलं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 98)
- अपदिट्ठिदपत्तेया असंखलोगप्पमाणया होंति (गोम्मटसार जीवकाण्ड 205)
- अपदेसं सपदेसं मुत्तममुत्तं च पज्जयमजादं (प्रवचनसार 41) · अर्थ
- अपदेसो परमाणू पदेसमेत्तो य सयमसद्दो जो (प्रवचनसार 163) · अर्थ
- अपमत्ते सम्मत्तं, अंतिमतियसंहदीयऽपुव्वम्हि (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 268) · अर्थ
- अपयत्ता वा चरिया सयणासणठाणचंकमादीसु (प्रवचनसार 216) · अर्थ
- अपरिग्गह समणुण्णेसु सद्दपरिसरसरूवगंधेसु (अष्टपाहुड 36) · अर्थ
- अपरिग्गहो अणिच्छो भणिदो णाणी य णेच्छदि अधम्मं (समयसार 211) · अर्थ
- अपरिग्गहो अणिच्छो भणिदो णाणी य णेच्छदे असणं (समयसार 212) · अर्थ
- अपरिग्गहो अणिच्छो भणिदो णाणी य णेच्छदे धम्मं (समयसार 210) · अर्थ
- अपरिग्गहो अणिच्छो भणिदो णाणी य णेच्छदे पाणं (समयसार 213) · अर्थ
- अपरिच्चत्तसहावेणुप्पादव्वयधुवत्तसंबद्धं (प्रवचनसार 95) · अर्थ
- अपरिणमंतम्हि सयं जीवे कोहादिएहिं भावेहिं (समयसार 122) · अर्थ
- अपरिस्साई णिव्वावओ य णिज्जावओ पहिदकित्ती (भगवती आराधना 420) · अर्थ
- अपरिस्साई सम्मं समपासी होहि सव्वकज्जेसु (भगवती आराधना 296) · अर्थ
- अप्पइँ अप्पु मुणंतयहँ, किं णेहा फलु होइ (योगसार 62) · अर्थ
- अप्पच्चओ अकित्ती संभारदिकलहवेरभयसोगा (भगवती आराधना 842) · अर्थ
- अप्पडिकमणं दुविहं अपच्चखाणं तहेव विण्णेयं (समयसार 283) · अर्थ
- अप्पडिकमणं दुविहं दव्वे भावे अपच्चखाणं पि (समयसार 284) · अर्थ
- अप्पडिकमणप्पडिसरणं अप्परिहारो अधारणा चेव (समयसार 307) · अर्थ
- अप्पडिकुट्ठं उवधिं अपत्थणिज्जं असंजदजणेहिं (प्रवचनसार 223) · अर्थ
- अप्पपरियम्म उवधिं बहुपरियम्मं च दोवि वज्जेइ (भगवती आराधना 165) · अर्थ
- अप्पपरोभयबाधणबंधासंजमणिमित्तकोहादी (गोम्मटसार जीवकाण्ड 289)
- अप्पपसंसं परिहरह सदा मा होह जसविणासयरा (भगवती आराधना 361) · अर्थ
- अप्पपसंसणकरणं पुज्जेसु वि दोसगहणसीलत्तं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 92) · अर्थ
- अप्पसमाणा दिट्ठा जीवा सव्वे वि तिहुयणत्था वि (तत्त्वसार 37) · अर्थ
- अप्पसरूवं पेच्छदि लोयालोयं ण केवली भगवं (नियमसार 166) · अर्थ
- अप्पसरूवं वत्थुं, चत्तं रायादिएहिं दोसेहिं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 99) · अर्थ
- अप्प-सरूवइँ जो रमइ, छंडिवि सहु ववहारु (योगसार 89) · अर्थ
- अप्पसरूवालंबणभावेण दु सव्वभावपरिहारं (नियमसार 119) · अर्थ
- अप्पसहावे णिरओ वज्जियपरदव्वसंगसुक्खरसो (आराधनासार 19) · अर्थ
- अप्पसहावे थक्को जोई ण मुणेइ आगए विसए (तत्त्वसार 62) · अर्थ
- अप्पा अप्पइँ जो मुणइ, जो परभाउ चएइ (योगसार 34) · अर्थ
- अप्पा अप्पउ जइ मुणहि, तो णिव्वाणु लहेहि (योगसार 12) · अर्थ
- अप्पा अप्पम्मि रओ रायादिसु सयलदोसपरिचत्तो (अष्टपाहुड 85) · अर्थ
- अप्पा अप्पम्मि रओ सम्माइट्ठी हवेइ फुडु जीवो (अष्टपाहुड 31) · अर्थ
- अप्पा अप्पि परिट्ठियउ कहिं वि ण लग्गइ लेउ (पाहुडदोहा 91) · अर्थ
- अप्पाउगरोगिदयाविरूवदाविगलदा अबलदा य (भगवती आराधना 797) · अर्थ
- अप्पा उवओगप्पा उवओगो णाणदंसणं भणिदो (प्रवचनसार 155) · अर्थ
- अप्पाए वि विभावियइं णासइ पाउ खणेण (पाहुडदोहा 76) · अर्थ
- अप्पा केवलणाणमउ हियडइ णिवसइ जासु (पाहुडदोहा 60) · अर्थ
- अप्पा चरित्तवंतो दंसणणाणेण संजुदो अप्पा (अष्टपाहुड 64) · अर्थ
- अप्पा झायंताणं दंसणसुद्धीण दिढचरित्ताणं (अष्टपाहुड 70) · अर्थ
- अप्पाणं जो णिंदइ, गुणवंताणं करेदि बहुमाणं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 112) · अर्थ
- अप्पाणं झायंतो दंसणणाणमओ अणण्णमओ (समयसार 189) · अर्थ
- अप्पाणं पि चवंतं, जह सक्कदि रक्खिदुं सुरिदो वि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 29) · अर्थ
- अप्पाणं पि ण पेच्छइ ण मुणइ ण वि सद्दहइ ण भावेइ (रयणसार 84) · अर्थ
- अप्पाणं पि य सरणं, खमादि-भावेहिं परिणदं होदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 31) · अर्थ
- अप्पाणं विणु णाणं णाणं विणु अप्पगो ण संदेहो (नियमसार 171) · अर्थ
- अप्पाणमप्पणा रुंधिऊण दोपुण्णपावजोगेसु (समयसार 187) · अर्थ
- अप्पाणमयाणंता मूढा दु परप्पवादिणो केई (समयसार 39) · अर्थ
- अप्पाणमयाणंतो अणप्पयं चावि सो अयाणंतो (समयसार 202) · अर्थ
- अप्पा णाऊण णरा केई सब्भावभावपब्भट्ठा (अष्टपाहुड 67) · अर्थ
- अप्पा णिच्चोऽसंखेज्जपदेसो देसिदो दु समयम्हि (समयसार 342) · अर्थ
- अप्पा णिच्छरदि जहा परमा तुट्ठी य हवदि जह तुज्झ (भगवती आराधना 1477) · अर्थ
- अप्पा तिविहपयारो बहिरप्पा अंतरप्प परमप्पा (णाणसार 29) · अर्थ
- अप्पा दंसणणाणमउ सयलु वि अण्णु पयालु (पाहुडदोहा 70) · अर्थ
- अप्पा-दंसणु एक्कु परु, अण्णु ण किं पि वियाणि (योगसार 16) · अर्थ
- अप्पा-दंसणु केवलउ अण्णु सयलु ववहारु (पाहुडदोहा 69) · अर्थ
- अप्पा दंसणु णाणु मुणि, अप्पा चरणु वियाणि (योगसार 81) · अर्थ
- अप्पा दमिदो लोएण होइ ण सुहे य संगमुवयादि (भगवती आराधना 90) · अर्थ
- अप्पा दिणयरतेओ णाणमओ णाहिकमलमझत्थो (णाणसार 35) · अर्थ
- अप्पा परप्पयासो तइया अप्पेण दंसणं भिण्णं (नियमसार 163) · अर्थ
- अप्पापरहं ण मेलयउ मणु मोडिवि सहसत्ति (पाहुडदोहा 96) · अर्थ
- अप्पापरहं ण मेलियउ आवागमणु ण भग्गु (पाहुडदोहा 186) · अर्थ
- अप्पा परिणामप्पा परिणामो णाणकम्मफलभावी (प्रवचनसार 125) · अर्थ
- अप्पा बुज्झिउ णिच्चु जइ केवलणाणसहाउ (पाहुडदोहा 24) · अर्थ
- अप्पा मेल्लिवि एक्कु पर अण्णु ण वइरिउ कोइ (पाहुडदोहा 118) · अर्थ
- अप्पा मेल्लिवि गुणणिलउ अण्णु जि झायहि झाणु (पाहुडदोहा 68) · अर्थ
- अप्पा मेल्लिवि जगतिलउ जे परदव्वि रमंति (पाहुडदोहा 71) · अर्थ
- अप्पा मेल्लिवि जगतिलउ मूढ म झायहि अण्णु (पाहुडदोहा 72) · अर्थ
- अप्पा मेल्लिवि णाणमउ अवरु परायउ भाउ (पाहुडदोहा 38) · अर्थ
- अप्पायत्तउ जं जि सुहु तेण जि करि संतोसु (पाहुडदोहा 3) · अर्थ
- अप्पायत्ता अज्झप्परदी भोगरमणं परायत्तं (भगवती आराधना 1263) · अर्थ
- अप्पा य वंचिओ तेण होइ विरियं च गूहियं भवदि (भगवती आराधना 1448) · अर्थ
- अप्पासुयचणयाणं भक्खणदो वज्जिदो मुणिंदेहिं (दर्शनसार 25) · अर्थ
- अप्पु कहिज्जइ काइं तासु जो अच्छइ सव्वंगओ संते (पाहुडदोहा 137) · अर्थ
- अप्पोवयार-वेक्खं, परोवयारू ण-मिंगिणीमरणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 61) · अर्थ
- अप्पो वि तवो बहुगं कल्लाणं फलइ सुप्पओगकदो (भगवती आराधना 1454) · अर्थ
- अप्पो वि परस्स गुणो सप्पुरिसं पप्प बहुदरो होदि (भगवती आराधना 375) · अर्थ
- अबलत्ति होदि जं से ण दढं हिदयम्मि धिदिबलं अत्थि (भगवती आराधना 974) · अर्थ
- अब्भंगादीहिं विणा सभावदो चेव जदि (?) (भगवती आराधना 1042) · अर्थ
- अब्भंतरबाहिरए सव्वे गंथे तुमं विवज्जेहि (भगवती आराधना 1111) · अर्थ
- अब्भंतरबाहिरगे तवम्मि सत्तिं सगं अगूहंतो (भगवती आराधना 1445) · अर्थ
- अब्भंतरसोधीए गंथे णियमेण बाहिरे चयदि (भगवती आराधना 1909) · अर्थ
- अब्भंतरसोधीए बाहिरसोधी वि होदि णियमेण (भगवती आराधना 1910) · अर्थ
- अब्भंतरसोधीए सुद्धं णियमेण बाहिरं करणं (भगवती आराधना 1343) · अर्थ
- अब्भंतरा य किच्चा बहिरत्थसुहाइ कुणह सुण्णतणुं (णाणसार 47) · अर्थ
- अब्भरहिदादु पुव्वं, णाणं तत्तो हि दंसणं होदि (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 16) · अर्थ
- अब्भहियजादहासो मत्थम्मि कदंजली कदपणामो (भगवती आराधना 710) · अर्थ
- अब्भावगाससयणं अणिट्ठुवणा अकंडुगं चेव (भगवती आराधना 228) · अर्थ
- अब्भिंतरचित्तु जु मइलियइ बाहिरि काइं तवेण (पाहुडदोहा 62) · अर्थ
- अब्भुज्जदंमि मरणे संथारत्थस्स चरमवेलाए (भगवती आराधना 659) · अर्थ
- अब्भुज्जदचरियाए उवकारमणुत्तरं वि कुव्वंतो (भगवती आराधना 458) · अर्थ
- अब्भुट्ठणं च रादो अण्हाणमदंतघोवणं चेव (भगवती आराधना 229) · अर्थ
- अब्भुट्ठाणं किदियम्मं णवसणं अंजली य मुंडाणं (भगवती आराधना 121) · अर्थ
- अब्भुट्ठाणं गहणं उवासणं पोसणं च सक्कारं (प्रवचनसार 262) · अर्थ
- अब्भुट्ठेया समणा सुत्तत्थविसारदा उवासेया (प्रवचनसार 263) · अर्थ
- अभय पयाणं पढमं विदियं तह होइ सत्थ दाणं च (भावसंग्रह 489) · अर्थ
- अभव्वसिद्धे णत्थि हु, सत्तं तित्थयरसम्ममिस्साणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 355) · अर्थ
- अभिजोगभावणाए कालगदा आभिजोगिया हुंति (भगवती आराधना 1954) · अर्थ
- अभिभूददुब्भिगंधं परिभुज्जदि मोहिएहिं परदेहं (भगवती आराधना 1041) · अर्थ
- अभिवंदिऊण सिरसा अपुणब्भवकारणं महावीरं (पंचास्तिकाय 105) · अर्थ
- अमणुण्णसंपओगे इट्ठविओए परिस्सहणिदाणे (भगवती आराधना 1697) · अर्थ
- अमणुण्णे य मणुण्णे सजीवदव्वे अजीवदव्वे य (अष्टपाहुड 29) · अर्थ
- अमयक्खरे णिवेसउ पंचसु ठाणेसु सिरसि धरिऊण (भावसंग्रह 430) · अर्थ
- अमरकओ उवसग्गो सिरिदत्तसुवण्णभद्दआईहिं (आराधनासार 51) · अर्थ
- अमराण वंदियाणं रूवं दट्ठूण सीलसहियाणं (अष्टपाहुड 25) · अर्थ
- अमुगंमि इदो काले देसे अमुगत्थ अमुगभावेण (भगवती आराधना 534) · अर्थ
- अमुणियतच्चेण इमं भणियं जं किंपि देवसेणेण (आराधनासार 115) · अर्थ
- अमुयंतो सम्मत्तं परीसहचमुक्करे उदीरंतो (भगवती आराधना 1838) · अर्थ
- अम्मापिदुसरिसो मे खमदु खु जगसीयलो जगाधारो (भगवती आराधना 712) · अर्थ
- अम्मिए जो परु सो जि परु परु अप्पाण ण होइ (पाहुडदोहा 52) · अर्थ
- अम्मिय यहु मणु हत्थिया विंझह जंतउ वारि (पाहुडदोहा 156) · अर्थ
- अम्हहिं जाणिउ एकु जिणु जाणिउ देउ अणंतु (पाहुडदोहा 59) · अर्थ
- अम्हे वि खमावेमो जं अण्णाणा पमादरागेहिं (भगवती आराधना 380) · अर्थ
- अयदाचारो समणो छस्सु वि कायेसु वधकरो त्ति मदो (प्रवचनसार 218) · अर्थ
- अयदापुण्णे ण हि थी, संढोवि य धम्मणारयं मुच्चा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 287) · अर्थ
- अयदे बिदियकसाया, बज्जं ओरालमणुदुमणुवाऊ (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 97) · अर्थ
- अयदे बिदियकसाया, वेगुव्वियछक्क णिरयदेवाऊ (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 266) · अर्थ
- अयदोत्तिछलेस्साओ सुहतियलेस्सा हु देसविरदतिये (गोम्मटसार जीवकाण्ड 532)
- अयदोत्ति हु अविरमणं देसे देसो पमत्तइदरे य (गोम्मटसार जीवकाण्ड 689)
- अयसमणत्थं दुःखं इहलोए दुग्गदी य परलोए (भगवती आराधना 901) · अर्थ
- अयसाण भायणेय य किं ते णग्गेण पावमलिणेण (अष्टपाहुड 69) · अर्थ
- अरदीसोगेसंढे, तिरिक्खभयणिरयतेजुरालदुगे (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 130) · अर्थ
- अरसं च अण्णवेलाकदं च सुद्धोदणं च लुक्खं च (भगवती आराधना 218) · अर्थ
- अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं (अष्टपाहुड 64) · अर्थ
- अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं (नियमसार 46) · अर्थ
- अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं (पंचास्तिकाय 127) · अर्थ
- अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं (प्रवचनसार 172) · अर्थ
- अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं (समयसार 49) · अर्थ
- अरहंतणमोक्कारो एक्को वि हविज्ज जो मरणकाले (भगवती आराधना 754) · अर्थ
- अरहंतपरमदेवं जो वंदइ परमभत्तिसंजुत्तो (धम्मरसायण 137) · अर्थ
- अरहंतभासियत्थं गणहरदेवेहिं गंथियं सम्मं (अष्टपाहुड 1) · अर्थ
- अरहंतसिद्ध आयरिय उवज्झाय साहु सव्ववग्गाणं (भगवती आराधना 900) · अर्थ
- अरहंतसिद्धकेवलि अविउत्ता सव्वसंघसक्खिस्स (भगवती आराधना 1628) · अर्थ
- अरहंतसिद्धचेइय सुदे य धम्मे य साधुवग्गे य (भगवती आराधना 45) · अर्थ
- अरहंतसिद्धचेदियपवयणआयरियसव्वसाहूसु (भगवती आराधना 743) · अर्थ
- अरहंतसिद्धचेदियपवयणगणणाणभत्तिसंपण्णो (पंचास्तिकाय 166) · अर्थ
- अरहंतसिद्धचेदियपवयणभत्तो परेण णियमेण (पंचास्तिकाय 171) · अर्थ
- अरहंतसिद्धभत्ती गुरुभत्ती सव्वसाहुभत्ती य (भगवती आराधना 319) · अर्थ
- अरहंतसिद्धसागरपउमसरं खीरपुप्फफलभरियं (भगवती आराधना 560) · अर्थ
- अरहंतसिद्धसाहूसु भत्ती धम्मम्मि जा य खलु चेट्ठा (पंचास्तिकाय 136) · अर्थ
- अरहंतादिसु भत्ती वच्छलदा पवयणाभिजुत्तेसु (प्रवचनसार 246) · अर्थ
- अरहंतु वि सो सिद्धु फुडु, सो आयरिउ वियाणि (योगसार 104) · अर्थ
- अरहंतेण सुदिट्ठं जं देवं तित्थमिह य अरहंतं (अष्टपाहुड 4) · अर्थ
- अरहंते सुहभत्ती सम्मत्तं दंसणेण सुविसुद्धं (अष्टपाहुड 40) · अर्थ
- अरहट्टघडीसरिसी अहवा चुंदच्छुदोवमा होइ (भगवती आराधना 594) · अर्थ
- अरहादिअंतियं तो किच्चा आलोचणं सुपरिसुद्धं (भगवती आराधना 2032) · अर्थ
- अरि जिय जिणवरि मणु ठवहि विसयकसाय चएहि (पाहुडदोहा 135) · अर्थ
- अरि मणकरह म रइ करहि इंदियविसयसुहेण (पाहुडदोहा 93) · अर्थ
- अरिहे लिंगे सिक्खा विणय समाधी य अणियदविहारे (भगवती आराधना 66) · अर्थ
- अरिहो संगच्चाओ कसायसल्लेहणा य कायव्वा (आराधनासार 22) · अर्थ
- अरुहा सिद्धाइरिया उवज्झाया साहु-पंचपरमेट्ठी (पंच महागुरु भक्ति 7)
- अरुहा सिद्धाइरिया, उवझाया साहु पंचपरमेट्ठी (बारस अणुवेक्खा 12) · अर्थ
- अरुहा सिद्धायरिया उज्झाया साहु पंच परमेट्ठी (अष्टपाहुड 104) · अर्थ
- अलिएहिं हसियवयणेहिं अलियरुयणेहिं अलियसवहेहिं (भगवती आराधना 963) · अर्थ
- अलि चुंविएहिं पुज्जइ जिणपयकमलं च जाइमल्लीहिं (भावसंग्रह 473) · अर्थ
- अलियं स किं पि भणियं घादं कुणदि बहुगाण सच्चाणं (भगवती आराधना 841) · अर्थ
- अलियवयणं पि सच्चं, उज्जमरहिए वि लच्छिसंपत्ती (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 432) · अर्थ
- अलियस्स फलेण पुणो गीवाए चंपिऊण पाएहिं (धम्मरसायण 51) · अर्थ
- अवगासदाणजोग्गं जीवादीणं वियाण आयासं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 19) · अर्थ
- अवणिदतिप्पयडीणं, पमत्तविरदे उदीरणा होदि (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 280) · अर्थ
- अवधिट्ठाणं णिरयं मच्छा आहारहेदु गच्छंति (भगवती आराधना 1644) · अर्थ
- अवरं तु ओहिखेत्तं उस्सेहं अंगुलं हवे जम्हा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 381)
- अवरं दव्वमुरालियसरीरणिज्जिण्णसमयबद्धं तु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 451)
- अवरंसमुदा सोहम्मीसाणादिमउडुम्मि सेढिम्मि (गोम्मटसार जीवकाण्ड 523)
- अवरंसमुदा होंति सदारदुगे मज्झिमंसगेण मुदा (गोम्मटसार जीवकाण्ड 520)
- अवरं होदि अणंतं अणंतभागेण अहियमुक्कस्सं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 387)
- अवरण्हरुक्खछाही व अहिदं वड्ढदे जरा लोगे (भगवती आराधना 1719) · अर्थ
- अवरद्दव्वादुवरिमदव्ववियप्पाय होदि धुवहारो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 384)
- अवरद्धे अवरुवरिं उड्ढे तव्वड्ढि परिसमत्ती हु (गोम्मटसार जीवकाण्ड 106)
- अवरपरित्तासंखेणवरं संगुणिय रूवपरिहीणे (गोम्मटसार जीवकाण्ड 109)
- अवरमप्पुण्णं पढमं सोलं पुण पढमबिदिय तदियोली (गोम्मटसार जीवकाण्ड 99)
- अवरा पज्जायठिदी खणमेत्तं होदि तं च समओत्ति (गोम्मटसार जीवकाण्ड 573)
- अवरुक्कस्सेण हवे, उववादेयंतबड्ढिठाणाणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 242) · अर्थ
- अवरुवरि इगिपदेसे जुदे असंखेज्जभागवड्ढीए (गोम्मटसार जीवकाण्ड 102)
- अवरुवरिम्मि अणंतमसंखं संखं च भागवड्ढीओ (गोम्मटसार जीवकाण्ड 323)
- अवरे अज्झवसाणेसु तिव्वमंदाणुभागगं जीवं (समयसार 40) · अर्थ
- अवरे परमविरोहे सव्वं अत्थित्ति सुद्धसंगहणो (लघु नयचक्र 36) · अर्थ
- अवरे वरसंखगुणे तच्चरिमो तम्हि रूवसंजुत्ते (गोम्मटसार जीवकाण्ड 108)
- अवरोगाहणमाणं उस्सेहंगुलअसंखभागस्स (गोम्मटसार जीवकाण्ड 380)
- अवरोगाहणमाणे जहण्णपरिमिद-असंखरासिहिदे (गोम्मटसार जीवकाण्ड 103)
- अवरो जुत्ताणंतो अभव्वरासिस्स होदि परिमाणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 560)
- अवरो भिण्णमुहुत्तो, तित्थाहाराण सव्व आऊणं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 126) · अर्थ
- अवरो वि दव्वसवणो दंसणवरणाणचरणपब्भट्ठो (अष्टपाहुड 50) · अर्थ
- अवरोहिखेत्तदीहं वित्थारुस्सेहयं ण जाणामो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 379)
- अवरोहिखेत्तमज्झे अवरोही अवरदव्वमवगमइ (गोम्मटसार जीवकाण्ड 382)
- अववददि सासणत्थं समणं दिट्ठा पदोसदो जो हि (प्रवचनसार 265) · अर्थ
- अववादियलिंगकदो विसयासत्तिं अगूहमाणो य (भगवती आराधना 86) · अर्थ
- अवसप्पिणि-उस्सप्पिणि-समयावलियासु णिरवसेसासु (बारस अणुवेक्खा 27) · अर्थ
- अवसप्पिणिए पढमे, काले मणुया तिकोसउच्छेहा (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 172) · अर्थ
- अवसेसा जे लिंगी दंसणणाणेण सम्म संजुत्ता (अष्टपाहुड 13) · अर्थ
- अवसेसा पयडीओ, अघादिया घादियाण पडिभागा (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 183) · अर्थ
- अवहट्टु अट्टरुद्दे महाभये सुगदीए पच्चूहे (भगवती आराधना 1699) · अर्थ
- अवहट्टु कायजोगे व विप्पओगे य तत्थ सो सव्वे (भगवती आराधना 1689) · अर्थ
- अवहीयदित्ति ओही सीमाणाणेत्ति वण्णियं समये (गोम्मटसार जीवकाण्ड 370)
- अविकत्थंतो अगुणो वि होइ सगुणो व सुजणमज्झम्मि (भगवती आराधना 366) · अर्थ
- अविगट्ठं पि तवं जो करेइ सुविसुद्धसुक्कलेस्साओ (भगवती आराधना 260) · अर्थ
- अवितक्कमवीचारं सुहुमकिरियसबंधणं तदियसुक्कं (भगवती आराधना 1880) · अर्थ
- अविदिदपरमत्थेसु य विसयकसायाधिगेसु पुरिसेसु (प्रवचनसार 257) · अर्थ
- अविभत्त मणण्णत्वं दव्व गुणाणं विभत्तमण्णतं (पंचास्तिकाय 45) · अर्थ
- अविभागपडिच्छेदो, वग्गो पुण वग्गणा य फड्ढयगं (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 223) · अर्थ
- अवियक्कमवीचारं अणियट्टिमकिरियं च सीलेसिं (भगवती आराधना 1882) · अर्थ
- अवियप्पो णिद्दंदो णिम्मोहो णिक्कलंकओ णियदो (रयणसार 96) · अर्थ
- अवि य वहो जीवाणं मेहुणसेवाए होइ बहुगाणं (भगवती आराधना 916) · अर्थ
- अविरइ सम्मादिट्ठी जहण्ण पत्तं तु अक्खियं समये (भावसंग्रह 498) · अर्थ
- अविरदठाणं एक्कं, अणुद्दिसादिसु सुरोघमेव हवे (गोम्मटसार कर्मकाण्ड 305) · अर्थ
- अविरद-देस-महव्वय आगम-रुइणं वियार-तच्चण्हं (रयणसार 114) · अर्थ
- अविरदसम्मादिट्ठी मरंति बालमरणे चउत्थम्मि (भगवती आराधना 29) · अर्थ
- अविरमणं हिंसादी पंच वि दोसा हवंति णायव्वा (भगवती आराधना 1820) · अर्थ
- अविरयसम्मद्दिट्ठी, होंति जहण्णा जिणंदपयभत्ता (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 197) · अर्थ
- अविरय सम्मादिठ्ठी एसो उत्तो मया समासेण (भावसंग्रह 349) · अर्थ
- अवि सहइ तत्थ दुक्खं सक्करपमुहणयविवरेसु (भावसंग्रह 58) · अर्थ
- अविसुद्धभावदोसा कसायवसगा य मंदसंवेगा (भगवती आराधना 1945) · अर्थ
- अविसुय असुसिर अघसा सउज्जोवा बहुसमा असिणिद्धा (भगवती आराधना 1963) · अर्थ
- अव्वाघादमसंदिद्धमुत्तमं सव्वदो असंकुडिदं (भगवती आराधना 2098) · अर्थ
- अव्वाघादी अंतोमुहुत्तकालट्ठिदी जहण्णिदरे (गोम्मटसार जीवकाण्ड 238)
- अव्वाबाधं च सुहं सिद्धा जं अणुहवंति लोगग्गे (भगवती आराधना 2143) · अर्थ
- अव्वाबाहमणिंदियमणोवमं पुण्णपावणिम्मुक्कं (नियमसार 178) · अर्थ
- अव्वावाहमणंतं जह्मा सोक्खं करेइ जीवाणं (धम्मरसायण 125) · अर्थ
- अव्वोच्छित्तिणिमित्तं सव्वगुणसमोयरं तयं णच्चा (भगवती आराधना 277) · अर्थ
- असणाइचउवियप्पो आहारो संजयाण दादव्वो (धम्मरसायण 155) · अर्थ
- असदि तणे चुण्णेहिं च केसरच्छारिट्ठियादिचुण्णेहिं (भगवती आराधना 1986) · अर्थ
- असमाधिणा व कालं करिज्ज सो सुण्णगम्मि णिज्जवगे (भगवती आराधना 678) · अर्थ
- असरीरहं संधाणु किउ सो धाणुक्कु णिरुत्तु (पाहुडदोहा 122) · अर्थ
- असरीरा अविणासा अणिंदिया णिम्मला विसुद्धप्पा (नियमसार 48) · अर्थ
- असरीरा जीव घणा चरमसरीरा हवंति किंचूणा (तत्त्वसार 72) · अर्थ
- असरीरा जीवघना उवजुत्ता दंसणेय णाणेय (दश भक्ति पाठ 1)
- असरीरु वि सुसरीरु मुणि, इहु सरीरु जडु जाणि (योगसार 61) · अर्थ
- अस विवरीयं कहियं मिच्छत पावनारणं विसमं (भावसंग्रह 62) · अर्थ
- असहायणाणदंसणसहियो इति केवली हु जोगेण (गोम्मटसार जीवकाण्ड 64)
- असि उज्जेणिणवरे आइरिओ भद्दवाहुणामेण (भावसंग्रह 138) · अर्थ
- असिऊण मंसगासं मज्जं पविऊणगम्मए सग्गं (भावसंग्रह 69) · अर्थ
- असिधारं व विसं वा दोसं पुरिसस्स कुणइ एयभवे (भगवती आराधना 1661) · अर्थ
- असिफरसुमोग्गरसत्तितिसूलेहिं सेल्लकोंतेहिं (धम्मरसायण 22) · अर्थ
- असियसय किरियवाई अक्किरियाणं च होइ चुलसीदी (अष्टपाहुड 137) · अर्थ
- असिवे दुब्भिक्खे वा कंतारे भए व आगाढे (भगवती आराधना 1527) · अर्थ
- असुइमयं दुग्गंधं, महिलादेहं विरच्चमाणो जो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 337) · अर्थ
- असुईबीहत्थेहि य कलिमलबहुलाहि गब्भवसहीहि (अष्टपाहुड 17) · अर्थ
- असुचिं अपेच्छणिज्जं दुग्गंधं मुत्तसोणियदुवारं (भगवती आराधना 1014) · अर्थ
- असुभोवओगरहिदा सुद्धुवजुत्ता सुहोवजुत्ता वा (प्रवचनसार 260) · अर्थ
- असुरसुरमणुयकिण्णररविससिकिंपुरिसमहियवरचरणो (भगवती आराधना 2163) · अर्थ
- असुराणं पणवीसं, सेसं णवभावणय दहदंडं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 169) · अर्थ
- असुराणमसंखेज्जा कोडीओ सेसजोइसंताणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 427)
- असुराणमसंखेज्जा वरिसा पुण सेसजोइसंताणं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 428)
- असुरोदीरिय-दुक्खं, सारीरं माणसं तहा विविहं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 35) · अर्थ
- असुहं अट्ट रउद्दं, धम्मं सुक्कं च सुहयरं होदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 469) · अर्थ
- असुहं सुहं व दव्वं ण तं भणदि बुज्झ मं ति सो चेव (समयसार 381) · अर्थ
- असुहं सुहं व रूवं ण तं भणदि पेच्छ मं ति सो चेव (समयसार 376) · अर्थ
- असुह कम्मस्स णाणो सुहस्स वा हवेइ केणुवाएण (भावसंग्रह 368) · अर्थ
- असुहपरिणामबहुलत्तणं च लोगस्स अदिमहल्लत्तं (भगवती आराधना 1862) · अर्थ
- असुह सुहस्स विवाओ चिंतइ जीवाण चउगइययाणं (भावसंग्रह 369) · अर्थ
- असुहस्स कारणेंहि य कम्म छक्केहि णिच्चं वट्टतो (भावसंग्रह 397) · अर्थ
- असुहा अत्था कामा य हुंति देहो य सव्वमणुयाणं (भगवती आराधना 1807) · अर्थ
- असुहाणं वरमज्झिमअवरंसे किण्हणीलकाउतिए (गोम्मटसार जीवकाण्ड 501)
- असुहादो णिरयाऊ सुहभावादो दु सग्ग-सुहमाओ (रयणसार 57) · अर्थ
- असुहादो विणिवित्ती सुहे पवित्ती य जाण चारित्तं (बृहद् द्रव्यसंग्रह 45) · अर्थ
- असुहे असुहं झाणं सुहझाणं होइ सुहोपजोगेण (भावसंग्रह 685) · अर्थ
- असुहेण णिरय-तिरियं, सुहउवजोगेण दिविजणरसोक्खं (बारस अणुवेक्खा 42) · अर्थ
- असुहेदरभेदेण दु, एक्केक्कं वण्णिदं हवे दुविहं (बारस अणुवेक्खा 50) · अर्थ
- असुहोदएण आदा कुणरो तिरियो भवीय णेरइयो (प्रवचनसार 12) · अर्थ
- असुहोवओगरहिदो सुहोवजुत्तो ण अण्णदवियम्हि (प्रवचनसार 159) · अर्थ
- असुहो सुहो व गंधो ण तं भणदि जिग्घ मं ति सो चेव (समयसार 377) · अर्थ
- असुहो सुहो व गुणो ण तं भणदि बुज्झ मं ति सो चेव (समयसार 380) · अर्थ
- असुहो सुहो व फासो ण तं भणदि फुससु मं ति सो चेव (समयसार 379) · अर्थ
- असुहो सुहो व रसो ण तं भणदि रसय मं ति सो चेव (समयसार 378) · अर्थ
- असुहो सुहो व सद्दो ण तं भणदि सुणसु मं ति सो चेव (समयसार 375) · अर्थ
- अस्संजदं ण वन्दे वत्थविहीणोवि तो ण वंदिज्ज (अष्टपाहुड 26) · अर्थ
- अह उड्ढतिरिय लोए चिंतेइ सपज्जयं ससंठाणं (भावसंग्रह 370) · अर्थ
- अह एउणवण्णासे कोट्ठे काऊण विउलरेहाहिं (भावसंग्रह 466) · अर्थ
- अह कह वि पमादेण य, दोसो जदि एदि तं पि पयडेदि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 450) · अर्थ
- अह कहवि हवदि देवो, तस्स य जायेदि माणसं दुक्खं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 58) · अर्थ
- अह गब्भे वि य जायदि, तत्थ वि णिवड़ीकयंगपच्चंगो (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 45) · अर्थ
- अह छुहिऊण तउअरो तिजयं पालेइ महुमहो णिच्चं (भावसंग्रह 225) · अर्थ
- अह जाणगो दु भावो णाणसहावेण अच्छदे त्ति मदं (समयसार 344) · अर्थ
- अह जीवो पयडी तह पोग्गलदव्वं कुणंति मिच्छत्तं (समयसार 330) · अर्थ
- अह ढिकुलियां झाणं झायइ अहवा स सोवए झाणी (भावसंग्रह 386) · अर्थ
- अह ण पयडी ण जीवो पोग्गलदव्वं करेदि मिच्छत्तं (समयसार 331) · अर्थ
- अह णीरोओ देहो, तो धण-धण्णाण णेय सम्पत्ति (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 52) · अर्थ
- अह णीरोओ होदि हु, तह वि ण पावेइ जीवियं सुइरं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 293) · अर्थ
- अह तिरियउड्ढलोए विचिणादि सपज्जए ससंठाणे (भगवती आराधना 1709) · अर्थ
- अह दे अण्णो कोहो अण्णुवओगप्पगो हवदि चेदा (समयसार 115) · अर्थ
- अह धन सहिओ होदि हु, इंदियपरिपुण्णदा तदो दुलहा (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 292) · अर्थ
- अह पुण अप्पा णिच्छदि धम्माइं करेइ णिरवसेसाइं (अष्टपाहुड 15) · अर्थ
- अह पुण अप्पा णिच्छदि पुण्णाइं करेदि णिरवसेसाइं (अष्टपाहुड 86) · अर्थ
- अह पुणु अप्पा णवि मुणहि, पुण्णु जि करहि असेस (योगसार 15) · अर्थ
- अहमिंदा जह देवा अविसेसं अहमहंति मण्णंता (गोम्मटसार जीवकाण्ड 164)
- अहमेक्को खलु सुद्धो णिम्ममओ णाणदंसणसमग्गो (समयसार 73) · अर्थ
- अहमेक्को खलु सुद्धो दंसणणाणमइयो सदारूवी (समयसार 38) · अर्थ
- अहमेदं एदमहं अहमेदस्स म्हि अत्थि मम एदं (समयसार 20) · अर्थ
- अह लहदि अज्जवंतं, तह ण वि पावेइ उत्तमं गोत्तं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 291) · अर्थ
- अहव मुणंतो छंडइ सव्वावासाइं सुत्तबद्धाइं (भावसंग्रह 607) · अर्थ
- अहव सुदिपाणयं से तहेव अणुसिट्ठिभोयणं देइ (भगवती आराधना 447) · अर्थ
- अहवा अप्पं आसाससुहं सरिदाए उप्पियंतस्स (भगवती आराधना 1254) · अर्थ
- अहवा एयं वयणं तेसिं जीवो ण होइ किं जोवो (भावसंग्रह 96) · अर्थ
- अहवा एसो जीवो पोग्गलदव्वस्स कुणदि मिच्छत्तं (समयसार 329) · अर्थ
- अहवा एसो धम्मो विट्ठं भक्खंतया वि णमणीया (भावसंग्रह 51) · अर्थ
- अहवा खिप्पउ साहा णिस्सेउ करंगुलीहिं वामेंहि (भावसंग्रह 435) · अर्थ
- अहवा चारित्ताराहणाए आराहियं हवइ सव्वं (भगवती आराधना 8) · अर्थ
- अहवा जं उब्भावेदि असंतं खेत्तकालभावेहिं (भगवती आराधना 821) · अर्थ
- अहवा जइ असमत्थो पुज्जइ परमेट्ठिपंचकं (भावसंग्रह 462) · अर्थ
- अहवा जइ कलसहिओ लोयव्वावार दिण्णणियचित्तो (भावसंग्रह 239) · अर्थ
- अहवा जइ भणइ इयं सो देवो तस्स ण हु पावं (भावसंग्रह 246) · अर्थ
- अहवा जह कहव पुणो पावइ मणुयत्तणं च संसारे (भावसंग्रह 169) · अर्थ
- अहवा णियं विढत्तं कस्स वि मा देहि होइ लोहिल्लो (भावसंग्रह 581) · अर्थ
- अहवा तण्हादिपरीसहेहिं खवओ हविज्ज अभिभूदो (भगवती आराधना 1496) · अर्थ
- अहवा तरुणी महिला जायइ अण्णेण जार पुरिसेण (भावसंग्रह 584) · अर्थ
- अहवा तल्लिच्छाइं कूराइं कसायसावदाइं तं (भगवती आराधना 1287) · अर्थ
- अहवा दंसणणाणचरित्तसुद्धी य विणयसुद्धी य (भगवती आराधना 169) · अर्थ
- अहवा देवो होदि हु, तत्थ वि पावेदि कह व सम्मत्तं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 298) · अर्थ
- अहवा पसिद्धिवयणं सोत्त सेवए जेण (भावसंग्रह 56) · अर्थ
- अहवा बंभसरूवं, एक्कं सव्वं पि मण्णदे जदि हि (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 234) · अर्थ
- अहवा मण्णसि मज्झं अप्पा अप्पाणमप्पणो कुणदि (समयसार 341) · अर्थ
- अहवा वत्थुसहावो धम्मं वत्थ् पुणो न सो अप्पा (भावसंग्रह 373) · अर्थ
- अहवा समाधिहेदुं कायव्वो पाणयस्स आहारो (भगवती आराधना 707) · अर्थ
- अहवा सयबुद्धीए पडिसेधे खेत्तकालभावेहिं (भगवती आराधना 819) · अर्थ
- अहवा सरीरसेज्जा संथारुवहीण भत्तपाणस्स (भगवती आराधना 171) · अर्थ
- अहवा सिद्ध सद्दे कीरइ जं किंपि अत्थववहरणं (लघु नयचक्र 41) · अर्थ
- अहवा सो परमप्पो जइ होइ जयम्मि दोसजुत्तो वि (धम्मरसायण 99) · अर्थ
- अहवा होइ विणासो गंथस्स जलग्गिमूसयादीहिं (भगवती आराधना 1148) · अर्थ
- अह संसारत्थाणं जीवाणं तुज्झ होंति वण्णादी (समयसार 63) · अर्थ
- अह सयमप्पा परिणमदि कोहभावेण एस दे बुद्धी (समयसार 124) · अर्थ
- अह सयमेव हि परिणमदि कम्मभावेण पोग्गलं दव्वं (समयसार 119) · अर्थ
- अह सावसेसकम्मा मलियकसाया पणट्ठमिच्छत्ता (भगवती आराधना 1924) · अर्थ
- अह होदि सीलजुत्तो, तह वि ण पावेइ साहुसंसग्गं (कार्तिकेयानुप्रेक्षा 294) · अर्थ
- अहिमारएण णिवदिम्मि मारिदे गहिदसमणलिंगेण (भगवती आराधना 2069) · अर्थ
- अहिमुहणियमियबोहणमाभिणिबोहियमणिंदिइंदियजं (गोम्मटसार जीवकाण्ड 306)
- अहियारो पाहुडयं एयट्ठो पाहुडस्स अहियारो (गोम्मटसार जीवकाण्ड 341)
- अहिसेहगिहं देवा णाऊण करंति तस्स अहिसेहं (धम्मरसायण 170) · अर्थ
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