द्विदल में सावधानी कैसे रखे? | Dwidal Mein Savdhani Kaise Rakhe?

द्विदल कैसे होता है ?
क्या सावधानी रखनी चाहिए ?
दूध एवं छाछ को प्रसूक करके उपयोग कर सकते है ?
प्रसूक करनेके क्या तरीक़े है ?

विषय बहुत ही सुंदर है, दूध या छास को गर्म करके पीना यह श्वेताम्बर मत में माना जाता है दिगम्बर के मूल ग्रंथो में यह सहमति नही है।
राई के साथ नमक मिलने पर द्विदल हो जाता है।



आयुर्वेद भी द्विदल को अभक्ष्य मानता है।

कौनसी पुस्तक है यह?

संयमप्रकाश भाग - 1

यहाँ फुटनोट में लिखा है कि बिना गर्म किया हुआ दही दूध दाल के साथ मिलना अभक्ष्य है। मतलब गर्म करके मिला सकते हैं ?

ऐसा ही कुछ देखने मे मुझे भी आया है।


  1. कच्चे दूध-दही के साथ द्विदल दोष
    सागार धर्मामृत/5/18आमगोरससंपृक्तं, द्विदलं प्रायशोऽनवम्। वर्षास्वदलितं चात्र … नाहरेत्।18।= कच्चे दूध, दही व मट्ठा मिश्रित द्विदल को, बहुधा पुराने द्विदल को, वर्षा ऋतु में बिना दले द्विदल को … नहीं खाना चाहिए।18। ( चारित्तपाहुड़/21/43/18 )।
    व्रत विधान सं./पृ. 33 पर उद्धृत–योऽपक्वतक्रं द्विदलान्नमिश्रं भुक्तं विधत्ते सुखवाष्पसंगे। तस्यास्यमध्ये मरणं प्रयत्ना: सन्मूर्च्छिका जीवगणा भवंति।=कच्चे दूध दही मट्ठा व द्विदल पदार्थों के मिलने से और मुख को लार का उनमें संबंध होने से असंख्य सम्मूर्च्छन त्रस जीव राशि पैदा होती है, इसके महान् हिंसा होती है। अत: वह सर्वथा त्याज्य है। ( लाटी संहिता/2/145 )।

  2. पक्के दूध-दही के साथ द्विदल दोष
    व्रत विधान सं./पृ. 33 जब चार मुहूरत जाहीं, एकेंद्रिय जिय उपजाहीं। बारा घटिका जब जाय, बेइंद्रिय तामें थाम। षोडशघटिका ह्वैं जबहीं, तेइंद्रिय उपजें तबहीं। जब बीस घड़ी गत जानी, उपजै चौइंद्रिय प्राणी। गमियां घटिका जब चौबीस, पंचेंद्रिय जिय पूरित तीस। ह्वै हैं नहीं संशय आनी, यों भाषै जिनवर वाणी। बुधि जन लाख ऐसो दोष, तजिये ततछिन अघकोष। कोई ऐसा कहवाई, खैहैं एक याम ही माहीं। मरयाद न सधि है मूल तजि हैं, जे व्रत अनुकूल। खावें में पाय अपार छाड़ें शुभगति है सार।

क्या मूंगफली के दूध से बने दही के साथ दालों का उपयोग किया जा सकता है या उसमे भी द्विदल का दोष लगेगा??

नही उसमे द्विदल का दोष नही होगा।
मात्र गाय या भैंस के दूध में ही होगा अन्य कोई भी वस्तु में नही होगा।

पनीर किस category में आता है? उसमें भी द्विदल का दोष लगेगा?

दूध दहीँ के समान पूरा दोष आएगा