धार्मिक कलर बुक
अनुक्रमणिका
| क्र. | विवरण |
|---|---|
| 1 | धार्मिक कलर बुक |
| 2 | धार्मिक कलर बुक |
| 3 | 1. अशोक वृक्ष |
| 4 | 2. सिंहासन |
| 5 | 3. भामण्डल |
| 6 | 4. तीन छत्र |
| 7 | 5. चँवर |
| 8 | 6. पुष्पवृष्टि |
| 9 | 7. देवदुंदुभि |
| 10 | दिव्यध्वनि |
| 11 | गज |
| 12 | वृषभ |
| 13 | 3. सिंह |
| 14 | 4. लक्ष्मी |
| 15 | 5. दो पुष्प मालाएँ |
| 16 | 6. चंद्रमा |
| 17 | 7. सूर्य |
| 18 | 8. कलश |
| 19 | 9. मत्स्य युगल |
| 20 | 10. सरोवर |
| 21 | 11. सागर |
| 22 | 12. रत्न जड़ित सिंहासन |
| 23 | 13. देव विमान |
| 24 | 14. नागेन्द्र भवन |
| 25 | 15. रत्नराशि |
| 26 | 16. निर्धूम अग्नि |
| 27 | PRIMARY + SECONDARY = TERTIARY |
धार्मिक कलर बुक
धार्मिक कलर बुक
कृति : धार्मिक कलर बुक
पावन प्रसंग : श्रमण संस्कृति संस्थान रजत जयंती वर्ष 2021-22
शुभाशीर्वाद : परमपूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
पावन प्रेरणा : निर्यापक श्रमण मुनिश्रीसुधासागर जी महाराज ससंघ
संपादक : डॉ. जयकुमार जैन (अधिष्ठाता)
डॉ. शीतलचंद जैन (निदेशक)
प्राचार्य श्रमण संस्कृति संस्थान
सह-संपादक / संकलक: प्रदीप कुमार जैन ‘शास्त्री’, दमोह
(शोधकार्य प्रभारी)
संयोजना : अभिषेक कुमार जैन ‘शास्त्री’, सागर
(द्वाराचार्य पाठ्यक्रम प्रभारी)
प्रतियाँ : 1100
संस्करण : प्रथम, 2021
मूल्य : 40/-
प्रकाशक : श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान
जैन नसियाँ रोड, बीसद्वार नगर
सांगानेर, जयपुर (राज.) 302029
मो.- 9314030108, 8306876339
1. अशोक वृक्ष
आठ प्रतिहार्यों में अशोकवृक्ष-देव रचित होता है, शोकरहित, तीर्थंकर
के मस्तक पर रहने के कारण यह अशोक वृक्ष कहलाता है।
2. सिंहासन
अष्ट प्रतिहार्यों में सिंहासन-रत्न जड़ित होता है, भगवान उससे चार अंगुल ऊपर अधर में विराजमान रहते हैं।
3. भामण्डल
अष्ट प्रतिहार्यों में भामण्डल-तीर्थंकरों के भामण्डल की प्रतिच्छाया में भव्य आत्मा अपने अतीत के तीन भव, एक वर्तमान और आगामी तीन भव, इस प्रकार 7 भवों को देख सकता है।
4. तीन छत्र
अष्ट प्रतिहार्यों में तीन छत्र-भगवान के मस्तक पर रत्नमय तीन छत्र शोभायमान रहते हैं, तीनों लोकों के साम्राज्य को सूचित करते हैं, तीन लोक के स्वामी हैं।
5. चँवर
अष्ट प्रतिहार्यों में चँवर – भगवान के दोनों ओर सुंदर सुसज्जित देवों द्वारा 64 चँवर ढोरे जाते हैं, यह नमन और उन्नमन द्वारा सूचित करते हैं कि प्रभु को नमस्कार करने से सज्जन उच्च गति को प्राप्त करते हैं।
6. पुष्पवृष्टि
अष्ट प्रतिहार्यों में पुष्पवृष्टि – भगवान के मस्तक के आकाश से सुगंधित जल की बूंदों से युक्त एवं सुखद मंदार, सुन्दर, नमेरु, पारिजात आदि उत्तम वृक्षों के ऊर्ध्वमुखी दिव्य फूलों की वर्षा देवों द्वारा की जाती है।
7. देवदुंदुभि
अष्ट प्रतिहार्यों में देवदुंदुभि – तीर्थंकर के सान्निध्य में ऊपर आकाश में भुवनव्यापी दुंदुभि ध्वनि होती है। देवाधिदेव अरहन्त प्रभु के आगमन की सूचना भी सर्वजनों को एक साथ मिल जाती है, दुंदुभि जयगान का प्रतीक है।
दिव्यध्वनि
अष्ट प्रतिहार्यों में दिव्यध्वनि—मृदु, मधुर, मनोहर, अधिक गंभीर और एक योजन प्रमाण समवसरण में विद्यमान देव, मनुष्य और तिर्यंचों को प्रतिबोधित करने वाली होती है। यह 18 महाभाषा एवं 700 लघु भाषा रूप परिणत होकर एक साथ समस्त जीवों को आनंद प्रदान करती है।
गज
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में गज—महत्ता का प्रतीक है। यह गर्भस्थ शिशु के महान् तीर्थ प्रचारक एवं महान् अभ्युदय की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
वृषभ
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में वृषभ—धर्म का प्रतीक है एवं गर्भस्थ शिशु के सत्य धर्म का प्रचारक होने का सूचक है।
3. सिंह
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में में
सिंह—गर्भस्थ बालक के अतुल पराक्रमी होने का प्रतीक
है।
4. लक्ष्मी
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में में
लक्ष्मी—यह दर्शाती है कि सुमेरु पर्वत पर सौधर्म आदि
इन्द्रों द्वारा बालक का अभिषेक किया जाएगा।
5. दो पुष्प मालाएँ
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में में दो
पुष्पमालाएँ—उत्सव यश और प्रसिद्धि का सूचक है।
6. चंद्रमा
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
चंद्रमा—यह सूचित करता है कि बालक चंद्रमा की तरह
जगत के संताप को दूर करेगा।
7. सूर्य
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
सूर्य—बालक अज्ञानरूपी अंधकार को नष्ट करने वाला
होगा और सूर्य के समान भास्कर केवलज्ञान प्राप्त करेगा।
8. कलश
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
कलश—बालक अक्षय निधियों का अधिपति होगा।
9. मत्स्य युगल
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
युगल—बालक की सुख-समृद्धि का प्रतीक एवं अनन्त
सुख की उपलब्धि का सूचक है।
10. सरोवर
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
सरोवर—बालक अत्यधिक संवेदनशील और वात्सल्य
भाव से युक्त होगा।
11. सागर
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में
सागर—हृदय की विशालता का प्रतीक है एवं बालक
समुद्र के समान गंभीर बुद्धि का धारक होगा।
12. रत्न जड़ित सिंहासन
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में रत्न
जड़ित सिंहासन—बालक तीनों लोकों में सर्वाधिक
वर्चस्व और प्रभुत्व को दर्शाता है।
13. देव विमान
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में देव
विमान—देवों के आगमन का प्रतीक है।
14. नागेन्द्र भवन
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में नागेन्द्र भवन—गर्भस्थ शिशु के अवधिज्ञानी होने का सूचक है।
15. रत्नराशि
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में रत्नराशि—सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र रूप रत्नत्रय धारण करेगा।
16. निर्धूम अग्नि
तीर्थंकर की माता के द्वारा देखे गए सोलह स्वप्नों में निर्धूम अग्नि—समस्त कर्म कालिमा को नष्टकर निर्वाण को प्राप्त करेगा।
PRIMARY + SECONDARY = TERTIARY
चित्र में रंगों का मिश्रण दिखाया गया है।
YELLOW + ORANGE = YELLOW-ORANGE
RED + ORANGE = RED-ORANGE
RED + VIOLET = RED-VIOLET
BLUE + VIOLET = BLUE-VIOLET
BLUE + GREEN = BLUE-GREEN
YELLOW + GREEN = YELLOW-GREEN
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है