धर्म धुरंधर, जिनवाणी पहचानो · रिश्ते पहचानो · गणित पहेली (जैन पाठशाला खेल) | Dharm Dhurandhar Jain Pathshala Game

‘धर्म धुरंधर’ — जैन पाठशाला/शिविर के लिए तीन राउंड का खेल: (1) जिनवाणी पहचानो — बिखरे अक्षरों से ग्रन्थ का नाम पहचानो (परीक्षामुख, समयसार, छहढाला…), (2) रिश्ते पहचानो — पौराणिक रिश्ते (अकलंक-निकलंक…), (3) गणित पहेली — जैन तत्त्व-संख्याओं का जोड़-घटाव (द्रव्य, प्राण, कषाय, कर्म…)। उत्तर साथ में। पाठ नीचे (अक्षर-विन्यास वही है जो खेल में दिखाना है); मूल PDF फ़ोरम की 58 MB सीमा से बड़ी है, इसलिए संलग्न नहीं।

Dharm Dhurandhar, a 3-round Jain pathshala game: identify scriptures from scrambled/spaced letters, identify Puranic relationships, and Jain-number maths puzzles (dravya, pran, kashay, karma…) with answers. Original PDF exceeds the forum’s 58 MB upload limit, so text only.


धर्म धुरंधर
जिनवाणी पहचानो
Example
Example

प री क्षा मु ख
जि न स् तुति
शतक
प्र मे य र त् न मा ला
स मु द्र वि ज य
स म य सा र
छ ह ढा ला
मो क्ष मा र्ग
प्र का श क
छ त्र चूड़ा म णि
गं ध ह स् थी
म हा भा ष् य
प द्म पुरा ण
अ ष्ट पा हु ड
Round 2
रिश्ते पहचानो
उ दा हर ण

ए क ऐसा पौ रा णि क रि श्ता ज हां
ध र्म की र क्षा के लि ए भा ई को
ब चा ने के लि ए स्व यं अ प ने
प्रा णों का ब लि दा न दे दिया।
अकलंक-निकलंक
(भाई-भाई)
ज हां प हले मुनि रा ज प र उप स र्ग
किया फिर प त्नि के स म झा ने
प र उस को दूर किया।
रा जा श्रे णि क- रा नी
चे ल ना ( प ति - प त्नी )
जि न् हों ने अ व स र्पिणी का ल में
स र्वप्र थ म अं क वि द्या औ र
अ क्ष र वि द्या का ज्ञा न प्रा प्त
किया औ र आ जी व न
ब्र ह्म च र्य व्र त का पा ल न
किया ?
आ दि ना थ जी
ब्रा म्ही - सुं द री
( पि ता - पुत्रि यां )
जि न के पि ता को के व ल ज्ञा न
की प्रा प्ति हुई, औ र स्व यं को
च क्र र त्न औ र पुत्र र त्न की
प्रा प्ति हुई
आ दिना थ -
भ र त च क्रव र्ती
( पि ता - पुत्र )
नि र्दोष हो ते हुए भी
अ प नी ब हु को घ र से
नि का ल दिया ?
के तुम ती - अं ज ना
स ती ( सा स - ब हु )
ऐसा व्यक्ति जिसने
मुनि के सिर पर
सिगड़ी रखी
ग ज कु मा र औ र
सो मि ल से ठ
( भ वि ष्य स सुर औ र
दा मा द )
मुनि रा ज जि न् हों ने
स्व प्न में दो बै लों को
आ ते दे खा
ध र से न आ चा र्य -
पुष् प दां त औ र भूत ब ली
मुनि ( शि ष्य गुरु
सं बं ध )
जि न का 1 0 भा व
त क बै र च ला
पा र्श्वना थ औ र
सं व र दे व / म रु भूति
औ र कम ठ
जि न के स् प र्श क री हु ई रे त
को प र्वत प र फे क ने प र
प र्वत सो ने का हो ग या
जि स के पा स रुप कु ल् य था
भ र ती हरी औ र
शुभ चं द्र ( भा ई भा ई
सं बं ध )
चा ल च ल ने प र भी
पि टा रा खो ल ने प र ना ग
भी मो ति यों की मा ला
ब न ग या
सती सोमा और सती
सोमा की सास(सास
बहू संबंध)
Round 3
खे ल खे ल में
श ब् दो का मे ल
उदाहरण
कु छ ना कहो, चुप ही रहो।
हमें कै सा पानी प्रयोग में लेना
चाहिए ?
कु छ ना कहो,
चुप ही रहो।
-छना पानी
मुनियों को मोक्ष मार्ग है प्यारा
10. धर्म में से एक
मुनियो को मोक्ष मार्ग है प्यारा
क्षमा
एक बार करो आत्मानुभव
फिर सहज रहो पांच इन्द्रियों
में से एक
एक बार करो आत्मानुभव
फिर सहज रहो

रसना
ये खेल है दूसरा गगन
छु आ तो जीत
विकारी भाव
ये खेल है दूसरा गगन
छु आ तो जीत
राग
धर्म धुरंधर रेवती
रानी लहरो से न
घबराती वो
लेश्य में से एक
धर्म धुरंधर रेवती रानी लहरो
से न घबराती वो
नील लेश्या
सरपट, आराध्या नटखट हो गई।

आभ्यंतर तप का एक भेद?
सरपट, आराध्या नटखट हो गई।

  • ध्यान तप
    छम-छम बारिश में, छाया
    छत पर छाता लेकर गई।

छह आवश्यक में से एक आवश्यक ?
छम-छम बारिश में,
छाया छत पर छाता लेकर गई।

  • तप
    ताकतवर बंसी तारे को ताकता ताकता
    तकत पर सो गया।

एक महासती का नाम ?
ताकतवर बंसी तारे को ताकता
ताकता तकत पर सो गया।

-सीता सती
नन करते कवि नयन कविता
कहकर निकल लिए।

तप का एक भेद
नन करते कवि नयन कविता कहकर
निकल लिए।

  • विनय तप
    चलो भईया रास्ता नापो।

बहुत सारी पेंसिल्स होने पर भी और
पेंसिल्स की चाह?
चलो भईया रास्ता नापो।

  • लोभ कषाय
    Round 4
    जैन दर्शन
    गणित
    उदाहरण:

द्रव्य + तत्त्व - पदार्थ
उदाहरण:
कषाय (4)
(तत्त्व + मूढ़ता) / पाप = ?
2 (जीव, नय)
(इन्द्रिय x जीव) + गुप्ति - धर्म के लक्षण
3 (रत्न, आत्मा, उपयोग)
स्वर्ग-नरक + रत्न - अन्तरंग तप
6 (द्रव्य, अनायतन)
(पदार्थ / नारायण) x
घाति कर्म
4 (कषाय, गति)
(मंगल x उत्तम x शरण) / मंगल द्रव्य
8 (कर्म. मद)
पाप + द्रव्य + प्रतिमा + ज्ञान

  • लोक
    28 (मोहनीय, अष्ट मूलगुण)
    (आवश्यक / अनायतन) +
    नोकषाय)
    10 (धर्म के लक्षण, प्राण)
    अणुव्रत + गुणव्रत - शिक्षाव्रत +
    मेरु
    9 (पदार्थ, नारायण)
    (नरक - पाप) x द्रव्य
    12 (भावना, तप)
    तत्त्व + बलभद्र + पाप-
    इन्द्रिय
    16 (स्वपन, भावना)
    (उत्तम x गुप्ति) -
    प्रतिमा
    1 (आत्मा)
    (बहिरंग ताप x इन्द्रियाँ)-
    आवश्यक
    24 (तीर्थंकर,
    कामदेव)
    (नारायण x द्रव्य) +पदार्थ
    63 (श्लाका पुरुष)
    भावना - अणुव्रत +
    अघाति कर्म
    (आवश्यक / अनायतन) +
    नोकषाय)
    11 (प्रतिमा,
    रूद्र)
    जय जिनेन्द्र