देव दर्शन(तीन भुवन के स्वामी मेरे) | Dev Darshan(teen Bhuvan Ke Swami Mere)

देव दर्शन (तीन भुवन के स्वामी मेरे)

तीन भुवन के स्वामी मेरे, आया सुखद सबेरा।
आनन्द उर न समाये, प्रभुवर दर्शन पाया तेरा।।

वीतराग सर्वज्ञ प्रभो, हम सुनी नहीं जिनवाणी।
कर्ता-धर्ता तुमको माना, कर बैठा नादानी।
तुम तो साक्षीभूत जगत के, दूर हुआ भ्रम मेरा ॥(1)

कण-कण है स्वाधीन जगत का तुमने प्रभु बतलाया।
निज-पर के कर्तापन का भ्रम जिनवर दूर भगाया।
सर्व विकल्प शून्य आनन्दमय, जिनवर दर्शन तेरा ॥(2)

तन-मन कर्म रंग-रागादिक देते भिन्न दिखाई।
सम्यग्ज्ञान कला उर जागी, निज प्रभुता मैं पाई।
मुक्त स्वरूप अहो प्रगटा अब, सफल हुआ भव मेरा ||(3)

सम्यक् हुई प्रतीति प्रभुवर, तुम सम ही प्रभु मैं हूँ।
हूँ गुणधाम सहज अभिराम, सु आनन्द धाम सदा हूँ।
निज में ही रम जाऊँ विभुवर, अभिनन्दन है तेरा ||(4)

Artist - ब्र.श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्'

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