जैन भजनों की छंद/राग सूची — दोहा, ताटंक, वीर, चौपाई, रोला, चन्द्रायण आदि छंदों के अनुसार लोकप्रिय भजनों के नाम, जिससे नए भजन उसी लय में गाए जा सकें। 5 पृष्ठ का स्कैन, पाठ नीचे, PDF संलग्न।
Chhand-Raag list: popular Jain bhajans grouped by metre (Doha, Tatank, Veer, Chaupai, Rola…) so new compositions can be sung in known tunes. 5-page scan, text below, PDF attached.
दोहा । ताटंक । वीर - आयो-2 है हमारो बड़ो भाग्य
पावन हो गई
शुद्धात्मा का श्रध्दान
प्रभु जी अब न भटकेंगे
रोम रोम से
मीठे रस से भरी
(अंतर में आनंद आयो जिनवर दर्शन पायो
अंर्तमुख जिन मुद्रा लखकर आत्मदर्शन
पायो जी पायो)
आओ रे आओ रे ज्ञानानंद की उगरिया
नाम तुम्हारा तारणहार
सिद्धो की श्रेणी
हेगुरुवर धन्य हो तुम, तुम अपने मे रहते हो
वीर / दोहा । ताटंक । चौपाई - जन जन को अचरज आयो
रोम रोम पुलकित
रंग मा² (जनम जरा नाश लियो रे)
छूजन में
जिनवाणी अमृत रसाल
जैनधर्म के हीरे मोती
म्हारा परम दिगम्बर
प्रभुवर तुम हो चंदा और मैं
हूँ चकोर
रोला / चन्द्रायण / आडिल्ल / - हे प्रभु चरणों में तेरे
पीयूषनिर्जर / पीयूष राशि - छोड़ो पर की बात
- आत्मा हूँ
ताटंक / वीर / जोगीरासा - जिनवाणी जग मैरया जनम दुख
मेट दो
कुन्दकुन्द से पुत्र तुम्हारे, गणधर जैसे भैरया।
समवशरण सा महल तुम्हारा तीर्थंकर से सैय्या
विधाता - तुम्हारे दर्श बिन स्वामी
मत्तसवैया / पादरि - मैं उस का अनुगामी हूँ, जिस पर चल
कर प्रभु सिद्ध हुए
रघुपति राघव राजा राम
काग के भाग बड़े राजनी हरी हाथ सो ले गयो
मनहरण - मंगल महोत्सव आ गया देख 3 जी आनंद छा गया
बड़ा पुण्य अवसर यह आया दशलक्षण विधान रचाय
धू पूजा रचाया थाल सजाया, प्रभु के सन्मुख अर्ध चढ़ाय
मोक्ष का मार्ग हमें भा गया, देखो 3
ताटंक / पद्रिका / मत्तसवैया - भव वन में जी भर धूम चुका
विजया - ऐसी लागी लगन
अगर हम वीर वानी
राधिका - है सीमंधर भगवान
हृदय
चार्या
गयो
चाव
वाल
मानव - आत्मा ही समयसार म्हाने - जिनवाणी सिखलड़्यो
तू जाग रे चेतन प्राणी-
ऐसा धर्म है मेरा
मेरे सामने वाली खिड़की में
तुझे बेटा कहूँ की वीरा
हरिगीतिका/गीता/गीतिका
- गुरुओं के उपकार को
- गाथा (मैं देव श्री)
- समयसार (मुक्ति गये न
- साधना के रास्ते
- निग्रन्थों का मार्ग
- जिस देश में
- सिद्धों की श्रेणी
- वीतरागी देव
अवतार - माता तू दया करके
बाजे कुण्डलपुर में बधाई
-नंदीश्वर श्री जिन धाम
मधुयानंद - नीर गंध अछतान् पुष्प
रोला - मनहर तेरी मूरतिया, आत्माहु आत्मा, हे प्रभु चरणों
कुण्डलिया(चंद्रायण) - जिनवाणी ध्याना सभी, मीठे बोल
विधाता - छोरे 2 मुझे मेरे ही
- तुम्हारे दर्श बिन स्वामी
- तिहारे ध्यान की
- परम उपकारी
- तुझे जिन धर्म पर चलना, सिखाती है वोह जिनवाणी।
दिग्वधु/दिग्पाल - अशरीरि सिद्ध भगवान
- इन्साफ की डगर पे
सोरठा - निग्रन्थों का मार्ग
- लिया प्रभु अवतार
पंचामर - नशे घातिया कर्म
- मैं पूर्ण ज्ञायक
- वन्दे जिनवरम्
राधिका - हे सीमंधर भगवान
चौपाई - रोम रोम पुलकित - वीरा प्रभु के ये बोल
- शांति सुधा बरसाये - आओ रे आओ रे
- सुनो जी - रंग मा
- अपना ही रंग - मेरी मिट्टी
- होली खिले
नारायण - वन्दे जिनवरम् - 2 (Slow)
नाराच । पंचचामर - वन्दे जिनवरम्
वीर - दिन आयो-2, आनंत अंतर मां, आओ तुम्हें ध्रुवधाम
घर-2 आनंद छायो, जिनवर दरबार दिखाई।
ऊ झर मयी, शुद्धात्मा, क्या तन-माजना
पावन हो गई, आओरै ज्ञानानंद, मंगल बेला
भावना की चूनर, प्रभुजी अब न
तुम ज्ञायक चेतन, ऐसा धर्म है मेरा
ये धर्म हमारा है, ये धर्म हमारा है
रंग मा आयो रे हमारो बड़ो
जिनमंदिर में आओ म्हारा साथी, कि निग्रंथों का मार्ग
बह रही रे धरम की धार, हे गुरुवर धन्य हो तुम
सिध्दो से मिलने का, आओ तुम्हें ध्रुवधाम
निरखी-2 मनहर मूरत, श्री अरहंत सदा मंगलमय
नाम तुम्हारा तारणहारा, कैसी सुन्दर जिनप्रतिमा है
जयहे जिनवर, तीन भुवन के स्वामी, जन जन को अचरज
माँ जिनवाणी, शांति सुधा बरसाये, मुझे देवानी
कैसे करू गुणगान प्रभुजी उस बल की दरकार
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